हरदोई जिले के कोथावां स्थित बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआकोला गांव में प्रशासन की बिना अनुमति के भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने से रोकने गई राजस्व और पुलिस टीम पर उपद्रियों ने जमकर पथराव किया। इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक पुलिसकर्मी और एक महिला आरक्षी को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोथावां भेजा गया है। उपद्रियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोथावां के चिकित्सक की गाड़ी और बेनीगंज के कानूनगो की गाड़ी सहित कई अन्य वाहनों पर पथराव और लाठी-डंडों से वार कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। इस मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक अशोक मीणा और जिला अधिकारी अनुनय झा ने बताया कि गांव के पुत्ती लाल पुत्र गिरजा प्रसाद मौर्य अपने सैकड़ों अन्य साथियों के साथ मिलकर भगवान बुद्ध की प्रतिमा की स्थापना कर रहा था, जिसका स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा था। बुधवार की सुबह राजस्व और पुलिस टीम ने स्थापना कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। सुबह 11 बजे से शुरू हुई आपसी बातचीत रात 10 बजे तक जारी रही, लेकिन इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों के अलावा बौद्ध धर्म को मानने वाले राजधानी लखनऊ की अलग-अलग जगहों से आए तीनों अज्ञात युवकों ने शरारती तत्वों के साथ मिलकर राजस्व टीम और पुलिस बल पर पथराव कर दिया। भीड़ को अचानक उग्र होता देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। घटना की सूचना पर तत्काल भारी पुलिस बल के साथ एसडीएम संडीला नारायणी भाटिया और क्षेत्राधिकारी हरियावाँ अजीत सिंह मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराया। पुलिस ने इस घटना में शामिल दो लोगों को हिरासत में ले लिया है और अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में महुआकोला गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है और क्षेत्रीय आमजनमानस में भय व्याप्त है।
हरदोई जिले के कोथावां स्थित बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआकोला गांव में प्रशासन की बिना अनुमति के भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने से रोकने गई राजस्व और पुलिस टीम पर उपद्रियों ने जमकर पथराव किया। इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक पुलिसकर्मी और एक महिला आरक्षी को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोथावां भेजा गया है। उपद्रियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोथावां के चिकित्सक की गाड़ी और बेनीगंज के कानूनगो की गाड़ी सहित कई अन्य वाहनों पर पथराव और लाठी-डंडों से वार कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। इस मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक अशोक मीणा और जिला अधिकारी अनुनय झा ने बताया कि गांव के पुत्ती लाल पुत्र गिरजा प्रसाद मौर्य अपने सैकड़ों अन्य साथियों के साथ मिलकर भगवान बुद्ध की प्रतिमा की स्थापना कर रहा था, जिसका स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा था। बुधवार की सुबह राजस्व और पुलिस टीम
ने स्थापना कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। सुबह 11 बजे से शुरू हुई आपसी बातचीत रात 10 बजे तक जारी रही, लेकिन इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों के अलावा बौद्ध धर्म को मानने वाले राजधानी लखनऊ की अलग-अलग जगहों से आए तीनों अज्ञात युवकों ने शरारती तत्वों के साथ मिलकर राजस्व टीम और पुलिस बल पर पथराव कर दिया। भीड़ को अचानक उग्र होता देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। घटना की सूचना पर तत्काल भारी पुलिस बल के साथ एसडीएम संडीला नारायणी भाटिया और क्षेत्राधिकारी हरियावाँ अजीत सिंह मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराया। पुलिस ने इस घटना में शामिल दो लोगों को हिरासत में ले लिया है और अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में महुआकोला गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है और क्षेत्रीय आमजनमानस में भय व्याप्त है।
- हरदोई जनपद के बेनीगंज थाना क्षेत्र के महुआ कोला गांव में बिना प्रशासनिक अनुमति भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक टकराव हो गया। गांव के निवासी पुत्ती लाल ने अपनी निजी भूमि पर बने मंदिर में कुछ बाहरी लोगों की मदद से यह प्रतिमा स्थापित की थी। स्थानीय लोगों ने इस प्रतिमा स्थापना का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर पथराव हुआ। इस दौरान सोशल मीडिया पर आगजनी की अफवाहें भी फैलाई गईं, जिससे तनाव और बढ़ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा तुरंत भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है। इस घटना के संबंध में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में आधी रात को 'बुद्ध' प्रतिमा की स्थापना को लेकर जमकर बवाल मच गया। यह हंगामा बिना किसी अनुमति के मूर्ति लगाए जाने के कारण भड़का, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए और राजस्व पुलिस कर्मियों पर पत्थर बरसाए गए। इस घटना से जुड़े हुए तीन 'खास मेहमान' लखनऊ से हरदोई आए थे। इस पूरे मामले में जिलाधिकारी (डीएम) हरदोई अनुनय झा का भी उल्लेख किया गया है।1
- हरदोई के शाहबाद क्षेत्र में आगामी बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। एडिशनल एसपी आलोक नारायण राज, एसडीएम शाहबाद और कोतवाली प्रभारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने नगर के मुख्य मार्गों और संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकालकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। फ्लैग मार्च के दौरान अधिकारियों ने आमजन से शांति एवं भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की। प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कुर्बानी केवल निर्धारित स्थानों पर तथा पूरी तरह आड़ में ही की जाए। साथ ही, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई। त्योहार के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस टीम द्वारा दंगा नियंत्रण अभ्यास (बलवा ड्रिल) भी किया गया। अधिकारियों ने धर्मगुरुओं और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों के साथ बैठक कर आपसी सौहार्द बनाए रखने एवं कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की। पुलिस प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया कि त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रहेगी और शांति भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- आगामी बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर्व के मद्देनजर हरदोई के शाहाबाद में पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नज़र आ रहा है। त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को सुरक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से, एडिशनल एसपी आलोक नारायण राज, उपजिलाधिकारी शाहाबाद और कोतवाली प्रभारी के नेतृत्व में नगर के विभिन्न इलाकों में एक फ्लैग मार्च निकाला गया। इस फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस बल ने संवेदनशील क्षेत्रों, बाजारों और मुख्य मार्गों पर पैदल गश्त करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कुर्बानी केवल निर्धारित स्थानों पर और पूरी तरह पर्दे की व्यवस्था के भीतर ही की जानी चाहिए। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने दंगा नियंत्रण अभ्यास और बलवा ड्रिल भी की, जिसमें पुलिसकर्मियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने धर्मगुरुओं और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के साथ बातचीत कर सभी से भाईचारे और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने का आग्रह किया। अधिकारियों ने यह भी दोहराया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।4
- हरदोई जिले के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गयंद गांव में गन्ने के खेत में पानी लगाते समय जहरीले सांप के काटने से 50 वर्षीय किसान धर्मवीर सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना का सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया, जब तहसील प्रशासन की कथित लापरवाही और संवेदनहीनता ने एक गरीब किसान की मृत्यु को सरकारी कागजों में संदिग्ध बना दिया। पुलिस द्वारा जहां प्रथम दृष्टया सर्पदंश को मृत्यु का कारण दर्ज किया गया था, वहीं तहसीली रिपोर्ट ने पूरे मामले पर संदेह पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को धर्मवीर सिंह अपने गन्ने के खेत में पानी लगा रहे थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने पंचायतनामा भरते हुए मृत्यु का कारण सर्पदंश दर्ज किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक किसान अपने पीछे पत्नी, दो शिक्षारत और बेरोजगार बेटे, तथा एक विवाह योग्य बेटी छोड़ गए हैं। परिजनों का कहना है कि धर्मवीर सिंह ही परिवार का एकमात्र सहारा थे और बेटी के विवाह के लिए वर की तलाश में जुटे थे। उनकी अचानक मौत से परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे पूरे गांव में शोक का माहौल है। तहसील प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि संबंधित हल्का लेखपाल श्रेयसी द्विवेदी ने न तो घटना स्थल का दौरा करना उचित समझा और न ही मृतक परिवार से सही जानकारी लेने का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप है कि घर बैठे तैयार की गई इस रिपोर्ट में मृतक किसान की उम्र गलत दर्ज की गई, उनके पिता का नाम (बल्दियत) तक बदल दिया गया, और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि मृत्यु का कारण सीधे “अज्ञात” लिख दिया गया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब पूरा गांव सर्पदंश की घटना का प्रत्यक्ष गवाह है और पुलिस रिकॉर्ड इसकी पुष्टि कर रहा है, तो तहसीली रिपोर्ट में सच्चाई को बदलने का प्रयास क्यों किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यदि पत्रकार और परिजन इस मामले में आवाज न उठाते, तो शायद इस गरीब किसान की मौत सरकारी अभिलेखों में हमेशा के लिए “अज्ञात” ही रह जाती। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब और असहाय परिवारों के प्रति अमानवीय संवेदनहीनता का एक उदाहरण है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या सरकारी सहायता और मृतक आश्रितों को मिलने वाले लाभों को प्रभावित करने वाली आधारभूत रिपोर्टें अब बिना किसी जांच-पड़ताल के ही तैयार की जा रही हैं, और क्या बिना “सुविधाशुल्क” के सही रिपोर्ट लिखना भी अब मुश्किल हो गया है। हालांकि, बाद में मृतक के परिजनों और पत्रकारों द्वारा सही तथ्य अवगत कराने पर नायब तहसीलदार शाहाबाद, संतोष कुशवाहा ने रिपोर्ट में सुधार कराने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में दो बार एसडीएम शाहाबाद के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन नेटवर्क समस्या के कारण बातचीत संभव नहीं हो सकी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में यही चर्चा है कि यदि एक मृतक किसान की स्पष्ट सर्पदंश से हुई मृत्यु को भी सरकारी कागजों में “अज्ञात” बनाया जा सकता है, तो आम आदमी आखिर किस व्यवस्था पर भरोसा करेगा।4
- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में प्रशासन की अनुमति के बिना भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर जमकर बवाल हो गया। इसे रोकने पहुंची राजस्व और पुलिस टीम पर दबंगों और अराजक तत्वों ने पथराव कर दिया, जिसमें एक महिला कर्मी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। यह घटना बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआकोला गांव में हुई, जहां गांव के पुत्ती लाल पुत्र गिरजा प्रसाद मौर्य अपने 25 अन्य साथियों के साथ मिलकर प्रतिमा स्थापित कर रहे थे, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे थे। राजस्व व पुलिस टीम ने सभी को समझाने का प्रयास किया। बुधवार को शुरू हुई बातचीत रात 10 बजे तक चलती रही, लेकिन बाहर से आए अराजक तत्वों ने मामले को और अधिक भड़का दिया। बौद्ध धर्म को मानने वाले ग्रामीणों और लखनऊ की अलग-अलग जगहों से आए तीन युवकों ने शरारती तत्वों के साथ मिलकर राजस्व टीम और पुलिस बल पर पथराव कर दिया। भीड़ को अचानक उग्र होता देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके चलते एक पुलिसकर्मी सहित महिला आरक्षी को गंभीर चोटें आईं और उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोथावां भेजा गया। घटना की सूचना पर भारी पुलिस बल के साथ एसडीएम संडीला नारायणी भाटिया और क्षेत्राधिकारी हरियावाँ अजीत सिंह मौके पर पहुंचे, लेकिन जिद पर अड़े दबंगों ने प्रशासन की बात नहीं सुनी। देर रात जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस अधीक्षक अशोक मीणा भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटना में शामिल दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल, पुलिस इस संवेदनशील मामले में पूरी सतर्कता बरत रही है और कड़ी नजर बनाए हुए है।1
- हरदोई जिले के बेनीगंज थानाक्षेत्र के महुआ कोला गांव में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा स्वयं भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला।1
- हरदोई में बकरीद की नमाज हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदा की गई। इस दौरान ज़मीन पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा, वहीं आसमान से 'तीसरी आंख' के जरिए भी निगरानी रखी गई। ईदगाह में नमाजियों ने देश में अमन-चैन बनाए रखने के लिए दुआएं मांगीं। नमाज के बाद, आरिफ खान शानू ने एक अनोखी मांग रखी, जिसमें उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।1
- हरदोई में 27 मई को पुत्तीलाल मौर्य की निजी भूमि पर बने एक मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के स्थापित किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस, मजिस्ट्रेट, एडीएम और एडिशनल एसपी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा समझाने-बुझाने के दौरान, कुछ बाहरी तत्वों द्वारा लोगों को उकसाने पर हल्का पथराव हुआ। इस पर पुलिस ने उचित बल प्रयोग करते हुए स्थिति को तत्काल नियंत्रण में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है और 20-25 अन्य संदिग्धों के नाम सामने आने के बाद आगे की जांच जारी है। इस बीच, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही 'डी एम चौराहा' से अशोक स्तंभ हटाए जाने की खबरों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अशोक स्तंभ अपने स्थान पर सुरक्षित है। मौके पर भारी पुलिस बल अभी भी तैनात है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य तथा नियंत्रण में है।1