*पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट एटा ✍️* एटा, 09 जनवरी 2026 ~ जनपद के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजी वीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर या जख्मी कर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है। इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जान बूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। *कठोर कार्रवाई की मांग* पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा ?
*पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट एटा ✍️* एटा, 09 जनवरी 2026 ~ जनपद के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजी वीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर या जख्मी कर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है। इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जान बूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। *कठोर कार्रवाई की मांग* पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा ?
- गोविन्द इन्टर कालेज पीपल अड्डा नगरसेवक बाली गली मे सालाना कार्यक्रम मे प्रोग्राम का आयोजन देखियेगा1
- मामी से शादी के लिए भान्जे ने मामा को उतारा मौत के घाट/1
- हाथरस के मथुरा–बरेली हाईवे पर थाना इगलास क्षेत्र के असरोई गांव के पास तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में 6 माह का मासूम, दो महिलाएं और एक पुरुष घायल हो गए। टक्कर से मासूम मां की गोद से उछलकर 20 मीटर दूर जा गिरा, जिसे घायल मां ने दौड़कर बचाया। NHAI की एम्बुलेंस ने सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया।1
- अवैध रूप से रह रहे 38 बांग्लादेशी नागरिक आगरा जेल से डिपोर्ट आगरा:- सिकंदरा क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे 38 बांग्लादेशी नागरिकों को आगरा जिला कारागार से डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी को विदेशी अधिनियम के तहत जेल भेजा गया था। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत इन नागरिकों को पश्चिम बंगाल ले जाकर बीएसएफ के सुपुर्द किया जाएगा। बीएसएफ द्वारा 13 जनवरी को इन्हें सीमा पार कर बांग्लादेश भेजा जाएगा।1
- एटा। कोतवाली अलीगंज क्षेत्र के ग्राम विजयदेपुर में बच्चों के विवाद से शुरू हुआ झगड़ा देखते ही देखते गंभीर संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट, गाली-गलौज, तमंचा दिखाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। एक पक्ष का आरोप है कि विवाद के दौरान अवैध तमंचे से फायरिंग की गई, जबकि दूसरे पक्ष ने रास्ते में गिराकर लाठी-डंडों व बेल्टों से बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है। बीच-बचाव में आए बुजुर्ग के साथ भी मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। सूचना पर अलीगंज पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। थाना अध्यक्ष अलीगंज राजकुमार सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों से लिखित तहरीर प्राप्त हुई है, मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।1
- फिरोजाबाद थाना उत्तर इलाके में नगर मिर्जा छोटा में एक दलित पीड़ितवर्ग के लोग यहां पर किसी अपराजंक व्यक्ति ने रात को 2:00 खोखे में पेट्रोल डालकर आग लगा दी1
- फिरोजाबाद। जनपद फिरोजाबाद में पुलिस द्वारा आदतन अपराधियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ दीक्षित के आदेश पर 01 अपराधी को 6 माह के लिए जिलाबदर किया गया है। अपराधी जनपद की सीमा में पाए जाने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई का सामना करेगा। जिलाबदर अतीक1
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। थाना कोतवाली सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर में जेठ और जेठानी ने हैवानियत की हदों को पार करते हुए विवाहिता को बेरहमी से पीटने के साथ ही भरे बाजार बाल पकड़कर उसे घसीटते हुए ले गया। घटना की भयावह तस्वीरें बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गईं, जिनमें साफ तौर पर मारपीट और घसीटने की घटना दिखाई दे रही है। वहीं पीड़िता की तहरीर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।1