किशनगंज में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जहाँ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी नवीन कुमार ने सोमवार को समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। पदभार संभालने के बाद, उन्होंने जिले के विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है। उनकी इस नई जिम्मेदारी के साथ, यह उम्मीद जताई जा रही है कि जिले में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ होगा, सुशासन को बल मिलेगा और आम लोगों से जुड़े कार्यों में भी गति आएगी। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने और जनहित से जुड़े मामलों का त्वरित निष्पादन करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जिले के लोगों के बीच नए जिलाधिकारी के कार्यकाल को लेकर सकारात्मक उम्मीदें देखी जा रही हैं, जो इस प्रशासनिक परिवर्तन से बेहतर भविष्य की आशा कर रहे हैं।
किशनगंज में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जहाँ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी नवीन कुमार ने सोमवार को समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। पदभार संभालने के बाद, उन्होंने जिले के विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है। उनकी इस नई जिम्मेदारी के साथ, यह उम्मीद जताई जा रही है कि जिले में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ होगा, सुशासन को बल मिलेगा और आम लोगों से जुड़े कार्यों में भी गति आएगी। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने और जनहित से जुड़े मामलों का त्वरित निष्पादन करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जिले के लोगों के बीच नए जिलाधिकारी के कार्यकाल को लेकर सकारात्मक उम्मीदें देखी जा रही हैं, जो इस प्रशासनिक परिवर्तन से बेहतर भविष्य की आशा कर रहे हैं।
- RealNewsRN द्वारा प्रकाशित खबर का प्रभाव मात्र 48 घंटों के भीतर देखने को मिला है। इस खबर के बाद फुलवरिया ब्रिज का एप्रोच मार्ग पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है।1
- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-9 स्थित मुस्लिम टोला गांव दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क की हालत बेहद खराब है, जो बरसात के मौसम में पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन ठप पड़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिसके चलते गांव एक टापू में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, मुस्लिम टोला गांव पूर्वी एवं दक्षिणी दिशा में गोरिया नदी तथा पश्चिमी दिशा में रेतुआ नदी से घिरा हुआ है, जिसके कारण बरसात में यह चारों ओर से पानी से घिर जाता है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी और कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है। पिछले साल, सड़क की बदहाल स्थिति और जलजमाव के कारण गांव के निवासी हकमो उद्दीन को समय पर वाहन नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने चारपाई के सहारे करीब डेढ़ किलोमीटर पानी और कीचड़ भरे रास्ते से उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने गांव में सड़क और पुल की आवश्यकता को और भी गंभीर रूप से उजागर कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क और आवागमन की समस्या गांव के सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जिससे लोग शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इस गांव में आने से कतराते हैं, और कई परिवारों को बच्चों के विवाह संबंध स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों, जिनमें बादल आलम, इस्लामुद्दीन, नईम अख्तर, राहिल आलम, असलम आलम, हकीमुद्दीन, शिवकुमार मंडल, शंकर मंडल, अनवर आलम, नईम आलम, दिलशाद आलम, अबू नसर, अरशद आलम, नासिर आलम, शाहनवाज आलम, साहिल आलम, तबरेज आलम, फिरोज आलम, मुख्तार आलम, राशिद आलम और मजेबुल आलम शामिल हैं, ने कई बार सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से तत्काल पक्की सड़क और गोरिया नदी पर आरसीसी पुल के निर्माण की मांग की है। उनका मानना है कि सड़क और पुल बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी वर्षों पुरानी पीड़ा को समझते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाएंगे, ताकि मुस्लिम टोला के लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।1
- पुलिसकर्मियों ने भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करने के बाद उन पर पाँच-पाँच गोलियाँ दाग दीं। इस कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए पूछा जा रहा है कि आखिर यह कहाँ का न्याय है।1
- बिहार में मौजूदा 'विकास' की स्थिति को लेकर गहरा असंतोष और निराशा व्यक्त की गई है, जहाँ इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि वर्तमान हालात प्राचीन मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यताओं की तुलना में भी बदतर हैं। पोस्ट में बिहार की दयनीय और खराब स्थिति पर अत्यधिक दुख और चिंता जाहिर की गई है।1
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- भरत तिवारी की पत्नी ने एक नेता जी से सीधे तौर पर सवाल किया है, जिसमें उन्होंने पूछा कि क्या भरत तिवारी कोई गुंडा थे, जिसके चलते उनका एनकाउंटर किया गया। इस सवाल के माध्यम से उन्होंने भरत तिवारी के एनकाउंटर पर गहरा संदेह और रोष व्यक्त किया।1
- सुपौल में स्थित नक्कु मोबाइल रिपेयरिंग शॉप ने यह दावा किया है कि वे मोबाइल के FRP (फ़ैक्टरी रीसेट प्रोटेक्शन) और अन्य प्रकार के लॉकों को तुरंत खोल देंगे। दुकान की ओर से कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक का मोबाइल लॉक कहीं और नहीं खुल रहा है, तो वे उसे तत्काल ठीक कर सकते हैं। लोगों से इस सेवा के लिए जल्द से जल्द दुकान पर आने का आग्रह किया गया है।1
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