भारतीय कानून के तहत स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी (SPOA) एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज़ है, जिसका उपयोग कानूनी प्रक्रियाओं, संपत्ति के मामलों और न्यायालयीन कार्यों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह दस्तावेज़ एक व्यक्ति (Principal) को किसी दूसरे व्यक्ति (Agent या Attorney) को अपनी ओर से किसी एक विशिष्ट या विशेष कार्य को पूरा करने का अधिकार देता है। जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के विपरीत, SPOA में अधिकार बहुत सीमित होते हैं और यह विशिष्ट कार्य पूरा होते ही स्वतः समाप्त हो जाती है। कोई भी मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो (Principal) इसे अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति (Agent) के पक्ष में बना सकता है। SPOA का निर्माण तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति बीमारी, वृद्धावस्था, शहर/देश से बाहर होने या अपनी नौकरी/पेशे में अत्यधिक व्यस्त होने के कारण किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होने में असमर्थ होता है। इसके मुख्य कारणों में किसी विशेष प्रॉपर्टी (जैसे मकान, दुकान, जमीन) की खरीद या बिक्री, न्यायालय में चल रहे किसी विशिष्ट मुकदमे की पैरवी या जवाब प्रस्तुत करना, बैंक से लोन लेना या कोई विशिष्ट वित्तीय लेन-देन करना, और सरकारी विभागों जैसे नगर निगम, RTO या आयकर विभाग में किसी विशेष कार्य को संपन्न करना शामिल हो सकता है। SPOA बनाने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सबसे पहले दस्तावेज़ का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया जाता है। इसमें अधिकार देने वाले, अधिकार पाने वाले और उस 'विशेष कार्य' का स्पष्ट विवरण लिखा जाता है। इस ड्राफ्ट को राज्य के नियमानुसार उचित मूल्य के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है, जिसके बाद Principal, Agent और कम से कम 2 गवाहों (पहचान पत्र सहित) के हस्ताक्षर होते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए, यदि कार्य केवल कोर्ट में पेशी, बिजली विभाग या सामान्य कार्यों तक सीमित है, तो इसे नोटरी पब्लिक से सत्यापित कराना पर्याप्त होता है। हालांकि, यदि मामला अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री या ट्रांसफर से जुड़ा है, तो इसे अनिवार्य रूप से इलाके के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पंजीकृत कराना होता है। SPOA का खर्च और स्टाम्प ड्यूटी विभिन्न राज्यों के स्टाम्प अधिनियम पर निर्भर करती है। यदि पावर ऑफ अटॉर्नी परिवार के सदस्यों जैसे माता-पिता, पति-पत्नी, बेटे-बेटी, भाई-बहन को दी जा रही है, तो मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी काफी कम (आमतौर पर 500 से 1000 रुपये के स्टाम्प पर) लगती है। इसके विपरीत, यदि अचल संपत्ति बेचने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति (जैसे बिल्डर, दोस्त या खरीदार) को दिया जाता है, तो कई राज्यों में इसे 'कनवेयंस' माना जाता है और प्रॉपर्टी की कुल कलेक्टर गाइडलाइन वैल्यू के बराबर भारी स्टाम्प ड्यूटी (लगभग 5% से 8%) चुकानी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त दस्तावेज़ की ड्राफ्टिंग फीस और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस की रजिस्ट्रेशन फीस (लगभग 1000-2000 रुपये) भी लगती है। हालांकि SPOA एक सुरक्षित दस्तावेज़ है क्योंकि यह केवल एक काम के लिए होता है, फिर भी इसमें कुछ जोखिम हो सकते हैं जैसे Agent द्वारा दिए गए अधिकारों का गलत इस्तेमाल करना (उदाहरण के लिए, प्रॉपर्टी को बाजार भाव से कम कीमत पर बेचना) या कार्य पूरा होने के बाद भी दस्तावेज़ का गलत इस्तेमाल करना। अधिकारों की अस्पष्टता भी एक जोखिम है, जहाँ ड्राफ्टिंग में विवरण स्पष्ट न होने पर Agent Principal की मंशा के विपरीत कार्य कर सकता है। इन जोखिमों से बचने के लिए, दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए कि Agent क्या कर सकता है और क्या नहीं (Negative Covenants)। साथ ही, SPOA में एक 'समय-सीमा' निर्धारित करना महत्वपूर्ण है (जैसे, केवल 6 महीने के लिए वैध) और पैसों के लेन-देन के मामलों में यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रॉपर्टी बिकने पर पैसा सीधे Principal के बैंक खाते में ही आएगा। यदि Principal को लगता है कि Agent अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, या उनका काम पूरा हो गया है, तो वे इसे कभी भी रद्द कर सकते हैं। इसके लिए 'कैंसिलेशन डीड' (Deed of Revocation) बनवानी होती है। यदि मूल SPOA सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड थी, तो कैंसिलेशन डीड को भी उसी ऑफिस में जाकर रजिस्टर कराना अनिवार्य है। इसके साथ ही, एक स्थानीय समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना (Public Notice) भी प्रकाशित करवानी चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा के उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक मामला अद्वितीय होता है, इसलिए कोई भी कानूनी कार्रवाई या लेनदेन करने से पहले किसी योग्य वकील से सलाह लेना आवश्यक है।
भारतीय कानून के तहत स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी (SPOA) एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज़ है, जिसका उपयोग कानूनी प्रक्रियाओं, संपत्ति के मामलों और न्यायालयीन कार्यों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह दस्तावेज़ एक व्यक्ति (Principal) को किसी दूसरे व्यक्ति (Agent या Attorney) को अपनी ओर से किसी एक विशिष्ट या विशेष कार्य को पूरा करने का अधिकार देता है। जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के विपरीत, SPOA में अधिकार बहुत सीमित होते हैं और यह विशिष्ट कार्य पूरा होते ही स्वतः समाप्त हो जाती है। कोई भी मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो (Principal) इसे अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति (Agent) के पक्ष में बना सकता है। SPOA का निर्माण तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति बीमारी, वृद्धावस्था, शहर/देश से बाहर होने या अपनी नौकरी/पेशे में अत्यधिक व्यस्त होने के कारण किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होने में असमर्थ होता है। इसके मुख्य कारणों में किसी विशेष प्रॉपर्टी (जैसे मकान, दुकान, जमीन) की खरीद या बिक्री, न्यायालय में चल रहे किसी विशिष्ट मुकदमे की पैरवी या जवाब प्रस्तुत करना, बैंक से लोन लेना या कोई विशिष्ट वित्तीय लेन-देन करना, और सरकारी विभागों जैसे नगर निगम, RTO या आयकर विभाग में किसी विशेष कार्य को संपन्न करना शामिल हो सकता है। SPOA बनाने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सबसे पहले दस्तावेज़ का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया जाता है। इसमें अधिकार देने वाले, अधिकार पाने वाले और उस 'विशेष कार्य' का स्पष्ट विवरण लिखा जाता है। इस ड्राफ्ट को राज्य के नियमानुसार उचित मूल्य के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है, जिसके बाद Principal, Agent और कम से कम 2 गवाहों (पहचान पत्र सहित) के हस्ताक्षर होते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए, यदि कार्य केवल कोर्ट में पेशी, बिजली विभाग या सामान्य कार्यों तक सीमित है, तो इसे नोटरी पब्लिक से सत्यापित कराना पर्याप्त होता है। हालांकि, यदि मामला अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री या ट्रांसफर से जुड़ा है, तो इसे अनिवार्य रूप से इलाके के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पंजीकृत कराना होता है। SPOA का खर्च और स्टाम्प ड्यूटी विभिन्न राज्यों के स्टाम्प अधिनियम पर निर्भर करती है। यदि पावर ऑफ अटॉर्नी परिवार के सदस्यों जैसे माता-पिता, पति-पत्नी, बेटे-बेटी, भाई-बहन को दी जा रही है, तो मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी काफी कम (आमतौर पर 500 से 1000 रुपये के स्टाम्प पर) लगती है। इसके विपरीत, यदि अचल संपत्ति बेचने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति (जैसे बिल्डर, दोस्त या खरीदार) को दिया जाता है, तो कई राज्यों में इसे 'कनवेयंस' माना जाता है और प्रॉपर्टी की कुल कलेक्टर गाइडलाइन वैल्यू के बराबर भारी स्टाम्प ड्यूटी (लगभग 5% से 8%) चुकानी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त दस्तावेज़ की ड्राफ्टिंग फीस और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस की रजिस्ट्रेशन फीस (लगभग 1000-2000 रुपये) भी लगती है। हालांकि SPOA एक सुरक्षित दस्तावेज़ है क्योंकि यह केवल एक काम के लिए होता है, फिर भी इसमें कुछ जोखिम हो सकते हैं जैसे Agent द्वारा दिए गए अधिकारों का गलत इस्तेमाल करना (उदाहरण के लिए, प्रॉपर्टी को बाजार भाव से कम कीमत पर बेचना) या कार्य पूरा होने के बाद भी दस्तावेज़ का गलत इस्तेमाल करना। अधिकारों की अस्पष्टता भी एक जोखिम है, जहाँ ड्राफ्टिंग में विवरण स्पष्ट न होने पर Agent Principal की मंशा के विपरीत कार्य कर सकता है। इन जोखिमों से बचने के लिए, दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए कि Agent क्या कर सकता है और क्या नहीं (Negative Covenants)। साथ ही, SPOA में एक 'समय-सीमा' निर्धारित करना महत्वपूर्ण है (जैसे, केवल 6 महीने के लिए वैध) और पैसों के लेन-देन के मामलों में यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रॉपर्टी बिकने पर पैसा सीधे Principal के बैंक खाते में ही आएगा। यदि Principal को लगता है कि Agent अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, या उनका काम पूरा हो गया है, तो वे इसे कभी भी रद्द कर सकते हैं। इसके लिए 'कैंसिलेशन डीड' (Deed of Revocation) बनवानी होती है। यदि मूल SPOA सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड थी, तो कैंसिलेशन डीड को भी उसी ऑफिस में जाकर रजिस्टर कराना अनिवार्य है। इसके साथ ही, एक स्थानीय समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना (Public Notice) भी प्रकाशित करवानी चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा के उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक मामला अद्वितीय होता है, इसलिए कोई भी कानूनी कार्रवाई या लेनदेन करने से पहले किसी योग्य वकील से सलाह लेना आवश्यक है।
- पाली में शनिवार को योग दिवस की पूर्व संध्या पर आर्य वीर दल पाली की युवा शाखा के आर्य वीरों द्वारा एक आकर्षक मानव पिरामिड की प्रस्तुति दी गई। यह प्रस्तुति आर्य वीर दल द्वारा आयोजित आत्म रक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर के दौरान दी गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।1
- आज 20 जून 2026 को महाराष्ट्र में उद्धव शिवसेना गुट के 6 सांसदों ने शिवसेना शिंदे की सदस्यता ग्रहण की, जिस पर पाली में शिंदे शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने खुशी मनाई। यह जश्न शाम 6 बजे शिवाजी सर्किल पर जिला प्रमुख तख्तसिंह सोलंकी और जिला प्रवक्ता राजू देवासी के नेतृत्व में मनाया गया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर अपनी खुशी का इजहार किया। इस दौरान शिवसेना का स्थापना दिवस भी मनाया गया। कार्यक्रम में नगर प्रमुख उदय शेट्टी, उप नगर प्रमुख प्रवीण सिंह इंदा, अर्जुन टाइगर, तहसील प्रमुख नरपत सिंह भाटी, नगर संगठन प्रमुख राजू सिंह रावत, दिलकुश वैष्णव, नंद किशोर शर्मा, जितेंद्र सिंह, महेंद्र मांडा, प्रहलाद सिसोदिया, दीपक पंवार, एडवोकेट नरेश प्रजापत, केसर सिंह, पिंटू आहूजा, किशन वैष्णव, पृथ्वी सिंह, जितेंद्र राव, सजना शर्मा, मनीषा कुमारी, संतोष माली, बाली कंवर, प्रियंका लखारा, संगीता चौहान, गीता मेवाडा, पिस्ता कंवर और भगवती परिहार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।2
- महाराष्ट्र की राजनीति में हुए एक बड़े घटनाक्रम का असर 20 जून 2026 को राजस्थान के पाली जिले में भी देखने को मिला। उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने और शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर पाली में शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं में भारी खुशी की लहर दौड़ गई। इस खुशी के माहौल में आज शाम 6 बजे पाली के शिवाजी सर्किल पर एक भव्य जश्न कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम शिवसेना शिंदे के जिला प्रमुख तख्तसिंह सोलंकी और जिला प्रवक्ता राजू देवासी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। शिवाजी सर्किल पर एकत्रित हुए शिवसैनिकों ने जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाकर बधाई दी। कार्यकर्ताओं ने बालासाहेब ठाकरे और पार्टी के पक्ष में जमकर नारेबाजी भी की। इस जश्न के दौरान संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें नगर प्रमुख उदय शेट्टी, उप नगर प्रमुख प्रवीण सिंह इंदा, अर्जुन टाइगर, तहसील प्रमुख नरपत सिंह भाटी, नगर संगठन प्रमुख राजू सिंह रावत, दिलकुश वैष्णव, नन्द किशोर शर्मा, जितेन्द्र सिंह, महेंद्र मांडा, प्रहलाद सिसोदिया, दीपक पंवार, एडवोकेट नरेश प्रजापत, केसर सिंह, पिंटू आहुजा, किशन वैष्णव, पृथ्वी सिंह और जितेन्द्र राव शामिल थे। महिला कार्यकर्ताओं में सजना शर्मा, मनीषा कुमारी, सन्तोष माली, बाली कंवर, प्रियंका लखारा, संगीता चौहान, गीता मेवाड़ा, पिस्ता कंवर और भगवती परिहार सहित भारी संख्या में शिवसैनिक उपस्थित थे।3
- Post by District.reporter.babulaljogaw1
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आज पाली जिले के सुमेरपुर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने नेतरा गाँव से लेकर टाउन हॉल तक विभिन्न सेवा शिविरों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया, जिससे लोगों को सरकारी कामकाज में अनावश्यक परेशानी न हो। मुख्यमंत्री के इस दौरे की शुरुआत नेतरा गाँव में ग्रामीण सेवा शिविर के अवलोकन और स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद के साथ हुई। इसके उपरांत, उन्होंने सुमेरपुर टाउन हॉल में आयोजित शहरी सेवा शिविर का भी औचक निरीक्षण किया। अपने संबोधन में सीएम भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 'आमजन को राहत' प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आयोजित किए जा रहे ये शिविर सरकारी तंत्र को सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा रहे हैं, जहाँ न केवल विभिन्न समस्याओं का तुरंत निपटारा किया जा रहा है, बल्कि नाम शुद्धि और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य भी मौके पर ही निष्पादित किए जा रहे हैं। शिविर स्थल पर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मंत्री जोराराम कुमावत, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, बाली विधायक पुष्पेंद्रसिंह राणावत, जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी और एसपी मोनिका सेन सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किया। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने के बजाय इन सेवा शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ। साथ ही, उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शिविरों में आने वाले किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी के कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएँ।1
- शनिवार सुबह के अवसर पर देश प्रेम और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत होकर 'राम राम सा' कहा गया। इस दौरान भारत माता को हृदय से सलाम करते हुए 'जय हिन्द' और 'जय भारत माता' के उद्घोष किए गए।2
- पाली में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर आर्य वीरांगनाओं ने कमल पिरामिड की एक आकर्षक प्रस्तुति दी। 21 जून को मिली जानकारी के अनुसार, यह प्रस्तुति आर्य समाज की युवा शाखा, आर्य वीर दल पाली द्वारा आयोजित आत्मरक्षा एवं चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर के दौरान शनिवार को दी गई।1
- पाली के सदर थाना क्षेत्र के उतवण गांव में शुक्रवार को एक हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई। इस घटना में पाली के सत्यनारायण मार्ग निवासी लक्ष्मण दास (45) पुत्र टीकममल की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मृतक उतवण गांव में मिनरल वॉटर के कैंपर भरने का काम करता था। शुक्रवार की सुबह जब वह पानी का पाइप इधर-उधर कर रहा था, तभी पाइप से तेज रफ्तार से पानी निकला। इससे वह अपना संतुलन खो बैठा और दीवार से जा टकराया। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे इलाज के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने उसके परिजनों को हादसे की सूचना दी।2