नागौर जिले के रियांबडी उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सथानाकलां में "वंदे गंगा" जल संरक्षण जन अभियान 2026 के तहत ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया है। यह कार्यक्रम ग्राम पंचायत सथाना के सथानी गांव स्थित बालाजी मंदिर के अमृत सरोवर पर आयोजित हुआ। अभियान की शुरुआत पूजा-अर्चना, पौधारोपण और स्वच्छता संदेश के साथ की गई। "वंदे गंगा" अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण और जल स्रोतों का संरक्षण करना है। इसी उद्देश्य के तहत, अमृत सरोवर परिसर में साधु-संतों के सानिध्य में पौधारोपण किया गया। इसके उपरांत, जल सरोवर देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी को जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी नंदकिशोर टाक, प्रशासक सरपंच प्रतिनिधि अयूब खान, प्रशासक रजिया बानो कायमखानी और ग्राम विकास अधिकारी डॉ. अंबिका शर्मा सहित विभिन्न ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। सहायक विकास अधिकारी नंदकिशोर टाक ने जानकारी दी कि इस अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों, तालाबों और जल संग्रहण ढांचों पर स्वच्छता अभियान, श्रमदान, दीप प्रज्ज्वलन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मात्र एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक दायित्व है, जिसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
नागौर जिले के रियांबडी उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सथानाकलां में "वंदे गंगा" जल संरक्षण जन अभियान 2026 के तहत ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया है। यह कार्यक्रम ग्राम पंचायत सथाना के सथानी गांव स्थित बालाजी मंदिर के अमृत सरोवर पर आयोजित हुआ। अभियान की शुरुआत पूजा-अर्चना, पौधारोपण और स्वच्छता संदेश के साथ की गई। "वंदे गंगा" अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण और जल स्रोतों का संरक्षण करना है। इसी उद्देश्य के तहत, अमृत सरोवर परिसर में साधु-संतों के सानिध्य में पौधारोपण किया गया। इसके उपरांत, जल सरोवर देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी को जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी नंदकिशोर टाक, प्रशासक सरपंच प्रतिनिधि अयूब खान, प्रशासक रजिया बानो कायमखानी और ग्राम विकास अधिकारी डॉ. अंबिका शर्मा सहित विभिन्न ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। सहायक विकास अधिकारी नंदकिशोर टाक ने जानकारी दी कि इस अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों, तालाबों और जल संग्रहण ढांचों पर स्वच्छता अभियान, श्रमदान, दीप प्रज्ज्वलन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह मात्र एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक दायित्व है, जिसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
- मशहूर फिल्म डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के.सी. बोकाडिया की फिल्म 'तीसरी बेगम' 29 मई 2024 को रिलीज हो गई है। यह फिल्म अपने 'जय श्री राम' डायलॉग को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ हुए विवाद के बाद चर्चा में रही थी, जिसे अंततः बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बदला गया। फिल्म एक मुस्लिम व्यक्ति की कहानी है जो अपनी पहचान छिपाकर तीन शादियां करता है: पहली पत्नी मुस्लिम, दूसरी राजपूत हिंदू और तीसरी ब्राह्मण हिंदू। विवाद तब शुरू हुआ जब क्लाइमेक्स में, अपनी तीनों पत्नियों द्वारा हमला किए जाने पर, वह व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए 'जय श्री राम' का नारा लगाता है। फिल्म के अंत में वह अपनी गलती स्वीकार करता है और प्रभु श्री राम की दुहाई देकर अपनी जान बचाता है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने 'जय श्री राम' वाले इस डायलॉग पर आपत्ति जताई थी, उनका मानना था कि एक मुस्लिम किरदार द्वारा हिंदू पत्नियों से बचने के लिए इस नारे का इस्तेमाल आपत्तिजनक है। बोर्ड को फिल्म में ट्रिपल तलाक के जिक्र पर भी आपत्ति थी। शुरुआत में डायरेक्टर के.सी. बोकाडिया ने डायलॉग हटाने से इनकार करते हुए कहा था कि वह 'मर जाएंगे पर नहीं हटाएंगे'। यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद बोकाडिया 'जय श्री राम' की जगह 'तुमको तुम्हारे भगवान की कसम' डायलॉग रखने पर राजी हुए। इस बदलाव के बाद ही फिल्म को U/A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की अनुमति मिली। के.सी. बोकाडिया बॉलीवुड के एक बड़े डायरेक्टर-प्रोड्यूसर हैं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, सलमान और शाहरुख जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उनके खाते में _आज का अर्जुन_, _लाल बादशाह_ और _हम तुम्हारे हैं सनम_ जैसी 60 से अधिक फिल्में हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह फिल्म 1966 की राज कपूर-वहीदा रहमान अभिनीत 'तीसरी कसम' से अलग है, जो फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पर आधारित थी।1
- राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने पत्रकारों से संवाद किया। इस दौरान, प्रभारी सचिव हिमांशु गुप्ता ने जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। संवाद में, 'जल संरक्षण से ही समृद्धि का संचार' के मूल मंत्र को रेखांकित करते हुए, 'वंदे गंगा' अभियान को एक जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया गया।2
- इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की लखनऊ सुपर जायंट्स टीम के गेंदबाज आवेश खान, आईपीएल खेल समाप्त होने के तुरंत बाद, ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत करने के लिए पहुँचे। उन्होंने आईपीएल मैचों के समापन के साथ ही यह विशेष दौरा किया।1
- अजमेर में रामसेतु ब्रिज और रेलवे स्टेशन रोड की स्थिति को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क सुरक्षा और जनहित को देखते हुए क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के होने का इंतजार कर रहा है, या समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह सवाल अजमेर की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करता है।1
- ब्यावर के मसूदा रोड पर हुए एक सड़क हादसे में एक एक्टिवा सवार महिला घायल हो गई। पाखरिया वास की निवासी यह महिला एक्टिवा पर जा रही थी, तभी एक कार ने उसे टक्कर मार दी। घटना के बाद, 108 एम्बुलेंस की सहायता से घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया गया।1
- भीलवाड़ा में एक मंदिर के बाहर जानवर की खाल मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इस घटना के विरोध में आक्रोशित लोगों ने चक्काजाम कर दिया, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए पुलिस जाप्ता तैनात किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की सहायता से दो युवकों, लोकेश खटीक और हेमंत कोली, की पहचान की और उन्हें हिरासत में ले लिया है। बताया गया है कि लोकेश खटीक जानवरों की खालों के खरीदने और बेचने का व्यवसाय करता है।1
- नागौर जिले के रिया बड़ी उपखंड क्षेत्र के ग्राम लांपोलाई में 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के तहत एक ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजस्थान सरकार और भारतीय जनता पार्टी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के सदुपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई, साथ ही आमजन को जल बचाने का संकल्प भी दिलाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपखंड अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया और तहसीलदार अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि 'जल ही जीवन है'। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने को हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। अधिकारियों ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान गांव-गांव तक जनजागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है। महिलाओं, ग्रामीणों और युवा शक्ति ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सभी ने जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विकास अधिकारी सिंगाड़िया, सहायक विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद माली, ग्राम विकास अधिकारी संदीप गोदारा, सहायक कृषि अधिकारी जोगीराम मेहरा, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक सुशील डांगा, जल ग्रहण कनिष्ठ सहायक कल्पना मीणा, प्रशासक केसर देवी लटियाल और प्रशासन प्रतिनिधि सुशील लटियाल सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष भंवर सिंह राठौड़, रामस्वरूप जोशी, जसनगर मंडल अध्यक्ष महेंद्र योगी, तुलसाराम, सोहनलाल, सत्यनारायण जोशी, मंगलाराम, कल्याणराम और गौतम जोशी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। पूरे आयोजन के दौरान गांव में जागरूकता और उत्साह का माहौल देखा गया, जो जल संरक्षण के प्रति समुदाय की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।1
- वंदे गंगाजल संरक्षण जल अभियान 2026 को लेकर एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार लखावत और जिला प्रभारी सचिव हिमांशु गुप्ता ने पत्रकारों को संबोधित किया। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) ब्रह्मलाल जाट, तहसीलदार हनुत सिंह रावत और मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) सतीश सोनी भी उपस्थित थे। ओंकार लखावत ने इस अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका मुख्य लक्ष्य राजस्थान में अधिक से अधिक जल संरक्षण करना है। उन्होंने जानकारी दी कि यह महत्वपूर्ण अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की देखरेख में चलाया जा रहा है, जिनकी मंशा प्रदेश को हरा-भरा बनाना है। लखावत ने आशा व्यक्त की कि राजस्थान के हरा-भरा होने से राज्य में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है। अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया गया।2
- डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, अजमेरु थोक ट्रांसपोर्ट विकास समिति ने अजमेर में मालभाड़े में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। समिति के अनुसार, मालभाड़े में अब प्रति किलोमीटर 10 रुपए की बढ़ोतरी की जाएगी। समिति अध्यक्ष मोइन खान ने बताया कि डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट की लागत में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रांसपोर्टर अब नए नियमों के अनुसार ही भाड़ा तय करेंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी रूट का मालभाड़ा पहले 70 हजार रुपए था और दूरी एक हजार किलोमीटर थी, तो नए नियम के तहत अब उसका भाड़ा 80 हजार रुपए होगा। खान के मुताबिक, बढ़ती लागत के बीच यह फैसला कारोबार को स्थिर बनाए रखने में सहायक साबित होगा।1