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9/2/संध्या बांके बिहार के दर्शन
Pandit Rahul brijwasi
9/2/संध्या बांके बिहार के दर्शन
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- देशभक्ति के रंग में रंगा नरी गाँव: सेवानिवृत्त फौजी देवेंद्र सिंह का भव्य स्वागत। छाता (मथुरा): तहसील क्षेत्र के गाँव नरी में उस वक्त राष्ट्रप्रेम का सैलाब उमड़ पड़ा, जब भारतीय सेना में 20 वर्षों तक गौरवशाली सेवा देने के बाद देवेंद्र फौजी अपने पैतृक निवास लौटे। ग्रामीणों ने उनके सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित किया, जिसमें भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति कार्यक्रम में आध्यात्मिक और सामाजिक जगत की जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि: पूज्य मौनी बाबा (कोटवन वाले) एवं श्री महामंडलेश्वर परमेश्वर दास त्यागी जी महाराज। विशिष्ट अतिथि: राधे बाबू, महाराज,भानु प्रताप सिंह (जिला कमांडेंट, होमगार्ड) और पदम फौजी (प्रतिनिधि, चेयरमैन बरसाना)। करें बाबा झब्बू उर्फ राजपाल ,राजवीर डॉक्टर ,अजय सिंह, यशपाल मास्टर, अशोक शेखर पहलवान राजेश पहलवान रहे समारोह के दौरान संतों और अतिथियों ने देवेंद्र फौजी को स्मृति चिह्न भेंट कर और माला पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ऑपरेशन सिंदूर के नायक रहे देवेंद्र मीडिया से वार्ता करते हुए देवेंद्र फौजी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि सेना के 20 साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें देश की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण मिशनों का हिस्सा बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे कठिन और बड़े ऑपरेशनों का जिक्र किया, जहाँ उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया था। "वर्दी उतारना केवल सेवा का अंत नहीं है, बल्कि समाज सेवा की एक नई शुरुआत है। मैं चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र का हर युवा नशे से दूर रहकर सेना में भर्ती हो और देश की रक्षा में अपना योगदान दे।" — देवेंद्र फौजी युवाओं के लिए बनेंगे प्रेरणा स्रोत गाँव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि देवेंद्र फौजी की वापसी से स्थानीय युवाओं में सेना के प्रति जोश बढ़ेगा। वे अब क्षेत्रीय युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देकर उनके प्रेरणा स्रोत बनेंगे। इस अवसर पर गाँव के सैकड़ों गणमान्य लोग और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।2
- Post by Gabruddin Usmani1
- Post by Subhash Chand1
- मथुरा। ब्रजभूमि से आज सनातन एकता और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम के लिए विशेष प्रसाद यात्रा विधिवत रूप से प्रेषित की गई। लाखों ब्रजवासियों ने कृष्ण भक्ति के भाव को हृदय में संजोए इस ऐतिहासिक यात्रा में सहभागिता कर इसे आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप दे दिया। महाशिवरात्रि, जिसे भगवान शिव और माता गौरी के विवाह दिवस तथा शिवलिंग के प्राकट्य पर्व के रूप में मनाया जाता है, सनातन धर्मावलंबियों के लिए आस्था, ऊर्जा और समर्पण का महासंगम है। इसी दिव्य भाव के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भेजा गया यह प्रसाद महाशिवरात्रि के दिन काशी में भगवान शिव को अर्पित किया जाएगा। ब्रज में आज हरिहर भाव साकार होता दिखाई दिया, जहाँ शिव और कृष्ण की संयुक्त भक्ति ने अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। प्रसाद यात्रा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मार्ग में उमड़े। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और स्वयं को इस पुण्य अवसर का साक्षी बनाया। चारों ओर “हर-हर महादेव” और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष गूंजते रहे। यात्रा के साथ फलाहारी लड्डू, मेवा, फल, माता गौरी के श्रृंगार की सामग्री तथा भगवती के आभूषणों सहित विशेष पूजन सामग्री काशी के लिए भेजी गई है। आयोजकों का कहना है कि यह नवाचार और दिव्य समन्वय सनातन धर्म के पुनर्गौरव की दिशा में एक स्वर्णिम अध्याय सिद्ध होगा। ब्रजवासियों का विश्वास है कि इसी एकता और आस्था के बल पर सभी अधूरे तीर्थ पूर्ण होंगे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि अपने पूर्ण स्वरूप को प्राप्त करेगी। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन चेतना और सांस्कृतिक समन्वय का विराट उत्सव है।2
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