मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के एक आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश के तहत एक ऐसे अधिकारी को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जो विभागीय जांच का सामना कर रहा था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित या लंबित हो, उसे उसी कार्यालय या विभाग का अतिरिक्त प्रभार देना कानून, नैतिकता और प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सरकार के इस निर्णय को न्यायपालिका की अंतरात्मा को झकझोरने वाला और सत्ता के दुरुपयोग की श्रेणी में आने वाला बताया। यह पूरा मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारी पी.सी. वर्मा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने 29 अप्रैल 2026 को जारी उस सरकारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसके माध्यम से भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार उनसे वापस लेकर एक दूसरे अधिकारी को सौंप दिया गया था। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड से सामने आया कि जिस अधिकारी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ सिवनी पुल ढहने के मामले में विभागीय कार्रवाई पहले से लंबित थी, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 4.94 करोड़ रुपये की क्षति हुई थी। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर के 1000 बिस्तर अस्पताल निर्माण परियोजना में लगभग 2.41 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की जांच में भी उसी अधिकारी की भूमिका सामने आई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि जनवरी 2025 में ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने के निर्देश जारी किए जा चुके थे, और राज्य सरकार ने भी स्वीकार किया कि विभागीय कार्रवाई लंबित है। इसके बावजूद, उसी अधिकारी को उस कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया जहाँ उसके खिलाफ जांच और फाइलें संचालित हो रही थीं। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ऐसी स्थिति है मानो किसी व्यक्ति को उसके अपने ही मामले में न्यायाधीश बना दिया गया हो, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। अदालत ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करने के महज तीन घंटे के भीतर उनका अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया और दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी गई, जो दर्शाता है कि निर्णय पहले से तय था। न्यायालय ने वर्ष 2004 के एक सरकारी परिपत्र का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार जिन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित हो, सतर्कता कार्रवाई चल रही हो, आपराधिक प्रकरण दर्ज हों, या गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हों, उन्हें किसी भी उच्च पद का अतिरिक्त या अस्थायी प्रभार नहीं दिया जा सकता। अंततः, हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 के विवादित आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार ऐसे अधिकारी को सौंपा जाए जिसका सेवा रिकॉर्ड निष्कलंक हो, जिसके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित न हो और जिस पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप न हों। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि जांच और आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर बैठाकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के एक आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश के तहत एक ऐसे अधिकारी को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जो विभागीय जांच का सामना कर रहा था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित या लंबित हो, उसे उसी कार्यालय या विभाग का अतिरिक्त प्रभार देना कानून, नैतिकता और प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सरकार के इस निर्णय को न्यायपालिका की अंतरात्मा को झकझोरने वाला और सत्ता के दुरुपयोग की श्रेणी में आने वाला बताया। यह पूरा मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारी पी.सी. वर्मा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने 29 अप्रैल 2026 को जारी उस सरकारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसके माध्यम से भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार उनसे वापस लेकर एक दूसरे अधिकारी को सौंप दिया गया था। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड से सामने आया कि जिस अधिकारी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ सिवनी पुल ढहने के मामले में विभागीय कार्रवाई पहले से लंबित थी, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 4.94 करोड़ रुपये की क्षति हुई थी। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर के 1000 बिस्तर अस्पताल निर्माण परियोजना में लगभग 2.41 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की जांच में भी उसी अधिकारी की भूमिका सामने आई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि जनवरी 2025 में ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने के निर्देश जारी किए जा चुके थे, और राज्य
सरकार ने भी स्वीकार किया कि विभागीय कार्रवाई लंबित है। इसके बावजूद, उसी अधिकारी को उस कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया जहाँ उसके खिलाफ जांच और फाइलें संचालित हो रही थीं। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ऐसी स्थिति है मानो किसी व्यक्ति को उसके अपने ही मामले में न्यायाधीश बना दिया गया हो, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। अदालत ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करने के महज तीन घंटे के भीतर उनका अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया और दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी गई, जो दर्शाता है कि निर्णय पहले से तय था। न्यायालय ने वर्ष 2004 के एक सरकारी परिपत्र का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार जिन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित हो, सतर्कता कार्रवाई चल रही हो, आपराधिक प्रकरण दर्ज हों, या गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हों, उन्हें किसी भी उच्च पद का अतिरिक्त या अस्थायी प्रभार नहीं दिया जा सकता। अंततः, हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 के विवादित आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार ऐसे अधिकारी को सौंपा जाए जिसका सेवा रिकॉर्ड निष्कलंक हो, जिसके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित न हो और जिस पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप न हों। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि जांच और आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर बैठाकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- गुना जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत म्याना थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने राजस्थान से मध्य प्रदेश लाई जा रही डोडाचूरा की एक बड़ी खेप को पकड़ते हुए अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को झटका दिया है। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर करीब 70 लाख रुपये मूल्य का मादक पदार्थ और तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त किया गया है। जब्त किए गए डोडाचूरा की कुल मात्रा 106.460 किलोग्राम है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 55 लाख रुपये है, जबकि सफेद रंग की फोर्स ट्रैक्स गाड़ी की कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान देव सिंह पुत्र मोहनलाल बंजारा (32 वर्ष) निवासी मदनाखेड़ी, थाना बापचा, जिला बारां (राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फतेहगढ़-बमोरी क्षेत्र से भारी मात्रा में डोडाचूरा एक सफेद फोर्स ट्रैक्स गाड़ी में भरकर पाटई हाईवे की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही म्याना थाना पुलिस ने एक विशेष टीम गठित कर ऊमरी-पाटई रोड पर नाकाबंदी की। कुछ समय बाद संदिग्ध वाहन दिखाई देने पर पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन को जंगल की ओर मोड़कर भागने लगा। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए घेराबंदी कर आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। मामले में म्याना थाने में अपराध क्रमांक 158/26 दर्ज कर आरोपी के खिलाफ धारा 8/15 और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रारंभिक जांच में इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश और भूमिका की जांच अभी जारी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में म्याना थाना प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन सिंह भदौरिया और ऊमरी चौकी प्रभारी बुंदेल सिंह सुनेरिया सहित पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।2
- अशोकनगर में 'डसटोन' कार्यक्रम से जुड़े एक पुराने विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच झड़प हो गई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद, पुलिस ने दोनों ही पक्षों की शिकायत के आधार पर संबंधित मामले दर्ज कर लिए हैं।1
- छीपाबड़ौद न्यूज द्वारा उठाई गई एक बड़ी समस्या का सुखद परिणाम सामने आया है, जहाँ सेतकोलू में एक जर्जर पुलिया की मरम्मत का काम प्रशासन ने शुरू कर दिया है। इससे पहले, छीपाबड़ौद न्यूज ने उस पुलिया की तस्वीरें साझा की थीं, जो बनने के महज चार महीने बाद ही खस्ताहाल हो गई थी। इस खबर का असर यह हुआ कि प्रशासन ने आखिरकार इस मामले में संज्ञान लिया और युद्ध स्तर पर पुलिया की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जन-हित की पत्रकारिता में कितनी ताकत होती है।1
- यह सलाह दी गई है कि व्यक्तियों को प्रतिदिन योग और प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।2
- आज विदिशा शहर के चार परीक्षा केंद्रों पर आयोजित री-नीट परीक्षा में गर्ल्स कॉलेज स्थित एक केंद्र पर तीन छात्राएं शामिल नहीं हो सकीं, जिसके कारण उनके परिजनों ने कॉलेज गेट पर हंगामा किया। परीक्षा से वंचित रहीं छात्राओं में स्नेहा दुबे निवासी आरएमपी नगर विदिशा और रागिनी विश्वकर्मा ग्राम कूड़ा तहसील कुरवाई शामिल हैं, जो निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर पाईं। प्रवेश का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक था, लेकिन ये दोनों छात्राएं 1:30 बजे के 2 मिनट बाद पहुंची थीं। जानकारी मिलने पर परीक्षा की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं और दोनों छात्राओं को अंदर ले गईं। हालांकि, अंदर जाने के बाद भी उनका बायोमेट्रिक थंब सफल नहीं हो सका, जिसके चलते उन्हें परीक्षा से बाहर आना पड़ा। इसी केंद्र पर, विदिशा की ही निवासी एक तीसरी छात्रा अक्षिता श्रीवास्तव को भी परीक्षा देने से रोक दिया गया। अक्षिता ने कुछ दिन पूर्व हुई परीक्षा का ही प्रवेश फार्म निकाला था, जिसे इस री-नीट परीक्षा के लिए मान्य नहीं किया गया। इस प्रकार, तीनों छात्राओं को री-नीट परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिल सकी।4
- आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने एसडीएम कार्यालय के समक्ष केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार धरना प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन पूर्व विधायक निर्मला सरिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारी भी मौजूद रहे। किशनगंज कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार की जल-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के विरोध में अपना विरोध दर्ज कराते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।1
- अशोकनगर जिले के दो केंद्रों पर री-नीट परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 865 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा का संचालन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और गहन जांच के बीच हुआ। इस दौरान अभ्यर्थियों के लिए कलावा से लेकर पेन तक कई वस्तुएं प्रतिबंधित की गईं।1
- सोमवार सुबह बारां जिले के भंवरगढ़ क्षेत्र में गेहूं से भरा एक ट्रक हादसे का शिकार हो गया। यह घटना भंवरगढ़ हाईवे पर उस समय हुई जब ट्रक पिछोर से बारां की ओर जा रहा था। जानकारी के अनुसार, अचानक एक गाय के सामने आ जाने पर चालक ने उसे बचाने की कोशिश की, जिससे ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस दुर्घटना की सूचना सुबह 11 बजे मिली। इस भीषण हादसे में ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें लदा सारा गेहूं सड़क किनारे बिखर गया। गनीमत रही कि दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।1