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शासन प्रशासन द्वारा अवैध रेत उत्खनन के संबंध में की गई पिछली कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है। इस पर पहले भी काफी बात हुई है, और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई कितनी प्रभावी और किस हद तक होती है।
राम बाबू
शासन प्रशासन द्वारा अवैध रेत उत्खनन के संबंध में की गई पिछली कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है। इस पर पहले भी काफी बात हुई है, और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई कितनी प्रभावी और किस हद तक होती है।
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- स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों के रवैये को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों का दिखावा रवैया अब उन्हें खलने लगा है, क्योंकि स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई भी केवल दिखावा मात्र है।1
- नौतपा के दूसरे दिन आज भी दंदरौआ सरकार पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। जानकारी के अनुसार, शाम आठ बजे तक भी हजारों की संख्या में भक्तगण दर्शन कर रहे थे।1
- दतिया जिले के इंदरगढ़ में आग की भीषण लपटें देखी जा रही हैं। यह जानकारी जिला ब्यूरो चीफ संजीव रिछारिया की रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है।1
- जिला चिकित्सालय भिंड में 25 मई को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन कार्यक्रम के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के दौरान कुल 87 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिन्हें आवश्यक उपचार और परामर्श प्रदान किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यह अभियान प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन दिवस' के रूप में संचालित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनका समय पर उपचार और परामर्श सुनिश्चित करना तथा सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था करना है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लक्ष्य के साथ, स्वास्थ्य विभाग निजी चिकित्सकों से भी सहयोग का आग्रह कर रहा है। इसी क्रम में, इस बार निजी क्षेत्र से वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशु मिश्रा की सेवाएं ली गईं, जिससे कई गर्भवती महिलाओं को लाभ मिला। विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि ऐसे नियमित अभियानों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं समय पर मिल रही हैं, जिससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल रहा है।1
- ओडिशा के सुबूकपुर स्थित एक आयरन फैक्ट्री में मजदूरों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री का मालिक प्रशासन के साथ मिलीभगत कर मनमानी कर रहा है, जिसके कारण मजदूरों का शोषण जारी है।1
- जालौन जिले के माधौगढ़ में ठेका नंबर-1 कानून का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है, जहाँ लोग खुलेआम शराब खरीदकर वहीं खड़े होकर और बैठकर पी रहे हैं। माधौगढ़ थाना महज चंद कदमों की दूरी पर है, इसके बावजूद खुलेआम शराबखोरी जारी है, जिससे प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वायरल वीडियो ने इस व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिससे कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। बजाज एजेंसी के बगल स्थित यह ठेका अब एक "ओपन बार" बन गया है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आबकारी नियमों के अनुसार, ठेके पर शराब की बिक्री की अनुमति है, लेकिन वहीं खड़े होकर या बैठकर शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ठेके के आसपास होटल या बैठकर शराब पीने की अनुमति नहीं होने के बावजूद, यहाँ खुली महफिल चल रही है, जिससे स्थानीय लोग खासे नाराज हैं। इस खुलेआम शराबखोरी का गलत असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, क्योंकि कोचिंग छात्र और मंदिर जाने वाली महिलाएं भी ठेके के सामने से ही गुजरती हैं। स्थानीय जनता का कहना है कि माधौगढ़ नगर का माहौल शराबियों द्वारा बिगाड़ा जा रहा है और अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो अराजकता बढ़ेगी। लोग सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन की सख्ती केवल कागजों तक ही सीमित क्यों है और जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा।1
- मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) में NH 44 डबरा-ग्वालियर रोड पर टेकनपुर के पास एक भीषण कार एक्सीडेंट हुआ है। यह हादसा कैमरे में कैद हो गया, जिसमें कार इतनी भयानक तरीके से दुर्घटनाग्रस्त हुई कि वह लगभग 40 मीटर तक घिसटती चली गई। इस भयावह मंजर को देखने वालों की रूह कांप उठी, और अब इस कार एक्सीडेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।1
- श्योपुर जिला कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब अपनी बात न सुनी जाने से नाराज़ एक युवक ने ज़हरीला पदार्थ खाने का दावा किया। युवक ने आरोप लगाया कि उसके परिवार वालों ने उसकी दुकान और सामान पर कब्ज़ा कर लिया है। उसने बताया कि इस मामले में वह तीन से चार जनसुनवाई में आवेदन दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। युवक ने यह भी कहा कि उसने कोतवाली थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, पर वहाँ से भी उसे कोई राहत नहीं मिली। इन सब से परेशान होकर युवक ने यह कदम उठाने का दावा किया, जिसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुनवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1