ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की नई दिल्ली में हालिया कार्यकारिणी बैठक में देश और मुस्लिम समुदाय की वर्तमान स्थिति का विस्तार से जायज़ा लिया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बोर्ड ने भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती भीड़ हिंसा (लिंचिंग), मस्जिदों और मदरसों पर ध्वंसात्मक कार्रवाइयों, घरों और बस्तियों पर बुलडोज़र कार्रवाई, वंदे मातरम् को अनिवार्य करने की कोशिशों, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रगति और कमाल मौला/भोजशाला मस्जिद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। कार्यकारिणी ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों की जान-माल, इज़्ज़त-आबरू, मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, पर्सनल लॉ, मौलिक अधिकार, यहाँ तक कि उनका ईमान और आस्था भी निरंतर हमलों की ज़द में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में नफ़रत, पक्षपात और सांप्रदायिक तनाव का वातावरण योजनाबद्ध ढंग से तैयार किया जा रहा है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और सरकार के ज़िम्मेदार लोग भी शामिल हैं, जबकि घृणा फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं होती। बोर्ड ने धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की 'आपराधिक चुप्पी' पर भी खेद व्यक्त किया, यह मानते हुए कि मुसलमान उनके लिए केवल एक वोट बैंक बन गए हैं। कार्यकारिणी ने मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर एक व्यापक दस्तावेज़ तैयार कर प्रकाशित करने का निर्णय लिया, ताकि देश के जागरूक, न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले वर्गों के ज़मीर को झकझोरा जा सके। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि दूसरे सबसे बड़े समुदाय के अधिकारों का हनन केवल एक वर्ग की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव देश की लोकतांत्रिक संरचना, सामाजिक सौहार्द और विकास प्रक्रिया पर पड़ता है, जो पूरे देश का नुकसान है। कमाल मौला मस्जिद/भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक साक्ष्यों, राजस्व अभिलेखों, औपनिवेशिक काल के सरकारी दस्तावेज़ों और सदियों पुरानी मुस्लिम इबादत की परंपरा के साथ-साथ पूजा स्थलों से संबंधित अधिनियम, 1991 (Places of Worship Act, 1991) की भावना के भी विरुद्ध बताया गया। बोर्ड ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के मस्जिद कमेटी के कदम का स्वागत करते हुए, उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया। वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने की कोशिशों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के विरुद्ध बताते हुए, बोर्ड ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार संसद के माध्यम से इसे अनिवार्य करती है, तो वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के निर्णय को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) फैसले के विरुद्ध बताते हुए, इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। बोर्ड ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश का स्वागत किया, जिसने मदरसों में वंदे मातरम् गाने को अनिवार्य करने वाली सरकारी अधिसूचना पर रोक लगा दी। कार्यकारिणी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वंदे मातरम् एक शिर्किया गीत है, जिसके कुछ अंश मुसलमानों के तौहीद के अकीदे के विरुद्ध हैं, इसलिए मुसलमानों के लिए इसका पाठ करना शरीअत की दृष्टि से उचित नहीं है, और मुसलमानों से सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपने ईमान और अकीदे से समझौता न करने की अपील की गई। बोर्ड ने भाजपा शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नाम पर जारी विधायी प्रयासों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की, खासकर उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इसकी तैयारी पर। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि UCC एक अनिवार्य संवैधानिक आदेश नहीं है, बल्कि संविधान के राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल एक गैर-बाध्यकारी मार्गदर्शक सिद्धांत है। इसे जबरन लागू करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना के खिलाफ है। बोर्ड ने घोषणा की कि जिस प्रकार उत्तराखंड सरकार के UCC कानून को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, उसी प्रकार अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंत में, कार्यकारिणी ने यह भी तय किया कि मुसलमानों को सामाजिक-राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने, संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन, नफ़रत और दुश्मनी के प्रसार, सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने, मुसलमानों की जान-माल, इज़्ज़त-आबरू पर हमलों और मस्जिदों-मदरसों के ध्वंस के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के न्यायप्रिय, लोकतंत्र-समर्थक और अमन-पसंद तबकों को साथ लेकर एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा, जिसके लिए एक एक्शन कमेटी का गठन किया जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की और कार्यवाही का संचालन बोर्ड के महासचिव मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी ने किया। बैठक में देश भर से कार्यकारिणी के कई सदस्य शामिल हुए, जिनमें उपाध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी, जनाब सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, मौलाना असगर इमाम मेहदी, डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास, जनाब यूसुफ हातीम मुच्छाला, जनाब एम. आर. शमशाद, एडवोकेट जलीसा सुल्ताना और बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी प्रमुख थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस को मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी और डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने संबोधित किया।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की नई दिल्ली में हालिया कार्यकारिणी बैठक में देश और मुस्लिम समुदाय की वर्तमान स्थिति का विस्तार से जायज़ा लिया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बोर्ड ने भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती भीड़ हिंसा (लिंचिंग), मस्जिदों और मदरसों पर ध्वंसात्मक कार्रवाइयों, घरों और बस्तियों पर बुलडोज़र कार्रवाई, वंदे मातरम् को अनिवार्य करने की कोशिशों, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रगति और कमाल मौला/भोजशाला मस्जिद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। कार्यकारिणी ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों की जान-माल, इज़्ज़त-आबरू, मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, पर्सनल लॉ, मौलिक अधिकार, यहाँ तक कि उनका ईमान और आस्था भी निरंतर हमलों की ज़द में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में नफ़रत, पक्षपात और सांप्रदायिक तनाव का वातावरण योजनाबद्ध ढंग से तैयार किया जा रहा है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और सरकार के ज़िम्मेदार लोग भी शामिल हैं, जबकि घृणा फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं होती। बोर्ड ने धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की 'आपराधिक चुप्पी' पर भी खेद व्यक्त किया, यह मानते हुए कि मुसलमान उनके लिए केवल एक वोट बैंक बन गए हैं। कार्यकारिणी ने मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर एक व्यापक दस्तावेज़ तैयार कर प्रकाशित करने का निर्णय लिया, ताकि देश के जागरूक, न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले वर्गों के ज़मीर को झकझोरा जा सके। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि दूसरे सबसे बड़े समुदाय के अधिकारों का हनन केवल एक वर्ग की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव देश की लोकतांत्रिक संरचना, सामाजिक सौहार्द और विकास प्रक्रिया पर पड़ता है, जो पूरे देश का नुकसान है। कमाल मौला मस्जिद/भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक साक्ष्यों, राजस्व अभिलेखों, औपनिवेशिक काल के सरकारी दस्तावेज़ों और सदियों पुरानी मुस्लिम इबादत की परंपरा के साथ-साथ पूजा स्थलों से संबंधित अधिनियम, 1991 (Places of Worship Act, 1991) की भावना के भी विरुद्ध बताया गया। बोर्ड ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के मस्जिद कमेटी के कदम का स्वागत करते हुए, उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया। वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने की कोशिशों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के विरुद्ध बताते हुए, बोर्ड ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार संसद के माध्यम से इसे अनिवार्य करती है, तो वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के निर्णय को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) फैसले के विरुद्ध बताते हुए, इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। बोर्ड ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश का स्वागत किया, जिसने मदरसों में वंदे मातरम् गाने को अनिवार्य करने वाली सरकारी अधिसूचना पर रोक लगा दी। कार्यकारिणी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वंदे मातरम् एक शिर्किया गीत है, जिसके कुछ अंश मुसलमानों के तौहीद के अकीदे के विरुद्ध हैं, इसलिए मुसलमानों के लिए इसका पाठ करना शरीअत की दृष्टि से उचित नहीं है, और मुसलमानों से सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपने ईमान और अकीदे से समझौता न करने की अपील की गई। बोर्ड ने भाजपा शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नाम पर जारी विधायी प्रयासों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की, खासकर उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इसकी तैयारी पर। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि UCC एक अनिवार्य संवैधानिक आदेश नहीं है, बल्कि संविधान के राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल एक गैर-बाध्यकारी मार्गदर्शक सिद्धांत है। इसे जबरन लागू करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना के खिलाफ है। बोर्ड ने घोषणा की कि जिस प्रकार उत्तराखंड सरकार के UCC कानून को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, उसी प्रकार अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंत में, कार्यकारिणी ने यह भी तय किया कि मुसलमानों को सामाजिक-राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने, संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन, नफ़रत और दुश्मनी के प्रसार, सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने, मुसलमानों की जान-माल, इज़्ज़त-आबरू पर हमलों और मस्जिदों-मदरसों के ध्वंस के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के न्यायप्रिय, लोकतंत्र-समर्थक और अमन-पसंद तबकों को साथ लेकर एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा, जिसके लिए एक एक्शन कमेटी का गठन किया जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की और कार्यवाही का संचालन बोर्ड के महासचिव मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी ने किया। बैठक में देश भर से कार्यकारिणी के कई सदस्य शामिल हुए, जिनमें उपाध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी, जनाब सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, मौलाना असगर इमाम मेहदी, डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास, जनाब यूसुफ हातीम मुच्छाला, जनाब एम. आर. शमशाद, एडवोकेट जलीसा सुल्ताना और बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी प्रमुख थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस को मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी और डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने संबोधित किया।
- Gangapur ki Aabajगंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान🤝9 hrs ago
- जनपद फिरोजाबाद को आज ₹658 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है। इन परियोजनाओं में टूण्डला के लिए ₹452 करोड़ और शिकोहाबाद के लिए ₹206 करोड़ की लागत वाली परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, उसाईनी पर बने फ्लैटों की चाबियां भी लाभार्थियों को सौंपकर उनका आवंटन किया गया।1
- जिला फिरोजाबाद के टुंडला में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान सपा पार्टी पर तीखे प्रहार किए।1
- थाना एकता क्षेत्र से 16 दिन पहले लापता हुई ममता कुशवाह को आखिरकार बरामद कर लिया गया है। इसके बावजूद, परिवार एकता थाना पुलिस के रवैये से आक्रोशित है और आरोप लगा रहा है कि उन्हें अब भी न्याय नहीं मिल रहा है। युवती के पिता राजवीर सिंह के अनुसार, बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपियों पर समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि बेटी के लापता होने के दौरान घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और लगभग 50-55 हजार रुपये नकद भी गायब हो गए। परिजनों ने दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज में युवती सामान ले जाते हुए दिखाई दे रही थी, लेकिन पुलिस ने इस महत्वपूर्ण पहलू को गंभीरता से नहीं लिया। परिवार ने बताया कि युवती का पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार चल रहा था, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई थी। युवती की बरामदगी के बाद भी परिजनों को घंटों थाने में बैठाए रखने और उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी न देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवार का कहना है कि न तो गायब हुए जेवरात और नकदी बरामद हुई है, और न ही पूरे मामले का संतोषजनक खुलासा किया गया है। इन सब को लेकर परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच, गायब हुए जेवरात व नकदी की बरामदगी और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। युवती की वापसी के बावजूद, गायब हुए जेवरात, नामजद आरोपियों पर कार्रवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।1
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) इलाके में आज, 22 जून 2026 को, एक तीन मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में भीषण अग्निकांड हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 युवाओं की मौत की पुष्टि हुई है, जिनकी उम्र 15 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इस इमारत में एक कोचिंग सेंटर, गेमिंग ज़ोन/गेमिंग सॉफ्टवेयर ऑफिस और भूतल पर एक पेट शॉप संचालित हो रही थी। आग इतनी भयानक थी कि जान बचाने के लिए कुछ छात्रों को खिड़कियों से नीचे कूदना पड़ा। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, जो भूतल से शुरू होकर तेजी से ऊपर की मंजिलों में फैल गई। धुएं के कारण दम घुटने और खिड़की से कूदने की वजह से कई छात्र घायल हुए हैं, जिन्हें KGMU सहित नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बचाव अभियान में दमकल विभाग की 14 से अधिक गाड़ियां और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म शामिल थे, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य किया। दीवारों को तोड़कर और रस्सियों के सहारे कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा रद्द कर दिया और तुरंत लखनऊ में घटनास्थल व अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को ₹2-2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। घटना के बाद उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने इस हादसे की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- फतेहाबाद थाना क्षेत्र के मोहल्ला पठान निवासी दानिश खान ऑनलाइन साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, जहाँ उनके बैंक खाते से 98,999 रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई। दानिश खान, जो यूसुफ खान के पुत्र हैं, ने फतेहाबाद पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनका बैंक ऑफ इंडिया, शाखा फतेहाबाद में खाता संख्या 726510610000088 संचालित है। 22 जून 2026 को सुबह करीब 11:41 बजे उन्हें अपने मोबाइल पर खाते से धनराशि निकलने के संदेश मिले। जाँच करने पर पता चला कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा दो अलग-अलग यूपीआई ट्रांजेक्शन के माध्यम से उनके खाते से ₹49,999 और ₹49,000 की राशि निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। इस घटना का पता चलते ही पीड़ित दानिश खान ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही, उन्होंने संबंधित बैंक को भी सूचित कर अपने खाते को सुरक्षित कराने का प्रयास किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या कोई अन्य गोपनीय विवरण साझा नहीं किया था, जिससे यह एक गंभीर साइबर अपराध का मामला प्रतीत होता है। फतेहाबाद थाना पुलिस ने दानिश खान का प्रार्थना पत्र प्राप्त कर इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस, साइबर सेल की सहायता से, इन ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी जुटाने और उन खातों का पता लगाने में जुटी हुई है जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई है। पीड़ित दानिश खान ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी निकाली गई धनराशि को वापस दिलाने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में एक युवती को लेकर थाने में जोरदार हंगामा हुआ। युवती के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके चलते थाने में तनाव का माहौल बन गया।2
- फिरोजाबाद जिले के टुंडला में आयोजित एक सभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सपा की तीखी आलोचना की।1
- फतेहाबाद के गंगोरा गांव में सोमवार को एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची, शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका की पहचान भारती पुत्री रामेश्वर निवासी नारीपुरा, भीमनगर, थाना शाहगंज, आगरा के रूप में हुई है, जिसकी शादी वर्ष 2020 में गंगोरा निवासी अवधेश के साथ हुई थी। जानकारी मिलने पर मृतका के मायके पक्ष के लोग भी गांव पहुँच गए और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। मृतका के पिता रामेश्वर ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी का पति अवधेश आए दिन उसके साथ मारपीट करता था और भारती ने कई बार उन्हें उत्पीड़न की जानकारी दी थी। उन्होंने अपनी बेटी की मौत को सामान्य मानने से इनकार करते हुए मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। बताया गया है कि भारती के दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें बड़ा पुत्र दिव्यांश लगभग तीन वर्ष का और छोटा पुत्र हिमांशु मात्र छह माह का है। परिजनों के अनुसार, दो दिन पहले ही छह माह के हिमांशु का मुंडन कराया गया था, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था। ऐसी अचानक हुई घटना से पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस के अनुसार, घटना के समय मृतका का पति बाजार गया हुआ था। थाना फतेहाबाद के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका है और रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के सही कारणों का पता चल पाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।1