जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं: पीएम मोदी *अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा है। अगस्त 01, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि समाज में व्याप्त आक्रोश को वह समझते हैं, लेकिन यह समय गुमराह बच्चों को अपनाने और उनका मार्गदर्शन करने का है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती बच्चों ने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है और गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की भी चिंता है कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे सांस्कृतिक दृष्टि से चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि लोगों से गलतियां हो जाती हैं और बचपन में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे बच्चों को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दांत गलती से जीभ को काट ले, तो दांत नहीं तोड़ा जाता क्योंकि दोनों अपने ही हैं। उन्होंने कहा कि उसी तरह बच्चे भी समाज के अपने हैं और उन्हें छोड़ना नहीं, बल्कि संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सजा देने या अदालतों के चक्कर कटवाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज को क्षमा और सुधार के रास्ते पर चलना चाहिए। युवा प्रदर्शनकारियों से प्रधानमंत्री ने देश के विकास में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वे नई बातें सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। आप भी आगे बढ़ें, आप भी उन्नति करें। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।
जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं: पीएम मोदी *अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा है। अगस्त 01, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि समाज में व्याप्त आक्रोश को वह समझते हैं, लेकिन यह समय गुमराह बच्चों को अपनाने और उनका मार्गदर्शन करने का है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती बच्चों ने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है और गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की भी चिंता है कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे सांस्कृतिक दृष्टि से चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि लोगों से गलतियां हो जाती हैं और बचपन में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे बच्चों को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दांत गलती से जीभ को काट ले, तो दांत नहीं तोड़ा जाता क्योंकि दोनों अपने ही हैं। उन्होंने कहा कि उसी तरह बच्चे भी समाज के अपने हैं और उन्हें छोड़ना नहीं, बल्कि संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सजा देने या अदालतों के चक्कर कटवाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज को क्षमा और सुधार के रास्ते पर चलना चाहिए। युवा प्रदर्शनकारियों से प्रधानमंत्री ने देश के विकास में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वे नई बातें सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। आप भी आगे बढ़ें, आप भी उन्नति करें। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।
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- वीडियो-नीरज चोपड़ा(सिल्वर मैडल🥈🇮🇳) राष्ट्रमंडल खेल 2026, ग्लासगो | भारत का शानदार दिन 🥇🥇 जूडो में इतिहास, भारत ने जीते 2 स्वर्ण अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग और हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत को जूडो के पहले स्वर्ण दिलाए 🥈 यामिनी मौर्य और नीरज चोपड़ा को रजत यामिनी मौर्य ने महिला 57 किग्रा जूडो में रजत पदक जीता, वहीं नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर भाला फेंककर रजत पदक अपने नाम किया 🥉 तेजस्विन शंकर और यशवीर सिंह ने दिलाया कांस्य तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य जीतकर इस स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों का भारत का पहला पदक हासिल किया, जबकि यशवीर सिंह ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 85.41 मीटर थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता 🥊 भारतीय मुक्केबाज़ों का दबदबा, सभी 10 फ़ाइनल में भारत के सभी 10 मुक्केबाज़ स्वर्ण पदक मुकाबले में पहुँच गए। इनमें प्रीति पवार, अंकुश पंघाल, जैस्मीन लांबोरिया, अरुंधति चौधरी, जादुमणि सिंह मांडेंगबाम, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, लवलीना बोरगोहेन, सचिन सिवाच और नरेंद्र बेरवाल शामिल हैं 🏃 मिश्रित 4×400 मीटर रिले टीम फ़ाइनल में विशाल टी.के., अंसा बाबू, राजेश रमेश और रशदीप कौर की भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ़ाइनल में जगह बनाई 🌿 लॉन बॉल्स में अजेय भारत भारत की पुरुष युगल टीम ने लगातार चौथी जीत दर्ज कर अपना विजयी अभियान जारी रखा, जबकि नयनमोनी सैकिया ने महिला एकल स्पर्धा में दूसरी जीत हासिल की 🏅 भारत के अब 23 पदक भारत ने अब तक 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 23 पदक जीत लिए हैं और पदक तालिका में लगभग 8वें स्थान पर बना हुआ है1
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