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रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच तीखा सियासी संग्राम देखने को मिला है। इस राजनीतिक टकराव के दौरान सिर्फ नारेबाजी ही नहीं हुई, बल्कि दोनों ओर से जमकर टमाटर, अंडे और पत्थर भी चलाए गए।
Nation24 news
रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच तीखा सियासी संग्राम देखने को मिला है। इस राजनीतिक टकराव के दौरान सिर्फ नारेबाजी ही नहीं हुई, बल्कि दोनों ओर से जमकर टमाटर, अंडे और पत्थर भी चलाए गए।
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- देवघर के बंधा गांव में गोरा जोरिया का पानी जहरीला होने का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास की कीमत अब इंसानों और बेजुबान पशुओं को चुकानी पड़ रही है। औद्योगिक कचरे की वजह से पानी दूषित होने के कारण अब तक हजारों पशुओं की मौत हो चुकी है, जिसे लेकर ग्रामीणों की शिकायतें वर्षों पुरानी हैं। बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी के आसपास पर्यावरण पर उठ रहे ये सवाल केवल एक गांव तक सीमित न होकर पूरे देवघर की चिंता का विषय बन चुके हैं। मामले में गांव की जमीनी हकीकत, ग्रामीणों के आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर इंसानों और बेजुबान पशुओं को इस जहरीले पानी से कब राहत मिलेगी।1
- पेपर लीक, भर्ती विवाद, परीक्षा में देरी, युवाओं का लंबा इंतज़ार और महीनों से वेतन भुगतान न होना—झारखंड की शिक्षा और रोज़गार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। दिल्ली में छात्रों के समर्थन में आवाज़ उठाना अच्छी बात है, लेकिन झारखंड के छात्रों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। लोकतंत्र में जवाबदेही सिर्फ़ विपक्ष की नहीं बल्कि सत्ता की भी होती है, इसलिए सवाल दिल्ली के साथ-साथ रांची में भी पूछे जाएँगे। इस स्थिति को देखते हुए जनता से भी राय माँगी गई है कि उनकी नज़र में झारखंड की शिक्षा और रोज़गार व्यवस्था का सबसे बड़ा मुद्दा क्या है।1
- झारखंड मंत्रालय सभागार में बुधवार को झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के बीच एक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह समझौता झारखंड के प्रतिभावान फिल्मकारों और कलाकारों को नई तकनीक, विश्वस्तरीय सुविधाएं और एक नया राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। राज्य सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल पारंपरिक सिनेमा, बल्कि वर्तमान दौर के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन में भी युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (JFTI) के माध्यम से छुपी हुई प्रतिभाओं को तराशने का काम किया जाएगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राज्य में बनी 'दिल बेचारा', 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी प्रसिद्ध फिल्मों का जिक्र किया, साथ ही धनबाद में अमिताभ बच्चन की फिल्म की शूटिंग और निर्देशक प्रकाश झा की झारखंड से हुई शिक्षा-दीक्षा का उल्लेख किया। डॉ. रामदयाल मुंडा की पंक्ति "जे नाची से बाची" को उद्धृत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संस्था के माध्यम से राज्य के आम लोगों के भीतर छिपे कलाकारों को ढूंढकर निधारा जाएगा। कार्यक्रम में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और SRFTI कोलकाता के कुलपति समीरन दत्ता ने एमओयू के उद्देश्यों पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के विशेष सचिव राजीव लोचन बक्शी, SRFTI के डीन सुकांते मजूमदार, सरला बिरला विश्वविद्यालय के डायरेक्टर जनरल प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक, कुलपति डॉ. सी. जगन्नाथ और विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रो. सी.बी. शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति और विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त बीजू टोप्पो, संथाली शॉर्ट फिल्म 'आंगेन' के लिए सम्मानित रविराज मुर्मू, 'एडपा काना' फिल्म के लिए पुरस्कृत अनुज कुमार और कलाकार निरंजन कुजूर को उनके उत्कृष्ट कला-सफर के लिए सम्मानित भी किया।4
- रामगढ़ में श्रावणी मेले के दौरान हुई आपसी नोंकझोंक के कारण विवाद काफी बढ़ गया। मेले में हुए इस झगड़े के बाद बात आगे बढ़ते हुए जिला प्रशासन तक पहुंच गई है।1
- झारखंड के रामगढ़ में एक स्ट्रीट सिंगर ने भीड़ के साथ मिलकर गाना गाया और अपने सेलिब्रेशन ट्रैक का प्रमोशन किया। इस दौरान लोगों के साथ मिलकर गायकी का आनंद लेते हुए जश्न का माहौल देखने को मिला।1
- रांची में राजनीतिक टकराव की कवरेज के दौरान कई पत्रकार भी हिंसा की चपेट में आ गए और घायल हो गए। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में अफरा-तफरी के माहौल के बीच मीडिया कर्मियों के चोटिल होने और घायल होने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर निष्पक्ष कवरेज कर रहे पत्रकार का क्या कसूर था।1