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जिला अस्पताल में लगे वाटर कूलर बन गए हैं शोपीस एक दिन में 550 से 1050 तक आ रहे हैं मरीज, दो वाटर कूलर होने के बाद भी पानी दुकान से खरीदकर पीने को मजबूर जिला अस्पताल में लगे वाटर कूलर बन गए हैं शोपीस एक दिन में 550 से 1050 तक आ रहे हैं मरीज, दो वाटर कूलर होने के बाद भी पानी दुकान से खरीदकर पीने को मजबूर

2 hrs ago
user_जफरूदीन गूमल
जफरूदीन गूमल
Voice of people फिरोजपुर झिरका, नूंह, हरियाणा•
2 hrs ago
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जिला अस्पताल में लगे वाटर कूलर बन गए हैं शोपीस एक दिन में 550 से 1050 तक आ रहे हैं मरीज, दो वाटर कूलर होने के बाद भी पानी दुकान से खरीदकर पीने को मजबूर जिला अस्पताल में लगे वाटर कूलर बन गए हैं शोपीस एक दिन में 550 से 1050 तक आ रहे हैं मरीज, दो वाटर कूलर होने के बाद भी पानी दुकान से खरीदकर पीने को मजबूर

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  • भिवाड़ी: चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित Balkrishna Industries Limited (BKT) में श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी
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    भिवाड़ी: चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित Balkrishna Industries Limited (BKT) में श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    52 min ago
  • Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    1
    Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    user_संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    संवाददाता दैनिक कंचन केसरी
    पत्रकार खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by पत्रकार
    1
    Post by पत्रकार
    user_पत्रकार
    पत्रकार
    मंडावर, अलवर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • पुलिस प्रवक्ता कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक पलवल *श्री नीतीश अग्रवाल, IPS* के निर्देशानुसार जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने व यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यातायात थाना पलवल के प्रभारी निरीक्षक जगबीर सिंह व उनकी टीम द्वारा आज DAV पुलिस पब्लिक स्कूल, पुलिस लाइन, पलवल में विशाल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। *कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:* 1. *ट्रैफिक नियमों की पाठशाला:* निरीक्षक जगबीर सिंह ने बच्चों को अत्यंत सरल भाषा में ट्रैफिक लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, रोड साइन, हेलमेट व सीट बेल्ट* के महत्व के बारे में बताया। नाबालिग द्वारा वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने व मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने के खतरों को उदाहरण सहित समझाया गया। 2. *रोड सेफ्टी डेमो:* यातायात टीम ने प्रोजेक्टर वीडियो डेमो के माध्यम से सड़क पार करने का सही तरीका, साइकिल चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियां के टिप्स दिए। 3. *स्टूडेंट पुलिस कैडेट (SPC) में नामांकन:* कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा स्टूडेंट पुलिस कैडेट योजना के तहत 23 इच्छुक छात्र-छात्राओं का नामांकन। निरीक्षक जगबीर सिंह ने बच्चों को SPC की भूमिका, कर्तव्यों व फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि SPC कैडेट न केवल खुद नियमों का पालन करेंगे, बल्कि अपने स्कूल, परिवार व मोहल्ले में ‘रोड सेफ्टी एम्बेसडर’ बनकर दूसरों को भी जागरूक करेंगे। 4. *शपथ व संकल्प:* कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों व स्टाफ को यातायात नियमों का पालन करने, दूसरों को करवाने व सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान थाना यातायात पलवल प्रभारी निरीक्षक जगबीर सिंह ने कहा कि “सड़क दुर्घटना में एक गलती पूरे परिवार की खुशियां छीन लेती है। बच्चे हमारे सबसे अच्छे दूत हैं। ये आज जो सीखेंगे, कल अपने माता-पिता को भी टोकेंगे कि ‘पापा हेलमेट लगाओ, मम्मी सीट बेल्ट बांधो’। स्टूडेंट पुलिस कैडेट योजना का उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम व कानून का सम्मान पैदा करना है। DAV स्कूल के बच्चों का उत्साह देखकर लगा कि पलवल का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।” *स्कूल प्रबंधन का सहयोग:* DAV स्कूल प्रिंसिपल श्रीमती सीमा राजवंशी एवं स्कूल प्रबंधन ने यातायात पुलिस की इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने का आग्रह किया। *पुलिस अधीक्षक श्री नीतीश अग्रवाल, IPS का कथन:* “सभी को सड़क सुरक्षा हेतु यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। ट्रैफिक सेंस बचपन से ही आना चाहिए।अभिभावकों से अपील है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन न दें और खुद भी नियमों का पालन कर बच्चों के सामने उदाहरण पेश करें।”
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    पुलिस प्रवक्ता कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक पलवल *श्री नीतीश अग्रवाल, IPS* के निर्देशानुसार जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने व यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यातायात थाना पलवल के प्रभारी निरीक्षक जगबीर सिंह व उनकी टीम द्वारा आज DAV पुलिस पब्लिक स्कूल, पुलिस लाइन, पलवल में विशाल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
*कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:*  
1.  *ट्रैफिक नियमों की पाठशाला:* निरीक्षक जगबीर सिंह ने बच्चों को अत्यंत सरल भाषा में ट्रैफिक लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, रोड साइन, हेलमेट व सीट बेल्ट* के महत्व के बारे में बताया। नाबालिग द्वारा वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने व मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने के खतरों को उदाहरण सहित समझाया गया।
2.  *रोड सेफ्टी डेमो:* यातायात टीम ने प्रोजेक्टर वीडियो डेमो के माध्यम से सड़क पार करने का सही तरीका, साइकिल चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियां के टिप्स दिए।
3.  *स्टूडेंट पुलिस कैडेट (SPC) में नामांकन:* कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा स्टूडेंट पुलिस कैडेट योजना के तहत 23 इच्छुक छात्र-छात्राओं का नामांकन। निरीक्षक जगबीर सिंह ने बच्चों को SPC की भूमिका, कर्तव्यों व फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि SPC कैडेट न केवल खुद नियमों का पालन करेंगे, बल्कि अपने स्कूल, परिवार व मोहल्ले में ‘रोड सेफ्टी एम्बेसडर’ बनकर दूसरों को भी जागरूक करेंगे।
4.  *शपथ व संकल्प:* कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों व स्टाफ को यातायात नियमों का पालन करने, दूसरों को करवाने व सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने की शपथ दिलाई गई।
इस दौरान थाना यातायात पलवल प्रभारी निरीक्षक जगबीर सिंह ने कहा कि “सड़क दुर्घटना में एक गलती पूरे परिवार की खुशियां छीन लेती है। बच्चे हमारे सबसे अच्छे दूत हैं। ये आज जो सीखेंगे, कल अपने माता-पिता को भी टोकेंगे कि ‘पापा हेलमेट लगाओ, मम्मी सीट बेल्ट बांधो’। स्टूडेंट पुलिस कैडेट योजना का उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम व कानून का सम्मान पैदा करना है। DAV स्कूल के बच्चों का उत्साह देखकर लगा कि पलवल का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।”
*स्कूल प्रबंधन का सहयोग:* DAV स्कूल प्रिंसिपल श्रीमती सीमा राजवंशी एवं स्कूल प्रबंधन ने यातायात पुलिस की इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने का आग्रह किया।
*पुलिस अधीक्षक श्री नीतीश अग्रवाल, IPS का कथन:*  
“सभी को सड़क सुरक्षा हेतु यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। ट्रैफिक सेंस बचपन से ही आना चाहिए।अभिभावकों से अपील है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वाहन न दें और खुद भी नियमों का पालन कर बच्चों के सामने उदाहरण पेश करें।”
    user_माथुर पत्रकार
    माथुर पत्रकार
    Voice of people हथीन, पलवल, हरियाणा•
    18 hrs ago
  • उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं। मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते? जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?” डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?” उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! *इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं।* एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।” मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया— *शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।* उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : *शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है।* काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना— _*“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”*_ जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं— “तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।” यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं। मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है। — *रूस में अध्ययनरत एक अज्ञात भारतीय छात्र द्वारा लिखित*
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    उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं।
मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते?
जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?”
डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?”
उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! *इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं।* एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।”
मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया— *शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।*
उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : *शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है।* काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना—
_*“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”*_
जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं—
“तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।”
यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं।
मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है।
— *रूस में अध्ययनरत एक अज्ञात भारतीय छात्र द्वारा लिखित*
    user_महेंद्र सिंह
    महेंद्र सिंह
    Local News Reporter अलवर, अलवर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित एक मेगा पेट्रोकेमिकल प्लांट है! जिसे 72000 करोड़ की लागत से यह कंपलेक्स बनाया गया था! इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2026 को नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना था !उद्घाटन से एक दिन पहले इसमें भीषण आग लग गया 😢😢
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    पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित एक मेगा पेट्रोकेमिकल प्लांट है! जिसे 72000 करोड़ की लागत से यह कंपलेक्स बनाया गया था! इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2026 को नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना था !उद्घाटन से एक दिन पहले इसमें भीषण आग लग गया 😢😢
    user_Voice of Labour
    Voice of Labour
    Alwar, Rajasthan•
    17 hrs ago
  • Post by Naseem Akram Akram
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    Post by Naseem Akram Akram
    user_Naseem Akram Akram
    Naseem Akram Akram
    Grain Distributor तावडू, नूंह, हरियाणा•
    22 hrs ago
  • खुशखेड़ा में भगवती प्रोडक्ट्स कंपनी के बाहर भीषण गर्मी में वेतन बढ़ोतरी को लेकर धरना दे श्रमिकों में से 2 महिला श्रमिक बेहोश, अस्पताल में कराया भर्ती
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    खुशखेड़ा में भगवती प्रोडक्ट्स कंपनी के बाहर भीषण गर्मी में वेतन बढ़ोतरी को लेकर धरना दे श्रमिकों में से 2 महिला श्रमिक बेहोश, अस्पताल में कराया भर्ती
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    18 hrs ago
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