ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक शहडोल, 12 सितंबर 2026 पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशन में आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को यातायात थाना परिसर में ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ऑटो संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ऑटो चालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों को यातायात नियमों, यात्रियों की सुरक्षा एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया। यातायात पुलिस द्वारा निर्देशित किया गया कि - सभी ऑटो चालक थाना यातायात में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराकर थाना यातायात द्वारा जारी ऑटो क्रमांक प्राप्त करेंगे। शहरी एवं ग्रामीण ऑटो के लिए पृथक-पृथक मोनो जारी किया जावेगा। ऑटो चालकों हेतु पहचान पत्र जारी किया जाएगा। थाना यातायात में ऑटो का पंजीयन अनिवार्य है, अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही शहर में निर्धारित स्थानों पर ऑटो पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। ऑटो चालकों को निर्देशित किया गया कि ऑटो के सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूर्ण एवं वैध रखें तथा यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित नियमों के अनुरूप वाहन संचालित करने एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। ऑटो चालकों को यह भी निर्देश दिए गए कि किसी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित पुलिस अधिकारी अथवा थाना को सूचना दें, जिससे समय रहते आवश्यक पुलिस कार्रवाई की जा सके। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों द्वारा दस्तावेज़ संबंधी समस्याओं से अवगत कराने पर यातायात पुलिस द्वारा बताया गया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से चर्चा कर आवश्यकतानुसार शिविर आयोजित कराने का प्रयास किया जाएगा। अंत में यातायात पुलिस द्वारा ऑटो संघ एवं चालकों से यातायात नियमों का पालन करते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई।
ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, यातायात नियमों एवं यात्रियों की सुरक्षा के प्रति किया जागरूक शहडोल, 12 सितंबर 2026 पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशन में आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को यातायात थाना परिसर में ऑटो चालकों के लिए यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ऑटो संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ऑटो चालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों को यातायात नियमों, यात्रियों की सुरक्षा एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया। यातायात पुलिस द्वारा निर्देशित किया गया कि - सभी ऑटो चालक थाना यातायात में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराकर थाना यातायात द्वारा
जारी ऑटो क्रमांक प्राप्त करेंगे। शहरी एवं ग्रामीण ऑटो के लिए पृथक-पृथक मोनो जारी किया जावेगा। ऑटो चालकों हेतु पहचान पत्र जारी किया जाएगा। थाना यातायात में ऑटो का पंजीयन अनिवार्य है, अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही शहर में निर्धारित स्थानों पर ऑटो पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। ऑटो चालकों को निर्देशित किया गया कि ऑटो के सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूर्ण एवं वैध रखें तथा यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित नियमों के अनुरूप वाहन संचालित करने एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। ऑटो चालकों को यह भी निर्देश दिए गए कि
किसी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित पुलिस अधिकारी अथवा थाना को सूचना दें, जिससे समय रहते आवश्यक पुलिस कार्रवाई की जा सके। कार्यक्रम के दौरान ऑटो चालकों द्वारा दस्तावेज़ संबंधी समस्याओं से अवगत कराने पर यातायात पुलिस द्वारा बताया गया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से चर्चा कर आवश्यकतानुसार शिविर आयोजित कराने का प्रयास किया जाएगा। अंत में यातायात पुलिस द्वारा ऑटो संघ एवं चालकों से यातायात नियमों का पालन करते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई।
- पशु तस्करों एवं अवैध पशु परिवहन के विरुद्ध कोतमा पुलिस द्वारा की गई कारवाही 03 पिकअप वाहनों से 21 नग मवेशी बरामद,कुल ₹40.50 लाख का माल-मशरूका जप्त अनूपपूर/ कोतमा : - दिनांक 10.09.2026 को थाना प्रभारी कोतमा को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि तीन पिकअप वाहन जिनमें मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर एवं क्रूरतापूर्वक बांधकर कटने हेतु छत्तीसगढ़ से केवाई रपटा मार्ग कोतमा होते हुए ले जाया जा रहा है। सूचना से पुलिस अधीक्षक अनूपपुर को अवगत कराया गया। उनके निर्देशन पर पर थाना प्रभारी कोतमा द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया ।थाना कोतमा पुलिस टीम द्वारा केवाई रपटा पुलिया के पास नाकाबंदी की गई।नाकाबंदी के दौरान कुछ समय बाद तीन पिकअप वाहन तेज गति से आते दिखाई दिए। दूर से ही वाहन चालकों द्वारा पुलिस की नाकाबंदी देखकर पुलिस द्वारा रुकने का संकेत देने पर चालकों ने वाहन को थोड़ी दूर पर खड़े करकर तीनों वाहन चालक वाहन छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।मौके पर पुलिस टीम द्वारा तीनों पिकअप वाहनों की जांच पड़ताल की गई । एक पिकअप में 07 मवेशी, दूसरी पिकअप में 07मवेशी, तथा तीसरी पिकअप में 07 मवेशी पाए गए। कुल 21 मवेशी जिनमें 13 नग भैंस (पड़ा) एवं 8 नग भैंसी सभी मवेशियों को रस्सियों से बांधकर अत्यंत क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंसकर भरा गया था तथा उनके लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। जप्त माल-मशरूका पुलिस द्वारा कुल 21 नग मवेशी एवं एक पिकअप क्रमांक MP65ZG2280,दूसरी पिकअप बिना नो. एवं तीसरी पिकअप MP65Z4094 कुल 3 वाहन जप्त किए गए। जप्त माल-मशरूका की कुल अनुमानित कीमत ₹40,50,000/- है। जप्त सामग्री| अनुमानित कीमत 03 पिकअप वाहन| ₹30,00,000/- 21 मवेशी| ₹10,50,000/- कुल| ₹40,50,000/-। प्रकरण में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम तथा मध्य प्रदेश कृषि पशु परिरक्षण अधिनियमकी की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर फरार वाहन चालकों एवं पशु तस्करों की तलाश की जा रही है तथा मामले की विवेचना जारी है। पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका उक्त कार्यवाही पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूपपुर एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) कोतमा के मार्गदर्शन में की गई। कार्यवाही में थाना प्रभारी कोतमा रत्नांबर शुक्ल , लाल जी श्रीवास्तव ,प्रधान आरक्षक संजीव त्रिपाठी ,प्रधान आरक्षक ऋषि पासी ,एवं चालक आरक्षक अनिल मरावी की सराहनीय भूमिका रही।1
- *💥स्वास्थ्य मंत्री जी, बयान नहीं… आदेश चाहिए!* आप सत्ता में हैं, अधिकार आपके पास है। यदि सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति है, तो फिर सवाल यह है कि पिछले 5 वर्षों में 15 से अधिक निजी क्लीनिक शहडोल जिले में कैसे अस्तित्व में आ गए...? डॉक्टर कॉलोनी में गायत्री मंदिर से लेकर आसपास के 500 मीटर के दायरे में इतने सारे क्लिनिक क्या प्राइवेट चिकित्सकों के खुले हैं...? जिस अस्पताल कॉलोनी में सरकारी डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था है, वहीं सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ क्यों दिखाई देती है? क्या सरकारी आवास निजी क्लीनिक चलाने की जगह बन गए हैं...? *मंत्री जी,भाषणों और बयानों से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी।* एक बार स्पष्ट आदेश जारी करके सख्ती से पालन कराइए—फिर देखिए कि व्यवस्था खुद इलाज मांगती है या मरीजों को ही इलाज के लिए भटकना पड़ता है। *जनता जवाब चाहती है—बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए।* *💥स्वास्थ्य मंत्री जी, बयान नहीं… आदेश चाहिए!* आप सत्ता में हैं, अधिकार आपके पास है। यदि सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पतालों में निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति है, तो फिर सवाल यह है कि पिछले 5 वर्षों में 15 से अधिक निजी क्लीनिक शहडोल जिले में कैसे अस्तित्व में आ गए...? डॉक्टर कॉलोनी में गायत्री मंदिर से लेकर आसपास के 500 मीटर के दायरे में इतने सारे क्लिनिक क्या प्राइवेट चिकित्सकों के खुले हैं...? जिस अस्पताल कॉलोनी में सरकारी डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था है, वहीं सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ क्यों दिखाई देती है? क्या सरकारी आवास निजी क्लीनिक चलाने की जगह बन गए हैं...? *मंत्री जी,भाषणों और बयानों से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी।* एक बार स्पष्ट आदेश जारी करके सख्ती से पालन कराइए—फिर देखिए कि व्यवस्था खुद इलाज मांगती है या मरीजों को ही इलाज के लिए भटकना पड़ता है। *जनता जवाब चाहती है—बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए।*1
- चीफ रिपोर्टर योगेश कुमार वर्मन संभाग शहडोल जिला शहडोल मप्र नयाटोला स्कूल में मेरे को बहुत कमियां समझ में आई जिसमें से खाने का व्यवस्था नहीं था वहां बच्चों के लिए कोई व्यवस्था किया गया नहीं था यानी वहां के जो सचिव हैं उनका फोन बंद आ रहा था मैं गया वहां कॉल किया उनको तो पूरी लापरवाही चल रही है वहां समूह वालों की जो सचिव है विजय यादव... उनके द्वारा लापरवाही बढ़ते जा रही है खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हैं शासकीय प्राथमिक विद्यालय नयाटोला. जैतपुर चीफ रिपोर्टर योगेश कुमार वर्मन संभाग शहडोल जिला शहडोल मप्र नयाटोला स्कूल में मेरे को बहुत कमियां समझ में आई जिसमें से खाने का व्यवस्था नहीं था वहां बच्चों के लिए कोई व्यवस्था किया गया नहीं था यानी वहां के जो सचिव हैं उनका फोन बंद आ रहा था मैं गया वहां कॉल किया उनको तो पूरी लापरवाही चल रही है वहां समूह वालों की जो सचिव है विजय यादव... उनके द्वारा लापरवाही बढ़ते जा रही है खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हैं शासकीय प्राथमिक विद्यालय नयाटोला. जैतपुर1
- मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।4
- अवैध उत्खनन खनिज विभाग को शिकायत मिलने के बाद भी नहीं होती करवाई अवैध मुरूम खनन का खेल, पोकलेन से चल रहा था उत्खनन, खनिज विभाग सोया रहा बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन से मुरूम का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा था। खनिज माफिया बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।1
- धनपुरी में बने वाटर पार्क को जल्द से जल्द प्रारंभ कराएं- कलेक्टर === कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने वाटर पार्क की सुविधाओं का लिया जायजा === शहडोल 12 सितम्बर 2026- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल एवं पुलिस अधीक्षक श्री संजय अग्रवाल ने आज धनपुरी में 11 एकड़ भूमि में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित वाटर पार्क का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निर्देश दिए कि धनपुरी वाटर पार्क को यथाशीघ्र प्रारंभ कराया जाए, जिससे नागरिकों को यहां निर्मित जिम, क्लब सहित अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने वाटर पार्क की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने तथा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया गया कि वाटर पार्क में जिम, क्लब, तैराकी, रेस्टोरेंट, मीटिंग हॉल सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं को समाहित किया गया है। वाटर पार्क के प्रारंभ होने से क्षेत्र के नागरिकों को मनोरंजन एवं विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रविंदर कौर, उपाध्यक्ष श्री हनुमान खंडेलवाल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री दीपक मंडावी सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- थाना क्षेत्र के निगरानी एवं गुंडा बदमाशो की कोतमा पुलिस द्वारा कराई गई परेड अनूपपूर/कोतमा - दिनांक 11.09.2026 को आगामी त्यौहार जैसे गणेश चतुर्थी ,नवरात्रि आदि त्योहारों को मद्देनजर रखते हुए आज थाना कोतमा परिसर में थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ल एवं थाना कोतमा पुलिस टीम द्वारा थाना थाना के लिस्टेड निगरानी एवं गुंडा बदमाशो को थाना लाकर उनकी परेड करायी गई एवं उनसे उनके जीवन यापन से सम्बन्धित पूछताछ भी की गई। थाना प्रभारी कोतमा द्वारा इन सभी निगरानी एवं गुंडा बदमाशो को अपराधों से दूर रहने एवं अपना जीवन यापन सही ढंग से करने के बारे में समझाईश दी गई।1
- कलेक्टर ने ब्लैक सुगंधित चावल उत्पादक किसान से किया संवाद ... शहडोल 11 सितंबर 2026: विधायक श्री जयसिंह मरावी एवं कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने जनपद पंचायत बुढार के ग्राम बहगढ़ निवासी किसान श्री सुनील मिश्रा से ब्लैक सुगंधित चावल के उत्पादन के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर श्री जायसवाल ने किसान से चावल के उत्पादन के साथ-साथ मिलिंग एवं पैकिंग की प्रक्रिया की भी जानकारी प्राप्त की। किसान श्री सुनील मिश्रा ने बताया कि वे दो से तीन एकड़ भूमि में जैविक खाद का प्रयोग कर ब्लैक सुगंधित चावल का उत्पादन कर रहे हैं। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री संजय अग्रवाल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री दीपक मांडवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने ब्लैक सुगंधित चावल उत्पादक किसान से किया संवाद ... शहडोल 11 सितंबर 2026: विधायक श्री जयसिंह मरावी एवं कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने जनपद पंचायत बुढार के ग्राम बहगढ़ निवासी किसान श्री सुनील मिश्रा से ब्लैक सुगंधित चावल के उत्पादन के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर श्री जायसवाल ने किसान से चावल के उत्पादन के साथ-साथ मिलिंग एवं पैकिंग की प्रक्रिया की भी जानकारी प्राप्त की। किसान श्री सुनील मिश्रा ने बताया कि वे दो से तीन एकड़ भूमि में जैविक खाद का प्रयोग कर ब्लैक सुगंधित चावल का उत्पादन कर रहे हैं। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री संजय अग्रवाल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री दीपक मांडवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।1
- सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि सागर जैसे हादसे का इंतजार है पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि ये आरोप स्थानीय स्तर के दावों पर आधारित हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही संभव होगी। क्या लग सकता है प्रतिबंध? नियमों के मुताबिक शराब ठेका क्षेत्र में अवैध बिक्री पर जिला आबकारी अधिकारी और कलेक्टर को कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हैं। आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर छापेमारी, जब्ती, जुर्माना और आपराधिक मुकदमे का प्रावधान है। यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो ठेकेदार का लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने का नियम है और संबंधित क्षेत्र में शराब की बिक्री पर अस्थायी या स्थायी प्रतिबंध भी संभव है। सागर कांड के बाद राज्य भर में आबकारी विभाग अलर्ट पर है, ऐसे में उमरिया प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की चुनौती सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की सत्यता की जांच है। पैकारी नेटवर्क अक्सर रात के अंधेरे में और गुप्त ठिकानों से चलता है, जिसे पकड़ना आसान नहीं होता। साथ ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगते रहे हैं। सागर मामले में कांग्रेस ने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिससे शराब माफिया और सत्ता के गठजोड़ की बहस तेज हुई है। उमरिया में भी इसी तरह के संदेहों से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे क्या? अब गेंद उमरिया जिला प्रशासन के पाले में है। ग्रामीणों की मांग है कि बिरसिंहपुर पाली में विशेष छापेमार अभियान चलाया जाए, ठेकेदार के लेन-देन की जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सागर की 28 मौतें इस बात की गवाही हैं कि अवैध शराब पर नरमी कितनी भारी पड़ सकती है। सवाल यह है कि क्या उमरिया प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। समय रहते कदम उठाए गए तो एक बड़ी त्रासदी टल सकती है।4