नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का भव्य समापन नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का भव्य समापन प्रयागराज। नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन मंगलवार को अत्यंत गरिमामय, उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिविर के दौरान आयोजित विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। सप्ताह भर चले इस सेवा-साधना शिविर में स्वयंसेवकों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय सहभागिता निभाई। शिविर के दौरान स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता रैलियां, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। स्वयंसेवकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया, शिक्षा के महत्व को समझाया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों में सकारात्मक सोच और जागरूकता का संचार हुआ। शिविर के अंतर्गत आयोजित जागरूकता अभियानों में विशेष रूप से प्लास्टिक मुक्त वातावरण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों को इन विषयों की जानकारी दी और उन्हें व्यवहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा, स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छ जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान की गई। शिविर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सभी का मन मोह लिया। स्वयंसेवकों ने गीत, नृत्य, नाटक और भाषण के माध्यम से सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति, सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन प्रस्तुतियों का स्वागत किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि, जमुनीपुर परिसर के निदेशक डॉ. आलोक मिश्रा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मिश्र ने विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति पंडित जे.एन. मिश्र की “संकल्पना समागम” की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुष्पांजलि पाल, डॉ. मोनिका सिंह एवं डॉ. रीतेश कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने शिविर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। समारोह के अंत में स्वयंसेवकों ने समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को पुनः दोहराया और राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करते रहने का प्रण लिया। यह शिविर केवल एक आयोजन भर नहीं रहा, बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश बनकर उभरा। इसने युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का भव्य समापन नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का भव्य समापन प्रयागराज। नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन मंगलवार को अत्यंत गरिमामय, उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिविर के दौरान आयोजित विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। सप्ताह भर चले इस सेवा-साधना शिविर में स्वयंसेवकों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय सहभागिता निभाई। शिविर के दौरान स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता रैलियां, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। स्वयंसेवकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया, शिक्षा के महत्व को समझाया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों में सकारात्मक सोच और जागरूकता का संचार हुआ। शिविर के अंतर्गत आयोजित जागरूकता अभियानों में विशेष रूप से प्लास्टिक मुक्त वातावरण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों को इन विषयों की जानकारी दी और उन्हें व्यवहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा, स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छ जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान की गई। शिविर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सभी का मन मोह लिया। स्वयंसेवकों ने गीत, नृत्य, नाटक और भाषण के माध्यम से सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति, सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन प्रस्तुतियों का स्वागत किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि, जमुनीपुर परिसर के निदेशक डॉ. आलोक मिश्रा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मिश्र ने विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति पंडित जे.एन. मिश्र की “संकल्पना समागम” की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुष्पांजलि पाल, डॉ. मोनिका सिंह एवं डॉ. रीतेश कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने शिविर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। समारोह के अंत में स्वयंसेवकों ने समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को पुनः दोहराया और राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करते रहने का प्रण लिया। यह शिविर केवल एक आयोजन भर नहीं रहा, बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश बनकर उभरा। इसने युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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- प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय भरत नाट्य समारोह का भव्य समापन मंगलवार को केंद्र प्रेक्षागृह में हुआ। अंतिम दिन महाकवि भवभूति रचित प्राचीन संस्कृत नाटक महावीरचरितम् का डॉ. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन और संगीत परिकल्पना में मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। इस नाटक ने रामायण की अमर कथा को नाटकीय बिंबों, फ्लैशबैक और आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर सबको तालियों के पुल बांधने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का आगाज मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि घनश्याम शाही (क्षेत्रीय संगठन मंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, पूर्वी उत्तर प्रदेश ), अभिलाष मिश्रा (काशी प्रांत संगठन मंत्री) एवं केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय और उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव व कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मंच पर पारंपरिक संगीत और नृत्य ने वातावरण को पवित्र बना दिया। नाटक विश्वामित्र के यज्ञ महोत्सव से प्रारंभ होता है। जनक के छोटे भाई कुशध्वज उर्मिला व सीता संग पधारते हैं। राम-लक्ष्मण की उनसे भेंट में प्रेम का बीज अंकुरित होता है। तभी सर्वमाय नामक राक्षस माल्यवान के इशारे पर रावण का पत्र पढ़ता है, जिसमें सीता से विवाह का अहंकारी प्रस्ताव है। "यह अन्याय है!"—सर्वमाय क्रोधित होकर चीखता है। बीच में राम द्वारा अहल्या उद्धार, ताड़का-मारीच-सुबाहु वध के वृतांत रोमांचित करते हैं। विश्वामित्र राम को दिव्यास्त्र प्रदान करते हैं। शिवधनुष मंगवाकर राम उसे चूर-चूर कर देते हैं—रामायण की मूल कथा से हटकर यहां विवाह शर्त नहीं, विश्वामित्र की आज्ञा है। राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला का विवाह धूमधाम से होता है। क्रोधित सर्वमाय माल्यवान को सूचना दे भागता है। षड्यंत्रों का नाटकीय मोड़ आता है। माल्यवान-सुरपनखा परशुराम को भड़काते हैं, लेकिन राम की सौम्यता से वे पिघल जाते हैं: "हे राम, यह धनुष लो, विजयी हो!" फ्लैशबैक में सुरपनखा मंथरा बनी कैकेयी को दो वर दिलवाती—राम का 14 वर्ष वनवास, भरत का राज्याभिषेक। राम प्रसन्नता से स्वीकारते हैं। जंगल में सीता हरण, जटायु वध, शबरी मिलन, बाली का राम-भक्त बनकर मृत्यु—सब चित्रित। रावण बाली भेजता है, लेकिन वह भक्त हो जाता है। मंदोदरी बार-बार समझाती है, "यह अधर्म है रावण!", पर वही अड़िग। युद्ध में राम विजयी, विभीषण को लंका सौंप अयोध्या लौटते हैं। कलाकारों ने अपने अभिनय से नाटक में जान डाल दी। अमिताभ आचार्य ने राम की भूमिका में गंभीरता दिखाई, वहीं अमन व्यास लक्ष्मण के रूप में जोश से भरे नजर आए। खुशी बघेल ने सीता के किरदार को बहुत ही सहजता से निभाया। शुभराज शुक्ला ने रावण और परशुराम दोनों किरदारों में दम दिखाया। सबसे ज्यादा ध्यान खींचा ऋतुराज चौहान ने, जिन्होंने मंथरा का किरदार निभाया। उनकी एक्टिंग इतनी प्रभावशाली रही कि दर्शक उनसे नजर नहीं हटा पाए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं नाट्य निर्देशक को केंद्र निदेशक द्वारा पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु शुक्ला ने किया।1
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- नैनी में ठगी के आरोप पर युवती का हंगामा, सरेबाजार चप्पलों से की पिटाई खबर: प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवती ने सरेबाजार एक युवक की चप्पलों से पिटाई कर दी। युवती का आरोप है कि युवक ने नौकरी दिलाने के नाम पर उससे करीब ₹4 लाख रुपये ठग लिए थे। घटना के दौरान मौके पर भारी भीड़ जुट गई और लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया। थाने में दोनों के बीच पंचायत भी हुई, जहां मामला समझौते की कगार पर पहुंच गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।1
- परमशक्ति धाम परिचायिका के शिक्षा विशेषांक का विमोचन --- अयोध्या विकास क्षेत्र के परमशक्ति धाम में भव्य आयोजन। परमशक्ति धाम। परमशक्ति धाम, श्रीराम जानकी हनुमान मंदिर में भव्य, दिव्य, नव्य प्राण प्रतिष्ठा के परम पावन अवसर पर परमशक्ति धाम परिचायिका पत्रिका के शिक्षा विशेषांक का विमोचन भारत वर्ष के विशिष्ट समाजसेवी मानवाधिकार कार्यकर्ता व शिक्षाविदों द्वारा श्रीराम नवमी, शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को किया गया। उपरोक्त की जानकारी देते हुए पीडब्ल्यूएस शिक्षालय व राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार नियंत्रण ब्यूरो के चेयरमैन आर के पाण्डेय एडवोकेट ने बताया कि एनजीओ पीडब्ल्यूएस तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार नियंत्रण ब्यूरो की प्रस्तुति परमशक्ति धाम परिचायिका के इस शिक्षा विशेषांक का प्रकाशन टीजीटी प्रकाशन समूह द्वारा किया गया है। इस अवसर पर मुख्य संरक्षिका श्रीमती इंदुमती देवी पाण्डेय, चेयरमैन आर के पाण्डेय एडवोकेट, श्रीमती मनीषा पाण्डेय, प. प्रमोद लक्ष्मीकांतराव झाल्टे, दिव्या, मानसी, निधि, फूल कुमारी कार्की, जूली सिंह, अतुल कुमार सिंह, कमिश्नरेट प्रयागराज के यातायात निरीक्षक पवन कुमार पाण्डेय, दलबीर सिंह, संजय श्रीवास्तव, राजेंद्र कुमार कार्की, संदीप सिंह आदि सैकड़ों विशिष्ट समाजसेवी मानवाधिकार कार्यकर्ता व शिक्षाविद उपस्थित रहे।2
- प्रयागराज में 8 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या करने वाले को सोमवार को फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनाया।1
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