सहारनपुर बनेगा प्रदेश का पहला रेबीज फ्री शहर, कुत्तों को रेबीज वैक्सीन लगाने वाली पांच टीमों को नगरायुक्त, महापौर ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना सहारनपुर को प्रदेश का पहला रैबीज फ्री शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने गुरुवार को एंटी रैबीज वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है। महापौर डॉ. अजय कुमार और नगरायुक्त शिपू गिरि ने वार्ड संख्या 40 स्थित नगर निगम परिसर से इस अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान कुत्तों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाकर वार्डों में जाने वाली टीमों को रवाना किया गया। सहारनपुर प्रदेश का पहला महानगर है, जहां राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पांच विशेष टीमों द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के पहले दिन पकड़े गए कुत्तों को चिकित्सकों ने एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए। इसके बाद महापौर और नगरायुक्त ने टीमों को विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना किया। महापौर डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अभियान की शुरुआत वार्ड 40 से की गई है। उन्होंने निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा को निर्देश दिए कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास अभियान को प्राथमिकता दी जाए। महापौर ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक देश को रेबीज मुक्त करना और कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है। नगरायुक्त शिपू गिरि ने जानकारी दी कि नगर निगम अब तक लगभग 24 हजार कुत्तों की नसबंदी कर चुका है, जिसके साथ एंटी रैबीज वैक्सीनेशन भी किया गया था। इन कुत्तों को अब बूस्टर डोज दी जाएगी। उन्होंने इसे नगर निगम की बड़ी उपलब्धि बताया कि सहारनपुर प्रदेश का पहला रैबीज फ्री शहर बनने जा रहा है। रेबीज से बचाव के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य मानव-पशु संघर्ष को कम करना है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा के अनुसार, अभियान के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में चार डॉग कैचर, एक वैक्सीनेटर, एक पशु चिकित्सक और एक वाहन शामिल हैं। महानगर के सभी 70 वार्डों को वार्डवार कवर किया जाएगा। अनुमानित रूप से शहर में लगभग 40 हजार कुत्ते हैं और प्रयास है कि 300 दिनों में सभी वार्डों को कवर कर लिया जाए। वैक्सीनेशन के बाद पहचान के लिए कुत्तों पर विषरहित रंग का निशान लगाया जाएगा।
सहारनपुर बनेगा प्रदेश का पहला रेबीज फ्री शहर, कुत्तों को रेबीज वैक्सीन लगाने वाली पांच टीमों को नगरायुक्त, महापौर ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना सहारनपुर को प्रदेश का पहला रैबीज फ्री शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने गुरुवार को एंटी रैबीज वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है। महापौर डॉ. अजय कुमार और नगरायुक्त शिपू गिरि ने वार्ड संख्या 40 स्थित नगर निगम परिसर से इस अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान कुत्तों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाकर वार्डों में जाने वाली टीमों को रवाना किया गया। सहारनपुर प्रदेश का पहला महानगर है,
जहां राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पांच विशेष टीमों द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के पहले दिन पकड़े गए कुत्तों को चिकित्सकों ने एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए। इसके बाद महापौर और नगरायुक्त ने टीमों को विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना किया। महापौर डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अभियान की शुरुआत वार्ड 40 से की गई है। उन्होंने निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा को निर्देश दिए कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास अभियान को प्राथमिकता दी जाए। महापौर
ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक देश को रेबीज मुक्त करना और कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है। नगरायुक्त शिपू गिरि ने जानकारी दी कि नगर निगम अब तक लगभग 24 हजार कुत्तों की नसबंदी कर चुका है, जिसके साथ एंटी रैबीज वैक्सीनेशन भी किया गया था। इन कुत्तों को अब बूस्टर डोज दी जाएगी। उन्होंने इसे नगर निगम की बड़ी उपलब्धि बताया कि सहारनपुर प्रदेश का पहला रैबीज फ्री शहर बनने जा रहा है। रेबीज से बचाव के लिए जनजागरूकता
अभियान भी चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य मानव-पशु संघर्ष को कम करना है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा के अनुसार, अभियान के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में चार डॉग कैचर, एक वैक्सीनेटर, एक पशु चिकित्सक और एक वाहन शामिल हैं। महानगर के सभी 70 वार्डों को वार्डवार कवर किया जाएगा। अनुमानित रूप से शहर में लगभग 40 हजार कुत्ते हैं और प्रयास है कि 300 दिनों में सभी वार्डों को कवर कर लिया जाए। वैक्सीनेशन के बाद पहचान के लिए कुत्तों पर विषरहित रंग का निशान लगाया जाएगा।
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- रालोद में रहने पर घुटन महसूस हो रही थी: राव केसर सलीम आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए, चंद्रशेखर आजाद को बताया एकमात्र संघर्षशील नेता सहारनपुर से राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के पूर्व जिला अध्यक्ष राव केसर सलीम ने गुरुवार को अपनी खामोशी तोड़ते हुए आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली। गांधी पार्क स्थित रोटरी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष सचिन खुराना ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर राव केसर सलीम ने कहा कि रालोद में रहते हुए अब उन्हें घुटन महसूस होने लगी थी, क्योंकि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। राव केसर सलीम ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद की जमकर सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा समय में वही ऐसे एकमात्र नेता हैं, जो सड़क से लेकर संसद तक आम जनता और सर्व समाज की आवाज को मजबूती से उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद संघर्ष, सिद्धांत और सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रतीक हैं। रालोद पर गंभीर आरोप लगाते हुए राव केसर सलीम ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों में पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। भाजपा से गठबंधन के बाद रालोद को एमएलसी, दो सांसद और आठ विधायक जैसे कई पद मिले, लेकिन इनमें अल्पसंख्यक समाज को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इससे साफ है कि पार्टी केवल सत्ता प्राप्ति तक सीमित रह गई है और मजदूरों, किसानों व सर्व समाज के मुद्दों की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने बताया कि साथियों के साथ लंबा विचार-विमर्श करने के बाद 5 जनवरी को उन्होंने सांसद चंद्रशेखर आजाद के समक्ष आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। राव केसर सलीम ने कहा कि आगामी 2026 के जिला पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी “जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उतनी उसकी भागीदारी” के सिद्धांत पर टिकट वितरण करेगी। कार्यक्रम में पार्टी जिला अध्यक्ष सचिन खुराना ने कहा कि लगातार विभिन्न वर्गों का आजाद समाज पार्टी से जुड़ना भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर ननौता के पूर्व अध्यक्ष अफजल खान, राव शमीम, राव फरमान, असद सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।2
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- मुज़फ्फरनगर | से बड़ी खबर मुज़फ्फरनगर में लिव-इन रिलेशनशिप का मामला अब गंभीर आपराधिक आशंकाओं में बदलता नजर आ रहा है, जहां एक युवक ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपनी प्रेमिका की हत्या की आशंका जताई है। पीड़ित युवक के अनुसार वह और युवती दोनों बालिग हैं और बीते एक वर्ष से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे, जिसका लिखित डिक्लेरेशन भी मौजूद है। आरोप है कि 4 जनवरी 2025 को युवती की मां, मामा और फूफा पुलिस के साथ मिलकर दोनों को जबरन उठाकर थाना सिविल लाइन ले गए, जहां दस्तावेज दिखाने के बावजूद युवती को परिजनों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद युवती ने युवक को फोन कर बताया कि उसके परिजन मिलकर उसे ज़हर देकर मारने की साजिश रच रहे हैं और उसकी जान को गंभीर खतरा है। युवक का कहना है कि इसके बाद से युवती से कोई संपर्क नहीं हो पाया, जिससे अनहोनी की आशंका गहरा गई है। पीड़ित ने एसएसपी से युवती को तत्काल बरामद कर बयान दर्ज कराने और उसकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है, वहीं मामले ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
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- सहारनपुर में रोडवेज डिपो बना ‘तालिबानी सजा’ का अखाड़ा, बस की हल्की रगड़ पर बाप–बेटों को घसीटकर पीटा, गेट बंद कर की गई बेरहमी, वीडियो वायरल* *रिपोर्ट- तारिक़ सिद्दीक़ी* सहारनपुर में रोडवेज कर्मचारियों की दबंगई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। थाना फतेहपुर क्षेत्र के छुटमलपुर रोडवेज डिपो में जो हुआ, उसने कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि बस की कार में मामूली साइड लगने का विरोध करना एक परिवार को इतना महंगा पड़ा कि बाप और उसके दो बेटों को सरेआम घसीटकर डिपो परिसर में ले जाया गया, गेट बंद किया गया और फिर जमकर पिटाई की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मिली जानकारी के अनुसार छुटमलपुर निवासी सोनू सैनी अपने बेटों हर्ष सैनी और मुकुल सैनी के साथ पंजाबी मार्केट में खरीदारी करने आए थे। उन्होंने शनिदेव मंदिर के पास कार खड़ी की थी। इसी दौरान एक रोडवेज बस ने उनकी कार में साइड मार दी। सोनू सैनी ने जब इसका विरोध किया तो मामला शांत होने के बजाय भड़क उठा। आरोप है कि बस चालक और परिचालक आगबबूला हो गए और मौके पर ही गाली-गलौज शुरू कर दी। यहीं से विवाद ने खतरनाक मोड़ ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रोडवेज कर्मचारियों ने सोनू सैनी और उनके दोनों बेटों को जबरन खींचते हुए रोडवेज डिपो के अंदर ले जाया। डिपो का गेट बंद कर दिया गया और फिर तीनों के साथ लाठी-घूंसे और लातों से बेरहमी से मारपीट की गई। डिपो कुछ देर के लिए किसी जेल या निजी सजा-घर में तब्दील हो गया, जहां कानून नहीं बल्कि कर्मचारियों की ताकत चलती दिखी। शोर-शराबा सुनकर आसपास के बाजार से लोग बड़ी संख्या में रोडवेज डिपो पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद लोगों ने गेट खुलवाया और किसी तरह तीनों को रोडवेज कर्मचारियों के चंगुल से छुड़ाया। घायल अवस्था में सोनू सैनी और उनके बेटों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के बाद व्यापारी नेता विकास गुप्ता, संदीप रोहिला, पूर्व प्रधान कर्म सिंह सैनी, दीपक भोरवाल समेत कई लोग अस्पताल पहुंचे और रोडवेज कर्मचारियों की इस हरकत पर तीखा आक्रोश जताया। व्यापारियों का आरोप है कि रोडवेज कर्मचारी आए दिन बसों को सड़क पर खड़ा कर अतिक्रमण करते हैं और जब कोई आम नागरिक इसका विरोध करता है तो ये लोग मारपीट पर उतर आते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी रोडवेज कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस बीच किसी ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रोडवेज डिपो के अंदर की कथित गुंडागर्दी साफ नजर आ रही है, जिससे विभाग और पुलिस दोनों की किरकिरी हो रही है। पीड़ित पक्ष की ओर से थाना फतेहपुर में रोडवेज कर्मचारियों के खिलाफ तहरीर दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और वीडियो के आधार पर कार्रवाई होगी।2