देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस के जवान बिना नेम प्लेट और बिना आधिकारिक बैच नंबर के ड्यूटी करते नजर आए हैं। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सुरक्षा और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वहां तैनात जवानों से सीधे सवाल करता हुआ दिखाई दे रहा है। इन्फ्लुएंसर ने जवानों से पूछा कि उनकी नेम प्लेट और बैच नंबर कहाँ हैं। जवानों की तरफ से कोई स्पष्ट उत्तर न मिलने पर इन्फ्लुएंसर ने उनसे कहा कि बिना नेम टैग के वे सामान्य कपड़ों (सिविल ड्रेस) की तरह ही हैं और ऐसे में यह पहचानना मुश्किल है कि वे वास्तव में सुरक्षाकर्मी हैं या नहीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर सुरक्षा नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। कानून के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात हर पुलिसकर्मी या सुरक्षा बल के जवान की वर्दी पर उनका नाम और बैच नंबर साफ तौर पर दिखना अनिवार्य है ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों का भी कहना है कि बिना पहचान के जवानों की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। इस मामले में अभी तक दिल्ली पुलिस या संबंधित सुरक्षा बल के आला अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस के जवान बिना नेम प्लेट और बिना आधिकारिक बैच नंबर के ड्यूटी करते नजर आए हैं। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सुरक्षा और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वहां तैनात जवानों से सीधे सवाल करता हुआ दिखाई दे रहा है। इन्फ्लुएंसर ने जवानों से पूछा कि उनकी नेम प्लेट और बैच नंबर कहाँ हैं। जवानों की तरफ से कोई स्पष्ट उत्तर न मिलने पर इन्फ्लुएंसर ने उनसे कहा कि बिना नेम टैग के वे सामान्य कपड़ों (सिविल ड्रेस) की तरह ही हैं और ऐसे में यह पहचानना मुश्किल है कि वे वास्तव में सुरक्षाकर्मी हैं या नहीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर सुरक्षा नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। कानून के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात हर पुलिसकर्मी या सुरक्षा बल के जवान की वर्दी पर उनका नाम और बैच नंबर साफ तौर पर दिखना अनिवार्य है ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों का भी कहना है कि बिना पहचान के जवानों की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। इस मामले में अभी तक दिल्ली पुलिस या संबंधित सुरक्षा बल के आला अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल यानी 21 जुलाई को बहराइच के महसी विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री के इस आगमन को लेकर सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री का उड़नखटोला तेजवापुर के रामलीला मैदान में उतरेगा, जहां से वे महसी और नानपारा विधानसभा क्षेत्र की जनता को संबोधित करेंगे। इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री बहराइच को करीब ₹350 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे, जिसके तहत करोड़ों की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री मंच से विभिन्न सरकारी योजनाओं के 50 चयनित लाभार्थियों को आवास की चाबी, लाभार्थी किट और स्वीकृति पत्र भी वितरित करेंगे।4
- बहराइच के ग्राम पंचायत बंदी फतेहुल्लहपुर में पिछले दो हफ्ते से बिजली नहीं आ रही है, जिससे स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं। इस गांव का विद्युत क्षेत्र रिसिया बाजार बिजली घर के अंतर्गत आता है। बिजली संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की तरफ से शिव कुमार ने नरेंद्र मोदी जी से बेहद विनम्रतापूर्वक निवेदन किया है कि वे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करवाने का प्रयास करें। दो हफ्तों से अंधेरे में रहने को मजबूर सभी ग्रामीणों ने बिजली पाने की उम्मीद में यह गुहार लगाई है।1
- बहराइच के मटेरा थाना में तैनात उपनिरीक्षक अहमद हुसैन का गैर जनपद गोंडा तबादला होने पर मटेरा चौराहे पर एक भव्य और भावुक कर देने वाला विदाई समारोह आयोजित किया गया। जनपद बहराइच में करीब छह वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद उनके स्थानांतरण पर ग्रामीणों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर विदाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। समारोह के दौरान वक्ताओं ने अहमद हुसैन के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी निष्पक्ष, ईमानदार और संवेदनशील कार्यशैली से लोगों का भरोसा जीता। इसके साथ ही उन्होंने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस विशेष अवसर पर उपनिरीक्षक अहमद हुसैन ने क्षेत्रवासियों से मिले सहयोग और सम्मान के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भावुक मन से कहा कि मटेरा में बिताए समय की यादें हमेशा उनके दिल में बनी रहेंगी।1
- महाराष्ट्र के पुणे में चिकन खाने की वजह से बीमारी फैल रही है, जिसके बाद वहां चिकन पर रोक लगा दी गई है।1
- भीषण गर्मी, उमस और लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से त्रस्त बहराइच के सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार शनिवार को रंजीतपुर पावर हाउस पर फूट पड़ा। उपकेंद्र रंजीतपुर से जुड़ी मोगलहा, गोबरहा, कटघरा कला, रमवापुर, बैकुंठा, सादियाबाद और बेचन पूर्वा सहित आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए पावर हाउस का ऐतिहासिक घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पूरा परिसर घंटों तक "बिजली दो या जवाब दो" और "रात की कटौती बंद करो" जैसे आक्रोशित नारों से गूंजता रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें 24 घंटे में मुश्किल से केवल 6 से 8 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिसमें भी बार-बार ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती की समस्या बनी रहती है। पूरी-पूरी रात बिजली गायब रहने से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सिंचाई, व्यापारियों का कारोबार और पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना आंधी-बारिश के भी 'लाइन फॉल्ट' का हवाला देकर घंटों बिजली बंद कर दी जाती है। क्षेत्र में जर्जर तार, झुके पोल और ओवरलोड ट्रांसफार्मर हादसों को दावत दे रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन शिकायत, हेल्पलाइन और प्रार्थना पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता और शिकायतें बिना समाधान के ही बंद कर दी जाती हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को एक 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। इन मांगों में रात्रिकालीन कटौती बंद करने, रोजाना कम से कम 18 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली देने, जर्जर तार व पोल बदलने, लो-वोल्टेज का स्थायी समाधान करने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और अधिकारियों द्वारा फोन उठाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर सुधार नहीं हुआ, तो जिला मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और प्रशासन की होगी। प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचे अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) ने ग्रामीणों से बातचीत कर लिखित रूप में आश्वासन दिया कि 48 घंटे के भीतर समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस लिखित आश्वासन के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभारी निरीक्षक श्री हरेन्द्र नाथ राय के नेतृत्व में शैलेंद्र कुमार यादव, कृष्ण कुमार सिंह, दिनेश कुमार यादव सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस आंदोलन में मुख्य रूप से आसिफ सिद्दीकी, जानकी प्रसाद तिवारी, आकाश वर्मा, शुभम सिंह, देवेन्द्र प्रताप सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के सामाजिक कार्यकर्ता, किसान, व्यापारी और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल रहे।3
- बहराइच के शंकर पुर में कुछ दिन पहले आग लग गई थी। इस हादसे में वहां नुकसान हुआ है।1
- सुदर्शन कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ जमकर मारपीट की है। पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाली यह भीड़ कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों की थी।1