खाकी की बर्बरता या लोकतंत्र पर वार? महिला पत्रकार शाहीन पर दिल्ली पुलिस के कथित अत्याचार के खिलाफ 4PM संपादक संजय शर्मा की हुंकार। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी दिल्ली में एक महिला पत्रकार के साथ थाने के भीतर कथित तौर पर बर्बरता मारपीट और बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। '4PM न्यूज नेटवर्क' के संपादक संजय शर्मा ने अपनी सहयोगी पत्रकार शाहीन खान और नफीसा के साथ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक बेहद तीखी और विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। संजय शर्मा ने दिल्ली पुलिस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वाली पुलिस अब 'वर्दी वाले गुंडों' की तरह व्यवहार कर रही है। थाने के भीतर पत्रकार की धार्मिक पहचान पूछकर उसके साथ लाठियों से मारपीट की गई, कपड़े फाड़े गए और घंटों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय शर्मा ने सिस्टम को ललकारते हुए कहा कि मीडिया की आवाज को दबाने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं—कभी ईडी, कभी आईटी, तो कभी पुलिस का खौफ दिखाया जाता है। लेकिन इस बार खाकी ने सारी सीमाएं लांघ दी हैं। साकेत थाने के भीतर महिला पत्रकारों के साथ जो हुआ, वह शर्मनाक है। क्या अब वीआईपी मूवमेंट के नाम पर किसी को भी थाने ले जाकर पीटा जाएगा? हमारी मांग साफ है—दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए, थाने और पूरे रास्ते की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हो। अगर रविवार तक कार्रवाई नहीं हुई, तो सोमवार को हम दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकार शाहीन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका शरीर भले ही चोटिल हुआ हो, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संविधान के दायरे में रहकर सच दिखाना और सवाल पूछना इस देश में गुनाह बन गया है? आधी रात तक वकीलों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बावजूद अब तक पुलिस के रवैये पर कई सवालिया निशान हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सिस्टम पर देश की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी है, अगर वहीं से इंसाफ के बजाय लाठियां मिलेंगी, तो पत्रकारिता जिंदा कैसे रहेगी? क्या गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इस मामले पर पारदर्शी जांच कराकर सीसीटीवी जारी करेगी, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?
खाकी की बर्बरता या लोकतंत्र पर वार? महिला पत्रकार शाहीन पर दिल्ली पुलिस के कथित अत्याचार के खिलाफ 4PM संपादक संजय शर्मा की हुंकार। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी दिल्ली में एक महिला पत्रकार के साथ थाने के भीतर कथित तौर पर बर्बरता मारपीट और बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। '4PM न्यूज नेटवर्क' के संपादक संजय शर्मा ने अपनी सहयोगी पत्रकार शाहीन खान और नफीसा के साथ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक बेहद तीखी और विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। संजय शर्मा ने दिल्ली पुलिस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वाली पुलिस अब 'वर्दी वाले गुंडों' की तरह व्यवहार कर रही है। थाने के भीतर पत्रकार की धार्मिक पहचान पूछकर उसके साथ लाठियों से मारपीट की गई, कपड़े फाड़े गए और घंटों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय शर्मा ने सिस्टम को ललकारते हुए कहा कि मीडिया की आवाज को दबाने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं—कभी ईडी, कभी आईटी, तो कभी पुलिस का खौफ दिखाया जाता है। लेकिन इस बार खाकी ने सारी सीमाएं लांघ दी हैं। साकेत थाने के भीतर महिला पत्रकारों के साथ जो हुआ, वह शर्मनाक है। क्या अब वीआईपी मूवमेंट के नाम पर किसी को भी थाने ले जाकर पीटा जाएगा? हमारी मांग साफ है—दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए, थाने और पूरे रास्ते की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हो। अगर रविवार तक कार्रवाई नहीं हुई, तो सोमवार को हम दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकार शाहीन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका शरीर भले ही चोटिल हुआ हो, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संविधान के दायरे में रहकर सच दिखाना और सवाल पूछना इस देश में गुनाह बन गया है? आधी रात तक वकीलों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बावजूद अब तक पुलिस के रवैये पर कई सवालिया निशान हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सिस्टम पर देश की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी है, अगर वहीं से इंसाफ के बजाय लाठियां मिलेंगी, तो पत्रकारिता जिंदा कैसे रहेगी? क्या गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इस मामले पर पारदर्शी जांच कराकर सीसीटीवी जारी करेगी, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?
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- 107 वर्षों से चौधरी परिवार निभा रहा कृष्ण जन्मोत्सव की परंपरा, भजनों पर झूमे... हायाघाट प्रखंड क्षेत्र के आनन्दपुर सहोड़ा पंचायत में चौधरी परिवार द्वारा पिछले 107 वर्षों से कृष्ण जन्मोत्सव की परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरागत पूजा को लेकर हर वर्ष श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है। बताया जाता है कि चौधरी परिवार के पूर्वज स्वर्गीय श्याम सुंदर चौधरी ने कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का संकल्प लिया था। इसके बाद से परिवार की आने वाली पीढ़ियां इस परंपरा को पूरी आस्था और विधि-विधान के साथ आगे बढ़ा रही हैं। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की गई। भगवान को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। वहीं लोक गायक रुपेश कुमार के भक्ति गीतों और भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमते नजर आए। ऐसा लग रहा था मानो भक्ति रूपी समंदर की धारा बह रही हो। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ “नंद घर आनंद भयो, जय हो नंदलाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे लगाए। कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। पूजा-अर्चना और भक्ति संगीत के बीच पूरा आयोजन आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल में मनाया जा रहा हैं1
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- स्वतंत्र भारद्वाज मामले में अभिषेक के बयान से मचा हंगामा, समर्थन में उतरे या दी खुली धमकी ? नई दिल्ली में स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े विवाद को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। मामले में अभिषेक के कथित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं और इसे खुली धमकी के तौर पर देखा जा रहा है। विवाद की शुरुआत जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और उसके बाद सामने आए स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, भारद्वाज ने प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने की बात कही थी। मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। इसी बीच अभिषेक के बयान ने मामले को और गरमा दिया है। उनके बयान में स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन या उनके पक्ष में खड़े होने के संकेत बताए जा रहे हैं। हालांकि, बयान के पूरे संदर्भ और उसके आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि अभिषेक का बयान सिर्फ समर्थन है या इसे धमकी के रूप में लिया जाना चाहिए? फिलहाल इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।1
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