"मेटा का सुरक्षा नियम भारत में बेअसर; जहाँ माता-पिता के लिए सोशल मीडिया कोई 'मायने' नहीं रखता, वहाँ बच्चों पर पड़ रहा है 'हद से ज़्यादा' बुरा असर!" " रात के सन्नाटे में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सोशल मीडिया की लत, आधे-अधूरे नियमों से नहीं थमेगा यह डिजिटल खतरा!" 1. माता-पिता के लिए 'मायने न रखना' (Lack of Concern or Awareness)तकनीकी समझ की कमी: भारत में एक बड़ी आबादी वाले माता-पिता खुद सोशल मीडिया के खतरों और उसकी सेटिंग्स से अनजान हैं। उनके लिए फोन सिर्फ बात करने या मनोरंजन का साधन है।निगरानी का अभाव: पश्चिमी देशों की तरह यहाँ माता-पिता बच्चों के अकाउंट्स को अपने फोन से लिंक (Parental Control) नहीं करते। जब तक माता-पिता आगे बढ़कर इन सेटिंग्स को एक्टिवेट नहीं करेंगे, तब तक मेटा (Meta) का कोई भी डिजिटल बेडटाइम नियम काम नहीं करेगा। 2. बच्चों पर 'हद से ज़्यादा' बुरा असर (Severe Impact) मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन: रील्स और लाइक्स की होड़ में भारतीय किशोर (Teens) देर रात तक जागे रहते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं होती। इसका सीधा असर उनके स्वभाव और पढ़ाई पर पड़ रहा है।साइबर बुलिंग और प्राइवेसी का खतरा: उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने के कारण बच्चे इंटरनेट पर असुरक्षित हो जाते हैं। वे अक्सर ऑनलाइन ठगी या गलत संगति का शिकार बन जाते हैं। 3. फेक उम्र (Fake Age) की सबसे बड़ी बीमारी भारतीय बच्चे अकाउंट बनाते समय अपनी असली जन्मतिथि छुपाकर खुद को 18+ (वयस्क) दिखा देते हैं। जब मेटा का सिस्टम उन्हें बच्चा मानेगा ही नहीं, तो रात 12 से सुबह 6 बजे वाला नियम उन पर लागू ही नहीं हो पाता। इस तरह नियम कागज़ पर तो अच्छा दिखता है, लेकिन हकीकत में बेकार हो जाता है।
"मेटा का सुरक्षा नियम भारत में बेअसर; जहाँ माता-पिता के लिए सोशल मीडिया कोई 'मायने' नहीं रखता, वहाँ बच्चों पर पड़ रहा है 'हद से ज़्यादा' बुरा असर!" " रात के सन्नाटे में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सोशल मीडिया की लत, आधे-अधूरे नियमों से नहीं थमेगा यह डिजिटल खतरा!" 1. माता-पिता के लिए 'मायने न रखना' (Lack of Concern or Awareness)तकनीकी समझ की कमी: भारत में एक बड़ी आबादी वाले माता-पिता खुद सोशल मीडिया के खतरों और उसकी सेटिंग्स से अनजान हैं। उनके लिए फोन सिर्फ बात करने या मनोरंजन का साधन है।निगरानी का अभाव: पश्चिमी देशों की तरह यहाँ माता-पिता बच्चों के अकाउंट्स को अपने फोन से लिंक (Parental Control) नहीं करते। जब तक माता-पिता आगे बढ़कर इन सेटिंग्स को एक्टिवेट नहीं करेंगे, तब तक मेटा (Meta) का कोई भी डिजिटल बेडटाइम नियम काम नहीं करेगा। 2.
बच्चों पर 'हद से ज़्यादा' बुरा असर (Severe Impact) मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन: रील्स और लाइक्स की होड़ में भारतीय किशोर (Teens) देर रात तक जागे रहते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं होती। इसका सीधा असर उनके स्वभाव और पढ़ाई पर पड़ रहा है।साइबर बुलिंग और प्राइवेसी का खतरा: उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने के कारण बच्चे इंटरनेट पर असुरक्षित हो जाते हैं। वे अक्सर ऑनलाइन ठगी या गलत संगति का शिकार बन जाते हैं। 3. फेक उम्र (Fake Age) की सबसे बड़ी बीमारी भारतीय बच्चे अकाउंट बनाते समय अपनी असली जन्मतिथि छुपाकर खुद को 18+ (वयस्क) दिखा देते हैं। जब मेटा का सिस्टम उन्हें बच्चा मानेगा ही नहीं, तो रात 12 से सुबह 6 बजे वाला नियम उन पर लागू ही नहीं हो पाता। इस तरह नियम कागज़ पर तो अच्छा दिखता है, लेकिन हकीकत में बेकार हो जाता है।
- जयपुर करधनी थाना क्षेत्र में एसीपी ऑफिस के ठीक सामने एसपी ऑफिस के ठीक सामने चल रहा मसाज पार्लर के नाम पर देह व्यापार को रोकने में पुलिस नाकाम1
- नेपाल से आ रहीं मार्मिक तस्वीरें विश्व को प्रकृति के प्रति कुछ संदेश दे रहीं हैं.... नेपाल से आ रहीं मार्मिक तस्वीरें सिर्फ एक आपदा नहीं, बल्कि प्रकृति के बिगड़ते संतुलन का गहरा संदेश देती हैं। ये तस्वीरें बता रही हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु संकट, ग्लेशियरों का टूटना और बाढ़ का बढ़ता खतरा अब दूर की चेतावनी नहीं रहा, बल्कि आज की सच्चाई है।1
- “BJP-कांग्रेस दोनों से दूरी, UGC मुद्दे पर छात्र समाज के साथ खड़े होने की शर्त—नेता ने कांग्रेस को दिया खुला संदेश #UGC #UGCRowback #StudentProtest #CityCablenewsjaipur1
- *श्रीलंका ने भारत को नहीं जीतने दिया दूसरा टेस्ट:* फॉलोऑन खेलने के बावजूद मैच ड्रॉ कराया, सोनल दिनूषा का दोनों पारियों में शतक भारत की मजबूत शुरुआत: टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 503/9 के विशाल स्कोर पर अपनी पहली पारी घोषित की थी। भारत के लिए ध्रुव जुरेल (115 रन) और देवदत्त पडिक्कल (117 रन) ने शानदार शतकीय पारियां खेली थीं।श्रीलंका की पहली पारी और फॉलोऑन: जवाब में श्रीलंकाई टीम अपनी पहली पारी में महज 290 रनों पर ढेर हो गई थी। श्रीलंका के लिए नंबर 6 पर आए सोनल दिनूषा ने 103 रनों की साहसी पारी खेली, लेकिन वह अपनी टीम को फॉलोऑन से नहीं बचा सके। भारत को पहली पारी के आधार पर 213 रनों की विशाल बढ़त मिली।दूसरी पारी में दिनूषा का ऐतिहासिक पलटवार: फॉलोऑन खेलने उतरी श्रीलंकाई टीम ने दूसरी पारी में कमाल का जज्बा दिखाया। सोनल दिनूषा ने 264 गेंदों का सामना करते हुए 133 रनों की नाबाद मैराथन पारी खेली। उनका साथ पासिंदु सूरियबंडारा (92 रन) और केशरा नुवंत (46 रन) ने बखूबी निभाया।आखरी दिन गेंदबाजों की बेअसर रणनीति: मैच के पांचवें और आखिरी दिन भारत को जीत के लिए सिर्फ 4 विकेट चाहिए थे। लेकिन दिनूषा ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारत के स्पिनरों और तेज गेंदबाजों को पूरे दिन तरसाया। श्रीलंका ने 429/9 के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित की, जिसके तुरंत बाद दोनों कप्तानों ने मैच ड्रॉ करने पर सहमति जताई। भारत की तरफ से दूसरी पारी में रवींद्र जडेजा और मानव सुथार ने 3-3 विकेट लिए। ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा दैनिक समाचार पत्र1
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- डोटासरा का बीजेपी पर बड़ा आरोप, बोले- अधिकारियों के फीडबैक से टिकट देना गलत जयपुर। निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेता संभावित रूप से जीतने वाले उम्मीदवारों की जानकारी एसडीएम से मांग रहे हैं और अधिकारियों के फीडबैक के आधार पर टिकट देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। डोटासरा ने कहा कि यदि टिकट वितरण में ब्यूरोक्रेसी की राय को प्राथमिकता दी जा रही है, तो यह बीजेपी के अंदरूनी सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए। पीसीसी चीफ ने मांग की कि निकाय चुनाव की टिकट प्रक्रिया से ब्यूरोक्रेसी को दूर रखा जाए। उन्होंने बीजेपी को अपने कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर टिकट वितरण करने की सलाह दी। डोटासरा के इस बयान के बाद निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।1
- नेपाल में जो हुआ उसके लिए विश्व में सभी के मन में भाव उत्पन्न हो रहे हैं... नेपाल की तबाही: दर्द, दुआ और राहत की उम्मीद। यह सिर्फ एक बाढ़ नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए ज़िंदगी भर का घाव है। नेपाल में आई इस भीषण आपदा में पुल, घर, सड़कें और उम्मीदें—सब एक साथ बह गए, और अब सबसे ज़रूरी चीज़ है तेज़ बचाव, सही सूचना और मानवीय मदद।1
- कानपुर में ट्रेनिंग विमान हादसा, पायलट और ट्रेनी की मौत कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुरुवार को गंगा बैराज के पास एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार हो गया। नत्थूपुरवा गांव के पास विमान अचानक अनियंत्रित होकर खेत में जा गिरा। हादसे में विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट सचिन भाटिया और ट्रेनी पायलट अभिषेक पुजारी की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान के गिरने से पहले तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद विमान खेत में जा गिरा और दुर्घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था। हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और DGCA को भी इसकी सूचना दी गई है। हादसे के बाद पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। विमान में तकनीकी खराबी समेत अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है।1