"मोहम्मद इरफान एक मुनाफिक है.." ठीक है मान लिया MTF news जो इस्लाम के अरकान (रोजा, नमाज़, हज, ज़कात) से इंकार करे वो मुनाफिक हो गया, किसी भी किस्म के शिर्क में मुब्तिला मुसलमान कतई एक आईडियल मुस्लिम नहीं रह जाता.. इस्लाम के जो 5 अरकान (Pillers) हैं उनमें से 4 यही हैं, बाकी पहला अरकान (कलमा/शहादा) तो हर नामनिहाद मुसलमान ने भी अदा किया ही होगा। मगर इरफान ने जो हालिया मकबूलियत हासिल की है, क्या ये उसने अपने नाम और मजहब के हवाले से कमाई है? क्या उसने कभी कौम से ये गुहार लगाई थी कि देशभर के मुसलमान मुझे मुसलमान होने के नाते हीरो मानें? क्या शिर्क में डूबा हुआ एक बुरा मुसलमान बेहतर इंसान नहीं हो सकता? कहीं आप किसी की तमाम काबिलियत को सिर्फ मजहब के चश्मे से आंककर उस एक वर्ग-विशेष की तरह सख्ती तो नहीं कर रहे है.. ऐसा करके आप सही हैं तो फिर वो लिंचर गलत कैसे हुए?? अगर आपने सिर्फ "इरफान" नाम देखकर अपने ख्यालों में उसे रोजा-नमाज़ का पाबंद कोई मौलवी या इस्लामिक-स्कॉलर मान लिया था और उसके वीडियो में एक लाइन सुनकर आपके ख्वाबों का शीशमहल ढह गया तो इसमें गलती आपकी ही है.. दरअसल ऐसे कई-कई बे'नमाजी इरफान आपको अपनी गली-मुहल्ले और गाँव-खेड़े में भी दिख जाएंगे, जो ना जानें कितने ऐसे ऐबों में मुब्तिला मिलेंगे जिनकी इस्लाम में सख्त मनाही है. अगर हम पूरी ईमानदारी से खुद-इहतिसाब करें या कोई मुफ्ती/मौलवी हम पर मुसाहिबा करे तो यकीनन हम भी कोई मिसाली-मुसलमान साबित नहीं हो पाएंगे.. इरफान की काबिलियत ये नहीं कि वो एक सच्चा-पक्का मुसलमान है, उसकी काबिलियत ये है कि वो एक ऐसा जिम्मेदार शहरी है जो अपनी मेहनतकश-कौम के लिए फिक्रमंद है, जो आपके हक-ओ-हुकूक के लिए बोलता है, जो आपके बच्चों के मुस्तकबिल के लिए सोचता है, जो उस सड़े हुए सिस्टम से नाराज़ है जो आपको इफैक्ट करता है.. वो खुद को मिल रहे हर प्लेटफार्म पर मुल्क के उस तमाम शहरी के बुनियादी हुकूक की खातिर बोल रहा है जिनकी हर रोज हक-तल्फ़ी होती है। दरअसल उसकी सबसे बड़ी गलती ये है कि वो सियासतदानों की तरह शातिर और घाघ नहीं है वरना जो बात बोलकर आज आपके तंज़ और तनकीद का निशाना बन रहा है, उसे बोले बिना आपका C काटता रहता और जूतों समेत आपके दिलों में उतरकर आपका हीरो जाता. उसकी गलती ये है कि उसके अंदर जो भरा है उसे बिना फिल्टर किए निकाल देता है। कौम के काबिल लड़के सबसे ज्यादा निशाना उसके लिए होनेवाली क्राउड-फंडिंग पर कर रहे हैं, जो उसने किसी से मांगी भी नहीं है. ये सब अजीत अंजुम जैसे सीनियर पत्रकार और किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) का इनिशिएटिव था, वैसे भी आप पर उसकी इमदाद करना कतई फर्ज़ नहीं है। खैर.. इंसान की व्यक्तिगत-सोच, उसकी जीवनशैली या उसके मजहबी-अकाईद उसके जाती-मामले होते हैं मगर वही इंसान अगर मुल्क और अवाम की बेहतरी के लिए आवाज उठाता है तो उसकी मजम्मत नहीं, तारीफ करना बनता है.. फिर चाहे वो हमारे गली-मुहल्ले वाला कोई नामनिहाद मुसलमान हो, चाहे शहीद भगतसिंह की तरह कोई मुल्हिद हो, चाहे इरफान की तरह कोई मुनाफिक हो (जिसकी हिदायत के लिए हम दुआ'गो हैं) या फिर वो किसी गैर-मजहब का अकीदतमंद हो.. दूसरों के हक़ की आवाज़ उठानेवाला हमसे थोड़ी सी तो एप्रीसिएशन का मुस्तहक़ यकीनन होता है। नोट:- बराय-मेहरबानी कौम के गाज़ी इस पोस्ट के बदले में अदब के दायरे में रहकर मेरी ट्रोलिंग करें और मुझे किसी खास टाइटल से नवाजने से पहले आईने के सामने खड़े होकर खुद को जरूर निहार लें... व'स्सलाम
"मोहम्मद इरफान एक मुनाफिक है.." ठीक है मान लिया MTF news जो इस्लाम के अरकान (रोजा, नमाज़, हज, ज़कात) से इंकार करे वो मुनाफिक हो गया, किसी भी किस्म के शिर्क में मुब्तिला मुसलमान कतई एक आईडियल मुस्लिम नहीं रह जाता.. इस्लाम के जो 5 अरकान (Pillers) हैं उनमें से 4 यही हैं, बाकी पहला अरकान (कलमा/शहादा) तो हर नामनिहाद मुसलमान ने भी अदा किया ही होगा। मगर इरफान ने जो हालिया मकबूलियत हासिल की है, क्या ये उसने अपने नाम और मजहब के हवाले से कमाई है? क्या उसने कभी कौम से ये गुहार लगाई थी कि देशभर के मुसलमान मुझे मुसलमान होने के नाते हीरो मानें? क्या शिर्क में डूबा हुआ एक बुरा मुसलमान बेहतर इंसान नहीं हो सकता? कहीं आप किसी की तमाम काबिलियत को सिर्फ मजहब के चश्मे से आंककर उस एक वर्ग-विशेष की तरह सख्ती तो नहीं कर रहे है.. ऐसा करके आप सही हैं तो फिर वो लिंचर गलत कैसे हुए?? अगर आपने सिर्फ "इरफान" नाम देखकर अपने ख्यालों में उसे रोजा-नमाज़ का पाबंद कोई मौलवी या इस्लामिक-स्कॉलर मान लिया था और उसके वीडियो में एक लाइन सुनकर आपके ख्वाबों का शीशमहल ढह गया तो इसमें गलती आपकी ही है.. दरअसल ऐसे कई-कई बे'नमाजी इरफान आपको अपनी गली-मुहल्ले और गाँव-खेड़े में भी दिख जाएंगे, जो ना जानें कितने ऐसे ऐबों में मुब्तिला मिलेंगे जिनकी इस्लाम में सख्त मनाही है. अगर हम पूरी ईमानदारी से खुद-इहतिसाब करें या कोई मुफ्ती/मौलवी हम पर मुसाहिबा करे तो यकीनन हम भी कोई मिसाली-मुसलमान साबित नहीं हो पाएंगे.. इरफान की काबिलियत ये नहीं कि वो एक सच्चा-पक्का मुसलमान है, उसकी काबिलियत ये है कि वो एक ऐसा जिम्मेदार शहरी है जो अपनी मेहनतकश-कौम के लिए फिक्रमंद है, जो आपके हक-ओ-हुकूक के लिए बोलता है, जो आपके बच्चों के मुस्तकबिल के लिए सोचता है, जो उस सड़े हुए सिस्टम से नाराज़ है जो आपको इफैक्ट करता है.. वो खुद को मिल रहे हर प्लेटफार्म पर मुल्क के उस तमाम शहरी के बुनियादी हुकूक की खातिर बोल रहा है जिनकी हर रोज हक-तल्फ़ी होती है। दरअसल उसकी सबसे बड़ी गलती ये है कि वो सियासतदानों की तरह शातिर और घाघ नहीं है वरना जो बात बोलकर आज आपके तंज़ और तनकीद का निशाना बन रहा है, उसे बोले बिना आपका C काटता रहता और जूतों समेत आपके दिलों में उतरकर आपका हीरो जाता. उसकी गलती ये है कि उसके अंदर जो भरा है उसे बिना फिल्टर किए निकाल देता है। कौम के काबिल लड़के सबसे ज्यादा निशाना उसके लिए होनेवाली क्राउड-फंडिंग पर कर रहे हैं, जो उसने किसी से मांगी भी नहीं है. ये सब अजीत अंजुम जैसे सीनियर पत्रकार और किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) का इनिशिएटिव था, वैसे भी आप पर उसकी इमदाद करना कतई फर्ज़ नहीं है। खैर.. इंसान की व्यक्तिगत-सोच, उसकी जीवनशैली या उसके मजहबी-अकाईद उसके जाती-मामले होते हैं मगर वही इंसान अगर मुल्क और अवाम की बेहतरी के लिए आवाज उठाता है तो उसकी मजम्मत नहीं, तारीफ करना बनता है.. फिर चाहे वो हमारे गली-मुहल्ले वाला कोई नामनिहाद मुसलमान हो, चाहे शहीद भगतसिंह की तरह कोई मुल्हिद हो, चाहे इरफान की तरह कोई मुनाफिक हो (जिसकी हिदायत के लिए हम दुआ'गो हैं) या फिर वो किसी गैर-मजहब का अकीदतमंद हो.. दूसरों के हक़ की आवाज़ उठानेवाला हमसे थोड़ी सी तो एप्रीसिएशन का मुस्तहक़ यकीनन होता है। नोट:- बराय-मेहरबानी कौम के गाज़ी इस पोस्ट के बदले में अदब के दायरे में रहकर मेरी ट्रोलिंग करें और मुझे किसी खास टाइटल से नवाजने से पहले आईने के सामने खड़े होकर खुद को जरूर निहार लें... व'स्सलाम
- सावन माह मे आने वाले कावड़ियों की सुरक्षा को लेकर दिया ज्ञापन!!! आज राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत) की तरफ से *आगरा के जिलाधिकारी महोदय* को दिया गया *ज्ञापन* है - जिसमे सावन मेला को लेकर प्रमुख मांगें की गई है.. 1. *सफाई व्यवस्था* - सभी महादेव मंदिरों और परिक्रमा मार्ग की साफ-सफाई 2. *सड़क* - परिक्रमा मार्ग गड्ढा मुक्त होना चाहिए 3. *लाइट* - सभी महादेव मंदिरों पर पर्याप्त लाइटिंग 4. *स्वास्थ्य* - कांवड़ मार्ग पर हर 5 किलोमीटर पर एक डॉक्टर की व्यवस्था 5. *सुरक्षा* - हर 5 किलोमीटर पर महिला और पुरुष पुलिस की तैनाती 6. *मार्ग व्यवस्था* - पूरे मार्ग की साफ-सफाई 7. *बंदी* - कांवड़ मार्ग में शराब की दुकानें ढकी हों और मांस-अंडे की दुकानें बंद हों *महत्वपूर्ण बात:* ज्ञापन में लिखा है कि सावन में लाखों कांवड़िये और श्रद्धालु आते हैं। उनकी सुविधा और आस्था का ध्यान रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर 24 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा।1
- आगरा में महिलाओं ने शराब के ठेके बंद कराए:लाठी-डंडों के साथ पहुंचीं, परिवार प्रभावित होने से थीं नाराज आगरा थाना खन्दौली चौकी उस्मानपुर गांव में शुक्रवार को ग्रामीण महिलाओं ने शराब के ठेकों के खिलाफ प्रदर्शन किया। दर्जनों महिलाएं लाठी-डंडों के साथ अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानों पर पहुंचीं और उन्हें बंद करा दिया। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि आसानी से शराब मिलने के कारण उनके परिवार बर्बाद हो रहे हैं गाँव मे ठेका हटाने की माँग को लेकर महिलाओ ने दिया जोर | विरोध बढ़ने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद सेल्समैन मौके से चले गए। महिलाओं ने दोनों ठेकों के शटर गिरा दिए। घटना की सूचना मिलते ही खंदौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। Updated News-31/जुलाई /26- AIN नेटवर्क से प्रधान संपादक अनुज रावत नये youtube चैनल के साथ एक बार फिर से उसी नाम के साथ सोशल मीडिया मित्रों और शुभचिंतको के चैनल सब्सक्राइब करने की अपील🙏| अपने देश व आसपास की खबरों को देखने के लिए चैनल को लाइक शेयर और सब्सक्राइब करना बिल्कुल भी ना भूले | अब सभी खबरों को देखिये 4K के साथ | AIN नेटवर्क को उत्तरप्रदेश व अन्य राज्यों से जिला संवाददाता, तहसील रिपोर्टर, ब्लॉक रिपोर्टर की आवश्यकता है | शीघ्र सम्पर्क करें - प्रधान संपादक अनुज रावत (9193250352) Subscribe Now 👆👆👆👆1
- पोस्ट नगला bajdar नगरीय bahoranpur mekacha रास्ता kharab है निकलने केलिए रास्ता नहीं है1
- अरनोटा तिराहे पर पीडब्लूडी का रास्ता है और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से जिस रास्ते से हजारों लोगो का रोजाना आवागवन होता है और बरसात के समय वहाँ पानी भर जाता है यहाँ की प्रॉब्लम किसी को नहीं दिख रही नेताओं का क्या ही कहना है ज़ब जनता को ही दिक्कत नहीं है तो बेसे किसी जगह पर अधिक गंदगी का होना लोगो के लिए घातक होता है क्यों गंदगी बीमारी पैदा करती है हमारा मकसद हर गांव हर तिराहा विकास का हो1
- फिरोजाबाद: मदर प्राइड इंटरनेशनल स्कूल पर गंभीर आरोप, दो छात्रों से मारपीट के मामले में मुकदमा दर्ज फिरोजाबाद के थाना उत्तर क्षेत्र स्थित मदर प्राइड इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक, मैनेजर विश्वनाथ शर्मा और दो शिक्षिकाओं काजल व योगेंद्री के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। श्रीराम कॉलोनी निवासी मनोज कुमार की शिकायत के अनुसार, उनका चार वर्षीय बेटा अनमोल, जो एलकेजी का छात्र है, 6 जुलाई को स्कूल में घायल हो गया। आरोप है कि कक्षा के दौरान शिक्षिका काजल द्वारा पेंसिल लगने से उसकी आंख में गंभीर चोट आई। हालत बिगड़ने पर बच्चे का इलाज नई दिल्ली स्थित एम्स में कराया गया, जहां 12 जुलाई को उसकी आंख का ऑपरेशन किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्कूल के मैनेजर विश्वनाथ शर्मा ने भी बच्चे के साथ मारपीट की। परिजनों का कहना है कि छोटे बेटे के इलाज के दौरान उन्हें पता चला कि उनके बड़े बेटे आर्यन के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई। आरोप है कि शिक्षिका योगेंद्री द्वारा की गई पिटाई से उसके कान में गंभीर चोट आई और खून निकलने लगा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने दोनों घटनाओं की सीसीटीवी फुटेज मांगी तो स्कूल प्रबंधन ने फुटेज डिलीट होने की बात कही। साथ ही स्कूल के निदेशक पर अभद्र व्यवहार और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1