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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने केंद्रीय बजट पर क्या कहा। केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बजट पेश किया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बजट के बारे में क्या कहा पूरी खबर अवश्य देखें
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने केंद्रीय बजट पर क्या कहा। केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बजट पेश किया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बजट के बारे में क्या कहा पूरी खबर अवश्य देखें
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- *मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को पलीता लगते अधिकारी मुस्लिम समुदाय के साथ भेद भाव के आरोप...* मध्यप्रदेश की मोहन सरकार गरीब बेटियों की शादी को लेकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को बड़ी सामाजिक पहल बताती है… लेकिन सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील से सामने आई तस्वीरें सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। 19 अप्रैल को सीहोर जिले की भेरुन्दा तहसील में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए भैरूंदा जनपद पंचायत कार्यालय में आवेदन जमा किए जा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग तहसीलों से आए मुस्लिम समुदाय के कई लोग सुबह 6 बजे से लाइन में लगे रहे… लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने उन्हें लाइन से हटा दिया। लोगों का कहना है कि एक तरफ दूसरे समुदाय के आवेदकों के फार्म जमा कर तत्काल रिसीविंग दी जा रही थी… वहीं मुस्लिम पक्ष के आवेदकों के साथ अलग व्यवहार किया गया। विरोध होने के बाद अधिकारियों ने फार्म तो ले लिए… लेकिन किसी प्रकार की रिसीविंग नहीं दी गई। अब सवाल यह है कि बिना रसीद के इन आवेदनों का रिकॉर्ड क्या रहेगा… और क्या ये जोड़े योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं? सरकार की जिस योजना का उद्देश्य सामाजिक समानता और सभी वर्गों को सम्मान देना है… उसी योजना को जमीनी स्तर पर अधिकारी ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। क्या अधिकारियों की लापरवाही से बीजेपी सरकार की योजनाओं की साख पर असर पड़ रहा है? मीडिया द्वारा जब जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछे गए… तो अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए। अब बड़े सवाल— क्या सरकारी योजनाओं में सभी समुदायों को समान अधिकार मिल रहा है? क्या प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव की जांच होगी? और क्या मोहन सरकार अपने अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी? फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है… लेकिन भैरूंदा से उठे ये सवाल अब सीधे शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर खड़े हो रहे हैं।1