नीरस और 9,668 करोड़ के घाटे का बजट, वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा हिमाचल - जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना चौथा बजट पेश. 4 घंटे से ज्यादा लंबे बजट भाषण पर विपक्ष की प्रक्रिया सामने आई है. बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम ठाकुर ने नीरस और 9,668 करोड़ के घाटे का बजट बताया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहली बार बजट तीन चरणों में पढ़ा गया. हिमाचल वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है और विपक्ष के विधायक भी बजट से निराशा हैं. उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास निधि को आधा करने के फैसले को विधायक इंस्टीट्यूट पर हमला बताया है. VO -- नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की सरकार का यह चौथा बजट था. अब केवल चुनावी साल का बजट बाकी रह गया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन के भीतर 29 बजट प्रस्तुत होते देखे हैं और बतौर मुख्यमंत्री 5 बजट स्वयं पेश किए. लेकिन, इस बजट में बजट की गरिमा तार-तार कर दी गई. पहली बार देखा गया कि बजट तीन चरणों में प्रस्तुत किया गया. बजट में एक शब्द पर आपत्ति जताने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि सदन स्थगित नहीं होगा इस पर विधानसभा अध्यक्ष बेबस नज़र आए. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 4 घंटे 9 मिनट का लंबा और नीरस बजट पेश किया गया. बजट में कुछ नहीं था, इसलिए रणनीति के तहत इसे लंबा किया गया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर बजट हर साल आगे बढ़ता है, लेकिन इस बार बजट पीछे चला गया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के विधायकों में भी बजट को लेकर निराशा दिखाई दी और बीच-बीच में मंत्री और विधायक सदन से बाहर जाते रहे. जयराम ठाकुर ने कहा कि 9 हजार 668 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विधायकों और अधिकारियों का 30 प्रतिशत वेतन डेफर का निर्णय केवल राजनीतिक दृष्टि से अपना कार्यकाल निकालने के लिए गया. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी हिमाचल विरोधी नहीं कांग्रेस विरोधी है. साथ ही उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास ने की निधि को आधा करने के फैसले को विधायक इंस्टीट्यूट पर हमला बताया है. बाइट -- जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
नीरस और 9,668 करोड़ के घाटे का बजट, वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा हिमाचल - जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना चौथा बजट पेश. 4 घंटे से ज्यादा लंबे बजट भाषण पर विपक्ष की प्रक्रिया सामने आई है. बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम ठाकुर ने नीरस और 9,668 करोड़ के घाटे का बजट बताया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहली बार बजट तीन चरणों में पढ़ा गया. हिमाचल वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है और विपक्ष के विधायक भी बजट से निराशा हैं. उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास निधि को आधा करने के फैसले को विधायक इंस्टीट्यूट पर हमला बताया है. VO -- नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की सरकार का यह चौथा बजट था. अब केवल चुनावी साल का बजट बाकी रह गया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन के भीतर 29 बजट प्रस्तुत होते देखे हैं और बतौर मुख्यमंत्री 5 बजट स्वयं पेश किए. लेकिन, इस बजट में बजट की गरिमा तार-तार कर दी गई. पहली बार देखा गया कि बजट तीन चरणों में प्रस्तुत किया गया. बजट में एक शब्द पर आपत्ति जताने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए
सदन स्थगित कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि सदन स्थगित नहीं होगा इस पर विधानसभा अध्यक्ष बेबस नज़र आए. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 4 घंटे 9 मिनट का लंबा और नीरस बजट पेश किया गया. बजट में कुछ नहीं था, इसलिए रणनीति के तहत इसे लंबा किया गया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर बजट हर साल आगे बढ़ता है, लेकिन इस बार बजट पीछे चला गया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के विधायकों में भी बजट को लेकर निराशा दिखाई दी और बीच-बीच में मंत्री और विधायक सदन से बाहर जाते रहे. जयराम ठाकुर ने कहा कि 9 हजार 668 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विधायकों और अधिकारियों का 30 प्रतिशत वेतन डेफर का निर्णय केवल राजनीतिक दृष्टि से अपना कार्यकाल निकालने के लिए गया. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी हिमाचल विरोधी नहीं कांग्रेस विरोधी है. साथ ही उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास ने की निधि को आधा करने के फैसले को विधायक इंस्टीट्यूट पर हमला बताया है. बाइट -- जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
- शिमला में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधायक कुलदीप राठौर ने बजट सत्र में पारित हुए संकल्प और अमेरिका के साथ एफटीए (Free Trade Agreement) के तहत सेब पर आयात शुल्क घटाने से जुड़े प्रस्ताव पर चिंता जताई। राठौर ने कहा कि अमेरिका जीरो टैरिफ की मांग कर रहा है, जिससे हिमाचल की बागवानी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रस्ताव का केंद्र सरकार पर असर होगा और बागवानों व किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। राठौर ने यह भी कहा कि उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर को अपने राज्यों से ऐसे प्रस्ताव पारित करने चाहिए, जबकि पंजाब ने पहले ही प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अमेरिका के दबाव में नहीं आना चाहिए और किसान आयोग के गठन से किसानों को फायदा मिलेगा। साथ ही, हिमाचल कांग्रेस अनुशासन समिति के चैयरमैन के तौर पर राठौर ने पार्टी अनुशासन पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “कोई भी संगठन अनुशासन से चलता है और हर पार्टी का अपना संविधान होता है। मैं किसी के दबाव में काम नहीं करता और पार्टी के लिए जो उचित होगा वही करूंगा। जल्द ही अनुशासन समिति की बैठक करके इस विषय पर चर्चा की जाएगी।” राठौर ने चेतावनी दी कि किसी भी विधायक या पार्टी नेता का पार्टी कार्यों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर कोई पार्टी मंच के बाहर अपनी बात रखेगा तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी जवाबदेही पार्टी के संविधान और हाईकमान के प्रति होगी और अनुशासन समिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए।2
- जिला मुख्यालय में 4 अप्रैल 1905 को कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप की स्मृति में उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक प्रभावी मॉक ड्रिल तथा जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर ने की। यह आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) बिलासपुर के सौजन्य से किया गया, जिसका उद्देश्य आमजन को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना तथा विभिन्न विभागों की आपात स्थिति में तत्परता और समन्वय का आकलन करना रहा। इस अवसर पर डीडीएमए के स्वयंसेवकों द्वारा एक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान अपनाए जाने वाले आवश्यक सुरक्षा उपायों का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। रैली के माध्यम से लोगों को सतर्कता, त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षित स्थानों की पहचान के बारे में जागरूक किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान होमगार्ड के जवानों ने भूकंप की स्थिति में बचाव एवं राहत कार्यों का सजीव प्रदर्शन किया। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया और उनका समुचित उपचार सुनिश्चित किया। इस समन्वित अभ्यास ने आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी तालमेल और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में पुलिस विभाग, उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारी तथा स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अवसर पर जिला राजस्व अधिकारी नीलाक्ष शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास न केवल विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि आमजन को भी आपदा के प्रति जागरूक और सतर्क बनने के लिए प्रेरित करते हैं।3
- यह सडक मार्ग चार पंचायतों, जिसमें, चौबिया पंचायत,घरेड पंचायत,पूलन पंचायत,बडग्राम पंचायत की लगभग 12000 की आबादी को जोडता है2
- Post by Dev Raj Thakur1
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- देखें वीडियो किस तरह हुआ बंजार हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन,,,,, प्रशासन, पुलिस, राजस्व विभाग, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय लोगों ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सराहनीय भूमिका निभाई। सभी की तत्परता, समन्वय और साहस के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका1
- Post by Dinesh Kumar1
- चेस्टर हिल घोटाले की हाई कोर्ट जज से जांच हो—भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री की चुप्पी क्यों?: रणधीर शर्मा भ्रष्टाचार में डूबी कांग्रेस सरकार—मुख्यमंत्री की चुप्पी से उठे बड़े सवाल: रणधीर शर्मा एंकर। चेस्टर हिल घोटाले को लेकर भाजपा लगतार हमलावर है और सरकार पर भृष्टाचार के आरोप लगा रहे है। भाजपा मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता ओर विधायक रणधीर शर्मा ने कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है और ईमानदारी का ढोंग कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। रणधीर शर्मा ने कहा कि सोलन के चेस्टर हिल भूमि प्रकरण ने प्रदेश में प्रशासनिक तंत्र की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रकार कार्यवाहक मुख्य सचिव को स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ऊपर लगे आरोपों का बचाव करना पड़ा, वह प्रदेश के इतिहास में अभूतपूर्व है। “जहां सफाई देने अधिकारी खुद सामने आएं और सरकार मौन रहे, वहां दाल में नहीं, पूरी दाल ही काली है,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव द्वारा प्रेस वार्ता में कई पूर्व और वर्तमान वरिष्ठ अधिकारियों के नाम लेने से प्रदेश में सनसनी का माहौल बन गया है और आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को न केवल बचा रही है बल्कि उन्हें एक्सटेंशन देकर महत्वपूर्ण पदों पर बैठा रही है। रणधीर शर्मा ने कहा कि “मुख्यमंत्री कार्यालय आज फैसलों का केंद्र कम और ‘कमीशन कल्चर’ का अड्डा ज्यादा बन चुका है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ठेकेदारों के भुगतान तक कथित कमीशन के आधार पर हो रहे हैं—“जिसकी ‘सेटिंग’ है उसका भुगतान, बाकी का इंतजार”—यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। बाईट। रणधीर शर्मा भाजपा विधायक एंट्री टैक्स पर सरकार घिरी, सदन को किया गुमराह रणधीर शर्मा ने एंट्री टैक्स के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में एक बात कही और उसी दिन जारी अधिसूचना में कुछ और लागू कर दिया। उन्होंने कहा कि 5-सीटर वाहनों पर ₹100 एंट्री टैक्स लगाकर सरकार ने सीधे आम जनता की जेब पर हमला किया है।कहीं पुराने बढ़े हुए रेट वसूले गए कहीं नई अधिसूचना के अनुसार टैक्स लिया गया जनता और परिवहन क्षेत्र में भारी भ्रम और आक्रोश रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला न केवल व्यापार, टैक्सी ऑपरेटर, ट्रांसपोर्टर्स पर बोझ है बल्कि इससे महंगाई भी बढ़ेगी और पर्यटन उद्योग को भी नुकसान होगा। बाईट। रणधीर शर्मा भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पंचायती राज चुनाव टालने और उसमें धांधली करने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च को रोस्टर जारी होना था, लेकिन सरकार ने बैकडेट में अधिसूचना जारी कर उपायुक्तों को 5% तक बदलाव की शक्ति दे दी। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 243(D) और पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन बताया। “यह 5% नहीं, पूरे रोस्टर के साथ छेड़छाड़ का रास्ता है—एक सीट बदली तो पूरी श्रृंखला बदल जाएगी,” उन्होंने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसा कानूनी विवाद पैदा करना चाहती है जिससे चुनाव टल जाएं, क्योंकि सरकार को अपनी हार का डर सता रहा है। बाईट। रणधीर शर्मा भाजपा विधायक1