*15 को 16 तारीख का अखबार कैसे? AI से बना फर्जी 'दैनिक जनप्रहरी' वायरल, सरपंच पति भरत परिहार ने कहा- ये साजिश है* *अमोलपठा शराब दुकान विवाद में मुकेश कुमार शासक पर FIR की मांग, बोले- RNI में नहीं है अखबार, ChatGPT से बनाई गई कटिंग* *Jitendra Singh Parihar mo.8007910624* शिवपुरी/अमोलपठा। अमोलपठा कंपोजिट शराब दुकान विवाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'दैनिक जनप्रहरी' की अखबार कटिंग को सरपंच पति भरत परिहार ने फर्जी, कूटरचित और AI से बनाई हुई बताया है। भरत परिहार ने कहा कि आज मंगलवार, 15 सितंबर 2026 है, जबकि वायरल कटिंग पर मंगलवार, 16 सितंबर 2026, वर्ष 12 अंक 218 छपा है। सवाल है कि 15 तारीख को 16 तारीख का अखबार एक दिन पहले कैसे छप गया? यही इस कटिंग के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने बताया कि यह कोई RNI से रजिस्टर्ड अखबार नहीं है। शिवपुरी संस्करण में 'दैनिक जनप्रहरी' नाम का कोई वैध प्रकाशन ही नहीं है। इसका फॉन्ट, डिजाइन और फोटो पर लिखा नाम AI इमेज जनरेटर से बना लगता है। क्या है पूरा मामला और सरपंच पति का पक्ष क्या है? 10 सितंबर को अमोलपठा बस स्टैंड स्थित कंपोजिट शराब दुकान पर विवाद हुआ था, जिसमें अमोला पुलिस ने 21 लोगों पर कार्रवाई की है। वायरल फर्जी खबर में आरोप लगाया गया है कि भरत परिहार ने भीड़ को उकसाया और सोशल मीडिया पर आवाहन किया। इस पर भरत परिहार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है - "घटना के दिन मैं मौके पर था, लेकिन उपद्रव करने के लिए नहीं, बल्कि गांव के लोगों के साथ पुलिस चौकी में आवेदन दिलवाने गया था। आवेदन में मांग थी कि कलारी (शराब दुकान) को बस स्टैंड से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए, क्योंकि वहां पास में सरकारी स्कूल और मंदिर है। लोगों में इसी बात को लेकर आक्रोश था।" "मैंने लोगों को समझाया भी था कि उपद्रव न करें, कानून अपने हाथ में न लें। मेरे रोकने के बावजूद कुछ लोगों ने नहीं माना और तोड़फोड़ कर दी। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, मैं निर्दोष हूं। पुलिस की जांच में भी 21 आरोपियों के कथन में कहीं मेरा नाम नहीं है, इसीलिए पुलिस ने मुझे आरोपी नहीं बनाया और न ही कोई नोटिस दिया।" उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता मुकेश कुमार शासक कौन हैं, उनका अमोलपठा से क्या संबंध है और वह किसके इशारे पर एसपी-कलेक्टर को आवेदन देने की बात कहकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। पुलिस अधीक्षक से FIR की मांग भरत परिहार ने कहा कि 15 तारीख को 16 तारीख का भविष्य का अखबार छापना प्रेस काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है और यह IT एक्ट और मानहानि के दायरे में आता है। उन्होंने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' के संपादक और इस कटिंग को फेसबुक पर वायरल करने वाले मुकेश कुमार शासक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4), 356 मानहानि और IT एक्ट 66C, 66D के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए और फेसबुक पोस्ट को डिलीट कराया जाए। --- आपका SP वाला आवेदन भी इसी नई लाइन के साथ अपडेट कर दिया है - विषय: फर्जी अखबार बनाकर बदनाम करने वाले के खिलाफ कार्रवाई बाबत। सेवा में, श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी महोदय, मैं भरत परिहार, पति सरपंच, ग्राम अमोलपठा का निवासी हूं। निवेदन है कि 10 सितंबर को अमोलपठा में शराब दुकान को बस स्टैंड से हटाने को लेकर ग्रामीणों द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन दिया गया था, जिसमें मैं भी साथ था। दुकान के पास स्कूल-मंदिर होने से ग्रामीणों में रोष था। मैंने मौके पर लोगों को उपद्रव करने से रोका भी था। इसके बावजूद मुकेश कुमार शासक द्वारा 15 सितंबर को 16 सितंबर 2026 की तारीख का एक फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' की कटिंग ChatGPT/AI से बनाकर मुझे आरोपी बताते हुए वायरल की जा रही है, जबकि अमोला पुलिस द्वारा बनाए गए 21 आरोपियों में मेरा नाम नहीं है। अतः उक्त व्यक्ति के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की कृपा करें। दिनांक 15/09/2026 प्रार्थी - भरत परिहार *15 को 16 तारीख का अखबार कैसे? AI से बना फर्जी 'दैनिक जनप्रहरी' वायरल, सरपंच पति भरत परिहार ने कहा- ये साजिश है* *अमोलपठा शराब दुकान विवाद में मुकेश कुमार शासक पर FIR की मांग, बोले- RNI में नहीं है अखबार, ChatGPT से बनाई गई कटिंग* *Jitendra Singh Parihar mo.8007910624* शिवपुरी/अमोलपठा। अमोलपठा कंपोजिट शराब दुकान विवाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'दैनिक जनप्रहरी' की अखबार कटिंग को सरपंच पति भरत परिहार ने फर्जी, कूटरचित और AI से बनाई हुई बताया है। भरत परिहार ने कहा कि आज मंगलवार, 15 सितंबर 2026 है, जबकि वायरल कटिंग पर मंगलवार, 16 सितंबर 2026, वर्ष 12 अंक 218 छपा है। सवाल है कि 15 तारीख को 16 तारीख का अखबार एक दिन पहले कैसे छप गया? यही इस कटिंग के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने बताया कि यह कोई RNI से रजिस्टर्ड अखबार नहीं है। शिवपुरी संस्करण में 'दैनिक जनप्रहरी' नाम का कोई वैध प्रकाशन ही नहीं है। इसका फॉन्ट, डिजाइन और फोटो पर लिखा नाम AI इमेज जनरेटर से बना लगता है। क्या है पूरा मामला और सरपंच पति का पक्ष क्या है? 10 सितंबर को अमोलपठा बस स्टैंड स्थित कंपोजिट शराब दुकान पर विवाद हुआ था, जिसमें अमोला पुलिस ने 21 लोगों पर कार्रवाई की है। वायरल फर्जी खबर में आरोप लगाया गया है कि भरत परिहार ने भीड़ को उकसाया और सोशल मीडिया पर आवाहन किया। इस पर भरत परिहार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है - "घटना के दिन मैं मौके पर था, लेकिन उपद्रव करने के लिए नहीं, बल्कि गांव के लोगों के साथ पुलिस चौकी में आवेदन दिलवाने गया था। आवेदन में मांग थी कि कलारी (शराब दुकान) को बस स्टैंड से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए, क्योंकि वहां पास में सरकारी स्कूल और मंदिर है। लोगों में इसी बात को लेकर आक्रोश था।" "मैंने लोगों को समझाया भी था कि उपद्रव न करें, कानून अपने हाथ में न लें। मेरे रोकने के बावजूद कुछ लोगों ने नहीं माना और तोड़फोड़ कर दी। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, मैं निर्दोष हूं। पुलिस की जांच में भी 21 आरोपियों के कथन में कहीं मेरा नाम नहीं है, इसीलिए पुलिस ने मुझे आरोपी नहीं बनाया और न ही कोई नोटिस दिया।" उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता मुकेश कुमार शासक कौन हैं, उनका अमोलपठा से क्या संबंध है और वह किसके इशारे पर एसपी-कलेक्टर को आवेदन देने की बात कहकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। पुलिस अधीक्षक से FIR की मांग भरत परिहार ने कहा कि 15 तारीख को 16 तारीख का भविष्य का अखबार छापना प्रेस काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है और यह IT एक्ट और मानहानि के दायरे में आता है। उन्होंने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' के संपादक और इस कटिंग को फेसबुक पर वायरल करने वाले मुकेश कुमार शासक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4), 356 मानहानि और IT एक्ट 66C, 66D के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए और फेसबुक पोस्ट को डिलीट कराया जाए। --- आपका SP वाला आवेदन भी इसी नई लाइन के साथ अपडेट कर दिया है - विषय: फर्जी अखबार बनाकर बदनाम करने वाले के खिलाफ कार्रवाई बाबत। सेवा में, श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी महोदय, मैं भरत परिहार, पति सरपंच, ग्राम अमोलपठा का निवासी हूं। निवेदन है कि 10 सितंबर को अमोलपठा में शराब दुकान को बस स्टैंड से हटाने को लेकर ग्रामीणों द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन दिया गया था, जिसमें मैं भी साथ था। दुकान के पास स्कूल-मंदिर होने से ग्रामीणों में रोष था। मैंने मौके पर लोगों को उपद्रव करने से रोका भी था। इसके बावजूद मुकेश कुमार शासक द्वारा 15 सितंबर को 16 सितंबर 2026 की तारीख का एक फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' की कटिंग ChatGPT/AI से बनाकर मुझे आरोपी बताते हुए वायरल की जा रही है, जबकि अमोला पुलिस द्वारा बनाए गए 21 आरोपियों में मेरा नाम नहीं है। अतः उक्त व्यक्ति के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की कृपा करें। दिनांक 15/09/2026 प्रार्थी - भरत परिहार
*15 को 16 तारीख का अखबार कैसे? AI से बना फर्जी 'दैनिक जनप्रहरी' वायरल, सरपंच पति भरत परिहार ने कहा- ये साजिश है* *अमोलपठा शराब दुकान विवाद में मुकेश कुमार शासक पर FIR की मांग, बोले- RNI में नहीं है अखबार, ChatGPT से बनाई गई कटिंग* *Jitendra Singh Parihar mo.8007910624* शिवपुरी/अमोलपठा। अमोलपठा कंपोजिट शराब दुकान विवाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'दैनिक जनप्रहरी' की अखबार कटिंग को सरपंच पति भरत परिहार ने फर्जी, कूटरचित और AI से बनाई हुई बताया है। भरत परिहार ने कहा कि आज मंगलवार, 15 सितंबर 2026 है, जबकि वायरल कटिंग पर मंगलवार, 16 सितंबर 2026, वर्ष 12 अंक 218 छपा है। सवाल है कि 15 तारीख को 16 तारीख का अखबार एक दिन पहले कैसे छप गया? यही इस कटिंग के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने बताया कि यह कोई RNI से रजिस्टर्ड अखबार नहीं है। शिवपुरी संस्करण में 'दैनिक जनप्रहरी' नाम का कोई वैध प्रकाशन ही नहीं है। इसका फॉन्ट, डिजाइन और फोटो पर लिखा नाम AI इमेज जनरेटर से बना लगता है। क्या है पूरा मामला और सरपंच पति का पक्ष क्या है? 10 सितंबर को अमोलपठा बस स्टैंड स्थित कंपोजिट शराब दुकान पर विवाद हुआ था, जिसमें अमोला पुलिस ने 21 लोगों पर कार्रवाई की है। वायरल फर्जी खबर में आरोप लगाया गया है कि भरत परिहार ने भीड़ को उकसाया और सोशल मीडिया पर आवाहन किया। इस पर भरत परिहार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है - "घटना के दिन मैं मौके पर था, लेकिन उपद्रव करने के लिए नहीं, बल्कि गांव के लोगों के साथ पुलिस चौकी में आवेदन दिलवाने गया था। आवेदन में मांग थी कि कलारी (शराब दुकान) को बस स्टैंड से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए, क्योंकि वहां पास में सरकारी स्कूल और मंदिर है। लोगों में इसी बात को लेकर आक्रोश था।" "मैंने लोगों को समझाया भी था कि उपद्रव न करें, कानून अपने हाथ में न लें। मेरे रोकने के बावजूद कुछ लोगों ने नहीं माना और तोड़फोड़ कर दी। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, मैं निर्दोष हूं। पुलिस की जांच में भी 21 आरोपियों के कथन में कहीं मेरा नाम नहीं है, इसीलिए पुलिस ने मुझे आरोपी नहीं बनाया और न ही कोई नोटिस दिया।" उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता मुकेश कुमार शासक कौन हैं, उनका अमोलपठा से क्या संबंध है और वह किसके इशारे पर एसपी-कलेक्टर को आवेदन देने की बात कहकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। पुलिस अधीक्षक से FIR की मांग भरत परिहार ने कहा कि 15 तारीख को 16 तारीख का भविष्य का अखबार छापना प्रेस काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है और यह IT एक्ट और मानहानि के दायरे में आता है। उन्होंने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' के संपादक और इस कटिंग को फेसबुक पर वायरल करने वाले मुकेश कुमार शासक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4), 356 मानहानि और IT एक्ट 66C, 66D के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए और फेसबुक पोस्ट को डिलीट कराया जाए। --- आपका SP वाला आवेदन भी इसी नई लाइन के साथ अपडेट कर दिया है - विषय: फर्जी अखबार बनाकर बदनाम करने वाले के खिलाफ कार्रवाई बाबत। सेवा में, श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी महोदय, मैं भरत परिहार, पति सरपंच, ग्राम अमोलपठा का निवासी हूं। निवेदन है कि 10 सितंबर को अमोलपठा में शराब दुकान को बस स्टैंड से हटाने को लेकर ग्रामीणों द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन दिया गया था, जिसमें मैं भी साथ था। दुकान के पास स्कूल-मंदिर होने से ग्रामीणों में रोष था। मैंने मौके पर लोगों को उपद्रव करने से रोका भी था। इसके बावजूद मुकेश कुमार शासक द्वारा 15 सितंबर को 16 सितंबर 2026 की तारीख का एक फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' की कटिंग ChatGPT/AI से बनाकर मुझे आरोपी बताते हुए वायरल की जा रही है, जबकि अमोला पुलिस द्वारा बनाए गए 21 आरोपियों में मेरा नाम नहीं है। अतः उक्त व्यक्ति के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की कृपा करें। दिनांक 15/09/2026 प्रार्थी - भरत परिहार *15 को 16 तारीख का अखबार कैसे? AI से बना फर्जी 'दैनिक जनप्रहरी' वायरल, सरपंच पति भरत परिहार ने कहा- ये साजिश है* *अमोलपठा शराब दुकान विवाद में मुकेश कुमार शासक पर FIR की मांग, बोले- RNI में नहीं है अखबार, ChatGPT से बनाई गई कटिंग* *Jitendra Singh Parihar mo.8007910624* शिवपुरी/अमोलपठा। अमोलपठा कंपोजिट शराब दुकान विवाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'दैनिक जनप्रहरी' की अखबार कटिंग को सरपंच पति भरत परिहार ने फर्जी, कूटरचित और AI से बनाई हुई बताया है। भरत परिहार ने कहा कि आज मंगलवार, 15 सितंबर 2026 है, जबकि वायरल कटिंग पर मंगलवार, 16 सितंबर 2026, वर्ष 12 अंक 218 छपा है। सवाल है कि 15 तारीख को 16 तारीख का अखबार एक दिन पहले कैसे छप गया? यही इस कटिंग के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने बताया कि यह कोई RNI से रजिस्टर्ड अखबार नहीं है। शिवपुरी संस्करण में 'दैनिक जनप्रहरी' नाम का कोई वैध प्रकाशन ही नहीं है। इसका फॉन्ट, डिजाइन और फोटो पर लिखा नाम AI इमेज जनरेटर से बना लगता है। क्या है पूरा मामला और सरपंच पति का पक्ष क्या है? 10 सितंबर को अमोलपठा बस स्टैंड स्थित कंपोजिट शराब दुकान पर विवाद हुआ था, जिसमें अमोला पुलिस ने 21 लोगों पर कार्रवाई की है। वायरल फर्जी खबर में आरोप लगाया गया है कि भरत परिहार ने भीड़ को उकसाया और सोशल मीडिया पर आवाहन किया। इस पर भरत परिहार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है - "घटना के दिन मैं मौके पर था, लेकिन उपद्रव करने के लिए नहीं, बल्कि गांव के लोगों के साथ पुलिस चौकी में आवेदन दिलवाने गया था। आवेदन में मांग थी कि कलारी (शराब दुकान) को बस स्टैंड से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए, क्योंकि वहां पास में सरकारी स्कूल और मंदिर है। लोगों में इसी बात को लेकर आक्रोश था।" "मैंने लोगों को समझाया भी था कि उपद्रव न करें, कानून अपने हाथ में न लें। मेरे रोकने के बावजूद कुछ लोगों ने नहीं माना और तोड़फोड़ कर दी। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, मैं निर्दोष हूं। पुलिस की जांच में भी 21 आरोपियों के कथन में कहीं मेरा नाम नहीं है, इसीलिए पुलिस ने मुझे आरोपी नहीं बनाया और न ही कोई नोटिस दिया।" उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता मुकेश कुमार शासक कौन हैं, उनका अमोलपठा से क्या संबंध है और वह किसके इशारे पर एसपी-कलेक्टर को आवेदन देने की बात कहकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। पुलिस अधीक्षक से FIR की मांग भरत परिहार ने कहा कि 15 तारीख को 16 तारीख का भविष्य का अखबार छापना प्रेस काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है और यह IT एक्ट और मानहानि के दायरे में आता है। उन्होंने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' के संपादक और इस कटिंग को फेसबुक पर वायरल करने वाले मुकेश कुमार शासक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4), 356 मानहानि और IT एक्ट 66C, 66D के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए और फेसबुक पोस्ट को डिलीट कराया जाए। --- आपका SP वाला आवेदन भी इसी नई लाइन के साथ अपडेट कर दिया है - विषय: फर्जी अखबार बनाकर बदनाम करने वाले के खिलाफ कार्रवाई बाबत। सेवा में, श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी महोदय, मैं भरत परिहार, पति सरपंच, ग्राम अमोलपठा का निवासी हूं। निवेदन है कि 10 सितंबर को अमोलपठा में शराब दुकान को बस स्टैंड से हटाने को लेकर ग्रामीणों द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन दिया गया था, जिसमें मैं भी साथ था। दुकान के पास स्कूल-मंदिर होने से ग्रामीणों में रोष था। मैंने मौके पर लोगों को उपद्रव करने से रोका भी था। इसके बावजूद मुकेश कुमार शासक द्वारा 15 सितंबर को 16 सितंबर 2026 की तारीख का एक फर्जी अखबार 'दैनिक जनप्रहरी' की कटिंग ChatGPT/AI से बनाकर मुझे आरोपी बताते हुए वायरल की जा रही है, जबकि अमोला पुलिस द्वारा बनाए गए 21 आरोपियों में मेरा नाम नहीं है। अतः उक्त व्यक्ति के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की कृपा करें। दिनांक 15/09/2026 प्रार्थी - भरत परिहार
- सिंध नदी में 13 वर्षीय मासूम डूबा, तलाश में जुटे गोताखोर बिजरौनी और घुरवार घाट के बीच हुआ हादसा, पुलिस मौके पर पहुंची; SDERF की रेस्क्यू टीम भी बुलाई गई शिवपुरी। जिले के इंदार थाना क्षेत्र में सिंध नदी में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। ग्राम बिजरौनी और घुरवार घाट के बीच सिंध नदी में 13 वर्षीय मासूम के डूबने की सूचना से इलाके में हड़कंप मच गया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार बिजरौनी गांव निवासी 13 वर्षीय सौरभ पुत्र बब्लू कुशवाहा अपनी मां के साथ सिंध नदी की ओर गया था। इसी दौरान वह नदी में डूब गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल बच्चे की तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, स्थानीय गोताखोर तलाश में जुटे घटना की सूचना मिलते ही इंदार थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों और स्थानीय गोताखोरों की मदद से सिंध नदी में मासूम की तलाश शुरू कर दी गई है। नदी के आसपास लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मासूम के नदी में डूबने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। हर कोई बच्चे के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए है। SDERF टीम को भी बुलाया गया हादसे की गंभीरता को देखते हुए SDERF की रेस्क्यू टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। टीम के पहुंचने के बाद नदी में सर्च ऑपरेशन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। पुलिस और ग्रामीण गोताखोर फिलहाल अपने स्तर पर बच्चे की तलाश में जुटे हुए हैं। फिलहाल मासूम सौरभ के नदी में डूबने के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। समाचार लिखे जाने तक मासूम की तलाश जारी थी। पुलिस, स्थानीय गोताखोरों और रेस्क्यू टीम की मदद से बच्चे को खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं।1
- दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! समाजसेवी कल्लू महाराज ने उठाई जांच की मांग *दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! समाजसेवी कल्लू महाराज ने उठाई जांच की मांग* *खसरा नंबर 347 की जमीन को लेकर गंभीर सवाल, मृत व्यक्ति की जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई? कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से पुनः जांच की मांग* दिनारा/शिवपुरी। दिनारा क्षेत्र में भूमि संबंधी विवादों और कथित अवैध कब्जों को लेकर समाजसेवी कल्लू महाराज ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनों पर दबंगों तथा कथित भूमि माफियाओं की नजर है। उनका कहना है कि कई मामलों में जमीनों की रजिस्ट्री, वास्तविक रकबे और मौके पर कब्जे की स्थिति की जांच की आवश्यकता है। समाजसेवी कल्लू महाराज ने शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से दिनारा क्षेत्र में भूमि संबंधी मामलों की व्यापक जांच एवं आवश्यकतानुसार अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है। *खसरा नंबर 347 को लेकर उठे गंभीर सवाल* कल्लू महाराज ने दिनारा में अशोक होटल के पास स्थित खसरा नंबर 347 की जमीन को लेकर विशेष जांच की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि उक्त जमीन में उपलब्ध वास्तविक रकबे और दस्तावेजों में दर्ज रकबे के बीच अंतर की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा, सीमांकन, रजिस्ट्री दस्तावेज और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए। यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में कोई अंतर पाया जाता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए। *मृत व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री का दावा, जांच की मांग* कल्लू महाराज ने एक और गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैजनाथ पुत्र जगदीश तिवारी, जिनके बारे में बताया गया है कि उनका निधन हो चुका है, उनसे संबंधित जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई—इसकी भी जांच होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित रजिस्ट्री के दस्तावेज, विक्रेता की पहचान, हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान, पंजीयन कार्यालय के रिकॉर्ड तथा संबंधित राजस्व दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए। *गरीब कोर्ट के चक्कर कैसे काटे* समाजसेवी कल्लू महाराज का कहना है कि जमीन विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को होती है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई लोग लंबे समय तक न्यायालयों के चक्कर नहीं काट पाते और इसी वजह से वे दबाव में समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में गरीब लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। *दिनारा में अभियान चलाकर कब्जों की जांच की मांग* कल्लू महाराज ने कहा कि दिनारा क्षेत्र में कॉलोनियों, मुख्य सड़कों के आसपास बने मकानों और अन्य भूमि पर कथित कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी भी व्यक्ति की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत हो तो रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी के पास दबाव, प्रभाव या आर्थिक ताकत अधिक होने के कारण उसे किसी दूसरे की जमीन पर अधिकार नहीं मिल सकता। राजस्व रिकॉर्ड और कानून के आधार पर ही वास्तविक मालिकाना हक तथा कब्जे की स्थिति तय होनी चाहिए। “एक बार फिर चलाया जाए विशेष अभियान” कल्लू महाराज ने कलेक्टर और एसडीएम से मांग की है कि दिनारा क्षेत्र में भूमि विवादों को लेकर विशेष अभियान चलाया जाए। इस दौरान संदिग्ध रजिस्ट्री, विवादित भूमि, सरकारी जमीन, रास्तों और कथित अवैध कब्जों की शिकायतों की जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से खसरा नंबर 347 सहित उन जमीनों का सीमांकन कराने की मांग की है, जिनके रकबे अथवा स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक जांच से सामने आ सकता है पूरा सच कल्लू महाराज ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हैं। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेजों और जमीनों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा और करैरा एसडीएम से अपील की है कि दिनारा में भूमि संबंधी शिकायतों की गंभीरता से जांच कराकर गरीब एवं वास्तविक भू-स्वामियों को न्याय दिलाया जाए। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि खसरा नंबर 347 सहित अन्य विवादित जमीनों में रजिस्ट्री, रकबे, स्वामित्व और कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।1
- ऑपरेशन ईगल में भितरवार पुलिस की बड़ी कार्रवाई, युवक दो अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार ऑपरेशन ईगल में भितरवार पुलिस की बड़ी कार्रवाई, युवक दो अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार #highlightseveryone #bhitarwar #gwalior1
- दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! खसरा नंबर 347 को लेकर उठे सवाल, मृत व्यक्ति से जुड़ी कथित रजिस्ट्री की जांच की मांग — कलेक्टर व एसडीएम से निष्पक्ष जांच की अपील दिनारा/शिवपुरी। दिनारा क्षेत्र में भूमि विवाद और कथित अवैध कब्जों को लेकर समाजसेवी कल्लू महाराज ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनों पर दबंगों एवं कथित भूमि माफियाओं की नजर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कल्लू महाराज ने कलेक्टर अर्पित वर्मा एवं करैरा एसडीएम से मांग की है कि भूमि संबंधी शिकायतों में राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, नक्शा, सीमांकन और मौके की स्थिति का मिलान कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। खसरा नंबर 347 को लेकर जांच की मांग दिनारा में अशोक होटल के पास स्थित खसरा नंबर 347 को लेकर उन्होंने विशेष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन के दस्तावेजों में दर्ज रकबे और मौके पर मौजूद वास्तविक रकबे की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संबंधित भूमि का सीमांकन कराकर राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और पंजीयन दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मृत व्यक्ति से संबंधित रजिस्ट्री पर सवाल कल्लू महाराज ने बैजनाथ पुत्र जगदीश तिवारी से संबंधित जमीन की कथित रजिस्ट्री को लेकर भी जांच की मांग उठाई है। उनका सवाल है कि यदि संबंधित व्यक्ति का निधन पहले हो चुका था, तो उनके नाम से जुड़ी जमीन की रजिस्ट्री किस प्रकार हुई। उन्होंने प्रशासन से रजिस्ट्री दस्तावेज, पंजीयन कार्यालय के रिकॉर्ड, विक्रेता की पहचान, हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान तथा संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। गरीब परिवारों को न्याय दिलाने की मांग कल्लू महाराज का कहना है कि भूमि विवादों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गरीब लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व अधिकारियों के माध्यम से मौके पर जांच कराई जाए। दिनारा में विशेष अभियान की मांग उन्होंने दिनारा क्षेत्र में विवादित जमीनों, संदिग्ध रजिस्ट्री, सरकारी भूमि, रास्तों और कथित अवैध कब्जों की शिकायतों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का वास्तविक अधिकार केवल दबाव या प्रभाव से तय नहीं होना चाहिए, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड और कानून के आधार पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। जांच के बाद सामने आएगा सच कल्लू महाराज ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा उठाए गए सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच की मांग के रूप में हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों और मौके की स्थिति का निष्पक्ष सत्यापन होने से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अब खसरा नंबर 347 सहित अन्य विवादित जमीनों के रकबे, स्वामित्व, रजिस्ट्री और कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह प्रशासनिक एवं राजस्व जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। P.NEWZ INDIA | पत्रकार राम मनोहर मिश्रा दिनारा में जमीनों पर ‘भूमि माफिया’ की नजर का आरोप, गरीब बोले—कागज हमारे, कब्जा दबंगों का! खसरा नंबर 347 को लेकर उठे सवाल, मृत व्यक्ति से जुड़ी कथित रजिस्ट्री की जांच की मांग — कलेक्टर व एसडीएम से निष्पक्ष जांच की अपील दिनारा/शिवपुरी। दिनारा क्षेत्र में भूमि विवाद और कथित अवैध कब्जों को लेकर समाजसेवी कल्लू महाराज ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनों पर दबंगों एवं कथित भूमि माफियाओं की नजर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कल्लू महाराज ने कलेक्टर अर्पित वर्मा एवं करैरा एसडीएम से मांग की है कि भूमि संबंधी शिकायतों में राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, नक्शा, सीमांकन और मौके की स्थिति का मिलान कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। खसरा नंबर 347 को लेकर जांच की मांग दिनारा में अशोक होटल के पास स्थित खसरा नंबर 347 को लेकर उन्होंने विशेष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन के दस्तावेजों में दर्ज रकबे और मौके पर मौजूद वास्तविक रकबे की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संबंधित भूमि का सीमांकन कराकर राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और पंजीयन दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मृत व्यक्ति से संबंधित रजिस्ट्री पर सवाल कल्लू महाराज ने बैजनाथ पुत्र जगदीश तिवारी से संबंधित जमीन की कथित रजिस्ट्री को लेकर भी जांच की मांग उठाई है। उनका सवाल है कि यदि संबंधित व्यक्ति का निधन पहले हो चुका था, तो उनके नाम से जुड़ी जमीन की रजिस्ट्री किस प्रकार हुई। उन्होंने प्रशासन से रजिस्ट्री दस्तावेज, पंजीयन कार्यालय के रिकॉर्ड, विक्रेता की पहचान, हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान तथा संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। गरीब परिवारों को न्याय दिलाने की मांग कल्लू महाराज का कहना है कि भूमि विवादों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गरीब लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व अधिकारियों के माध्यम से मौके पर जांच कराई जाए। दिनारा में विशेष अभियान की मांग उन्होंने दिनारा क्षेत्र में विवादित जमीनों, संदिग्ध रजिस्ट्री, सरकारी भूमि, रास्तों और कथित अवैध कब्जों की शिकायतों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का वास्तविक अधिकार केवल दबाव या प्रभाव से तय नहीं होना चाहिए, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड और कानून के आधार पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। जांच के बाद सामने आएगा सच कल्लू महाराज ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा उठाए गए सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच की मांग के रूप में हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों और मौके की स्थिति का निष्पक्ष सत्यापन होने से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अब खसरा नंबर 347 सहित अन्य विवादित जमीनों के रकबे, स्वामित्व, रजिस्ट्री और कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह प्रशासनिक एवं राजस्व जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। P.NEWZ INDIA | पत्रकार राम मनोहर मिश्रा1
- शिवपुरी में 28-29 अगस्त को हुई लगभग 50 लाख रुपये की चोरी से मचा था हड़कंप शिवपुरी शहर की संजय कॉलोनी में 28-29 अगस्त की दरमियानी रात अज्ञात चोरों ने मातादीन चौधरी के घर को निशाना बनाकर लाखों रुपए की नकदी और सामान पर हाथ साफ कर दिया। घटना को कई दिन बीतने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी और चोरी का पूरा खुलासा नहीं होने से पीड़ित परिवार में चिंता बढ़ गई है। आज अग्रवाल समाज शिवपुरी ने पुलिस अधीक्षक से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। समाज ने चोरी का शीघ्र खुलासा, आरोपियों की गिरफ्तारी और चोरी गए माल की बरामदगी की मांग करते हुए पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने की अपील की है। बाइट-सुमत गुप्ता अध्यक्ष अग्रवाल समाज बाइट-मातादीन गुप्ता पीड़ित बाइट-रश्मि पीड़िता2
- radhe rani Mandir Barsana dham Shri Radhe Radhe Radhe Radhe radhe rani Mandir Shri Barsana dham Jay Jay Shri Radhe Jay Shri Radhe Jay Jay Shri Radhe Jay Shri Radhe1
- शिवपुरी में गूंजे 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे: कमलागंज मेंविराजे 17 फीट के राजा, बारिश और ट्टी प्रतिमा के विवाद केबीच धूमधाम से हुई स्थापना1
- Orchha dham Shri Ram Raja Sarkar Jay Siyaram Jay Siyaram Jay Jay Siyaram Jay Siyaram Orchha dham Ram Raja Sarkar ka Pavan janm sthan hai Jay Shri Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe1