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Available for Sale Locality : Chhatikara se Radhakund Road Area (dimensions) : 1 बीघा पक्का है Expected Price : 350000000 Property Type : Agricultural / Farm Land इलाका : Chhatikara se Radhakund Road क्षेत्रफल : 1 बीघा पक्का है अपेक्षित कीमत : 350000000 प्रॉपर्टी का प्रकार : कृषि / खेती की जमीन ral
Gautam
Available for Sale Locality : Chhatikara se Radhakund Road Area (dimensions) : 1 बीघा पक्का है Expected Price : 350000000 Property Type : Agricultural / Farm Land इलाका : Chhatikara se Radhakund Road क्षेत्रफल : 1 बीघा पक्का है अपेक्षित कीमत : 350000000 प्रॉपर्टी का प्रकार : कृषि / खेती की जमीन ral
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- मथुरा जिले की छाता तहसील क्षेत्र के गांव बिलौटी के समीप स्थित एक प्राचीन मंदिर को तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस घटना को लेकर मंदिर के पुजारी ने प्रशासन पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है और इसे आस्था पर सीधा प्रहार बताया है। जब इस मामले की सच्चाई जानने के लिए कथित कब्जाधारी लोगों से बातचीत का प्रयास किया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, इस कार्रवाई और कथित अवैध निर्माण के संबंध में तहसीलदार का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही यह भी कहा है कि यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई होनी चाहिए। यह मामला फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए लोगों ने बताया कि "भगवान का आशियाना उजाड़ा!" और आजकल जमीनों की बढ़ती कीमतों के कारण पूरे ब्रज क्षेत्र में भूमाफियाओं का हाहाकार मचा हुआ है, जिसके चलते आए दिन दबंगई और अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं। इन स्थितियों को देखकर ब्रज क्षेत्र के अस्तित्व पर ही सवाल उठ रहे हैं, और अब देखना होगा कि योगी जी की सरकार में भूमाफियाओं से पीड़ित लोगों को न्याय मिल पाएगा या नहीं।4
- मथुरा जिले की महावन तहसील के बलदेव पोस्ट स्थित ग्राम पंचायत हथोड़ा में परिक्रमा मार्ग पर लगा एक नल पिछले 6 महीने से खराब पड़ा है। यहां के ग्राम प्रधान ने इसकी मरम्मत नहीं करवाई है, जिसके कारण परिक्रमा यात्री, ग्रामीण और आम जनता गंभीर रूप से परेशान हैं और पानी को लेकर समस्या का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन किया है कि वे इस मुद्दे को तत्काल संज्ञान में लें और इस नल को जल्द से जल्द ठीक कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। ग्रामीणों की यह भी मांग है कि सरकार ग्राम प्रधानों पर शिकंजा कसते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने और उनका निवारण करे।1
- मथुरा जिले की महावन तहसील के बलदेव विकासखंड स्थित झरोठा गांव में एक मॉडल दुकान का निर्माण किया जा रहा है, जिसके चलते कार्डधारकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने इस निर्माण पर चिंता व्यक्त की है। यह प्रस्तावित दुकान गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर 'जंगल' जैसे इलाके में बनाई जा रही है। वहाँ तक पहुँचने के लिए कोई उचित रास्ता नहीं है, और बारिश के मौसम में खेत पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं, जिससे आवागमन असंभव हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह स्थान बहन-बेटियों के लिए उचित नहीं है, और विकलांग तथा वृद्ध व्यक्ति तो वहाँ तक पहुँच ही नहीं पाएँगे। इन सभी कारणों के चलते, कार्डधारकों की मुश्किलें काफी बढ़ेंगी। आरोप है कि अधिकारियों ने इन समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया और इस मॉडल शॉप को ऐसे दुर्गम स्थान पर बनाने का निर्णय लिया।1
- जनपद मथुरा में नन्हे-नन्हे हाथों ने अपनी गुल्लक में जमा किए पैसों का सदुपयोग करते हुए बृजचोरासी परिक्रमार्थियों को सरबत पिलाया। इस कार्य से बच्चों ने बड़े संस्कारों का परिचय दिया और सेवाभाव का अनूठा उदाहरण पेश किया। उन्होंने अपनी बचत से मिले पैसों को धर्मार्थ कार्य में लगाकर राहगीरों को गर्मी में राहत प्रदान की, जिससे उनकी परिक्रमार्थियों के प्रति आदर और समाज सेवा की भावना स्पष्ट होती है।1
- मथुरा वृंदावन नगर निगम के खुले नाले एक बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि शहर में मौजूद खुले नाले किसी गंभीर हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय अपने एक दिवसीय धार्मिक दौरे पर शुक्रवार को वृंदावन व गोवर्धन पहुंचे। वृंदावन स्थित यशोगोपाल रिसॉर्ट में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति और विभिन्न सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की। अजय राय ने आरोप लगाया कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, जबकि सरकार इन बुनियादी समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। उन्होंने वृंदावन जैसे पवित्र तीर्थ स्थल पर भी बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्थानीय निवासियों की समस्याओं को उठाया। राय ने दावा किया कि भाजपा सरकार केवल विज्ञापनों में विकास दिखाती है, जबकि धरातल पर वास्तविक स्थितियाँ बदतर हैं। अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि अब जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस ही भाजपा की जनविरोधी नीतियों का सही विकल्प है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनौतियों के लिए तैयार रहने और लोगों के बीच जाकर सरकार की विफलताओं को उजागर करने का आह्वान किया।4
- मथुरा के हथोड़ा ग्राम पंचायत में परिक्रमा मार्ग पर भारी जलभराव की समस्या सामने आई है, जिससे परिक्रमा यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग पर पानी भरने के कारण परिक्रमा यात्री लगातार गिर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस गंभीर समस्या पर तत्काल सुनवाई कर परिक्रमा मार्ग से पानी निकालने की जल्द से जल्द व्यवस्था करने की मांग की है।1
- समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कासगंज में एक जोरदार संबोधन दिया, जहाँ उन्होंने तीखे आरोप लगाए। अपने भाषण के दौरान, अखिलेश यादव ने कहा कि बंगाल को लूटा गया है और बिहार में बेईमानी की गई है।1
- मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में संविदा पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने पिछले तीन से चार महीने से वेतन न मिलने और ठेकेदार द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के विरोध में प्रदर्शन और हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें प्रतिमाह केवल ₹6,600 से ₹7,000 का वेतन मिलता है, वह भी समय पर नहीं दिया जाता। ठेका कंपनी पर आरोप है कि उसने कई महीनों से कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया है। लगातार वेतन न मिलने और आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारियों, जिनमें महिला सफाईकर्मी भी शामिल हैं, ने कामकाज ठप करके अपना गुस्सा व्यक्त किया। महिला कर्मियों ने विशेष रूप से आरोप लगाया है कि उन्हें रात के समय बिना किसी सुरक्षा के अकेले शव गृह (मर्च्युरी) में शव रखने जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भेजा जाता है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब वे वेतन के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से बात करते हैं, तो वे इस मामले को सीधे ठेकेदार पर टाल देते हैं।4