चुरहट -“नेहरू तिराहा बना ‘जाम चौक’ — प्रशासन मौन” जनता हो रही परेशान “नेहरू तिराहा बना ‘जाम चौक’ — प्रशासन मौन, जनता परेशान” चुरहट सीधी जिले के चुरहट बाजार का नेहरू तिराहा इन दिनों यातायात व्यवस्था की नहीं, बल्कि अव्यवस्था की मिसाल बन चुका है। सुबह से शाम तक यहां वाहनों की लंबी कतारें ऐसे खड़ी रहती हैं मानो किसी अदृश्य आयोजन का हिस्सा हों। आम नागरिकों के लिए यह तिराहा अब रास्ता कम और परीक्षा अधिक बन गया है—जहां धैर्य, समय और सहनशीलता तीनों की कड़ी परीक्षा होती है। - स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फुटपाथ, जो पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए थे, अब “स्थायी दुकानों” और अस्थायी अतिक्रमणों की शरणस्थली बन चुके हैं। फल, सब्जी, ठेले और दुकानें इतनी शान से जमी हैं कि राहगीरों को सड़क पर उतरना मजबूरी बन जाता है। उधर, वाहन चालक भी नियमों को ताक में रखकर जहां जगह मिली, वहीं गाड़ी खड़ी कर देते हैं—चाहे वह नो-पार्किंग ही क्यों न हो। और इस पूरे दृश्य के बीच, नगरीय प्रशासन की भूमिका किसी मौन साधु से कम नहीं दिखती। मानो उन्होंने तय कर लिया हो कि “देखेंगे, पर कुछ कहेंगे नहीं।” ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए न तो कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है, न ही अतिक्रमण हटाने की कोई गंभीर कोशिश नजर आती है। - स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में नेहरू तिराहा ‘जाम पर्यटन स्थल’ के रूप में प्रसिद्ध हो सकता है। सवाल यह है कि आखिर कब प्रशासन अपनी “मौन तपस्या” तोड़ेगा और जनता को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करेगा? - फिलहाल, चुरहट के लोग हर दिन इस जाम में फंसकर यही सोचते हैं—“क्या यही विकास का रास्ता है?”
चुरहट -“नेहरू तिराहा बना ‘जाम चौक’ — प्रशासन मौन” जनता हो रही परेशान “नेहरू तिराहा बना ‘जाम चौक’ — प्रशासन मौन, जनता परेशान” चुरहट सीधी जिले के चुरहट बाजार का नेहरू तिराहा इन दिनों यातायात व्यवस्था की नहीं, बल्कि अव्यवस्था की मिसाल बन चुका है। सुबह से शाम तक यहां वाहनों की लंबी कतारें ऐसे खड़ी रहती हैं मानो किसी अदृश्य आयोजन का हिस्सा हों। आम नागरिकों के लिए यह तिराहा अब रास्ता कम और परीक्षा अधिक बन गया है—जहां धैर्य, समय और सहनशीलता तीनों की कड़ी परीक्षा होती है। - स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फुटपाथ, जो पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए थे, अब “स्थायी दुकानों” और अस्थायी अतिक्रमणों की शरणस्थली बन चुके हैं। फल, सब्जी, ठेले और दुकानें इतनी शान से जमी हैं कि राहगीरों को सड़क पर उतरना मजबूरी बन जाता है। उधर,
वाहन चालक भी नियमों को ताक में रखकर जहां जगह मिली, वहीं गाड़ी खड़ी कर देते हैं—चाहे वह नो-पार्किंग ही क्यों न हो। और इस पूरे दृश्य के बीच, नगरीय प्रशासन की भूमिका किसी मौन साधु से कम नहीं दिखती। मानो उन्होंने तय कर लिया हो कि “देखेंगे, पर कुछ कहेंगे नहीं।” ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए न तो कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है, न ही अतिक्रमण हटाने की कोई गंभीर कोशिश नजर आती है। - स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में नेहरू तिराहा ‘जाम पर्यटन स्थल’ के रूप में प्रसिद्ध हो सकता है। सवाल यह है कि आखिर कब प्रशासन अपनी “मौन तपस्या” तोड़ेगा और जनता को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करेगा? - फिलहाल, चुरहट के लोग हर दिन इस जाम में फंसकर यही सोचते हैं—“क्या यही विकास का रास्ता है?”
- 💥 *बड़ी खबर*💥 मिर्जापुर-रीवा हाईवे पर भीषण हादसा, बेकाबू ट्रक ने दो गाड़ियों को रौंदा, धू-धू कर जली कारें, कई लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत! उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले में ड्रमंडगंज घाटी के बड़का मोड़ (घुमान) पर हुए इस भीषण सड़क हादसे में शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कम से कम 6 से 8 लोगों की ज़िंदा जलकर मौत हो गई है। कुछ अपुष्ट मीडिया दावों में यह संख्या और भी ज़्यादा बताई जा रही है। दुर्घटना की वजह ढलान पर एक ट्रक का अचानक ब्रेक फेल हो गया। अनियंत्रित ट्रक ने आगे चल रही बोलेरो और एक अन्य कार (स्विफ्ट डिजायर) को ज़ोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि गाड़ियाँ आगे चल रहे गिट्टी से लदे बड़े वाहन और डिवाइडर के बीच फंस गईं और उनमें तुरंत भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज़ी से फैली कि बोलेरो और कार के अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। शवों के पूरी तरह से जल जाने के कारण पुलिस के लिए मृतकों की तत्काल शिनाख्त करना और सटीक संख्या की पुष्टि करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। *मृतकों के नाम और विवरण* मृतकों में अधिकांश लोग मिर्जापुर के जिगना क्षेत्र के निवासी थे, जो मैहर से मुंडन कराकर लौट रहे थे। मृतकों में दो लोग सतना के भी नाम ....उम्र... निवासी ▪️विष्णु सिंह (ड्राइवर) 45 वर्ष रामपुर हंसवार, जिगना, मिर्जापुर ▪️पंकज सिंह 40 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️वंदना सिंह 43 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️बीना सिंह 47 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️पीयूष सिंह 14 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️सोनम सिंह 9 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️शिवा सिंह 8 वर्ष जिगना, मिर्जापुर ▪️प्रियंका सिंह 42 वर्ष सतना, मध्य प्रदेश ▪️कार्तिकेय सिंह 18 वर्ष सतना, मध्य प्रदेश ▪️विकास शर्मा 32 वर्ष सागर, मध्य प्रदेश ▪️जय प्रकाश 27 वर्ष सोनभद्र2
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