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दमोह जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते कई नदी-नाले उफान पर हैं।
सचिन सिंह राजपूत प्रदेश समय
दमोह जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते कई नदी-नाले उफान पर हैं।
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- तिदनी पंचायत में सड़क का निरीक्षण, अधिकारियों ने ली निर्माण संबंधी जानकारी1
- *दमोह ब्रेकिंग: जहरीली शराब के खिलाफ पथरिया में उठी आवाज - थाना प्रभारी और SDM को मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन संगठन ने* *दमोह: *पथरिया में अवैध शराब पर रोक की मांग तेज: नशा मुक्त समाज के लिए भगवती संगठन का हल्ला-बोल, कहा- नगर और गांवों में खुलेआम बिक रही शराब* *जहरीली शराब के खिलाफ ज्ञापन: पथरिया में गूंजी नशा मुक्त समाज की मांग* *दमोह।* पड़ोसी *सागर जिले की तहसील बंडा में जहरीली शराब से 35 लोगों की मौत* के मामले ने पूरे बुंदेलखंड को हिला दिया है। इस दर्दनाक हादसे के विरोध में आज *दमोह जिले के पथरिया* में आवाज उठी। *दिनांक 10/09/2026 को भगवती मानव कल्याण संगठन, शाखा पथरिया* द्वारा *पथरिया थाना प्रभारी एवं एसडीएम महोदय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन* सौंपा गया। *ज्ञापन में 3 बड़ी मांगें* संगठन ने ज्ञापन में मांग की है कि - 1. बंडा जहरीली शराब कांड के *दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई* की जाए। 2. प्रदेश भर में चल रहे *अवैध शराब के कारोबार पर तत्काल रोक* लगाई जाए। 3. *पथरिया नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही अवैध शराब* के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि *"नशा मुक्त समाज"* के निर्माण के लिए उनका संगठन निरंतर प्रयासरत है और अवैध शराब के कारण कई परिवार उजड़ रहे हैं। इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करना जरूरी है।4
- सत्य निकेतन दिल्ली में एक हॉस्टल के गिरने पर NSUI का संघर्ष जारी घटना सिर्फ एक बिल्डिंग का गिरना नहीं है, बल्कि उन परिवारों के सपनों का मलबे में दब जाना है, जो अपने बच्चों को पढ़ने और बेहतर भविष्य बनाने दिल्ली भेजते हैं। हमारी मांग है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सत्य निकेतन दिल्ली में एक हॉस्टल के गिरने पर NSUI का संघर्ष जारी घटना सिर्फ एक बिल्डिंग का गिरना नहीं है, बल्कि उन परिवारों के सपनों का मलबे में दब जाना है, जो अपने बच्चों को पढ़ने और बेहतर भविष्य बनाने दिल्ली भेजते हैं। हमारी मांग है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो1
- पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष बद्री पटेल की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा l दमोह। पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष बद्री पटेल जी की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर दमोह सांसद राहुल सिंह एवं श्री रामकृष्ण कुसमरिया सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने स्वर्गीय बद्री पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।3
- गणेश महोत्सव की आहट… बहोरीबंद में कारीगरों के हाथों ने पकड़ी रफ्तार, मिट्टी से साकार हो रहे गणपति के मनमोहक स्वरूप बहोरीबंद। हर वर्ष आयोजित होने वाले श्री गणेश महोत्सव को लेकर तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के लिए मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कारीगरों के हाथों की बढ़ती रफ्तार के साथ मिट्टी की प्रतिमाएं अब धीरे-धीरे भगवान श्री गणेश के आकर्षक स्वरूप में ढलने लगी हैं। बहोरीबंद के एक मूर्तिकार करीब 50 वर्षों से गणेश प्रतिमाएं बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वे महज 15 वर्ष के थे, तभी से मूर्ति निर्माण का काम शुरू किया था। आज उनकी उम्र करीब 65 वर्ष हो चुकी है, लेकिन गणेश प्रतिमाओं को आकार देने का जुनून आज भी बरकरार है। मूर्तिकार के अनुसार, सामान्य तौर पर एक गणेश प्रतिमा तैयार करने में करीब 3 से 4 दिन का समय लगता है। हालांकि, इस काम में परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग करते हैं, जिससे प्रतिमाओं को कम समय में तैयार किया जा सकता है। परिवार के सदस्य प्रतिमाओं को आकार देने, रंग-रोगन और सजावट सहित अलग-अलग कार्यों में हाथ बंटाते हैं। गणेश महोत्सव नजदीक आने के साथ ही मूर्तिकारों पर प्रतिमाओं को समय पर तैयार करने का दबाव भी बढ़ गया है। कार्यशालाओं में दिनभर हथौड़ी, मिट्टी और रंगों के बीच कारीगर भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वर्षोंज़रूर। आपके दिए गए तथ्यों के आधार पर स्पेशल हेडिंग और न्यूज़-स्टाइल स्क्रिप्ट इस तरह तैयार की जा सकती है: स्पेशल हेडिंग गणेश महोत्सव की आहट… बहोरीबंद में कारीगरों के हाथों ने पकड़ी रफ्तार, मिट्टी से साकार हो रहे गणपति के मनमोहक स्वरूप बहोरीबंद। हर वर्ष आयोजित होने वाले श्री गणेश महोत्सव को लेकर तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के लिए मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कारीगरों के हाथों की बढ़ती रफ्तार के साथ मिट्टी की प्रतिमाएं अब धीरे-धीरे भगवान श्री गणेश के आकर्षक स्वरूप में ढलने लगी हैं। बहोरीबंद के एक मूर्तिकार करीब 50 वर्षों से गणेश प्रतिमाएं बनाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वे महज 15 वर्ष के थे, तभी से मूर्ति निर्माण का काम शुरू किया था। आज उनकी उम्र करीब 65 वर्ष हो चुकी है, लेकिन गणेश प्रतिमाओं को आकार देने का जुनून आज भी बरकरार है। मूर्तिकार के अनुसार, सामान्य तौर पर एक गणेश प्रतिमा तैयार करने में करीब 3 से 4 दिन का समय लगता है। हालांकि, इस काम में परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग करते हैं, जिससे प्रतिमाओं को कम समय में तैयार किया जा सकता है। परिवार के सदस्य प्रतिमाओं को आकार देने, रंग-रोगन और सजावट सहित अलग-अलग कार्यों में हाथ बंटाते हैं। गणेश महोत्सव नजदीक आने के साथ ही मूर्तिकारों पर प्रतिमाओं को समय पर तैयार करने का दबाव भी बढ़ गया है। कार्यशालाओं में दिनभर हथौड़ी, मिट्टी और रंगों के बीच कारीगर भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वर्षों के अनुभव, मेहनत और कला के हुनर से तैयार हो रही ये प्रतिमाएं इस बार भी श्रद्धालुओं के घरों और पंडालों की शोभा बढ़ाएंगी।1
- “बांदकपुर में पानी का कहर! दादा की पूरी गृहस्थी डूबी 💔🌊” चारों तरफ पानी… घर के अंदर पानी… और दादा की जिंदगी भर की गृहस्थी बर्बाद। गेहूं, चावल, आटा, दाल—सब पानी में डूब गया। दादा बोले—“भैया, मेरी मदद करो…” 📞 मदद के लिए: 9109251960 #Bandakpur #DamohNews #BarishKaKahar #GroundReport #SachHameshaNews1
- दमोह। बारिश से प्रभावित क्षेत्र का दौर जारी, नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया1
- खनियाधाना गोलाकोट से 300 किलोमीटर पदयात्रा करते हुए कुण्डलपुर पहुंचे पदयात्री1
- आवारा मवेशियों के गले में लगाए लाल रिफ्लेक्टिव बेल्ट, सड़क हादसों से बचाव की अनूठी पहल l दमोह / पटेरा । पटेरा थाना क्षेत्र के ग्राम तिदनी में आवारा मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीणों ने सराहनीय पहल की है। गांव के संदीप राजपूत, पुष्पेंद्र राजपूत एवं प्रकाश राजपूत ने आवारा मवेशियों के गले में लाल रंग के रेडीमेड रिफ्लेक्टिव बेल्ट लगाए। रात के समय सड़क पर बैठे या घूमते मवेशी वाहन चालकों को आसानी से दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रिफ्लेक्टिव बेल्ट पर वाहन की रोशनी पड़ने से मवेशी दूर से ही दिखाई देने लगेंगे, जिससे वाहन चालक समय रहते सावधानी बरत सकेंगे। ग्रामीणों की इस पहल का उद्देश्य मवेशियों और वाहन चालकों दोनों को सड़क हादसों से बचाना है। स्थानीय लोगों ने इसे जागरूकता और जनभागीदारी से जुड़ी उपयोगी पहल बताते हुए अन्य ग्रामीणों से भी इस तरह के प्रयास करने की अपील की है।2