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रांची झारखंड सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार, विधानसभा में सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय रखा। चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड से बगरा मार्ग के बीच बेलगढ़ा तालाब स्थित फल्गु नदी के उद्गम स्थल की वर्षों से उपेक्षा हो रही है, जबकि यह स्थल धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सदन के माध्यम से सरकार से मांग की कि इस पवित्र स्थल को धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और क्षेत्र का समग्र विकास हो सके। सरकार ने बताया कि इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में घोषित करने के लिए प्रस्ताव जिला पर्यटन संवर्धन परिषद के समक्ष विचारार्थ रखने हेतु निर्देशित किया गया है। सिमरिया क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाते रहेंगे।

on 10 March
user_Aakash Kumar paswan
Aakash Kumar paswan
Artist तांडवा, चतरा, झारखंड•
on 10 March
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रांची झारखंड सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार, विधानसभा में सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय रखा। चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड से बगरा मार्ग के बीच बेलगढ़ा तालाब स्थित फल्गु नदी के उद्गम स्थल की वर्षों से उपेक्षा हो रही है, जबकि यह स्थल धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सदन के माध्यम से सरकार से मांग की कि इस पवित्र स्थल को धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और क्षेत्र का समग्र विकास हो सके। सरकार ने बताया कि इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में घोषित करने के लिए प्रस्ताव जिला पर्यटन संवर्धन परिषद के समक्ष विचारार्थ रखने हेतु निर्देशित किया गया है। सिमरिया क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाते रहेंगे।

More news from झारखंड and nearby areas
  • Post by Lalmohan munda
    2
    Post by Lalmohan munda
    user_Lalmohan munda
    Lalmohan munda
    खेलारी, रांची, झारखंड•
    5 hrs ago
  • हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
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    हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। 
परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। 
घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
    user_Abhay Kumar Singh
    Abhay Kumar Singh
    पत्रकार हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    18 min ago
  • विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
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    विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    18 min ago
  • ✍रंजन चौधरी सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है। यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं। झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
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    ✍रंजन चौधरी
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। 
हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है।
यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं।
झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    38 min ago
  • डुमरी टोल प्लाजा के पास आज का दुखद घटना तीन गाड़ियां टकरा गई जिससे दो गाड़िया पुरी तरह जल कर राख हो गई एक टेलर को स्थानीय लोगों के प्रयास से इंजन वाले हिस्से को बचा लिया गया, चालक का अभी कोई पता नहीं
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    डुमरी टोल प्लाजा के पास आज का दुखद घटना तीन गाड़ियां टकरा गई जिससे दो गाड़िया पुरी तरह जल कर राख हो गई एक टेलर को स्थानीय लोगों के प्रयास से इंजन वाले हिस्से को बचा लिया गया, चालक का अभी कोई पता नहीं
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    5 hrs ago
  • इचाक पुलिस को बड़ी सफलता, चोरी के जेवरात बरामद — एक आरोपी गिरफ्तार
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    इचाक पुलिस को बड़ी सफलता, चोरी के जेवरात बरामद — एक आरोपी गिरफ्तार
    user_झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    7 hrs ago
  • भाजपा के प्रदेश बैठकें एवं कार्यक्रम प्रभारी स्वामी देवेन्द्र प्रकाश ने उमेडण्डा स्थित खुशबू के शोकसंतप्त परिजनों से मिलकर आर्थिक सहायता एवं सांत्वना प्रदान किया। मौके पर स्वामी देवेंद्र प्रकाश ने दलित युवती खुश्बू की निर्मम हत्या को आधुनिक समाज का घृणित कलंक बताते हुए कहा की आज हम देश को हक़ हुकूक़ का क़ानूनरूपी संविधान देनेवाले डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहे हैं लेकिन खुश्बू की आत्मा न्याय की उम्मीद लगाये होगी। उन्होंने कहा की आज बाबा साहेब की जयंती में हम खुशबू को न्याय दिलाने का संकल्प लेते हैं जो आर्थिक सहायता या फोटो खिंचाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मैं खुश्बू के परिजनों के साथ निरंतर सडक से न्यायालय तक हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने केलिये दृढ़ संकल्पित हूँ। उन्होंने समाज की इस बेटी को न्याय दिलाने तक चैन की सांस नहीं लेने की बात कही। मौके पर बिंदू शाहदेव, विजय साहू, विकास साहू, अर्जुन महतो, पवन महतो, राजू राम, तारकेश्वर भारती समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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    भाजपा के प्रदेश बैठकें एवं कार्यक्रम प्रभारी स्वामी देवेन्द्र प्रकाश ने उमेडण्डा स्थित खुशबू के शोकसंतप्त परिजनों से मिलकर आर्थिक सहायता एवं सांत्वना प्रदान किया। मौके पर स्वामी देवेंद्र प्रकाश ने दलित युवती खुश्बू की निर्मम हत्या को आधुनिक समाज का घृणित कलंक बताते हुए कहा की आज हम देश को हक़ हुकूक़ का क़ानूनरूपी संविधान देनेवाले डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहे हैं लेकिन खुश्बू की आत्मा न्याय की उम्मीद लगाये होगी। उन्होंने कहा की आज बाबा साहेब की जयंती में हम खुशबू को न्याय दिलाने का संकल्प लेते हैं जो आर्थिक सहायता या फोटो खिंचाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मैं खुश्बू के परिजनों के साथ निरंतर सडक से न्यायालय तक हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने केलिये दृढ़ संकल्पित हूँ। उन्होंने समाज की इस बेटी को न्याय दिलाने तक चैन की सांस नहीं लेने की बात कही। मौके पर बिंदू शाहदेव, विजय साहू, विकास साहू, अर्जुन महतो, पवन महतो, राजू राम, तारकेश्वर भारती समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
    user_Sanjay kumar
    Sanjay kumar
    Newspaper publisher बुरमू, रांची, झारखंड•
    8 hrs ago
  • उसकी मासूम आवाज़ में छुपी समझदारी ने सबका ध्यान खींच लिया — आप भी सुनिए आखिर उसने क्या कहा!
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    उसकी मासूम आवाज़ में छुपी समझदारी ने सबका ध्यान खींच लिया — आप भी सुनिए आखिर उसने क्या कहा!
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    4 hrs ago
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