सदर अस्पताल व पोठिया सीएचसी में हुआ राज्यस्तरीय कार्यक्रम का प्रसारण, जिला पदाधिकारी की मौजूदगी में 50 गर्भवती महिलाओं की जांच किशनगंज, 25 अगस्त 2026 को एनीमिया को अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि लंबे समय तक हीमोग्लोबिन की कमी रहने से व्यक्ति की कार्यक्षमता, शारीरिक विकास और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों, किशोर-किशोरियों और महिलाओं में भी इसका असर स्वास्थ्य एवं विकास पर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बिहार में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 98 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया गया है।अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा मंगलवार को किया गया। किशनगंज जिले में सदर अस्पताल एवं पोठिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। सदर अस्पताल में जिला पदाधिकारी की मौजूदगी में 50 गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच की गई और उन्हें पोषण, आयरन-फोलिक एसिड तथा नियमित स्वास्थ्य जांच के संबंध में परामर्श दिया गया। जांच के साथ उपचार और फॉलोअप पर रहेगा जोर राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एनीमिया की समय पर जांच और उपचार को महत्वपूर्ण बताते हुए अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा। जांच में एनीमिया पाए जाने वाले लोगों को उनकी स्थिति के अनुसार दवा, उपचार, पोषण संबंधी परामर्श और आवश्यक फॉलोअप उपलब्ध कराया जाएगा। किशोरियों, प्रजनन आयु की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान रहेगा। कार्यक्रम में उपस्थित जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि गर्भावस्था में एनीमिया की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि जांच में चिन्हित प्रत्येक लाभार्थी को उपचार से जोड़ा जाए और मध्यम तथा गंभीर मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि कमजोरी, थकान या चक्कर को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और समय पर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। सात लक्षित वर्गों तक पहुंचेगा अभियान जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि अभियान के तहत सात प्रमुख लाभार्थी समूहों को लक्षित किया गया है। इनमें कम वजन के साथ जन्मे शिशु, 4 से 59 माह के बच्चे, 5 से 9 वर्ष के बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियां, 20 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाएं, गर्भवती माताएं तथा धात्री माताएं शामिल हैं।अभियान में नर्स, ममता कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इनके माध्यम से समुदाय में एनीमिया की पहचान, जागरूकता, पोषण संबंधी व्यवहार में बदलाव तथा लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास होगा। सात प्रमुख हस्तक्षेपों से एनीमिया पर होगा प्रहार अभियान में एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए सात प्रमुख हस्तक्षेपों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण, बच्चों, किशोर-किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं में कृमि प्रबंधन, खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव, एनीमिया की जांच, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना, गैर-पोषण संबंधी एनीमिया की रोकथाम तथा एनीमिया का चिकित्सीय प्रबंधन शामिल है।इससे जांच के साथ एनीमिया के कारणों की पहचान, पोषण सुधार, दवा, उपचार और फॉलोअप की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा। लाभार्थियों की उम्र और स्थिति के अनुसार मिलेगा उपचार कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों की स्थिति के अनुसार उपचार निर्धारित किया गया है। कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं को आयरन-फोलिक एसिड सिरप दिया जाएगा, जबकि 4 से 59 माह के बच्चों को आईएफए गुलाबी गोली मिलेगी। 5 से 9 वर्ष के बच्चों को आईएफए नीली गोली और 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को आईएफए लाल गोली दी जाएगी।20 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाओं तथा गर्भवती माताओं को आईएफए लाल गोली दी जाएगी और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह पर एफसीएम थेरेपी उपलब्ध कराई जाएगी। धात्री माताओं में भी हीमोग्लोबिन स्तर के अनुसार आवश्यक आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण, पोषण परामर्श एवं चिकित्सीय प्रबंधन किया जाएगा। गंभीर मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल की व्यवस्था रहेगी। अस्पताल से पंचायत और विद्यालय तक होगी जांच नोडल पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, जिला अस्पताल से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक एनीमिया की जांच की जाएगी। सामुदायिक स्तर पर वीएचएसएनडी एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सत्रों में भी जांच होगी। विद्यालयों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चलंत चिकित्सा दल सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों और किशोर-किशोरियों की जांच करेंगे।जांच के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग किया जाएगा। जरूरत के अनुसार आईएफए दवा, उपचार एवं परामर्श दिया जाएगा तथा गंभीर मामलों को उच्च स्वास्थ्य संस्थान से जोड़ा जाएगा। डिजिटल निगरानी से मजबूत होगी व्यवस्था डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के बीच समन्वय, एनीमिया मुक्त भारत इकाई, दवाओं एवं सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला, अन्य विभागों के साथ अभिसरण, एनीमिया मुक्त भारत पोर्टल तथा टी4 के माध्यम से डिजिटल निगरानी पर जोर रहेगा। पोषण और व्यवहार में बदलाव भी बनेगा अभियान का आधार लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने, संतुलित आहार लेने और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि एनीमिया के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए जांच, दवा, पोषण, कृमि प्रबंधन, चिकित्सीय उपचार और फॉलोअप को साथ लेकर चलना जरूरी है। मध्यम एवं गंभीर मामलों की नियमित निगरानी कर उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी। 30 नवंबर तक चलेगा 98 दिनों का विशेष अभियान सिविल सर्जन ने बताया कि विशेष अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा। पंचायत स्तर तक लक्षित लाभार्थियों की जांच कर उन्हें आवश्यक दवा, उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। जिले में राज्यस्तरीय शुभारंभ के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब समुदाय तक पहुंचेगा। लक्ष्य है कि एनीमिया की समय पर पहचान हो, कोई गंभीर मामला नजरअंदाज न हो और जांच में चिन्हित प्रत्येक लाभार्थी को उपचार तथा नियमित फॉलोअप मिले।
सदर अस्पताल व पोठिया सीएचसी में हुआ राज्यस्तरीय कार्यक्रम का प्रसारण, जिला पदाधिकारी की मौजूदगी में 50 गर्भवती महिलाओं की जांच किशनगंज, 25 अगस्त 2026 को एनीमिया को अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि लंबे समय तक हीमोग्लोबिन की कमी रहने से व्यक्ति की कार्यक्षमता, शारीरिक विकास और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों, किशोर-किशोरियों और महिलाओं में भी इसका असर स्वास्थ्य एवं विकास पर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बिहार में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 98 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया गया है।अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा मंगलवार को किया गया। किशनगंज जिले में सदर अस्पताल एवं पोठिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। सदर अस्पताल में जिला पदाधिकारी की मौजूदगी में 50 गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच की गई और उन्हें पोषण, आयरन-फोलिक एसिड तथा नियमित स्वास्थ्य जांच के संबंध में परामर्श दिया गया। जांच के साथ उपचार और फॉलोअप पर रहेगा जोर राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एनीमिया की समय पर जांच और उपचार को महत्वपूर्ण बताते हुए अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि अभियान केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा। जांच में एनीमिया पाए जाने वाले लोगों को उनकी स्थिति के अनुसार दवा, उपचार, पोषण संबंधी परामर्श और आवश्यक फॉलोअप उपलब्ध कराया जाएगा। किशोरियों, प्रजनन आयु की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान रहेगा। कार्यक्रम में उपस्थित जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि गर्भावस्था में एनीमिया की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि जांच में चिन्हित प्रत्येक लाभार्थी को उपचार से जोड़ा जाए और मध्यम तथा गंभीर मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि कमजोरी, थकान या चक्कर को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और समय पर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। सात लक्षित वर्गों तक पहुंचेगा अभियान जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि अभियान के तहत सात प्रमुख लाभार्थी समूहों को लक्षित किया गया है। इनमें कम वजन के साथ जन्मे शिशु, 4 से 59 माह के बच्चे, 5 से 9 वर्ष के बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियां, 20 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाएं, गर्भवती माताएं तथा धात्री माताएं शामिल हैं।अभियान में नर्स, ममता कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इनके माध्यम से समुदाय में एनीमिया की पहचान, जागरूकता, पोषण संबंधी व्यवहार में बदलाव तथा लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास होगा। सात प्रमुख हस्तक्षेपों से एनीमिया पर होगा प्रहार अभियान में एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए सात प्रमुख हस्तक्षेपों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण, बच्चों, किशोर-किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं में कृमि प्रबंधन, खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव, एनीमिया की जांच, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा
देना, गैर-पोषण संबंधी एनीमिया की रोकथाम तथा एनीमिया का चिकित्सीय प्रबंधन शामिल है।इससे जांच के साथ एनीमिया के कारणों की पहचान, पोषण सुधार, दवा, उपचार और फॉलोअप की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा। लाभार्थियों की उम्र और स्थिति के अनुसार मिलेगा उपचार कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों की स्थिति के अनुसार उपचार निर्धारित किया गया है। कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं को आयरन-फोलिक एसिड सिरप दिया जाएगा, जबकि 4 से 59 माह के बच्चों को आईएफए गुलाबी गोली मिलेगी। 5 से 9 वर्ष के बच्चों को आईएफए नीली गोली और 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरियों को आईएफए लाल गोली दी जाएगी।20 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाओं तथा गर्भवती माताओं को आईएफए लाल गोली दी जाएगी और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह पर एफसीएम थेरेपी उपलब्ध कराई जाएगी। धात्री माताओं में भी हीमोग्लोबिन स्तर के अनुसार आवश्यक आयरन-फोलिक एसिड अनुपूरण, पोषण परामर्श एवं चिकित्सीय प्रबंधन किया जाएगा। गंभीर मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल की व्यवस्था रहेगी। अस्पताल से पंचायत और विद्यालय तक होगी जांच नोडल पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, जिला अस्पताल से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक एनीमिया की जांच की जाएगी। सामुदायिक स्तर पर वीएचएसएनडी एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सत्रों में भी जांच होगी। विद्यालयों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चलंत चिकित्सा दल सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों और किशोर-किशोरियों की जांच करेंगे।जांच के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग किया जाएगा। जरूरत के अनुसार आईएफए दवा, उपचार एवं परामर्श दिया जाएगा तथा गंभीर मामलों को उच्च स्वास्थ्य संस्थान से जोड़ा जाएगा। डिजिटल निगरानी से मजबूत होगी व्यवस्था डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के बीच समन्वय, एनीमिया मुक्त भारत इकाई, दवाओं एवं सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला, अन्य विभागों के साथ अभिसरण, एनीमिया मुक्त भारत पोर्टल तथा टी4 के माध्यम से डिजिटल निगरानी पर जोर रहेगा। पोषण और व्यवहार में बदलाव भी बनेगा अभियान का आधार लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने, संतुलित आहार लेने और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि एनीमिया के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए जांच, दवा, पोषण, कृमि प्रबंधन, चिकित्सीय उपचार और फॉलोअप को साथ लेकर चलना जरूरी है। मध्यम एवं गंभीर मामलों की नियमित निगरानी कर उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी। 30 नवंबर तक चलेगा 98 दिनों का विशेष अभियान सिविल सर्जन ने बताया कि विशेष अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा। पंचायत स्तर तक लक्षित लाभार्थियों की जांच कर उन्हें आवश्यक दवा, उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। जिले में राज्यस्तरीय शुभारंभ के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब समुदाय तक पहुंचेगा। लक्ष्य है कि एनीमिया की समय पर पहचान हो, कोई गंभीर मामला नजरअंदाज न हो और जांच में चिन्हित प्रत्येक लाभार्थी को उपचार तथा नियमित फॉलोअप मिले।
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- महानंदा नदी में दो सगी बहनें डूबीं, 15 घंटे बाद भी नहीं मिला सुराग किशनगंज: जिले के बेलवा वार्ड संख्या-03 स्थित महानंदा नदी में सोमवार शाम करीब 5 बजे फोटो खींचने के दौरान दो सगी बहनें नदी में डूब गईं। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई, वहीं परिजनों में शोक की लहर है। दोनों बहनों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मिली जानकारी के अनुसार, काशीपुर बेलवा निवासी फतेबुल रहमान की पुत्री फरहाना बेगम (27) और रूही नाज (15) सोमवार शाम महानंदा नदी के किनारे फोटो खींच रही थीं। इसी दौरान एक बहन का पैर फिसल गया और वह नदी में गिर गई। उसे बचाने के प्रयास में दूसरी बहन भी तेज बहाव की चपेट में आकर नदी में गिर गई। दोनों को नदी में गिरते देख आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दोनों बहनें तेज धारा में बह गई थीं। घटना की सूचना बेलवा पंचायत के मुखिया तय्यबुर रहमान ने तत्काल किशनगंज प्रशासन और पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद SDRF की टीम मौके पर पहुंची और सोमवार रात से ही नदी में दोनों की तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बावजूद रात में सफलता नहीं मिली। मंगलवार सुबह से SDRF की टीम लगातार नदी में खोजबीन कर रही है। 15 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दोनों बहनों का पता नहीं चल सका है। मुखिया तय्यबुर रहमान ने बताया कि मंगलवार सुबह सीओ से संपर्क कर अतिरिक्त गोताखोर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। सीओ की ओर से जल्द गोताखोरों को भेजकर तलाश अभियान चलाने का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल घटनास्थल पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और किशनगंज पुलिस मौजूद हैं तथा SDRF टीम का तलाश अभियान जारी है।2
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- अर्राबाड़ी पशुचिकित्सा महाविद्यालय में विद्यार्थी सहयोग शिविर आयोजित पोठिया: प्रखंड अंतर्गत अर्राबाड़ी स्थित पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में मंगलवार को विद्यार्थी सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला पशुपालन पदाधिकारी, किशनगंज डॉ. विजय कुमार सिंह ने की। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं एवं सुझावों को आमंत्रित कर उनका समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करना था। मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सिंह ने विद्यार्थी सहयोग पोर्टल के महत्व एवं इसकी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को पोर्टल के माध्यम से अपनी समस्याएं दर्ज कराने के लिए जागरूक किया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. चंद्रहास ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपनी शैक्षणिक एवं अन्य समस्याओं को विद्यार्थी सहयोग शिविर के माध्यम से सामने रखें, ताकि उनके समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत किया। शिविर के संयोजक डॉ. धीरेंद्र कुमार ने उपस्थित विद्यार्थियों, अतिथियों एवं अन्य सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विनोद, डॉ. राजेश एवं डॉ. राजीव कुमार, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य कर्मियों ने सक्रिय योगदान दिया।2
- “रिश्ते अपनी जगह हैं, लेकिन पहचान अपनी होती है। ❤️ आप किसी के नहीं, सबसे पहले खुद के हैं। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपनी राय कमेंट में बताइए 👇 वीडियो पसंद आए तो Like ❤️ Share 🔄 और Follow जरूर करें। #RahulGandhi #YogiAdityanath #Kishanganj #Politics #JantaKiAwaaz #IndianPolitics #Reels”1
- आए दिन Purnia Me मोबाइल झपटा मार कीसी ना किसी का फोन क्षीण कर भाग जाते है Purnea me choro ka atank itna bad gya hai ki wo kahi par bhi koi bhi ghatna ko anjam dete rahte hai aur kanoon aur polish bas jaach me hi juti rahti hai aakhir kab tak aishe apradh pr polis rok laga payegi Dekhiye kaise ye Japat mar phone chhinne ki koshish kar raha tha lekin phone chhin nahin paya aur jiska fone tha usne to apna fone ko chori hone se bacha to liya lekin fone bich road pe gir k tut gya aur झपटा maar bhaag nikla kya sarkar koi action kyo nhi leti hai in sab chizo pe aye din kuch na kuch hota rahta hai aur in sab chori chintai ki sabse badi jar hai smake Agar sarkar smake k taraf dhayan de to bahut had tak apradh ko control me laya ja sakta hai to mai purnea Police aagrah krta hu ki kripya kr k smake taskaron pe koi action lijiye jisse in jhaptamaaro pe control kiya ja sake1