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Rehla plamu के कोयल नदी से अवैध बालू उठाव पर प्रसासन का साखत करवाई l आये दिन अवैध बालू करोबार का, बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है l उपजौ खेती को बंजर बने प्यास लोग द्वारा किया जा रहा है l 09/12 /2025 चमरही खेत के रास्ते अवैध बालू उठाव बंद कर के लिए, गढ़वा प्रशासन को आवेदन दिया गया है l प्रशान की ओर से संगराहे खुर्द-पंचायत के चमराही गांव के खेत से होकर कोयल नदी से बालू बेचा का मामला को pusty भी किया गया है l भीर भी बंद नहीं हुवा बालू बेचने का करोबार l
Ramashankar sharma
Rehla plamu के कोयल नदी से अवैध बालू उठाव पर प्रसासन का साखत करवाई l आये दिन अवैध बालू करोबार का, बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है l उपजौ खेती को बंजर बने प्यास लोग द्वारा किया जा रहा है l 09/12 /2025 चमरही खेत के रास्ते अवैध बालू उठाव बंद कर के लिए, गढ़वा प्रशासन को आवेदन दिया गया है l प्रशान की ओर से संगराहे खुर्द-पंचायत के चमराही गांव के खेत से होकर कोयल नदी से बालू बेचा का मामला को pusty भी किया गया है l भीर भी बंद नहीं हुवा बालू बेचने का करोबार l
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- हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनिया प्रखंड क्षेत्र में चल रहे कुष्ठ रोग उन्मूलन अभियान को लेकर शुक्रवार दोपहर 2:00 बजे से को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान डॉक्टर पल्लवी सिंह ने बताया कि 9 मार्च से लेकर आगामी 23 मार्च तक चिनिया प्रखंड के विभिन्न पंचायतों और गांवों में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर कुष्ठ रोग से संबंधित जागरूकता अभियान चला रहे हैं। टीम द्वारा लोगों को कुष्ठ रोग के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग की समय पर पहचान कर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांवों में जाकर लोगों से संपर्क कर रही है। बैठक में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया कि अभियान के दौरान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर उन्हें जागरूक किया जाए, ताकि कुष्ठ रोग को जड़ से खत्म करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।1
- गढ़वा जिले के बरडीहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत में एक बार आज फिर मौसम खराब देखने के लिए मिल रहा है। जिससे आसमान में बादल छाया हुआ दिख रहा है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने रवि फसल काटकर अपने खलिहान में रखे हुए हैं।2
- भारत के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी पहलें अत्यंत कारगर हैं। ये योजनाएं सीधे बैंक खातों में वित्तीय सहायता (₹6000/वर्ष), फसल सुरक्षा, कम ब्याज पर कर्ज और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं। PM India +4 किसानों के उत्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजनाएं: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इसके तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) में दी जाती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): प्राकृतिक आपदाओं, कीटों या बीमारी के कारण फसल खराब होने पर किसानों को बीमा सुरक्षा और वित्तीय राहत प्रदान करती है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY): यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 की मासिक पेंशन सुनिश्चित करने वाली एक स्वैच्छिक और अंशदायी योजना है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme): मिट्टी की उर्वरता का आकलन कर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह देती है, जिससे लागत कम और उपज बढ़ती है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): "प्रति बूंद अधिक फसल" (More Crop Per Drop) के उद्देश्य से सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित करती है। कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund - AIF): फसल कटाई के बाद प्रबंधन और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के लिए ऋण पर ब्याज छूट प्रदान करती है। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा और फसल बेचने के लिए बेहतर मार्केटिंग विकल्प (e-NAM) उपलब्ध कराती है। एफपीओ (FPO) का गठन: 10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से किसानों को सामूहिक शक्ति और बेहतर बाजार मूल्य दिलाने का प्रयास।1