समय के साथ तकनीक और परिवहन के साधनों में आए बदलाव ने बहराइच के नानपारा की सड़कों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कभी शहर की पहचान माने जाने वाले हाथ से चलने वाले पैडल रिक्शे अब धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए हैं। घोड़ा-टांगे की सवारी पहले ही इतिहास बन चुकी है और अब पैडल रिक्शा भी शहर की गलियों से लगभग गायब होता जा रहा है, जिनकी जगह ई-रिक्शा और अन्य आधुनिक वाहनों ने ले ली है। एक समय था जब नानपारा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार, अस्पताल, बस स्टैंड और मोहल्लों में हर ओर पैडल रिक्शों की आवाजाही दिखाई देती थी। करीब दो दशक पहले तक पैडल रिक्शा आम लोगों के आवागमन का सबसे भरोसेमंद और सस्ता साधन माना जाता था, जिससे रिक्शा चालक सुबह से देर शाम तक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उस समय शहर की अधिकांश सवारियां इन्हीं रिक्शों से तय होती थीं, और रिक्शा चालकों की मेहनत और ईमानदारी लोगों के बीच एक मिसाल थी। हालांकि, बदलते समय के साथ बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा बाजार में आ गए। कम समय में अधिक दूरी तय करने, कम शारीरिक मेहनत और अधिक आय की संभावना ने अधिकांश रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा की ओर आकर्षित किया, जिसके परिणामस्वरूप पैडल रिक्शों की संख्या लगातार घटती चली गई। आज नानपारा में गिने-चुने पैडल रिक्शे ही दिखाई देते हैं, और नई पीढ़ी के कई बच्चों ने शायद कभी पारंपरिक पैडल रिक्शे की सवारी भी नहीं की होगी। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कभी पैडल रिक्शा नानपारा की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा था, जिस पर लोग शादी-ब्याह, बाजार की खरीदारी, रेलवे स्टेशन तक पहुंचने या बच्चों के स्कूल जाने जैसे हर काम के लिए निर्भर रहते थे। इसकी धीमी रफ्तार में भी अपनापन और भरोसा महसूस होता था। हालांकि, ई-रिक्शा ने लोगों को तेज, सुविधाजनक और अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक ऐतिहासिक परिवहन व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। कई पुराने रिक्शा चालक बताते हैं कि बढ़ती महंगाई, कम होती सवारियां और कठिन शारीरिक श्रम के कारण पैडल रिक्शा चलाना अब लाभदायक नहीं रह गया है, यही कारण है कि अधिकांश लोगों ने यह पेशा छोड़ दिया या ई-रिक्शा अपना लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैडल रिक्शा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है और यदि इन्हें पूरी तरह भुला दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां केवल तस्वीरों और कहानियों में ही इस विरासत को देख पाएंगी। नानपारा का बदलता परिवेश विकास की नई कहानी जरूर लिख रहा है, लेकिन इस विकास के बीच शहर की पुरानी पहचान भी धीरे-धीरे खोती जा रही है। घोड़ा-टांगे के बाद अब पैडल रिक्शा भी इतिहास बनने की ओर है। यह बदलाव आधुनिकता का प्रतीक है, लेकिन साथ ही उन मेहनतकश रिक्शा चालकों की याद भी दिलाता है, जिन्होंने वर्षों तक अपनी मेहनत से शहर की रफ्तार को आगे बढ़ाया।
समय के साथ तकनीक और परिवहन के साधनों में आए बदलाव ने बहराइच के नानपारा की सड़कों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कभी शहर की पहचान माने जाने वाले हाथ से चलने वाले पैडल रिक्शे अब धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए हैं। घोड़ा-टांगे की सवारी पहले ही इतिहास बन चुकी है और अब पैडल रिक्शा भी शहर की गलियों से लगभग गायब होता जा रहा है, जिनकी जगह ई-रिक्शा और अन्य आधुनिक वाहनों ने ले ली है। एक समय था जब नानपारा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार, अस्पताल, बस स्टैंड और मोहल्लों में हर ओर पैडल रिक्शों की आवाजाही दिखाई देती थी। करीब दो दशक पहले तक पैडल रिक्शा आम लोगों के आवागमन का सबसे भरोसेमंद और सस्ता साधन माना जाता था, जिससे रिक्शा चालक सुबह से देर शाम तक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उस समय शहर की अधिकांश सवारियां इन्हीं रिक्शों से तय होती थीं, और रिक्शा चालकों की मेहनत और ईमानदारी लोगों के बीच एक मिसाल थी। हालांकि, बदलते समय के साथ बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा बाजार में आ गए। कम समय में अधिक दूरी तय करने, कम शारीरिक मेहनत और अधिक आय की संभावना ने अधिकांश रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा की ओर आकर्षित किया, जिसके परिणामस्वरूप पैडल रिक्शों की संख्या लगातार घटती चली गई। आज नानपारा में गिने-चुने पैडल रिक्शे ही दिखाई देते हैं, और नई पीढ़ी के कई बच्चों ने शायद कभी पारंपरिक पैडल रिक्शे की सवारी भी नहीं की होगी। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कभी पैडल रिक्शा नानपारा की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा था, जिस पर लोग शादी-ब्याह, बाजार की खरीदारी, रेलवे स्टेशन तक पहुंचने या बच्चों के स्कूल जाने जैसे हर काम के लिए निर्भर रहते थे। इसकी धीमी रफ्तार में भी अपनापन और भरोसा महसूस होता था। हालांकि, ई-रिक्शा ने लोगों को तेज, सुविधाजनक और अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक ऐतिहासिक परिवहन व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। कई पुराने रिक्शा चालक बताते हैं कि बढ़ती महंगाई, कम होती सवारियां और कठिन शारीरिक श्रम के कारण पैडल रिक्शा चलाना अब लाभदायक नहीं रह गया है, यही कारण है कि अधिकांश लोगों ने यह पेशा छोड़ दिया या ई-रिक्शा अपना लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैडल रिक्शा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है और यदि इन्हें पूरी तरह भुला दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां केवल तस्वीरों और कहानियों में ही इस विरासत को देख पाएंगी। नानपारा का बदलता परिवेश विकास की नई कहानी जरूर लिख रहा है, लेकिन इस विकास के बीच शहर की पुरानी पहचान भी धीरे-धीरे खोती जा रही है। घोड़ा-टांगे के बाद अब पैडल रिक्शा भी इतिहास बनने की ओर है। यह बदलाव आधुनिकता का प्रतीक है, लेकिन साथ ही उन मेहनतकश रिक्शा चालकों की याद भी दिलाता है, जिन्होंने वर्षों तक अपनी मेहनत से शहर की रफ्तार को आगे बढ़ाया।
- उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में, आज 20 जून, 2026 को जनपद बहराइच में परिवहन विभाग ने पुलिस विभाग के सहयोग से एक संयुक्त प्रवर्तन अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा से संबंधित सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर बल देना था, जिसके तहत विभिन्न वाहनों की सघन जांच की गई और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। उक्त अभियान में एआरटीओ (प्रवर्तन) श्री सुशील कुमार यादव, यात्री कर अधिकारी श्री अवधराज गुप्ता और टीआई श्री रंजीत सिंह भदौरिया ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। जांच के दौरान, नशे की हालत में वाहन चलाने, मालवाहक वाहनों में अवैध रूप से सवारी ढोने, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन संचालित करने तथा बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाने वाले चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप कुल 9 वाहनों को निरुद्ध किया गया और 47 चालान किए गए।1
- बहाराईच के शिवपुर ब्लॉक मुख्यालय समेत क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर रविवार सुबह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को उत्साहपूर्वक मनाया गया। सुबह करीब सात बजे से आयोजित हुए इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया और स्वस्थ जीवन जीने का संकल्प लिया। योग शिक्षक रवि शंकर शुक्ला ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि योग मानसिक तनाव को दूर करने, शारीरिक रोगों से बचाव का एक सरल, सफल और उत्तम माध्यम है। शुक्ला ने यह भी कहा कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है, और उन्होंने सभी से प्रतिदिन कम से कम एक घंटे योग व व्यायाम करने की अपील की। इन आयोजनों में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी ने योग के प्रति जागरूकता का संदेश दिया, इस दौरान योग को दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया।4
- बहराइच में 20 जून को तहसील सदर के सभागार में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता की उपस्थिति में विभिन्न योजनाओं के स्वीकृति पत्रों का वितरण किया गया। इस अवसर पर मिशन शक्ति 2026 और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत दो छात्राओं, प्रतिभा शर्मा और दिपांशी पटेल को, सात-सात हजार रुपये की धनराशि के स्वीकृति पत्र सौंपे गए। इसके अतिरिक्त, निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत रेशमा बेगम और नौसबा को एक हजार रुपये प्रति माह की दर से प्रथम तिमाही के लिए कुल तीन-तीन हजार रुपये की धनराशि के स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए।1
- नानपारा में तहसील अधिवक्ता एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बहराइच लोकसभा सांसद डॉ. आनन्द गौड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि नानपारा विधायक राम निवास वर्मा, विधायक प्रतिनिधि आलोक जिंदल, नगर पालिका परिषद नानपारा के अध्यक्ष अब्दुल वहीद, रुपईडीहा नगर पालिका अध्यक्ष विमल वैश्य, उपजिलाधिकारी नानपारा श्रीमती अमिता यादव, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कृपा राम वर्मा, तथा तहसीलदार नानपारा शैलेश अवस्थी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शिरकत की। कार्यक्रम में वरिष्ठ समिति के अध्यक्ष रूप नारायण जायसवाल ने अपने सहयोगियों राम गोपाल भारतीय, जगदीश प्रसाद गुप्ता, सुरेश चंद्र गुप्ता और सुन्दर लाल आर्य के साथ मिलकर अतिथियों का बुके, माल्यार्पण और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। सांसद डॉ. आनन्द गौड़ ने अधिवक्ता संघ के चुनाव को सफलतापूर्वक और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित लोगों की सराहना की। उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष राम नरेश पाण्डेय और पूरी कार्यकारिणी को अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित भी किया। इस दौरान उपजिलाधिकारी श्रीमती अमिता यादव ने अपनी काव्य प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए अतिथियों का विशेष स्वागत किया, जिसकी उपस्थित जनों ने काफी सराहना की। इस समारोह का संचालन आशीष पाण्डेय और वरिष्ठ अधिवक्ता रूप नारायण जायसवाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि, और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें अनुराग श्रीवास्तव, डॉ. अरविन्द मिश्र, ओम प्रकाश गुप्ता, और बाल मुकुन्द तिवारी भी शामिल थे।4
- बहराइच जिले के महसी क्षेत्र में, हरदी थाना पुलिस ने चोरी के एक मुकदमे से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए इस व्यक्ति को अब न्यायालय भेज दिया गया है।2
- बहराइच जिले में शिव बारात की शोभायात्रा के दौरान बवाल हो गया, जब एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से आम की डाल टूट जाने के कारण रास्ता बाधित हो गया और शोभायात्रा रोक दी गई। प्रारंभिक विवाद में दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज हुई, जिसके बाद वैबाही चौकी के कॉन्स्टेबल फैजल खान मौके पर पहुँचे और कथित तौर पर उन्होंने भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया। शोभायात्रा में शामिल लोगों के अनुसार, कॉन्स्टेबल फैजल खान ने गंदी-गंदी गालियाँ दीं और ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त करने की धमकी देते हुए यह भी कहा कि अगर लोग ज़्यादा उपद्रव करेंगे तो सभी को अंदर कर दिया जाएगा, साथ ही यह भी कहा कि वे भगवान को नहीं मानते हैं। इस घटना से नाराज़ होकर शोभायात्रा में शामिल हज़ारों लोग धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट माँग की है कि जब तक कॉन्स्टेबल फैजल खान को लाइन हाजिर नहीं किया जाएगा, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। सूचना मिलने पर एसओ प्रदीप सिंह मौके पर पहुँचे और उन्होंने स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने शोभायात्रा के आयोजकों को धरना हटाने और मूर्ति स्थापना करने के लिए मनाने का प्रयास किया, साथ ही आश्वासन दिया कि फैजल खान के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें लाइन हाजिर किया जाएगा। यह शोभायात्रा बाबा बूढ़ेश्वर नाथ मंदिर से काली मंदिर की ओर वापस आ रही थी और खैरी समैसा व लोहारन पूर्व से निकली थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी माँग पूरी नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।1
- बहराइच जनपद में 20 जून को उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (खाद्य एवं रसद विभाग) तथा जनपद के नामित नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। यह बैठक प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात विभाग और बहराइच के प्रभारी मंत्री, श्री दिनेश प्रताप सिंह द्वारा जनपद भ्रमण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन में आयोजित की गई थी। इस दौरान जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी सौरभ दुबे और अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद ने प्रभारी मंत्री के निर्देशों के क्रम में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए सीएमओ को सभी सीएचसी और पीएचसी का स्थलीय निरीक्षण कराने तथा महर्षि बालार्क चिकित्सालय में स्थापित जन औषधि केंद्र को बाहर स्थापित करने का निर्देश दिया। कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान जिला कृषि अधिकारी को योजना के तहत किसान सम्मान निधि, केसीसी और अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे किसानों की संख्या बताने को कहा गया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना की अनुपालन रिपोर्ट जनप्रतिनिधियों को भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। नोडल अधिकारी ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम की तैयारियों की भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। नोडल अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने विकास परियोजनाओं, राजस्व मामलों, खाद्य एवं रसद व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि, स्वच्छता सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों के कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को प्रभारी मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन करने और जनहित से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण करने का निर्देश दिया, साथ ही विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। बैठक में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने जनपद में संचालित विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि सभी विभाग शासन की मंशा के अनुरूप लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस अवसर पर पीडी डीआरडीए मनीष कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी नरेन्द्र तिवारी, सीवीओ डॉ. राजेश उपाध्याय, डीएसटीओ घासीराम सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। अंत में, नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद ने विभागीय अधिकारियों को जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समयबद्ध लक्ष्य पूर्ति के लिए पुनः निर्देश दिए।1
- 20 जून को बहराइच के तहसील सदर सभागार में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता उपस्थित थे। उनके द्वारा मिशन शक्ति 2026 और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत स्वीकृति पत्रों का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत, स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत दो छात्राओं, प्रतिभा शर्मा और दिपांशी पटेल को, सात-सात हज़ार रुपये की धनराशि के स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, निराश्रित महिला पेंशन योजना के अंतर्गत रेशमा बेगम और नौसबा को एक हज़ार रुपये प्रतिमाह की दर से प्रथम तिमाही हेतु कुल तीन-तीन हज़ार रुपये की धनराशि के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए।1