मध्यप्रदेश के घुनवारा में नेशनल हाईवे-30 के किनारे बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सड़क किनारे लगे बिजली के खंभों पर कटी हुई केबल खुलेआम झूल रही है, जिससे किसी भी वक्त एक बड़ा और जानलेवा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। यदि इन तारों में करंट आ जाता है या कोई राहगीर, बाइक सवार, किसान या पशु इनकी चपेट में आ जाता है, तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह खतरनाक स्थिति घुनवारा विद्युत वितरण केंद्र से मात्र लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन विभाग ने अब तक इसे न तो हटाया है और न ही सुरक्षित किया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित किसान लल्लू साहू, संता कुशवाहा और रामप्रसाद साकेत ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि विभाग की अनदेखी लोगों की जान को जोखिम में डाल रही है। किसानों का आरोप है कि ऐसा लगता है मानो विभाग किसी बड़े हादसे या किसी किसान की मौत का इंतजार कर रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिजली विभाग किसी की जान जाने के बाद ही जागेगा और कोई कार्रवाई करेगा? स्थानीय लोगों के अनुसार, इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान कई बार आकर्षित कराया गया है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। नेशनल हाईवे-30 से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं और आसपास के ग्रामीणों व किसानों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है, ऐसे में झूलती हुई यह केबल कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ग्रामीणों और किसानों ने बिजली विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण करने, कटी हुई केबल को सुरक्षित करने और किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, किसानों द्वारा लगाए गए ये आरोप उनके स्वयं के बयान हैं; इस संबंध में बिजली विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
मध्यप्रदेश के घुनवारा में नेशनल हाईवे-30 के किनारे बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सड़क किनारे लगे बिजली के खंभों पर कटी हुई केबल खुलेआम झूल रही है, जिससे किसी भी वक्त एक बड़ा और जानलेवा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। यदि इन तारों में करंट आ जाता है या कोई राहगीर, बाइक सवार, किसान या पशु इनकी चपेट में आ जाता है, तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह खतरनाक स्थिति घुनवारा विद्युत वितरण केंद्र से मात्र लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन विभाग ने अब तक इसे न तो हटाया है और न ही सुरक्षित किया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित किसान लल्लू साहू, संता कुशवाहा और रामप्रसाद साकेत ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि विभाग की अनदेखी लोगों की जान को जोखिम में डाल रही है। किसानों का आरोप है कि ऐसा लगता है मानो विभाग किसी बड़े हादसे या किसी किसान की मौत का इंतजार कर रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिजली विभाग किसी की जान जाने के बाद ही जागेगा और कोई कार्रवाई करेगा? स्थानीय लोगों के अनुसार, इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान कई बार आकर्षित कराया गया है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। नेशनल हाईवे-30 से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं और आसपास के ग्रामीणों व किसानों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है, ऐसे में झूलती हुई यह केबल कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ग्रामीणों और किसानों ने बिजली विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण करने, कटी हुई केबल को सुरक्षित करने और किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, किसानों द्वारा लगाए गए ये आरोप उनके स्वयं के बयान हैं; इस संबंध में बिजली विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
- कटनी जीआरपी पुलिस ने रेल यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ करने वाले एक बड़े अंतर-जिला/राज्य स्तरीय चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। रेल क्षेत्र में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने पांच शातिर चोरों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की, जिनके पास से 10 लाख 30 हजार 848 रुपये कीमत के सोने के जेवरात बरामद किए गए। रेल पुलिस अधीक्षक जबलपुर सुंदर सिंह कनेश ने एक पत्रकार वार्ता में इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कटनी जीआरपी ने मुस्तैदी दिखाते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के नाम शरद उर्फ गोलू झारिया, अमित सिंह खंगार, सौरभ कुल्हाड़ा, राहुल ठाकुर और हर्ष खंगार हैं। पुलिस ने चोरों के पास से भारी मात्रा में सोने के आभूषण बरामद किए, जिसमें एक सोने का हार, तीन सोने के मंगलसूत्र, एक जोड़ी सोने के झुमके, एक जोड़ी सोने के टॉप्स, दो सोने की अंगूठियां और एक सोने की बाली शामिल हैं। पुलिस की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पकड़े गए आरोपियों में से दो मुख्य आरोपी पुराने हिस्ट्रीशीटर हैं। ये दोनों आरोपी कटनी जीआरपी थाना के ही रिकॉर्डेड 'निगरानी बदमाश' हैं, जो लंबे समय से रेल क्षेत्र में चोरी और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस अंधी चोरी और गिरोह का पर्दाफाश करने में कटनी जीआरपी पुलिस की भूमिका बेहद सराहनीय रही, जिसके लिए रेल पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश ने टीम के उत्कृष्ट कार्य की पीठ थपथपाई और कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।1
- सतना जिले के नागौद ब्लॉक में स्थित छुलहा गांव की सड़क की दुर्दशा को दर्शाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।1
- मैहर स्थित माँ शारदा शक्तिपीठ में आज दिनांक 02 जुलाई 2026, गुरुवार को दिव्य प्रातःकालीन दर्शन और आरती की गई। इस पावन अवसर पर देवी माँ का विशेष दिव्य श्रंगार भी किया गया। जय माई की।1
- स्मार्ट सिटी सतना के निवासियों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है, जहाँ आधुनिक और प्रदूषण मुक्त परिवहन के लिए स्वीकृत 20 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी अचानक निरस्त कर दी गई है। इस निर्णय से शहर में भारी आक्रोश है। इसी आक्रोश के चलते मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इसे सतना के साथ अन्याय बताया। ये बसें केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना' के तहत सतना के लिए स्वीकृत की गई थीं, जिनके संचालन के लिए नगर निगम स्तर पर तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। हालांकि, ग्वालियर में परिवहन विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद अचानक इन बसों का आवंटन रद्द कर दिया गया। अब इन बसों को भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में संचालित किया जाएगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बसों की मंजूरी निरस्त करने के पीछे विभाग की ओर से कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, जिससे सतना की प्रस्तावित इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा फिलहाल अधर में लटक गई है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित ग्राम पंचायत क्यों बेरमा में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, और इस विषय पर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये आरोप क्यों लगे हैं।1