चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र के बिछौर गांव में शनिवार को गिट्टी सप्लायर्स ने माइनिंग विभाग के रॉयल्टी ठेका कर्मियों द्वारा की जा रही मनमानी वसूली के खिलाफ सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के चलते गिट्टी से भरे ट्रैक्टरों और डंपरों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। घटना की सूचना मिलते ही माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गिट्टी सप्लायर्स का आरोप है कि रॉयल्टी ठेकेदार द्वारा निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूली जा रही है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार खनिज लाइम स्टोन गिट्टी की रॉयल्टी 51 रुपए प्रति टन निर्धारित है। इस हिसाब से 4 टन गिट्टी के ट्रैक्टर की रॉयल्टी 204 रुपए, 5 टन की 255 रुपए और 8 टन की रॉयल्टी 408 रुपए बनती है, लेकिन ठेका कर्मी प्रति ट्रैक्टर 500 रुपए वसूल रहे हैं। इसी तरह, 20 टन गिट्टी के डंपर की रॉयल्टी 1020 रुपए और 25 टन की रॉयल्टी 1275 रुपए होनी चाहिए, मगर उनसे 1600 रुपए वसूले जा रहे हैं। सप्लायर्स का यह भी कहना है कि ठेका कर्मचारी रसीदों में भी मनमाने ढंग से वजन दर्ज करते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। सप्लायर्स ने यह भी आरोप लगाया कि अधिक रॉयल्टी वसूलने पर आपत्ति जताने पर ठेका कर्मचारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। सप्लायर्स ने बताया कि वे पहले भी ठेका कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने, नियमानुसार रॉयल्टी की रसीदें जारी करने और अवैध वसूली रोकने की मांग को लेकर बेगूं एसडीएम के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंप चुके हैं। उस पर कोई कार्रवाई न होने के बाद ही उन्होंने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन का यह रास्ता अपनाया। इस विरोध प्रदर्शन में गिट्टी सप्लायर्स एसोसिएशन के सत्यनारायण, आयुष जैन, छोटू लाल, डालचंद, उत्तम सिंह, सांवरा लाल सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।
चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र के बिछौर गांव में शनिवार को गिट्टी सप्लायर्स ने माइनिंग विभाग के रॉयल्टी ठेका कर्मियों द्वारा की जा रही मनमानी वसूली के खिलाफ सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के चलते गिट्टी से भरे ट्रैक्टरों और डंपरों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। घटना की सूचना मिलते ही माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गिट्टी सप्लायर्स का आरोप है कि रॉयल्टी ठेकेदार द्वारा निर्धारित दरों से अधिक राशि वसूली जा रही है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार खनिज लाइम स्टोन गिट्टी की रॉयल्टी 51 रुपए प्रति टन निर्धारित है। इस हिसाब से 4 टन गिट्टी के ट्रैक्टर की रॉयल्टी 204 रुपए, 5 टन की 255 रुपए और 8 टन की रॉयल्टी 408 रुपए बनती है, लेकिन ठेका कर्मी प्रति ट्रैक्टर 500 रुपए वसूल रहे हैं। इसी तरह, 20 टन गिट्टी के डंपर की रॉयल्टी 1020 रुपए और 25 टन की रॉयल्टी 1275 रुपए होनी चाहिए, मगर उनसे 1600 रुपए वसूले जा रहे हैं। सप्लायर्स का यह भी कहना है कि ठेका कर्मचारी रसीदों में भी मनमाने ढंग से वजन दर्ज करते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। सप्लायर्स ने यह भी आरोप लगाया कि अधिक रॉयल्टी वसूलने पर आपत्ति जताने पर ठेका कर्मचारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। सप्लायर्स ने बताया कि वे पहले भी ठेका कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने, नियमानुसार रॉयल्टी की रसीदें जारी करने और अवैध वसूली रोकने की मांग को लेकर बेगूं एसडीएम के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंप चुके हैं। उस पर कोई कार्रवाई न होने के बाद ही उन्होंने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन का यह रास्ता अपनाया। इस विरोध प्रदर्शन में गिट्टी सप्लायर्स एसोसिएशन के सत्यनारायण, आयुष जैन, छोटू लाल, डालचंद, उत्तम सिंह, सांवरा लाल सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।
- दहेज मृत्यु के एक मामले को झूठा पाए जाने के बाद एक नया और गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है। मामले की जाँच के दौरान जब्त किए गए करोड़ों रुपये के जेवर आखिर कहाँ गए? इस सवाल के जवाब में अधिकारियों द्वारा “बंदर ले गए” कहने से जनता में भारी रोष और अविश्वास का माहौल है। इस हैरान कर देने वाले जवाब के बाद अब जनता पूछ रही है कि आखिर इतना शातिर कौन निकला—बंदर, या कोई और? करोड़ों की कीमत के जेवरों के गायब होने और ऐसा बेतुका जवाब मिलने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आम लोग मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। यह भी रेखांकित किया गया है कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।1
- आगामी महिला T20 वर्ल्ड कप फाइनल का विजेता कौन होगा, यह सवाल उठाया गया है। दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे इस महत्वपूर्ण मुकाबले के संभावित विजेता के बारे में जानने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें।1
- विश्व योग दिवस के अवसर पर चित्तौड़गढ़ योगमय हो उठा। इस दौरान घोसुण्डा में, सुख सेवा संस्थान में योग का मंत्र गूंजा और सभी ने नशामुक्त जीवन का संकल्प लिया।1
- चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने जिले की जनता से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों से यह महत्वपूर्ण संदेश हर व्यक्ति तक पहुँचाने का आग्रह किया है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड के मूंगा का खेड़ा गांव में शनिवार को एक अनोखी रेस्क्यू कार्रवाई देखने को मिली। यहाँ, एक कुएं से 35 वर्षीय कालू किर का शव निकालने के दौरान, शव के पास तीन सांप मौजूद थे, जिससे सीधे तौर पर शव को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही गंगरार पुलिस और सिविल डिफेंस टीम मौके पर पहुँची। कुएं में सांपों को देखकर वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को भी बुलाया गया। पीयूष कांबले, राम कुमार साहू, मुबारिक खान और मयूर गोसावी ने रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर तीनों सांपों को सुरक्षित रूप से ज़िंदा पकड़ा। इसके बाद सिविल डिफेंस टीम ने मृतक का शव कुएं से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। पुलिस, सिविल डिफेंस और वन्यजीव टीम के इस संयुक्त प्रयास से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा।1
- भदेसर क्षेत्र के पीपलवास गांव और आसपास के इलाकों में किसानों ने बुधवार को हुई प्री-मानसून की तेज बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। बुधवार देर रात से सुबह तक हुई इस बारिश से उत्साहित होकर, कई किसानों ने शुक्रवार से ही जोखिम उठाते हुए बुवाई का कार्य प्रारंभ किया, जबकि कुछ अन्य गांवों में शनिवार से यह कार्य शुरू हुआ। पीपलवास निवासी प्रकाश सोलंकी के अनुसार, बारिश के बाद भूमि बुवाई के लिए उपयुक्त हो गई है। किसानों का मानना है कि यदि अगले 10-15 दिनों तक बारिश न भी हो, तो भी मिट्टी में मौजूद वर्तमान नमी अंकुरण के लिए पर्याप्त रहेगी। पीपलवास पंचायत के आसपास के किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में यह जोखिम भरा फैसला ले रहे हैं। इसके विपरीत, मौसम पूर्वानुमान मंच और कृषि विशेषज्ञ किसानों को बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दे रहे हैं। उनका तर्क है कि प्री-मानसून बारिश पर बड़े पैमाने पर बुवाई करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि आगे पर्याप्त वर्षा न होने की स्थिति में फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।1
- परिवार में रिश्तों के कत्ल का एक खौफनाक मामला बेनकाब हुआ है, जहाँ एक सगी बहन के लड़के ने अपने ही परिजनों के खिलाफ घिनौनी साजिश रची। इस षड्यंत्र के तहत, उसने स्पष्ट रूप से कहा था कि 'पहले नानी को मार दो, फिर मामा को भी निपटा देंगे।' इस भयावह योजना को अंजाम देते हुए, बहू ने अपनी सास को कीटनाशक देकर मौत के घाट उतार दिया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि उन रिश्तों, विश्वास और पारिवारिक मूल्यों की भी हत्या है जहाँ अपनापन और विश्वास होना चाहिए था। जब स्वार्थ और गलत इरादे हावी हो जाते हैं, तब इंसान अपने ही लोगों का दुश्मन बन जाता है। इस जघन्य अपराध के दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में यह स्पष्ट संदेश जाए कि रिश्तों के नाम पर किया गया अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना कोई अन्य जघन्य अपराध।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड स्थित मूंगा खेड़ा गांव में खेत पर काम करते समय किसान कालू कीर एक कुएं में गिर गए। इस घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस, पुलिस और हिन्दुस्तान जिंक की बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य के दौरान कुएं में सांपों की मौजूदगी सामने आई, जिससे अभियान प्रभावित हुआ और उसमें बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद, वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने कुएं से तीन जहरीले सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें जंगल में छोड़ा। सांपों का खतरा टलने के बाद, बचाव दल ने किसान कालू कीर के शव को कुएं से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए गंगरार चिकित्सालय पहुंचाया।1