बांसखोह कस्बे में मस्जिद से मुहर्रम के अवसर पर ताजियों का जुलूस अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और उन्होंने पूरी धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन व भाईचारे के साथ इमाम हुसैन की शहादत को पारंपरिक मातम के साथ याद किया। ताजिया जुलूस बांसखोह कस्बे के सभी मुख्य मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचा, जहाँ धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार ताजियों का सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान कई तरह के करतब भी दिखाए गए। पूरे जुलूस मार्ग में पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात था। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार जुलूस की निगरानी की और सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी जगह-जगह पानी, शरबत और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएँ प्रदान कीं। ग्रामवासियों ने आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए जुलूस का खुले दिल से स्वागत किया। प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी नागरिकों, आयोजकों और सुरक्षा बलों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मस्जिद अध्यक्ष बाबूदीन खा, सद्दाम हुसैन, रफीक बागवान, नूर मोहम्मद, रफीक लुहार, मुंशी लुहार, सिराज, सत्तार शाह, जाकिर हुसैन, मुन्ना लुहार, साबिर सहित काफी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित थे। बस्सी पुलिस प्रशासन के थानाधिकारी धर्मेंद्र शर्मा, तूंगा थाना इंचार्ज अशोक सिंह, जटवाड़ा चौकी इंचार्ज रामकेश मीणा, बांसखोह चौकी इंचार्ज मुकेश कुमार और समस्त स्टाफ, जिसमें जसवंत सिंह, कृष्ण कुमार, राजेंद्र, रामराज, सीताराम, रोशन और अन्य महिला पुलिसकर्मी स्टाफ भी शामिल थे, मौजूद रहे। ताजिया जुलूस के दौरान समिति द्वारा सरपंच प्रतिनिधि राजेश महंत, रामफूल सैनी, तूंगा इंचार्ज, बांसखोह इंचार्ज, जटवाड़ा चौकी इंचार्ज और मीडियाकर्मी योगेश कुमार गुप्ता व पत्रकार गिर्राज शर्मा का माला व साफा पहनाकर सम्मान भी किया गया।
बांसखोह कस्बे में मस्जिद से मुहर्रम के अवसर पर ताजियों का जुलूस अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और उन्होंने पूरी धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन व भाईचारे के साथ इमाम हुसैन की शहादत को पारंपरिक मातम के साथ याद किया। ताजिया जुलूस बांसखोह कस्बे के सभी मुख्य मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचा, जहाँ धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार ताजियों का सुपुर्द-ए-खाक किया
गया। इस दौरान कई तरह के करतब भी दिखाए गए। पूरे जुलूस मार्ग में पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात था। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार जुलूस की निगरानी की और सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी जगह-जगह पानी, शरबत और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएँ प्रदान कीं। ग्रामवासियों ने आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक
सौहार्द का परिचय देते हुए जुलूस का खुले दिल से स्वागत किया। प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी नागरिकों, आयोजकों और सुरक्षा बलों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मस्जिद अध्यक्ष बाबूदीन खा, सद्दाम हुसैन, रफीक बागवान, नूर मोहम्मद, रफीक लुहार, मुंशी लुहार, सिराज, सत्तार शाह, जाकिर हुसैन, मुन्ना लुहार, साबिर सहित काफी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित थे। बस्सी पुलिस प्रशासन के थानाधिकारी धर्मेंद्र शर्मा, तूंगा
थाना इंचार्ज अशोक सिंह, जटवाड़ा चौकी इंचार्ज रामकेश मीणा, बांसखोह चौकी इंचार्ज मुकेश कुमार और समस्त स्टाफ, जिसमें जसवंत सिंह, कृष्ण कुमार, राजेंद्र, रामराज, सीताराम, रोशन और अन्य महिला पुलिसकर्मी स्टाफ भी शामिल थे, मौजूद रहे। ताजिया जुलूस के दौरान समिति द्वारा सरपंच प्रतिनिधि राजेश महंत, रामफूल सैनी, तूंगा इंचार्ज, बांसखोह इंचार्ज, जटवाड़ा चौकी इंचार्ज और मीडियाकर्मी योगेश कुमार गुप्ता व पत्रकार गिर्राज शर्मा का माला व साफा पहनाकर सम्मान भी किया गया।
- योगेश कुमार गुप्ता ने बांसखोह कस्बे में ताजिया जुलूस की एक लाइव रिपोर्ट पेश की है।1
- जयपुर के कलवाड़ रोड पर स्थित मंगलम सिटी, जो इस मार्ग का पहला प्रोजेक्ट था, आज पानी और सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रही है। लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या मंगलम सिटी जयपुर का हिस्सा नहीं है, क्योंकि इसे पूरी तरह से उपेक्षित छोड़ दिया गया है। पोस्ट के अनुसार, मंगलम सिटी पानी और सड़कों से इतनी दूर क्यों है, इसका कोई जवाब नहीं मिल रहा। निवासियों का मानना है कि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिससे वे प्रशासन से यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर मंगलम सिटी की देखभाल कौन करेगा। यह स्थिति क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जवाबदेही के अभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त करती है।2
- बहरोड़ में एक दूध का टैंकर पलट गया। इस घटना के बाद, टैंकर से दूध ले जाने के लिए लोगों में होड़ मच गई।1
- मध्य प्रदेश के रतलाम में मोहर्रम के जुलूस के दौरान एक हादसा हो गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि मरने वाले चारों लोगों को 'हूरें' मिलीं, जबकि घायल हुए दो दर्जन से अधिक लोग भी अब 'हूरों' की आस में हैं।1
- लाइब्रेरियन ग्रेड-3 भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम 11 माह बीत जाने के बाद भी जारी न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को जयपुर में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत लेटकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और जल्द से जल्द परिणाम जारी करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा हुए लगभग 11 महीने हो चुके हैं, लेकिन अंतिम परिणाम अभी तक घोषित नहीं किया गया है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी के कारण उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान, अभ्यर्थियों ने बोर्ड प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अंतिम परिणाम जारी करने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने की मांग की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे।1
- एक निजी कंपनी के 'मास्टरस्ट्रोक' ऐप में सेंध लगाकर ₹1,72,86,297 की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस संबंध में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लालसोट निवासी राहुल और रिंकू सैनी नामक दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों ने कंपनी को यह बड़ा चूना लगाया है। कंपनी अपने उत्पाद खरीदने पर ग्राहकों को टोकन रिवॉर्ड देती है, लेकिन इन आरोपियों ने कोई भी उत्पाद नहीं खरीदा। उन्होंने फर्जी क्यूआर कोड जनरेट किए और उनके माध्यम से कंपनी के साथ यह बड़ी धोखाधड़ी की। पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के निर्देश पर साइबर थाने ने यह कार्रवाई की है।1
- बांसखोह में पुलिस प्रशासन ने ताजिया जुलूस पर माला व साफा पहनाकर उसका स्वागत और सम्मान किया।1
- अलवर से मिली जानकारी के अनुसार, एक मासूम से दरिंदगी के आरोपी की सारी हेकड़ी और अकड़ कानून के सामने धरी रह गई। जो खुद को बड़ा समझ रहा था, आज उसके लिए पैरों पर खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है। यह घटना दर्शाती है कि कानून भले ही देर से कार्य करे, लेकिन वह हैवानियत का जवाब पूरी सख्ती के साथ देता है।1