रांची के काटाटोली स्थित अरुण ईएनटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बारिश के मौसम में नाक, कान और गले (ENT) की सामान्य समस्याओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनके अनुसार, इस मौसम में कान का फंगल इन्फेक्शन (ओटोमाइकोसिस), साइनस, गले में खराश और सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं। इन सभी समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए उन्होंने जरूरी सावधानियां अपनाने और उचित देखभाल करने पर जोर दिया है। डॉ. अरुण कुमार ने सलाह दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति को नाक, कान या गले से संबंधित कोई भी लक्षण या समस्या महसूस होती है, तो उन्हें तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर उचित परामर्श लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी केवल जन जागरूकता और सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है, जिसे पेशेवर चिकित्सा निदान, इलाज या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रांची के काटाटोली स्थित अरुण ईएनटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बारिश के मौसम में नाक, कान और गले (ENT) की सामान्य समस्याओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनके अनुसार, इस मौसम में कान का फंगल इन्फेक्शन (ओटोमाइकोसिस), साइनस, गले में खराश और सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं। इन सभी समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए उन्होंने जरूरी सावधानियां अपनाने और उचित देखभाल करने पर जोर दिया है। डॉ. अरुण कुमार ने सलाह दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति को नाक, कान या गले से संबंधित कोई भी लक्षण या समस्या महसूस होती है, तो उन्हें तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर उचित परामर्श लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी केवल जन जागरूकता और सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है, जिसे पेशेवर चिकित्सा निदान, इलाज या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
- झारखंड में सुबोधकांत सहाय ने कानून के वास्तविक उद्देश्य को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि कानून न्याय सुनिश्चित करने के लिए होना चाहिए, न कि किसी की आवाज को दबाने के लिए। उनके अनुसार, कानून का इस्तेमाल लोगों की आवाज को बंद करने या उन्हें दबाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।1
- एक बेहद दर्दनाक हादसे में तालाब में नहाने गए 12 साल के एक बच्चे को मगरमच्छ ने देखते ही देखते निगल लिया। यह बच्चा अपने कई साथियों के साथ तालाब में नहाने के लिए गया हुआ था, तभी अचानक एक मगरमच्छ ने उस पर हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई, लेकिन वहां मौजूद कोई भी कुछ नहीं कर पाया और बच्चे को बचाया नहीं जा सका।1
- झारखंड के रांची में आस्था, उत्साह और परंपरा के अद्भुत संगम के साथ भव्य रथ यात्रा का आयोजन हुआ, जिसने हर किसी का मन मोह लिया। इस पावन अवसर पर चारों ओर गहरा उत्साह देखा गया और पूरा माहौल 'जय जगन्नाथ' के भक्तिमय जयघोष से गूंज उठा।1
- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 के तहत रांची जिले के सभी शहरी मतदान केंद्रों पर 18 एवं 20 जुलाई 2026 को विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। यह शिविर सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को Enumeration Form (गणना प्रपत्र) उपलब्ध कराना और भरे हुए प्रपत्र प्राप्त करना है। इससे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जा सकेगा। जिन मतदाताओं को अब तक गणना प्रपत्र नहीं मिला है या जिन्होंने इसे प्राप्त करने के बाद भी अभी तक जमा नहीं किया है, वे अपने संबंधित मतदान केंद्र पर जाकर इस प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर सकते हैं। हालांकि, जिन मतदाताओं ने अपना प्रपत्र पहले ही संबंधित बीएलओ (BLO) के पास या ऑनलाइन माध्यम से सफलतापूर्वक जमा कर दिया है, उन्हें इस शिविर में आने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, विदेशी नागरिकों या भारतीय नागरिकता त्याग चुके लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने नाम पर प्राप्त गणना प्रपत्र को बिना भरे और बिना हस्ताक्षर किए संबंधित बीएलओ को वापस कर दें। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी शहरी मतदाताओं से अपील की है कि वे इन विशेष शिविरों में पहुंचकर समय पर गणना प्रपत्र प्राप्त करने या जमा करने की प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।1
- लद्दाख के पर्यावरण, संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय लोगों के भविष्य को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का अनशन पूरे देश में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके इस आंदोलन ने देश में विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस अनशन के पीछे की असली वजह और इसके भविष्य पर पड़ने वाले असर को लेकर देश की जनता में उत्सुकता बनी हुई है। ऐसे में यह गंभीर सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या सरकार को उनकी इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल ले जाया गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्हें अस्पताल ले जाते हुए देखा जा सकता है। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस का कहना है कि यह कदम स्वास्थ्य संबंधी कारणों और मेडिकल सलाह के आधार पर उठाया गया है। वहीं दूसरी ओर, सोनम वांगचुक के समर्थकों की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग दावा किया जा रहा है।1