जनता और सोशल मीडिया की शक्ति का ताजा प्रमाण पाकुड़ जिले में देखने को मिला है, जहाँ पिछले 20 सालों से अपनी जमीन और मकान के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे गरीब किसान गणेश मंडल की पुकार आखिरकार रांची तक पहुँच गई। भाजपा नेत्री मिसफिका हसन द्वारा पाकुड़ प्रशासन की 'कुंभकर्णी नींद' का एक्स (ट्विटर) पर पर्दाफाश करते हुए सीधे मुख्यमंत्री से सवाल दागे जाने और इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सरकार तुरंत हरकत में आ गई। परिणामस्वरूप, खबर छपने और सोशल मीडिया पर मामला गर्माने के कुछ ही समय के भीतर, सीधे मंत्री कार्यालय से पाकुड़ उपायुक्त को कार्रवाई का कड़ा निर्देश जारी कर दिया गया है। झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के माननीय मंत्री के आप्त सचिव कपिल कुमार ने पाकुड़ डीसी को पत्रांक 623/मं०का० (दिनांक 21/05/2026) जारी कर स्पष्ट रूप से जवाब तलब किया है और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदेश में बताया गया है कि गोविंदपुर साहेबगंज पथ चौड़ीकरण परियोजना के लिए अंचल-अमड़ापाड़ा अंतर्गत मौजा-छोटापहाड़पुर नंबर-13, जमाबंदी नंबर-13, दाग नंबर-372 में स्थित मकान के समुचित मुआवजे हेतु आवेदन प्राप्त हुआ है, जिस पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। यह निर्देश फाइलों को दबाकर बैठे अधिकारियों के लिए 'ऊपर' से एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह घटना केवल एक मुआवजे का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र की उस बेरुखी को भी उजागर करती है जिसने एक गरीब परिवार को 20 साल तक मोहताज बनाए रखा। इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मार्च में ही पाकुड़ डीसी को एक कड़ा पत्र लिखा था, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मिसफिका हसन की 'ट्विटर स्ट्राइक' ने इस मामले को सीधे जनता और मुख्यमंत्री के सामने लाकर खड़ा कर दिया, जिसके बाद जो काम 20 साल में नहीं हुआ, उस पर सरकार को आनन-फानन में कार्रवाई करनी पड़ी। अब कमान पाकुड़ डीसी के हाथ में है और आदेश रांची से पाकुड़ पहुँच चुका है। देखना दिलचस्प होगा कि मंत्री के इस पत्र के बाद भी फाइलें धीमी गति से चलती हैं या गरीब गणेश मंडल के घर 20 साल बाद न्याय का उजाला पहुँचता है। इस खबर पर लगातार नजर बनाए रखी जा रही है, क्योंकि मिसफिका हसन के एक ट्वीट से पाकुड़ प्रशासन में खलबली मच गई और रांची तक इसकी गूँज सुनाई दी।
जनता और सोशल मीडिया की शक्ति का ताजा प्रमाण पाकुड़ जिले में देखने को मिला है, जहाँ पिछले 20 सालों से अपनी जमीन और मकान के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे गरीब किसान गणेश मंडल की पुकार आखिरकार रांची तक पहुँच गई। भाजपा नेत्री मिसफिका हसन द्वारा पाकुड़ प्रशासन की 'कुंभकर्णी नींद' का एक्स (ट्विटर) पर पर्दाफाश करते हुए सीधे मुख्यमंत्री से सवाल दागे जाने और इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सरकार तुरंत हरकत में आ गई। परिणामस्वरूप, खबर छपने और सोशल मीडिया पर मामला गर्माने के कुछ ही समय के भीतर, सीधे मंत्री कार्यालय से पाकुड़ उपायुक्त को कार्रवाई का कड़ा निर्देश जारी कर दिया गया है। झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के माननीय मंत्री के आप्त सचिव कपिल कुमार ने पाकुड़ डीसी को पत्रांक 623/मं०का० (दिनांक 21/05/2026) जारी कर स्पष्ट रूप से जवाब तलब किया है और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदेश में बताया गया है कि गोविंदपुर साहेबगंज पथ चौड़ीकरण परियोजना के लिए अंचल-अमड़ापाड़ा अंतर्गत मौजा-छोटापहाड़पुर नंबर-13, जमाबंदी नंबर-13, दाग नंबर-372 में स्थित मकान के समुचित मुआवजे हेतु आवेदन प्राप्त हुआ है, जिस पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। यह निर्देश फाइलों को दबाकर बैठे अधिकारियों के लिए 'ऊपर' से एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह घटना केवल एक मुआवजे का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र की उस बेरुखी को भी उजागर करती है जिसने एक गरीब परिवार को 20 साल तक मोहताज बनाए रखा। इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मार्च में ही पाकुड़ डीसी को एक कड़ा पत्र लिखा था, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मिसफिका हसन की 'ट्विटर स्ट्राइक' ने इस मामले को सीधे जनता और मुख्यमंत्री के सामने लाकर खड़ा कर दिया, जिसके बाद जो काम 20 साल में नहीं हुआ, उस पर सरकार को आनन-फानन में कार्रवाई करनी पड़ी। अब कमान पाकुड़ डीसी के हाथ में है और आदेश रांची से पाकुड़ पहुँच चुका है। देखना दिलचस्प होगा कि मंत्री के इस पत्र के बाद भी फाइलें धीमी गति से चलती हैं या गरीब गणेश मंडल के घर 20 साल बाद न्याय का उजाला पहुँचता है। इस खबर पर लगातार नजर बनाए रखी जा रही है, क्योंकि मिसफिका हसन के एक ट्वीट से पाकुड़ प्रशासन में खलबली मच गई और रांची तक इसकी गूँज सुनाई दी।
- पश्चिम बंगाल में 'अतीक अहमद' कहे जा रहे एक व्यक्ति के 'काले साम्राज्य' के राज अब उजागर होने लगे हैं। यह महत्वपूर्ण खुलासा सुबेन्दु पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के परिणामस्वरूप सामने आ रहा है।1
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- गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड स्थित बाबूपुर बस्ती निवासी उस्मान गनी पिछले छह महीनों से लापता हैं। इसी बीच, लगभग 12 घंटे पहले एक वीडियो सोशल मीडिया और एक चैनल के माध्यम से तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक व्यक्ति गन्ने के खेत में गिरा हुआ दिखाई दे रहा है, और उसके पास एक साइकिल भी पड़ी है। हालांकि, यह वीडियो किस क्षेत्र से पोस्ट किया गया है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। लोगों से अपील की गई है कि वे वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें और वीडियो के संबंध में कोई भी जानकारी होने पर दिए गए नंबर +91 80021 33724 पर संपर्क करें।1
- गोड्डा जिले के संझौला में एक छोटी सी बात को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस विवाद ने 'महाभारत' का रूप ले लिया, जिसके बाद वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।1
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- झारखंड के दुमका जिले में एक पथ (रास्ता) बेहद जर्जर अवस्था में है। इस खराब हालत के कारण लोगों को उस पर चलने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।1
- गोड्डा जिले के मेहरमा में बकरीद पर्व को लेकर शांति समिति की बैठक हुई। इसमें सभी लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई।1