JPSC का बजट 55 करोड़, खर्च कर दिए पौने दस करोड़ और परिणाम सिर्फ विवाद JPSC का बजट 55 करोड़, खर्च कर दिए पौने दस करोड़ और परिणाम सिर्फ विवाद राँची: झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है. JPSC का चालू वित्तीय वर्ष में कुल बजट 55.33 करोड़ रुपये है, जिसमें से 9.48 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं. बावजूद इसके, दो दशक लंबे सफर में JPSC का कोई भी परिणाम ऐसा नहीं रहा जो दूध का दूध और पानी की पानी की तरह साफ साबित हुआ हो. हर परीक्षा, हर परिणाम और हर चयन प्रक्रिया के साथ विवादों का एक नया अध्याय जुड़ता गया है. प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा तक, कॉपियों के मूल्यांकन से लेकर कटऑफ तय करने तक हर मोर्चे पर जेपीएससी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में रही है. पहली से छठी JPSC: शुरुआत से ही विवादों का रहा है चोली-दामन का साथ राज्य गठन के ठीक बाद वर्ष 2003 में जब पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा आयोजित हुई, तो लगा कि झारखंड के युवाओं को उनका हक मिलेगा। लेकिन यह उम्मीदें ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाईं. वर्ष 2005-06 में आयोजित दूसरी जेपीएससी परीक्षा ने ही आयोग के भ्रष्टाचार के द्वार खोल दिए. चयन प्रक्रिया में खुलेआम बरती गई अनियमितताओं के बाद जब जांच बैठी, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हुए और अधिकारियों पर कार्रवाई की गई. इसके बाद वर्ष 2008 में हुई तीसरी जेपीएससी हो या फिर 2012-13 की चौथी और 2015 की पांचवीं JPSC, हर बार नियमावली, कटऑफ, आरक्षण के प्रावधान और परीक्षा पैटर्न को लेकर विवादों का बवंडर उठता रहा. इन सबमें सबसे बदनाम रही वर्ष 2016 की छठी जेपीएससी परीक्षा, जो अपनी सुस्ती, धांधली और लंबी कानूनी लड़ाइयों के लिए जानी गई. 7वीं से 10वीं JPSC : सीरियल रोल नंबर और ओएमआर शीट का रहस्य बैकलॉग के नाम पर आयोग ने जब 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को एक साथ ले कर वर्ष 2021 में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की, तो अभ्यर्थियों ने जब रिजल्ट का विश्लेषण किया, तो पाया कि एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार (सीरियल) रोल नंबर वाले दर्जनों अभ्यर्थियों का चयन हो गया था. इसके अलावा ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे। रास्तों पर उतरे युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं और मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिससे जेपीएससी की साख पूरी तरह से रसातल में चली गई. 11वीं से 13वीं JPSC: एक तीर से कई निशाने, लेकिन दाग बरकरार विवादों से पीछा छुड़ाने के बजाय आयोग ने पुरानी शैली अपनाते हुए 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को एक बार फिर क्लब करके संयुक्त रूप से आयोजित किया. इस परीक्षा के जरिए 342 पदों पर अंतिम रूप से नियुक्तियां तो पूरी कर ली गईं, लेकिन प्रक्रिया पर से सवालिया निशान हटे नहीं. सफल अभ्यर्थियों की सूची आने के साथ ही नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी के आरोप फिर से गूंजने लगे. 14वीं JPSC : भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा, स्थगित हुई मुख्य परीक्षा और ठप पड़ा सिस्टम विज्ञापन संख्या 01/2026 के अंतर्गत मात्र 103 पदों के लिए 19 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में जब पीटी का परिणाम घोषित हुआ, तो राज्यभर में भूचाल आ गया. छात्रों का सीधा आरोप है कि आयोग ने पारदर्शी तरीके से कटऑफ मार्क्स (Cut-off) तक जारी नहीं किए। ओएमआर शीट के मूल्यांकन और चयन के कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भयंकर धांधली बरती गई। रास्तों पर छात्रों का आक्रोश उबल पड़ा. JPSC का सफर और परीक्षाओं के विवाद • 2003 (पहली JPSC): 64 पदों के लिए पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन, जो शुरुआत का शंखनाद थी. • 2005-06 (दूसरी JPSC) : चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप लगे, जिसके बाद लंबी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गई. • 2008 (तीसरी JPSC): चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए और छात्रों का आक्रोश फूटा. • 2012-13 (चौथी JPSC): नियमावली और कटऑफ को लेकर भारी विवाद, मामला अदालतों की देहरी तक पहुंचा. • 2015 (पांचवीं JPSC): आरक्षण के नियमों और परीक्षा पैटर्न में मनमाने बदलाव को लेकर तीखा विरोध हुआ. • 2016 (छठी JPSC): विज्ञापन से लेकर अंतिम परिणाम तक लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह परीक्षा किसी तरह पूरी हो पाई. • 2021 (7वीं-10वीं JPSC): बैकलॉग खत्म करने के नाम पर एक साथ चार परीक्षाएं कराई गईं, जिसमें सीरियल रोल नंबर घोटाला और ओएमआर शीट में धांधली का बड़ा आरोप लगा. • 2024 (11वीं-13वीं JPSC): तीन परीक्षाओं को एक साथ जोड़कर 342 पदों पर नियुक्ति पूरी की गई, लेकिन नियम और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. • 2026 (14वीं JPSC): 19 अप्रैल को प्रारंभिक परीक्षा हुई, जुलाई में रिजल्ट आया और फिर पारदर्शिता के अभाव में विवाद गरमाया. अंततः मुख्य परीक्षा समेत 9 परीक्षाएं टालनी पड़ गई.
JPSC का बजट 55 करोड़, खर्च कर दिए पौने दस करोड़ और परिणाम सिर्फ विवाद JPSC का बजट 55 करोड़, खर्च कर दिए पौने दस करोड़ और परिणाम सिर्फ विवाद राँची: झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है. JPSC का चालू वित्तीय वर्ष में कुल बजट 55.33 करोड़ रुपये है, जिसमें से 9.48 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं. बावजूद इसके, दो दशक लंबे सफर में JPSC का कोई भी परिणाम ऐसा नहीं रहा जो दूध का दूध और पानी की पानी की तरह साफ साबित हुआ हो. हर परीक्षा, हर परिणाम और हर चयन प्रक्रिया के साथ विवादों का एक नया अध्याय जुड़ता गया है. प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा तक, कॉपियों के मूल्यांकन से लेकर कटऑफ तय करने तक हर मोर्चे पर जेपीएससी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में रही है. पहली से छठी JPSC: शुरुआत से ही विवादों का रहा है चोली-दामन का साथ राज्य गठन के ठीक बाद वर्ष 2003 में जब पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा आयोजित हुई, तो लगा कि झारखंड के युवाओं को उनका हक मिलेगा। लेकिन यह उम्मीदें ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाईं. वर्ष 2005-06 में आयोजित दूसरी जेपीएससी परीक्षा ने ही आयोग के भ्रष्टाचार के द्वार खोल दिए. चयन प्रक्रिया में खुलेआम बरती गई अनियमितताओं के बाद जब जांच बैठी, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हुए और अधिकारियों पर कार्रवाई की गई. इसके बाद वर्ष 2008 में हुई तीसरी जेपीएससी हो या फिर 2012-13 की चौथी और 2015 की पांचवीं JPSC, हर बार नियमावली, कटऑफ, आरक्षण के प्रावधान और परीक्षा पैटर्न को लेकर विवादों का बवंडर उठता रहा. इन सबमें सबसे बदनाम रही वर्ष 2016 की छठी जेपीएससी परीक्षा, जो अपनी सुस्ती, धांधली और लंबी कानूनी लड़ाइयों के लिए जानी गई. 7वीं से 10वीं JPSC : सीरियल रोल नंबर और ओएमआर शीट का रहस्य बैकलॉग के नाम पर आयोग ने जब 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को एक साथ ले कर वर्ष 2021 में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की, तो अभ्यर्थियों ने जब रिजल्ट का विश्लेषण किया, तो पाया कि एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार (सीरियल) रोल नंबर वाले दर्जनों अभ्यर्थियों का चयन हो गया था. इसके अलावा ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे। रास्तों पर उतरे युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं और मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिससे जेपीएससी की साख पूरी तरह से रसातल में चली गई. 11वीं से 13वीं JPSC: एक तीर से कई निशाने, लेकिन दाग बरकरार विवादों से पीछा छुड़ाने के बजाय आयोग ने पुरानी शैली अपनाते हुए 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को एक बार फिर क्लब करके संयुक्त रूप से आयोजित किया. इस परीक्षा के जरिए 342 पदों पर अंतिम रूप से नियुक्तियां तो पूरी कर ली गईं, लेकिन प्रक्रिया पर से सवालिया निशान हटे नहीं. सफल अभ्यर्थियों की सूची आने के साथ ही नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी के आरोप फिर से गूंजने लगे. 14वीं JPSC : भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा, स्थगित हुई मुख्य परीक्षा और ठप पड़ा सिस्टम विज्ञापन संख्या 01/2026 के अंतर्गत मात्र 103 पदों के लिए 19 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में जब पीटी का परिणाम घोषित हुआ, तो राज्यभर में भूचाल आ गया. छात्रों का सीधा आरोप है कि आयोग ने पारदर्शी तरीके से कटऑफ मार्क्स (Cut-off) तक जारी नहीं किए। ओएमआर शीट के मूल्यांकन और चयन के कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भयंकर धांधली बरती गई। रास्तों पर छात्रों का आक्रोश उबल पड़ा. JPSC का सफर और परीक्षाओं के विवाद • 2003 (पहली JPSC): 64 पदों के लिए पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन, जो शुरुआत का शंखनाद थी. • 2005-06 (दूसरी JPSC) : चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप लगे, जिसके बाद लंबी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गई. • 2008 (तीसरी JPSC): चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए और छात्रों का आक्रोश फूटा. • 2012-13 (चौथी JPSC): नियमावली और कटऑफ को लेकर भारी विवाद, मामला अदालतों की देहरी तक पहुंचा. • 2015 (पांचवीं JPSC): आरक्षण के नियमों और परीक्षा पैटर्न में मनमाने बदलाव को लेकर तीखा विरोध हुआ. • 2016 (छठी JPSC): विज्ञापन से लेकर अंतिम परिणाम तक लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह परीक्षा किसी तरह पूरी हो पाई. • 2021 (7वीं-10वीं JPSC): बैकलॉग खत्म करने के नाम पर एक साथ चार परीक्षाएं कराई गईं, जिसमें सीरियल रोल नंबर घोटाला और ओएमआर शीट में धांधली का बड़ा आरोप लगा. • 2024 (11वीं-13वीं JPSC): तीन परीक्षाओं को एक साथ जोड़कर 342 पदों पर नियुक्ति पूरी की गई, लेकिन नियम और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. • 2026 (14वीं JPSC): 19 अप्रैल को प्रारंभिक परीक्षा हुई, जुलाई में रिजल्ट आया और फिर पारदर्शिता के अभाव में विवाद गरमाया. अंततः मुख्य परीक्षा समेत 9 परीक्षाएं टालनी पड़ गई.
- डूमरझारा में अवैध महुआ शराब भट्टी पर पुलिस का छापा, कई लीटर शराब व जावा महुआ नष्ट डूमरझारा में अवैध महुआ शराब भट्टी पर पुलिस का छापा, कई लीटर शराब व जावा महुआ नष्ट गिरिडीह जिले गांवा थाना क्षेत्र डूमरझारा गांव में घर संचालित अवैध महुआ शराब निर्माण की सूचना सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा कस दिया। खोरी महुआ थाना के पुलिस पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी कर अवैध रूप से संचालित महुआ शराब भट्टी को ध्वस्त कर दिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई लीटर तैयार महुआ शराब बरामद की, जिसे विधि-सम्मत प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा शराब निर्माण के लिए तैयार किया गया बड़ी मात्रा में जावा महुआ भी नष्ट किया गया। पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण और बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने सूचना का सत्यापन किया और कार्रवाई को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले संचालक मौके से फरार हो गए। उनकी पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब निर्माण, भंडारण और बिक्री में संलिप्त लोगों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं अवैध शराब का निर्माण या बिक्री हो रही हो तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। इस कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने सराहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहनी चाहिए, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनी रहे और सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाया जा सके।1
- रजौली के हरदिया पंचायत में लगे सफाई कर्मियों को एक साल से नहीं मिला मानदेय, कर्मियों में आर्थिक संकट गहराया1
- रजौली हरदिया पंचायत में स्वच्छता कर्मी को एक साल से मानदेय नही मिलने पर प्रखंड कार्यालय पहुंचे लोग कहा मानदेय नहीं मिलने से हमारे घर का खर्चा नहीं चल रहा है और पढ़ाई लिखाई में भी दिक्कत हो रहा है1
- चंदवारा प्रखंड के पथलगड्डा पंचायत का मामला, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग चंदवारा प्रखंड अंतर्गत पथलगड्डा पंचायत में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हाल ही में बनी लगभग चार किलोमीटर लंबी सड़क पहली ही बारिश में कई स्थानों पर धंसने लगी है। सड़क के किनारे मिट्टी भराई और समतलीकरण ठीक से नहीं होने के कारण बरसात शुरू होते ही किनारे टूटने लगे, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।ग्रामीणों का शनिवार को 12 बजे कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अब सड़क के कई हिस्सों में किनारे धंसने और गड्ढे बनने से राहगीरों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदार ने भुगतान प्राप्त कर लिया, जबकि सड़क कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त होने लगी। उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तथा सड़क की शीघ्र मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है। चंदवारा प्रखंड के पथलगड्डा पंचायत का मामला, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग चंदवारा प्रखंड अंतर्गत पथलगड्डा पंचायत में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हाल ही में बनी लगभग चार किलोमीटर लंबी सड़क पहली ही बारिश में कई स्थानों पर धंसने लगी है। सड़क के किनारे मिट्टी भराई और समतलीकरण ठीक से नहीं होने के कारण बरसात शुरू होते ही किनारे टूटने लगे, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।ग्रामीणों का शनिवार को 12 बजे कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अब सड़क के कई हिस्सों में किनारे धंसने और गड्ढे बनने से राहगीरों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदार ने भुगतान प्राप्त कर लिया, जबकि सड़क कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त होने लगी। उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तथा सड़क की शीघ्र मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।1
- सतगावां में प्रशासनिक बदलाव: बीडीओ मनोज कुमार रवि ने संभाला सीओ का अतिरिक्त प्रभार, सेवानिवृत्त सीओ केशव प्रसाद चौधरी को भावभीनी विदाई सतगावां (कोडरमा)। सतगावां प्रखंड में शुक्रवार को प्रशासनिक बदलाव के साथ एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार रवि ने अंचल अधिकारी (सीओ) का अतिरिक्त प्रभार विधिवत ग्रहण किया, वहीं लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी को सम्मानपूर्वक भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने उनकी प्रशासनिक सेवाओं की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जिला प्रशासन के आदेश के आलोक में अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी के सेवानिवृत्त होने के बाद अगली व्यवस्था होने तक बीडीओ मनोज कुमार रवि को अंचल अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शुक्रवार को प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त सीओ केशव प्रसाद चौधरी से विधिवत कार्यभार ग्रहण किया। इस दौरान अंचल निरीक्षक पवन कुमार साहू सहित प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। पदभार ग्रहण करने के बाद बीडीओ सह प्रभारी अंचल अधिकारी मनोज कुमार रवि ने कहा कि वे दोनों विभागों के कार्यों का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा। इसी अवसर पर अंचल सभागार में सेवानिवृत्त अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी के सम्मान में भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता 20 सूत्री अध्यक्ष विजय सिंह ने की, जबकि मंच संचालन पूर्व कोडरमा विधानसभा प्रत्याशी रविंद्र शांडिल्य ने किया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि केशव प्रसाद चौधरी ने अपने पूरे सरकारी सेवाकाल में ईमानदारी, निष्ठा, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ दायित्वों का निर्वहन किया तथा अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक सेवा में एक अलग पहचान बनाई। अपने संबोधन में केशव प्रसाद चौधरी ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं क्षेत्रवासियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा का यह अध्याय उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण यात्रा रहा। अब वे जीवन के नए पड़ाव में परिवार और समाज के बीच अधिक समय बिताने का प्रयास करेंगे। उन्होंने सभी से मिले स्नेह और सम्मान को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया। समारोह के दौरान उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके उपरांत प्रखंड मुख्यालय से उनके सम्मान में भव्य विदाई जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूरे मार्ग में लोगों ने उनका स्वागत करते हुए उनके सफल, स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की। इस अवसर पर प्रमुख ललिता देवी, थाना प्रभारी बबलू सिंह, अंचल निरीक्षक पवन कुमार साहू, जिला परिषद प्रतिनिधि धनंजय यादव, पंचायत समिति सदस्य नईमुद्दीन, रणधीर यादव, रामावतार चौधरी, कांग्रेस मंडल अध्यक्ष लालदेव यादव, प्रमोद कुमार, ललन सिंह, प्रफुल्ल सिंह, केदार यादव, अनिल कुमार, राकेश कुमार, मनोज कुमार चौधरी, अनुज यादव, सुनील सिंह, मंटू गुप्ता, उदय राम सहित अंचल एवं प्रखंड कार्यालय के अधिकारी-कर्मी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सतगावां में प्रशासनिक बदलाव: बीडीओ मनोज कुमार रवि ने संभाला सीओ का अतिरिक्त प्रभार, सेवानिवृत्त सीओ केशव प्रसाद चौधरी को भावभीनी विदाई सतगावां (कोडरमा)। सतगावां प्रखंड में शुक्रवार को प्रशासनिक बदलाव के साथ एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार रवि ने अंचल अधिकारी (सीओ) का अतिरिक्त प्रभार विधिवत ग्रहण किया, वहीं लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी को सम्मानपूर्वक भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने उनकी प्रशासनिक सेवाओं की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जिला प्रशासन के आदेश के आलोक में अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी के सेवानिवृत्त होने के बाद अगली व्यवस्था होने तक बीडीओ मनोज कुमार रवि को अंचल अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शुक्रवार को प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त सीओ केशव प्रसाद चौधरी से विधिवत कार्यभार ग्रहण किया। इस दौरान अंचल निरीक्षक पवन कुमार साहू सहित प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। पदभार ग्रहण करने के बाद बीडीओ सह प्रभारी अंचल अधिकारी मनोज कुमार रवि ने कहा कि वे दोनों विभागों के कार्यों का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा। इसी अवसर पर अंचल सभागार में सेवानिवृत्त अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी के सम्मान में भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता 20 सूत्री अध्यक्ष विजय सिंह ने की, जबकि मंच संचालन पूर्व कोडरमा विधानसभा प्रत्याशी रविंद्र शांडिल्य ने किया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि केशव प्रसाद चौधरी ने अपने पूरे सरकारी सेवाकाल में ईमानदारी, निष्ठा, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ दायित्वों का निर्वहन किया तथा अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक सेवा में एक अलग पहचान बनाई। अपने संबोधन में केशव प्रसाद चौधरी ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं क्षेत्रवासियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा का यह अध्याय उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण यात्रा रहा। अब वे जीवन के नए पड़ाव में परिवार और समाज के बीच अधिक समय बिताने का प्रयास करेंगे। उन्होंने सभी से मिले स्नेह और सम्मान को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया। समारोह के दौरान उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके उपरांत प्रखंड मुख्यालय से उनके सम्मान में भव्य विदाई जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूरे मार्ग में लोगों ने उनका स्वागत करते हुए उनके सफल, स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की। इस अवसर पर प्रमुख ललिता देवी, थाना प्रभारी बबलूकुमार सिंह, अंचल निरीक्षक पवन कुमार साहू, जिला परिषद प्रतिनिधि धनंजय यादव, पंचायत समिति सदस्य नईमुद्दीन, रामावतार चौधरी, कांग्रेलाल सुनील सिंह, सहित अंचल एवं प्रखंड कार्यालय के अधिकारी-कर्मी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- चतरा की बेटी मन्नत ने शूटिंग प्रतियोगिता में रचा इतिहास चार स्वर्ण पदक जीतकर बनीं स्टेट रैंक-1, जिले का बढ़ाया मान चतरा। चतरा जिला परिषद के उपाध्यक्ष बिरजू तिवारी की पुत्री मन्नत ने अपनी शानदार प्रतिभा का परिचय देते हुए झारखंड राज्य शूटिंग प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक जीतकर स्टेट रैंक-1 हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे चतरा जिले में खुशी का माहौल है। पश्चिम बंगाल में आयोजित इस प्रतियोगिता में मन्नत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विभिन्न स्पर्धाओं में चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। लगातार बेहतरीन निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने स्टेट रैंक-1 प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे चतरा जिले का नाम रोशन किया। मन्नत की इस उपलब्धि पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, खेल प्रेमियों और जिलेवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। लोगों ने विश्वास जताया कि मन्नत आने वाले दिनों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर झारखंड और देश का गौरव बढ़ाएंगी। चतरा जिला परिषद उपाध्यक्ष बिरजू तिवारी ने अपनी पुत्री की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को उचित अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। मन्नत की इस सफलता से जिले के युवाओं और खेल प्रतिभाओं को भी नई प्रेरणा मिली है।1
- गया जिले के कोच में मोटर पंपसेट चोरी करने के दौरान तीन युवकों को ग्रामीणों ने पकड़ा।1