अपना दुख सुनाने के लिए देने होगें दो सौ पचास रूपया रोते के लिए पॉच सौ । भरथना/इटावा/ सोशल मीडिया पर इन दिनों मुंबई के एक बीच का हैरतअंगेज वीडियो वायरल हो रहा है, जहाँ एक शख्स "दुख सुनने" का स्टॉल लगाकर बैठा है। भागदौड़ भरी जिंदगी और अकेलेपन के इस दौर में यह विचित्र बिजनेस आइडिया चर्चा का विषय बन गया है। इस शख्स के बोर्ड पर रेट लिस्ट भी काफी चौंकाने वाली है: मामूली दुख सुनने के ₹250, बड़ा दुख सुनने के ₹500 और साथ बैठकर रोने के ₹1000। लोग इसे आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बता रहे हैं, क्योंकि अक्सर भीड़भाड़ वाले शहरों में इंसान के पास अपनी बात कहने के लिए कोई अपना नहीं होता। यह कॉन्सेप्ट विदेशों में 'लिस्टिंग सर्विस' या 'कडल थेरेपी' के रूप में पहले से मशहूर है, लेकिन भारत में इसका इस तरह सामने आना क्रांतिकारी माना जा रहा है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाना कई मानसिक बीमारियों की जड़ है, ऐसे में यह 'पेड लिसनर' लोगों के लिए एक शक्तिशाली सहारा बन रहा है। जहां कुछ लोग इसे केवल पैसे कमाने का जरिया बता रहे हैं, वहीं जागरूक वर्ग इसे समाज में बढ़ते अकेलेपन और 'इमोशनल सपोर्ट' की कमी पर एक गंभीर कटाक्ष मान रहा है। 😳
अपना दुख सुनाने के लिए देने होगें दो सौ पचास रूपया रोते के लिए पॉच सौ । भरथना/इटावा/ सोशल मीडिया पर इन दिनों मुंबई के एक बीच का हैरतअंगेज वीडियो वायरल हो रहा है, जहाँ एक शख्स "दुख सुनने" का स्टॉल लगाकर बैठा है। भागदौड़ भरी जिंदगी और अकेलेपन के इस दौर में यह विचित्र बिजनेस आइडिया चर्चा का विषय बन गया है। इस शख्स के बोर्ड पर रेट लिस्ट भी काफी चौंकाने वाली है: मामूली दुख सुनने के ₹250, बड़ा दुख सुनने के ₹500 और साथ बैठकर रोने के ₹1000। लोग इसे आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बता रहे हैं, क्योंकि अक्सर भीड़भाड़ वाले शहरों में इंसान के पास अपनी बात कहने के लिए कोई अपना नहीं होता। यह कॉन्सेप्ट विदेशों में 'लिस्टिंग सर्विस' या 'कडल थेरेपी' के रूप में पहले से मशहूर है, लेकिन भारत में इसका इस तरह सामने आना क्रांतिकारी माना जा रहा है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाना कई मानसिक बीमारियों की जड़ है, ऐसे में यह 'पेड लिसनर' लोगों के लिए एक शक्तिशाली सहारा बन रहा है। जहां कुछ लोग इसे केवल पैसे कमाने का जरिया बता रहे हैं, वहीं जागरूक वर्ग इसे समाज में बढ़ते अकेलेपन और 'इमोशनल सपोर्ट' की कमी पर एक गंभीर कटाक्ष मान रहा है। 😳
- Post by Kanhaiya lal1
- takha Indian Gas agency karmchari ne camera dikhane se keya mana 🤔 jald se jald karva ho agency per camera kyon band hai Raat mein Koi chori kar le keya kari gi1
- अमेरिका ईरान के छिड़े भीषण युद्ध का असर इस जनपद के गैस एजेंसियों की मनमानी व कालाबाजारी से यहां घरेलू उपभोक्ताओं को काफी अपमानित किया गया। लोहिया गैस एजेंसी में गैस की किल्लत को लेकर अपने काफी दिनों से बुक गैस उपभोक्ताओं की आज सुबह से लम्बी कतारें लगी रहीं जहां शाम को दो ट्रकों में सिलेण्डर आने के बाद कुछ अपने चहेतों को सिलेण्डर दिये इस बीच गैस एजेंसी के मैनेजर विकास यादव व उपभोक्ताओं में काफी नोक झोंक हुई जहां मालिक सिद्धार्थ भदौरिया की शह पर मैनेजर विकास यादव ने कई महिलाओं को अपमानित किया। तथा आए दिन यह उपभोक्ताओं को अपमानित करता है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस गैस एजेंसी में खुलकर कालाबाजारी हो रही जहां जिला प्रशासन को इसके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। और इस माह के गैस उपलब्ध होनी चाहिए।1
- Post by Rohit Kumar4
- इटावा। जनपद के ऊसराहार क्षेत्र में कथित रूप से संचालित अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई न होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में कई क्लीनिक बिना मान्यता के संचालित होने की चर्चाएं हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत कुमार यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक पर पोस्ट करते हुए स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों या क्लीनिकों से रिश्वत नहीं मिलती, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जबकि अन्य को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के समक्ष रखी जाएगी और दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रशांत कुमार यादव ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटर फर्जी डिग्री से संचालित हो रहे थे और वहां लिंग परीक्षण जैसे गंभीर मामलों की शिकायतें भी सामने आईं थीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ समय पहले एक सेंटर फर्जी डिग्री के आधार पर संचालित होता पाया गया था, लेकिन उसके खिलाफ न तो कोई मुकदमा दर्ज किया गया और न ही सख्त कार्रवाई की गई। आरोप है कि बाद में दूसरी डिग्री लगाकर सेंटर को दोबारा संचालित करा दिया गया। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ. सतेंद्र यादव ने क्षेत्र के कुछ अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच कर जुर्माना लगाया था, जिसके बाद यह मामला और चर्चा में आ गया। वहीं डिप्टी सीएमओ डॉ. सतेंद्र यादव ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई क्लीनिक बिना पंजीकरण के संचालित पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 29 अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई की जा चुकी है। फिलहाल यह मामला पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।1
- Post by PK Crime Story1
- Post by Shuru User, satendra kevat1
- Post by Rohit Kumar1