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गोरखपुर में अरविंद उपेंद्र शुक्ला जेल से रिहा हो गए हैं। जेल से बाहर आते ही उनका भव्य स्वागत किया गया। इस रिहाई के बाद से एसपी कार्यकर्ताओं में भारी खुशी देखी जा रही है।
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गोरखपुर में अरविंद उपेंद्र शुक्ला जेल से रिहा हो गए हैं। जेल से बाहर आते ही उनका भव्य स्वागत किया गया। इस रिहाई के बाद से एसपी कार्यकर्ताओं में भारी खुशी देखी जा रही है।
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- गोरखपुर के गोला नगर पंचायत के गोपालपुर स्थित चौबाह बाबा मंदिर परिसर में भारी जलभराव होने से स्थानीय लोगों में भारी रोष है और इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इस स्थिति के लिए गोला नगर पंचायत की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि हाल ही में बनाई गई नाली को मंदिर परिसर से नहीं जोड़ा गया, जिसके कारण बारिश का पानी जमा हो गया है और इससे अब आसपास के घर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इस पूरी लापरवाही को लेकर स्थानीय सभासद पर भी पक्षपात करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच एक बड़ा ऐलान किया गया है। इस आंदोलन और बड़े ऐलान के बीच लोग यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि आखिर सोनम वांगचुक कौन हैं।1
- सोनम वांगचुक ने देशवासियों से एक बेहद भावुक अपील की है। उन्होंने लोगों से आगामी 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित होने वाले संसद मार्च में बढ़-चढ़कर शामिल होने का आह्वान किया है। दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना, भूख हड़ताल, शिक्षा सुधार और छात्र आंदोलन के इस आह्वान के साथ उन्होंने देश के नागरिकों से एकजुट होने की अपील की है।1
- जंतर-मंतर पर 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के एक बयान ने सबको चौंका दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वह दो दिन में मर जाएंगे। उनके इस हैरान करने वाले बयान के पीछे का पूरा सच क्या है और उन्होंने ऐसा क्यों कहा, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोनम वांगचुक की इस 18 दिवसीय भूख हड़ताल के पूरे सच को लेकर चर्चा तेज है।1
- गोरखपुर के गुरुकुल इनलाइटेंड पब्लिक स्कूल में भारतीय न्यूज एजेंसी (BNA) द्वारा साइबर अवेयरनेस एवं नारी सशक्तिकरण विषय पर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों और उपस्थित लोगों को साइबर अपराधों से बचाव, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार तथा महिलाओं के अधिकारों व सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता साइबर कमांडो उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि साइबर ठगों से बचने का सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता और सतर्कता है। उन्होंने उपस्थित लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल भुगतान में बरती जाने वाली सावधानियों और साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में दूसरी मुख्य वक्ता अधिवक्ता पूजा गुप्ता ने नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश देते हुए कहा कि कानून महिलाओं को सुरक्षा और समान अधिकार देता है, आवश्यकता केवल उन्हें जानने और अपनाने की है। उन्होंने महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों के साथ-साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के महत्व को भी रेखांकित किया। इस दौरान भारतीय न्यूज एजेंसी के मुख्य ट्रस्टी ई. शक्ति शंकर, कोषाध्यक्ष वर्षा रावत, डायरेक्टर बलराम सिंह, विद्यालय के प्रिंसिपल एस. डी. शुक्ला और वाइस प्रिंसिपल श्रीमती सीमा विजेता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इस पहल को समाज के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम का संचालन विशाल राय ने किया। इस अवसर पर पत्रकार जावेद खान, अमित भारती, अंशुल वर्मा, दबीर आलम, अहमद फ्रेजर, महेश सरन श्रीवास्तव, आबिद अली, विजय कुमार गुप्ता सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में भारतीय न्यूज एजेंसी की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया और भविष्य में भी समाजहित में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।1
- सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारियों ने अपनी सामाजिक सुरक्षा और बुढ़ापे की लाठी कही जाने वाली पुरानी पेंशन को बहाल करने के लिए सरकार से भावुक अपील की है। डिप्लोमा इंजीनियर्स भवन पर इकट्ठा होकर इन सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारियों ने बकायदा कफन ओढ़कर प्रदर्शन किया और अपनी पीड़ा को सबके सामने रखा। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों पर तीखा सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब नेताओं को दो-दो और चार-चार पेंशन मिल सकती हैं, तो 40 वर्ष तक लगातार सेवा करने वाले कर्मचारियों को महज एक पेंशन देने में सरकार आखिर क्यों हीला-हवाली कर रही है?1
- गोरखपुर में इंसानी फितरत पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि पहले जहां बारिश का बेसब्री से इंतजार होता था, वहीं अब बारिश के मौसम में भी डर लगने लगा है। स्थिति यह हो गई है कि मेंढक भी बाहर निकलने से पहले सोचने लगा है कि वह बाहर आए या नहीं। यह डर बारिश का नहीं है, बल्कि इंसानों का है, क्योंकि इंसान अब प्रकृति से भी ज्यादा खतरनाक हो चुके हैं।1