उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें डायल-112 पर तैनात एक पुलिस आरक्षी एक नागरिक को जमीन पर गिराकर बूटों से पीटता दिख रहा है। पुलिस अधीक्षक ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी आरक्षी को तत्काल निलंबित कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक सिपाही के निलंबन या एक युवक की पिटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, नागरिकों के व्यवहार और पुलिस के संकट प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पीड़ित युवक ने अपनी पत्नी से विवाद के बाद खुद पुलिस को मदद के लिए बुलाया था। आरोप है कि जब पुलिस पहुंची, तो युवक कथित तौर पर नशे की हालत में था और उसने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना के दो पहलू सामने आते हैं: पहला, नागरिक का दायित्व और कानून का सम्मान — नशे की हालत में कानून के रखवालों के साथ गाली-गलौज करना और उनके कॉलर पर हाथ डालना निंदनीय और गैर-कानूनी है। दूसरा, पुलिस का संयम और मर्यादा — पुलिस को विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बरतने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि नागरिक कानून हाथ में ले रहा था, तो पुलिस के पास उसे हिरासत में लेने और कानूनी मुकदमा दर्ज करने के अधिकार थे, लेकिन युवक को जमीन पर गिराकर बूटों से कुचलना किसी भी स्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना पुलिस और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को तोड़ती है। जब एक सिपाही गुस्से में बर्बरता पर उतर आता है, तो वह पूरी 'खाकी' की साख को रौंदता है। अपराधियों से निपटने के लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया है, और अगर रक्षक ही 'ऑन द स्पॉट' फैसला करने लगेंगे, तो न्यायपालिका और कानून-व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रहेगा। कहा गया है कि "क्रोध में लिया गया निर्णय कभी न्याय नहीं हो सकता। पुलिस का काम डराना नहीं, बल्कि कानून का भय पैदा करना और आम जन को सुरक्षा का अहसास कराना है।" इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज और प्रशासन दोनों स्तरों पर आत्ममंथन की आवश्यकता है। पुलिसकर्मियों के लिए नियमित अंतराल पर तनाव प्रबंधन और जनता से व्यवहार के विशेष सत्र आयोजित होने चाहिए। डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवाओं पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास 'बॉडी वॉर्न कैमरे' का अनिवार्य उपयोग होना चाहिए, जिससे विवाद की शुरुआत और मौके पर हुई वास्तविक घटना स्पष्ट हो सके। नागरिकों को भी यह समझना होगा कि पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि गाली सुनने के लिए, और पुलिस का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। बस्ती के पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपी सिपाही को निलंबित करना एक तात्कालिक उपाय है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए समाज को अपनी मर्यादा और पुलिस को अपना संयम नहीं खोना चाहिए। जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखेंगे, तब तक 'मित्र पुलिस' की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें डायल-112 पर तैनात एक पुलिस आरक्षी एक नागरिक को जमीन पर गिराकर बूटों से पीटता दिख रहा है। पुलिस अधीक्षक ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी आरक्षी को तत्काल निलंबित कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक सिपाही के निलंबन या एक युवक की पिटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, नागरिकों के व्यवहार और पुलिस के संकट प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पीड़ित युवक ने अपनी पत्नी से विवाद के बाद खुद पुलिस को मदद के लिए बुलाया था। आरोप है कि जब पुलिस पहुंची, तो युवक कथित तौर पर नशे की हालत में था और उसने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना के दो पहलू सामने आते हैं: पहला, नागरिक का दायित्व और कानून का सम्मान — नशे की हालत में कानून के रखवालों के साथ गाली-गलौज करना और उनके कॉलर पर हाथ डालना निंदनीय और गैर-कानूनी है। दूसरा, पुलिस का संयम और मर्यादा — पुलिस को विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बरतने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि नागरिक कानून हाथ में ले रहा था, तो पुलिस के पास उसे हिरासत में लेने और कानूनी मुकदमा दर्ज करने के अधिकार थे, लेकिन युवक को जमीन पर गिराकर बूटों से कुचलना किसी भी स्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना पुलिस और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को तोड़ती है। जब एक सिपाही गुस्से में बर्बरता पर उतर आता है, तो वह पूरी 'खाकी' की साख को रौंदता है। अपराधियों से निपटने के लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया है, और अगर रक्षक ही 'ऑन द स्पॉट' फैसला करने लगेंगे, तो न्यायपालिका और कानून-व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रहेगा। कहा गया है कि "क्रोध में लिया गया निर्णय कभी न्याय नहीं हो सकता। पुलिस का काम डराना नहीं, बल्कि कानून का भय पैदा करना और आम जन को सुरक्षा का अहसास कराना है।" इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज और प्रशासन दोनों स्तरों पर आत्ममंथन की आवश्यकता है। पुलिसकर्मियों के लिए नियमित अंतराल पर तनाव प्रबंधन और जनता से व्यवहार के विशेष सत्र आयोजित होने चाहिए। डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवाओं पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास 'बॉडी वॉर्न कैमरे' का अनिवार्य उपयोग होना चाहिए, जिससे विवाद की शुरुआत और मौके पर हुई वास्तविक घटना स्पष्ट हो सके। नागरिकों को भी यह समझना होगा कि पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि गाली सुनने के लिए, और पुलिस का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। बस्ती के पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपी सिपाही को निलंबित करना एक तात्कालिक उपाय है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए समाज को अपनी मर्यादा और पुलिस को अपना संयम नहीं खोना चाहिए। जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखेंगे, तब तक 'मित्र पुलिस' की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी।
- संतकबीरनगर जनपद के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देश पर चलाए जा रहे 'क्रैक साइबर क्राइम अभियान' के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए साइबर सेल थाना महुली की टीम ने एक अहम कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में एक अज्ञात व्यक्ति के बैंक खाते में गलती से ट्रांसफर हो गई ₹5,000 की धनराशि को सफलतापूर्वक वापस कराया गया। घटना के अनुसार, नाथनगर, थाना महुली, संतकबीरनगर निवासी सत्यम कांडू पुत्र नंदन प्रसाद ऑनलाइन लेन-देन के दौरान गलती से ₹5,000 की राशि गलत बैंक खाते में भेज बैठे थे। इस संबंध में वादी ने 27 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और थाना महुली पुलिस से सहायता मांगी। शिकायत मिलते ही थाना महुली पुलिस और साइबर टीम ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और संबंधित बैंक व तकनीकी माध्यमों से आवश्यक कार्रवाई शुरू की। निरंतर समन्वय और प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप, पीड़ित सत्यम कांडू के खाते में ₹5,000 की धनराशि सफलतापूर्वक वापस आ गई। अपनी राशि वापस मिलने पर आवेदक ने संतकबीरनगर पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है। इस साइबर टीम में थानाध्यक्ष महुली, उपनिरीक्षक दुर्गेश पाण्डेय, उपनिरीक्षक अनुज कुमार यादव, आरक्षी अंकित पटेल, आरक्षी सोनू यादव, आरक्षी मनोज यादव और महिला आरक्षी कमलेश कुमारी शामिल थे।2
- संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद नगर पालिका क्षेत्र के बिधियानी मोहल्ले में विकास के दावों की सच्चाई जलभराव के रूप में सामने आई है। मोहल्ले की सड़क पर इतना पानी भर गया है कि पैदल चलने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह सड़क परेशानी का सबब बन गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मामूली बारिश के बाद भी सड़कें तालाब में बदल जाती हैं, फिर भी इस समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।1
- विनय पाठक को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ दी गई हैं।1
- पी.एम. म्यूजिक वर्ल्ड ने इस सीजन का नया सुपरहिट भोजपुरी गाना "जबसे चल गइला दिल्ली" प्रस्तुत किया है। अपनी मधुर और जादुई आवाज़ के लिए मशहूर कलाकार रजत पंडित ने इस धमाकेदार गीत को गाया है, जो अब श्रोताओं के दिलों पर राज करने के लिए तैयार है। गाने का आनंद लेने और इसे दोस्तों के साथ साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- अंबेडकरनगर में जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने आगामी विश्व योगा दिवस के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।1
- अंबेडकर नगर के अकबरपुर तहसील अंतर्गत क्रांतिकारी विकासखंड के प्रतापपुर चौखा गांव की निवासी कंचन को आवास के लिए जमीन का एक टुकड़ा नहीं मिल पा रहा है। पिछले चार वर्षों से इस मूलभूत आवश्यकता के लिए भटक रही कंचन को प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार तंज सुनने को मिल रहे हैं। अपनी इस पीड़ा से परेशान होकर, कंचन आज कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अपने पूरे परिवार के साथ धरने पर बैठ गईं। धरने पर बैठकर कंचन ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें आवास के लिए जमीन की सख्त दरकार है। इस पूरी स्थिति को 'महिला की बेज्जती पर बेज्जती' बताया जा रहा है, जहाँ प्रशासन की उदासीनता साफ दिख रही है। कंचन ने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी सिस्टम सरकार की मंशा के अनुसार कब काम करेगा और उसे एक टुकड़े जमीन के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा। प्रशासन की इस कथित संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर कब प्रशासन का दिल पसीजेगा और उनकी गुहार सुनी जाएगी।1
- सिद्धार्थनगर जिले में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में गुरुवार को एक जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी, त्वरित मक्का गोष्ठी और प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद जगदंबिका पाल, विधायक जय प्रताप सिंह, विधायक विनय वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष शीतल सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सांसद जगदंबिका पाल ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक तरीकों और प्राकृतिक खेती से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। विधायक जय प्रताप सिंह ने किसानों को नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, वहीं विधायक विनय वर्मा ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कृषि विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी और स्टॉलों का अवलोकन भी किया। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म पूरी की गई, नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार किया गया, और टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया, उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पांडेय के साथ कृषि वैज्ञानिक, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- अम्बेडकरनगर जनपद में आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट परीक्षा को सकुशल, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के संबंध में पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने जानकारी दी है।1
- उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के मगहर में NH-28 पर एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ एक अनियंत्रित ट्रेलर पुल की रेलिंग तोड़ते हुए आमी नदी में गिर गया। नदी में गिरते ही ट्रेलर में भीषण आग लग गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते ट्रेलर जलकर राख हो गया। आग की लपटों से मगहर दहल उठा।1