Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 3 *श्लोक:* 20 *श्लोक:* कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः । लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ॥ २० ॥ *अनुवाद:* जनक जैसे राजाओं ने केवल नियत कर्मों को करने से ही सिद्धि प्राप्त की। अत: सामान्य जनों को शिक्षित करने की दृष्टि से तुम्हें कर्म करना चाहिए। *तात्पर्य:* जनक जैसे राजा स्वरूपसिद्ध व्यक्ति थे, अत: वे वेदानुमोदित कर्म करने के लिए बाध्य न थे। तो भी वे लोग सामान्यजनों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करने के उद्देश्य से सारे नियत कर्म करते रहे। जनक सीताजी के पिता तथा भगवान् श्रीराम के श्वसुर थे। भगवान् के महान भक्त होने के कारण उनकी स्थिति दिव्य थी, किन्तु चूँकि वे मिथिला (जो भारत के बिहार प्रान्त में एक परगना है) के राजा थे, अत: उन्हें अपनी प्रजा को यह शिक्षा देनी थी कि कर्तव्य-पालन किस प्रकार किया जाता है। भगवान् कृष्ण तथा उनके शाश्वत सखा अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध में लडऩे की कोई आवश्यकता नहीं थी, किन्तु उन्होंने जनता को यह सिखाने के लिए युद्ध किया कि जब सत्परामर्श असफल हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में हिंसा आवश्यक हो जाती है। कुरुक्षेत्र युद्ध के पूर्व युद्ध-निवारण के लिए भगवान् तक ने सारे प्रयास किये, किन्तु दूसरा पक्ष लडऩे पर तुला था। अत: ऐसे सद्धर्म के लिए युद्ध करना आवश्यक था। यद्यपि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को संसार में कोई रुचि नहीं हो सकती तो भी वह जनता को यह सिखाने के लिए कि किस तरह रहना और कार्य करना चाहिए, कर्म करता रहता है। कृष्णभावनामृत में अनुभवी व्यक्ति इस तरह कार्य करते हैं कि अन्य लोग उनका अनुसरण कर सकें और इसकी व्याख्या अगले श्लोक में की गई है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो मिलेगा कल !* एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा। लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया ! एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया उसने बहुत दुखी मन से कहा - महात्मा जी मैं इस गाँव का जमींदार हूँ का सैंकड़ों बीघे जमीन है इतना सब कुछ होने के बावजूद मुझे एक लाइलाज रोग है जो कहीं से भी ठीक नहीं हो रहा ! महात्मा जी ने पूछा भाई, क्या रोग है आपको जी मुझे मल त्याग करते समय बहुत खून आता है और इतनी जलन होती है जो बर्दाश्त नहीं होती। ऐसा लगता है मेरे प्राण ही निकल जायेंगे। आप कुछ मेहरबानी करो महात्मा जी बाबा ने आँख बंद कर ली शांत बैठ गये थोड़ी देर बाद बोले -बुरा तो नहीं मानोगे एक बात पूछूँ ? नहीं महाराज पूछिये ! तुमने कभी किसी का दिल इतना ज़्यादा तो नहीं दुखाया कि उसने तुम्हें जी भरके बद्दुआऐं दी हों जिसका दण्ड आज तुम भोग रहे हो ? तुम्हारे दुःख देने से वो इतना अधिक दुखी हुआ हो जिसके कारण आज तुम इतनी पीड़ा झेल रहे हो ? नहीं बाबा ! जहाँ तक मुझे याद है, मैंने तो कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। याद करो और सोचो कभी किसी का हक तो नहीं छीना, किसी की पीठ में छुरा तो नहीं मारा किसी की रोज़ी रोटी तो नहीं छीनी ? किसी का हिस्सा ज़बरदस्ती, तुमने खुद तो नहीं संभाला हुआ ? महात्मा जी की बात पूरी होने पर वो ख़ामोश और शर्मसार हो कर बोला। जी मेरी एक विधवा भाभी है जो कि इस वक्त अपने मायके में रहती है वो जमीन में से अपना हिस्सा मांगती थी। यह सोचकर मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया कि कल को ये सब कुछ अपने भाईयों को ही दे देगी इसका क्या पता ? बाबा ने कहा -आज से ही उसे हर महीने सौ रूपए भेजने शुरू करो ! यह उस समय की बात है जब सौ रूपए में पूरा परिवार पल जाता था ! उसने कुछ रूपए भेजना शुरू कर दिया ! दो तीन हफ़्तों के बाद उसने बाबा से आकर कहा - जी मै पचहत्तर प्रतिशत ठीक हूँ ! महात्मा जी ने सोचा कि इसे तो पूरा ठीक होना चाहिये था ऐसा क्यों नहीं हुआ ? उससे पूछा तुम कितने रूपए भेजते हो ? जी पचहत्तर रूपए हर महीने भेजता हूँ इसी कारण तेरा रोग पूरा ठीक नहीं हुआ ! सन्त जी ने कहा उसका पूरा हक उसे इज़्जत से बुला कर दे दो, वो अपने पैसे को जैसे मर्जी खर्च करे, अपनी ज़मीन जिसे चाहे दे दे । यह उसकी मिल्कीयत है इसमें तुम्हारा कोई दख़ल नहीं है ! जानते हो वो कितना रोती रही है, जलती रही है तभी आपको इतनी जलन हो रही है ज़रा सोचो, मरने के बाद हमारे साथ क्या जायेगा ? ज़मींदार को बहुत पछतावा हुआ उसने फौरन ही अपनी विधवा भाभी और उसके भाईयों को बुलाकर, सारे गाँव के सामने, उसकी ज़मीन, उसके हक का पैसा उसे दे दिया और हाथ जोड़कर अपने ज़ुल्मों की माफी माँगी। उसकी भाभी ने उसे माफ कर दिया और उसके परिवार को खूब आशीर्वाद दिये जमींदार का रोग शीघ्र ही पूरी तरह से ठीक हो गया ! अगर आपको भी ऐसा कोई असाध्य रोग है तो ज़रूर सोचना* *कहीँ मैंने किसी का हक तो नहीं छीना है ? किसी की पीठ में छुरा तो नहीं घोंपा है ? किसी का इतना दिल तो नहीं दुखाया हुआ कि वो बेचारा इतना बेबस था कि तुम्हारे सामने कुछ कहने की हिम्मत भी ना कर सका होगा ? लेकिन उस बेचारे के दिल से आहें निकली होंगी जो आपके अंदर रोग पैदा कर रही है जलन पैदा कर रही हैं। *याद रखो, परमात्मा की लाठी बिल्कुल बे आवाज़ है।* 🙏🙏 *जो प्राप्त है-पर्याप्त है* *जिसका मन मस्त है* *उसके पास समस्त है!!* *वजन घटाने के उपाय* लौकी में फाइबर बड़ी मात्रा में होता है और फैट की मात्रा बिलकुल नही होती। यदि आप खाने में लौकी को ज्यादा यूज करेंगे तो उसका असर आपकी बॉडी पे दिखने लगेगा। और सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और एक निम्बू का रस मिलकर पिने से फैट कंट्रोल होता है। जय जय श्री राधे 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 3 *श्लोक:* 20 *श्लोक:* कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः । लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ॥ २० ॥ *अनुवाद:* जनक जैसे राजाओं ने केवल नियत कर्मों को करने से ही सिद्धि प्राप्त की। अत: सामान्य जनों को शिक्षित करने की दृष्टि से तुम्हें कर्म करना चाहिए। *तात्पर्य:* जनक जैसे राजा स्वरूपसिद्ध व्यक्ति थे, अत: वे वेदानुमोदित कर्म करने के लिए बाध्य न थे। तो भी वे लोग सामान्यजनों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करने के उद्देश्य से सारे नियत कर्म करते रहे। जनक सीताजी के पिता तथा भगवान् श्रीराम के श्वसुर थे। भगवान् के महान भक्त होने के कारण उनकी स्थिति दिव्य थी, किन्तु चूँकि वे मिथिला (जो भारत के बिहार प्रान्त में एक परगना है) के राजा थे, अत: उन्हें अपनी प्रजा को यह शिक्षा देनी थी कि कर्तव्य-पालन किस प्रकार किया जाता है। भगवान् कृष्ण तथा उनके शाश्वत सखा अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध में लडऩे की कोई आवश्यकता नहीं थी, किन्तु उन्होंने जनता को यह सिखाने के लिए युद्ध किया कि जब सत्परामर्श असफल हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में हिंसा आवश्यक हो जाती है। कुरुक्षेत्र युद्ध के पूर्व युद्ध-निवारण के लिए भगवान् तक ने सारे प्रयास किये, किन्तु दूसरा पक्ष लडऩे पर तुला था। अत: ऐसे सद्धर्म के लिए युद्ध करना आवश्यक था। यद्यपि कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को संसार में कोई रुचि नहीं हो सकती तो भी वह जनता को यह सिखाने के लिए कि किस तरह रहना और कार्य करना चाहिए, कर्म करता रहता है। कृष्णभावनामृत में अनुभवी व्यक्ति इस तरह कार्य करते हैं कि अन्य लोग उनका अनुसरण कर सकें और इसकी व्याख्या अगले श्लोक में की गई है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो मिलेगा कल !* एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा। लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया ! एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया उसने बहुत दुखी मन से कहा - महात्मा जी मैं इस गाँव का जमींदार हूँ का सैंकड़ों बीघे जमीन है इतना सब कुछ होने के बावजूद मुझे एक लाइलाज रोग है जो कहीं से भी ठीक नहीं हो रहा ! महात्मा जी ने पूछा भाई, क्या रोग है आपको जी मुझे मल त्याग करते समय बहुत खून आता है और इतनी जलन होती है जो बर्दाश्त नहीं होती। ऐसा लगता है मेरे प्राण ही निकल जायेंगे। आप कुछ मेहरबानी करो महात्मा जी बाबा ने आँख बंद कर ली शांत बैठ गये थोड़ी देर बाद बोले -बुरा तो नहीं मानोगे एक बात पूछूँ ? नहीं महाराज पूछिये ! तुमने कभी किसी का दिल इतना ज़्यादा तो नहीं दुखाया कि उसने तुम्हें जी भरके बद्दुआऐं दी हों जिसका दण्ड आज तुम भोग रहे हो ? तुम्हारे दुःख देने से वो इतना अधिक दुखी हुआ हो जिसके कारण आज तुम इतनी पीड़ा झेल रहे हो ? नहीं बाबा ! जहाँ तक मुझे याद है, मैंने तो कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। याद करो और सोचो कभी किसी का हक तो नहीं छीना, किसी की पीठ में छुरा तो नहीं मारा किसी की रोज़ी रोटी तो नहीं छीनी ? किसी का हिस्सा ज़बरदस्ती, तुमने खुद तो नहीं संभाला हुआ ? महात्मा जी की बात पूरी होने पर वो ख़ामोश और शर्मसार हो कर बोला। जी मेरी एक विधवा भाभी है जो कि इस वक्त अपने मायके में रहती है वो जमीन में से अपना हिस्सा मांगती थी। यह सोचकर मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया कि कल को ये सब कुछ अपने भाईयों को ही दे देगी इसका क्या पता ? बाबा ने कहा -आज से ही उसे हर महीने सौ रूपए भेजने शुरू करो ! यह उस समय की बात है जब सौ रूपए में पूरा परिवार पल जाता था ! उसने कुछ रूपए भेजना शुरू कर दिया ! दो तीन हफ़्तों के बाद उसने बाबा से आकर कहा - जी मै पचहत्तर प्रतिशत ठीक हूँ ! महात्मा जी ने सोचा कि इसे तो पूरा ठीक होना चाहिये था ऐसा क्यों नहीं हुआ ? उससे पूछा तुम कितने रूपए भेजते हो ? जी पचहत्तर रूपए हर महीने भेजता हूँ इसी कारण तेरा रोग पूरा ठीक नहीं हुआ ! सन्त जी ने कहा उसका पूरा हक उसे इज़्जत से बुला कर दे दो, वो अपने पैसे को जैसे मर्जी खर्च करे, अपनी ज़मीन जिसे चाहे दे दे । यह उसकी मिल्कीयत है इसमें तुम्हारा कोई दख़ल नहीं है ! जानते हो वो कितना रोती रही है, जलती रही है तभी आपको इतनी जलन हो रही है ज़रा सोचो, मरने के बाद हमारे साथ क्या जायेगा ? ज़मींदार को बहुत पछतावा हुआ उसने फौरन ही अपनी विधवा भाभी और उसके भाईयों को बुलाकर, सारे गाँव के सामने, उसकी ज़मीन, उसके हक का पैसा उसे दे दिया और हाथ जोड़कर अपने ज़ुल्मों की माफी माँगी। उसकी भाभी ने उसे माफ कर दिया और उसके परिवार को खूब आशीर्वाद दिये जमींदार का रोग शीघ्र ही पूरी तरह से ठीक हो गया ! अगर आपको भी ऐसा कोई असाध्य रोग है तो ज़रूर सोचना* *कहीँ मैंने किसी का हक तो नहीं छीना है ? किसी की पीठ में छुरा तो नहीं घोंपा है ? किसी का इतना दिल तो नहीं दुखाया हुआ कि वो बेचारा इतना बेबस था कि तुम्हारे सामने कुछ कहने की हिम्मत भी ना कर सका होगा ? लेकिन उस बेचारे के दिल से आहें निकली होंगी जो आपके अंदर रोग पैदा कर रही है जलन पैदा कर रही हैं। *याद रखो, परमात्मा की लाठी बिल्कुल बे आवाज़ है।* 🙏🙏 *जो प्राप्त है-पर्याप्त है* *जिसका मन मस्त है* *उसके पास समस्त है!!* *वजन घटाने के उपाय* लौकी में फाइबर बड़ी मात्रा में होता है और फैट की मात्रा बिलकुल नही होती। यदि आप खाने में लौकी को ज्यादा यूज करेंगे तो उसका असर आपकी बॉडी पे दिखने लगेगा। और सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और एक निम्बू का रस मिलकर पिने से फैट कंट्रोल होता है। जय जय श्री राधे 🙏🌹
- जयपुर में माताओं के प्रति एक अद्भुत प्रेम प्रदर्शन ने सभी को भावुक कर दिया। इस हृदयस्पर्शी पल को देखकर उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं।1
- Bhajan Lal Sharma खुद गांवों में पहुंचकर, रात में रुककर और आमजन की समस्याएं सुनकर प्रशासन को सीधे जवाबदेह बना रहे हैं। जनता को राहत मिले, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांवों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो — इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री लगातार फील्ड में सक्रिय नजर आ रहे हैं।1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨 🚖 ऑटो ड्राइवर ने कस्टमर से मांगे एक्स्ट्रा पैसे, हुआ विवाद! जयपुर शहर में एक बार फिर ऑटो किराए को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक ऑटो ड्राइवर द्वारा तय किराए से ज्यादा पैसे मांगने पर कस्टमर और ड्राइवर के बीच बहस हो गई। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और मामला चर्चा का विषय बन गया। 📢 आखिर कब रुकेगी मनमानी? 📢 क्या यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बढ़ते विवादों का निकलेगा समाधान? देखिए इस मामले की खास रिपोर्ट और जानिए पूरा मामला विस्तार से। 👉 जुड़े रहें हमारे साथ 👍 कमेंट करें 📲 शेयर करें ⭐ फॉलो अवश्य करें 🎥 जस्ट जयपुर लाइव — आपकी आवाज़, आपकी खबर #BreakingNews #Jaipur #AutoDriver #JaipurNews #ViralNews #JustJaipurLive #DriverNews #RajasthanNews #AutoRickshaw #TrendingNews1
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी। उनकी इस उपस्थिति ने राष्ट्रीय राजनीति में कई नए सियासी संकेतों और अटकलों को जन्म दिया है।1
- कांग्रेस पार्टी पर अपने सहयोगियों को धोखा देने और उन्हें 'पनौती' साबित होने का गंभीर आरोप लगा है। लालू परिवार, ममता और हाल ही में तमिलनाडु में DMK जैसी पार्टियों को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद नुकसान उठाना पड़ा है। यह आरोप राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के गठबंधन समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।1
- जयपुर के थानों में संचालित जनसुनवाई केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का मानना है कि यहां अक्सर सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, ठोस समस्याओं का समाधान नहीं।1
- राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) में 900 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा घोटाला सामने आया है। इस फर्जीवाड़े में अधिकारी, सरकारी डॉक्टर, निजी अस्पताल और दवा विक्रेता शामिल हैं, जिससे साढ़े 12 लाख लाभार्थी प्रभावित हुए। सरकार ने एक अधिकारी को हटाया और 200 से अधिक लोगों पर पुलिस में मामला दर्ज किया है।1
- एक यूज़र ने Shuru ऐप में स्वस्थ मनोरंजन के लिए एक अलग मंच बनाने की मांग की है। यूज़र का कहना है कि चुटकुले, किस्से और मनोरंजक वीडियो के लिए एक सेक्शन होना चाहिए। उन्होंने ऐप के संस्थापकों से इस अनुरोध पर विचार करने का आग्रह किया है।1