*विश्व हिंदी दिवस : हमारी पहचान की भाषा* हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें हिंदी भाषा के महत्व और उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है। हिंदी केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सोच और पहचान का आधार है। आज हिंदी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में शामिल है। भारत के अलावा कई देशों में लोग हिंदी बोलते, समझते और पढ़ते हैं। फ़िल्मों, गीतों, टीवी और मोबाइल के ज़रिए हिंदी ने पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाई है। इसके बावजूद अपने ही देश में कई बार हिंदी को उतना सम्मान नहीं मिल पाता, जितना मिलना चाहिए। हिंदी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता है। यह आम आदमी की भाषा है, जो सीधे दिल तक पहुँचती है। किसान, मज़दूर, दुकानदार, विद्यार्थी—हर वर्ग की आवाज़ हिंदी में आसानी से सामने आती है। आज़ादी के आंदोलन से लेकर आज तक, हिंदी ने समाज को जोड़ने का काम किया है। ज़रूरत इस बात की है कि हम हिंदी को सिर्फ़ कार्यक्रमों और भाषणों तक सीमित न रखें। शिक्षा, दफ़्तरों और रोज़मर्रा के कामों में भी हिंदी का अधिक उपयोग किया जाए। बच्चों और युवाओं को यह समझाना होगा कि हिंदी में बोलना या लिखना किसी भी तरह से कमज़ोरी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान है।डिजिटल युग में हिंदी के लिए नए अवसर खुले हैं। मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों पर हिंदी तेज़ी से बढ़ रही है। अगर हम चाहें, तो हिंदी को ज्ञान और तकनीक की मजबूत भाषा बना सकते हैं। विश्व हिंदी दिवस हमें याद दिलाता है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और उस पर गर्व करना हमारा कर्तव्य है। हिंदी को अपनाकर ही हम अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं। हिंदी बचेगी, तो हमारी पहचान बचेगी। लेखक : सूबेदार बी. के. पाण्डेय (से.नी.) (कारगिल युद्ध विजेता) प्रयागराज
*विश्व हिंदी दिवस : हमारी पहचान की भाषा* हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें हिंदी भाषा के महत्व और उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है। हिंदी केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सोच और पहचान का आधार है। आज हिंदी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में शामिल है। भारत के अलावा कई देशों में लोग हिंदी बोलते, समझते और पढ़ते हैं। फ़िल्मों, गीतों, टीवी और मोबाइल के ज़रिए हिंदी ने पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाई है। इसके बावजूद अपने ही देश में कई बार हिंदी को उतना सम्मान नहीं मिल पाता, जितना मिलना चाहिए। हिंदी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता है। यह आम आदमी की भाषा है, जो सीधे दिल तक पहुँचती है। किसान, मज़दूर, दुकानदार, विद्यार्थी—हर वर्ग की आवाज़ हिंदी में आसानी से सामने आती है। आज़ादी के आंदोलन से लेकर आज तक, हिंदी ने समाज को जोड़ने का काम किया है। ज़रूरत इस बात की है कि हम हिंदी को सिर्फ़ कार्यक्रमों और भाषणों तक सीमित न रखें। शिक्षा, दफ़्तरों और रोज़मर्रा के कामों में भी हिंदी का अधिक उपयोग किया जाए। बच्चों और युवाओं को यह समझाना होगा कि हिंदी में बोलना या लिखना किसी भी तरह से कमज़ोरी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान है।डिजिटल युग में हिंदी के लिए नए अवसर खुले हैं। मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों पर हिंदी तेज़ी से बढ़ रही है। अगर हम चाहें, तो हिंदी को ज्ञान और तकनीक की मजबूत भाषा बना सकते हैं। विश्व हिंदी दिवस हमें याद दिलाता है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और उस पर गर्व करना हमारा कर्तव्य है। हिंदी को अपनाकर ही हम अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं। हिंदी बचेगी, तो हमारी पहचान बचेगी। लेखक : सूबेदार बी. के. पाण्डेय (से.नी.) (कारगिल युद्ध विजेता) प्रयागराज
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