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पुलिसकर्मियों द्वारा हंसने और मज़ाक उड़ाने के असंवेदनशील रवैये पर जनता में गहरा आक्रोश है। लोगों का सवाल है कि अगर ऐसी घटना इन पुलिसकर्मियों के अपने घर में हुई होती, तो क्या वे तब भी इसी तरह हंसते और खिलखिलाते रहते? इस तरह की हरकतें सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने किए जाने पर लोगों का पुलिस पर से भरोसा कैसे बन पाएगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी अपनी स्थिति का गलत इस्तेमाल करते हुए दूसरों की पीड़ा को मज़ाक समझते हैं। जबकि उन्हें पीड़ितों और उनके घर वालों का समर्थन करना चाहिए, न कि उनका उपहास उड़ाना चाहिए। जनता सवाल कर रही है कि ऐसे असंवेदनशील पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित क्यों नहीं किया जा रहा है, और क्यों इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस का मूल कार्य तो जनता का सहयोग और समर्थन करना होता है।

1 hr ago
user_Pooja mahwer
Pooja mahwer
Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
1 hr ago

पुलिसकर्मियों द्वारा हंसने और मज़ाक उड़ाने के असंवेदनशील रवैये पर जनता में गहरा आक्रोश है। लोगों का सवाल है कि अगर ऐसी घटना इन पुलिसकर्मियों के अपने घर में हुई होती, तो क्या वे तब भी इसी तरह हंसते और खिलखिलाते रहते? इस तरह की हरकतें सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने किए जाने पर लोगों का पुलिस पर से भरोसा कैसे बन पाएगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी अपनी स्थिति का गलत इस्तेमाल करते हुए दूसरों की पीड़ा को मज़ाक समझते हैं। जबकि उन्हें पीड़ितों और उनके घर वालों का समर्थन करना चाहिए, न कि उनका उपहास उड़ाना चाहिए। जनता सवाल कर रही है कि ऐसे असंवेदनशील पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित क्यों नहीं किया जा रहा है, और क्यों इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस का मूल कार्य तो जनता का सहयोग और समर्थन करना होता है।

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  • कुछ पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें यह पूछा गया है कि ऐसे कर्मियों को सरकार निलंबित क्यों नहीं करती। आरोप है कि सरकार ऐसे लोगों को लोगों की मदद करने के बजाय उनके साथ गलत व्यवहार करने के लिए वेतन देती है। इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के कारण ही अच्छे पुलिस अधिकारियों की प्रतिष्ठा खराब होती है।
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    कुछ पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें यह पूछा गया है कि ऐसे कर्मियों को सरकार निलंबित क्यों नहीं करती। आरोप है कि सरकार ऐसे लोगों को लोगों की मदद करने के बजाय उनके साथ गलत व्यवहार करने के लिए वेतन देती है। इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के कारण ही अच्छे पुलिस अधिकारियों की प्रतिष्ठा खराब होती है।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि उनकी प्रत्येक बैठक का ध्यान गति बनाए रखने और वास्तविक परिणाम सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी जिम्मेदारी वास्तविक विकल्प प्रदान करना है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति बिगड़ रही है। वोंग ने बताया कि यह क्षेत्र अत्यधिक आर्थिक तनाव का सामना कर रहा है। उन्होंने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से क्षेत्र और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने नेविगेशन की स्वतंत्रता को पुनः सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक समाधान की दिशा में सेक्रेटरी रूबियो के प्रयासों को स्वीकार किया, और नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत को बनाए रखने के साथ-साथ किसी भी टोलिंग प्रस्ताव का विरोध करने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने अंत में बताया कि क्वाड वर्तमान में कई नई पहलों को आगे बढ़ा रहा है।
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    क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि उनकी प्रत्येक बैठक का ध्यान गति बनाए रखने और वास्तविक परिणाम सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी जिम्मेदारी वास्तविक विकल्प प्रदान करना है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति बिगड़ रही है।

वोंग ने बताया कि यह क्षेत्र अत्यधिक आर्थिक तनाव का सामना कर रहा है। उन्होंने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से क्षेत्र और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने नेविगेशन की स्वतंत्रता को पुनः सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक समाधान की दिशा में सेक्रेटरी रूबियो के प्रयासों को स्वीकार किया, और नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत को बनाए रखने के साथ-साथ किसी भी टोलिंग प्रस्ताव का विरोध करने के महत्व पर भी बल दिया।

उन्होंने अंत में बताया कि क्वाड वर्तमान में कई नई पहलों को आगे बढ़ा रहा है।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
  • मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की इस टिप्पणी पर संज्ञान लिया है कि 'तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर' है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, साथ ही अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार के उस फैसले की सराहना की जिसमें जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने पर बल दिया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष का कहना था कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं। मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनसे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे, खास तौर पर उसमें 'संस्थागत पक्षपात' और 'जांच में विसंगतियों' की बात कही गई थी। अदालत ने आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह आशंका जताई कि जांच प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनकी सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। अदालत ने कहा कि इसी वजह से यह नैरेटिव बना कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है, जिसके चलते इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की गई। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य की जांच एजेंसियों के कामकाज पर कोई संदेह न व्यक्त करते हुए भी कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना आवश्यक हो जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से हो। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि परिवारों को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को भी निर्देश दिया कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के सामने ही रखें।
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    मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की इस टिप्पणी पर संज्ञान लिया है कि 'तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर' है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, साथ ही अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार के उस फैसले की सराहना की जिसमें जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने पर बल दिया।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष का कहना था कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं। मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनसे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे, खास तौर पर उसमें 'संस्थागत पक्षपात' और 'जांच में विसंगतियों' की बात कही गई थी। अदालत ने आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह आशंका जताई कि जांच प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनकी सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। अदालत ने कहा कि इसी वजह से यह नैरेटिव बना कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है, जिसके चलते इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की गई। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य की जांच एजेंसियों के कामकाज पर कोई संदेह न व्यक्त करते हुए भी कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना आवश्यक हो जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से हो।

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि परिवारों को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को भी निर्देश दिया कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के सामने ही रखें।
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Karol Bagh, Central Delhi•
    4 hrs ago
  • annu nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon
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    annu nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon
    user_Annu Jay bhim
    Annu Jay bhim
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • गोदी मीडिया ने एक नया 'ज्ञान' प्रस्तुत किया है, जिसमें दावा किया गया है कि ₹7 के इजाफे से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता। यह बात इस तरह से पेश की जा रही है जैसे इसे सतही तौर पर देखने पर यह वृद्धि बहुत मामूली लगती हो।
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    गोदी मीडिया ने एक नया 'ज्ञान' प्रस्तुत किया है, जिसमें दावा किया गया है कि ₹7 के इजाफे से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता। यह बात इस तरह से पेश की जा रही है जैसे इसे सतही तौर पर देखने पर यह वृद्धि बहुत मामूली लगती हो।
    user_Bhupendra mishra
    Bhupendra mishra
    Lawyer चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • एक ऑनलाइन पोस्ट में 'शुभ विचार' साझा किया गया है, जिसके साथ '@jay sirri sayam' का उल्लेख है।
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    एक ऑनलाइन पोस्ट में 'शुभ विचार' साझा किया गया है, जिसके साथ '@jay sirri sayam' का उल्लेख है।
    user_Prvesh jitu Prvesh jitu
    Prvesh jitu Prvesh jitu
    वसंत विहार, नई दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • 38 साल पहले अमरीशपुरी ने भारत को लेकर पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी भारत में क्या होने वाला है 38 साल पहले अमरीशपुरी ने भारत को लेकर पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी भारत में क्या होने वाला है
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    38 साल पहले अमरीशपुरी ने भारत को लेकर पहले ही भविष्यवाणी कर दी  थी भारत में क्या होने वाला है
38 साल पहले अमरीशपुरी ने भारत को लेकर पहले ही भविष्यवाणी कर दी  थी भारत में क्या होने वाला है
    user_Nirmal Kumar
    Nirmal Kumar
    Voice of people महरौली, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    7 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने समाज में व्याप्त कथित बुराइयों और इंसानियत के खत्म होने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। पोस्ट में कड़े सवाल उठाए गए हैं कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी हद तक कैसे गिर सकता है कि कुछ भी करने को तैयार हो जाए, और क्यों लोग ऐसे कृत्यों पर चुप रहते हैं। यह भी पूछा गया है कि यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा और क्या वास्तव में अब किसी में भी इंसानियत का नामोनिशान बचा है या नहीं।
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    सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने समाज में व्याप्त कथित बुराइयों और इंसानियत के खत्म होने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। पोस्ट में कड़े सवाल उठाए गए हैं कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी हद तक कैसे गिर सकता है कि कुछ भी करने को तैयार हो जाए, और क्यों लोग ऐसे कृत्यों पर चुप रहते हैं। यह भी पूछा गया है कि यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा और क्या वास्तव में अब किसी में भी इंसानियत का नामोनिशान बचा है या नहीं।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    1 hr ago
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