कैलादेवी मेले की व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन कैला देवी मंदिर ट्रस्ट प्रशासन ने प्रेस वार्ता में मेले की तैयारी व व्यवस्था की जानकारी दी. मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारी संतोष सिंह भदौरिया और किशन पाल सिंह ने बताया कि 16 मार्च से शुरू होने वाले मां कैलादेवी के मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई है. भक्त सुबह 4 से रात 9 बजे तक माता के दर्शन कर सकेंगे. संख्या अधिक हुई तो दर्शन के लिए एक घंटे का अतिरिक्त समय देंगे. बड़ी समेत अन्य धर्मशालाओं में निःशुल्क रहने व जगह-जगह निःशुल्क भंडारे लगाए गए. पंखे एवं पेयजल के इंतजाम रहेंगे. इस बार मंदिर में पॉलीथिन व प्लास्टिक पूर्णतया बंद रहेगा. मंदिर परिसर मे हेड काउंटिंग से भक्तो की संख्या की निगरानी की जाएगी पर्यवारण संरक्षण हेतु प्लास्टिक बोतल के निस्तारण और पुनः चक्रण की की समुचित व्यवस्था की गई है भक्तो को प्रसाद वितरण के लिए 60 से अधिकप्र साद काउंटर लगाए गए है चिकित्सा सेवा के लिए मुफ्त मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई गई है और एमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था रहेगी मंदिर ट्रस्ट द्वारा पूरा परिसर 350 सीसी टीवी कैमरो से युक्त है जिससे पल पल पर नजर रहेगी और आसामजिक तत्वों पर भी पैनी नजर रहेगी लाइन मे लगे भक्तो पर केवड़े व गंगा जल की फुहारों से तारोंताज रखा जायेगा व कतार मे भी पेय जल के लिए पानी की बोतलों की व्यवस्था रहेगी मंत्र परिसर में स्थित विश्राम स्थल में माता द्वारा दुग्ध दुकान के लिए स्तनपान केंद्र बनाया गया है नगर निर्मित परिक्रमा मार्ग में टाइल्स पर हिट प्रूफ पेंट किया गया जैसे नंगे पैर चलने वाले भक्तों को ताप से बचाया जा सके वाहनों की पार्किंग स्थल से आशा है भक्तजनों को निशुल्क मंदिर तक लाने के लिए दो गोल्फ कोर्ट एवं पांच ई रिक्शा की व्यवस्था मंदिर प्रशासन द्वारा की गई है
कैलादेवी मेले की व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन कैला देवी मंदिर ट्रस्ट प्रशासन ने प्रेस वार्ता में मेले की तैयारी व व्यवस्था की जानकारी दी. मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारी संतोष सिंह भदौरिया और किशन पाल सिंह ने बताया कि 16 मार्च से शुरू होने वाले मां कैलादेवी के मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई है. भक्त सुबह 4 से रात 9 बजे तक माता के दर्शन कर सकेंगे. संख्या अधिक हुई तो दर्शन के लिए एक घंटे का अतिरिक्त समय देंगे. बड़ी समेत अन्य धर्मशालाओं में निःशुल्क रहने व जगह-जगह निःशुल्क भंडारे लगाए गए. पंखे एवं पेयजल के इंतजाम रहेंगे. इस बार मंदिर में पॉलीथिन व प्लास्टिक पूर्णतया बंद रहेगा. मंदिर परिसर मे हेड काउंटिंग से भक्तो की संख्या की निगरानी की जाएगी पर्यवारण संरक्षण हेतु प्लास्टिक बोतल के निस्तारण और पुनः चक्रण की की समुचित व्यवस्था की गई है भक्तो को प्रसाद वितरण के लिए 60 से अधिकप्र साद
काउंटर लगाए गए है चिकित्सा सेवा के लिए मुफ्त मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई गई है और एमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस की समुचित व्यवस्था रहेगी मंदिर ट्रस्ट द्वारा पूरा परिसर 350 सीसी टीवी कैमरो से युक्त है जिससे पल पल पर नजर रहेगी और आसामजिक तत्वों पर भी पैनी नजर रहेगी लाइन मे लगे भक्तो पर केवड़े व गंगा जल की फुहारों से तारोंताज रखा जायेगा व कतार मे भी पेय जल के लिए पानी की बोतलों की व्यवस्था रहेगी मंत्र परिसर में स्थित विश्राम स्थल में माता द्वारा दुग्ध दुकान के लिए स्तनपान केंद्र बनाया गया है नगर निर्मित परिक्रमा मार्ग में टाइल्स पर हिट प्रूफ पेंट किया गया जैसे नंगे पैर चलने वाले भक्तों को ताप से बचाया जा सके वाहनों की पार्किंग स्थल से आशा है भक्तजनों को निशुल्क मंदिर तक लाने के लिए दो गोल्फ कोर्ट एवं पांच ई रिक्शा की व्यवस्था मंदिर प्रशासन द्वारा की गई है
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- हिंडौन सिटी। शीतलाष्टमी पर बुधवार को महिला श्रद्धालुओं ने शीतला माता का पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने शीतला माता की प्रतिमा को बासे पकवानों का भोग लगाकर सुख समृद्धि की मनौती मांगी। शहर के शीतला चौराहा स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए महिलाओं की अधिक भीड़ रही। इस मौके पर मंदिर परिसर के बाहर अस्थाई दुकानें लगाई गई। इससे मैले जैसा माहौल नजर आया। अस्थाई दुकानों से महिला एवं बच्चों ने जरूरत के समान एवं खिलौने, गुब्बारे आदि की खरीददारी की।1
- करौली शहर सहित जिले में शीतलाष्टमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। शीतला माता मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित किया।जिले में सुबह से ही शीतला माता मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। परंपरा के अनुसार, शीतलाष्टमी से एक दिन पहले घरों में विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं, जिनका अगले दिन माता को भोग लगाया जाता है। नगाड़ खाना दरवाजा स्थित शीतला माता मंदिर में अलसुबह से ही महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने माता को ठंडे और बासी पकवानों का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की। शीतला माता के पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने लांगरा और हनुमानजी की भी पूजा-अर्चना की।कई घरों में बुधवार दोपहर 12:00 बजे कन्याओं और लांगुरिया को भोजन कराया गया।1
- मैं उमेश कुमार शर्मा निदेशक डीएस साइंस एकेडमी आप सभी पत्रकार बंधुओ का इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करता हूं। मित्रों जैसा कि आप सबको पता है कि शिक्षा के क्षेत्र में आज गंगापुर सिटी का नाम पूरे प्रदेश भर में और न सिर्फ प्रदेश में बल्कि अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है हम सबके लिए यह गर्व का विषय है कि अभी कुछ दिन पहले ही डीएस साइंस एकेडमी गंगापुर सिटी को केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडवीया के द्वारा प्राइड ऑफ इंडिया के अवार्ड से सम्मानित किया गया, जो न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि प्रदेश के लिए भी एक गौरवशाली पल था। मित्रों आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य है कि आगामी दिनों में डीएस साइंस एकेडमी शिक्षा के क्षेत्र में क्या कुछ नया और बेहतरीन करने वाला है इसके बारे में क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों को एक संदेश देना है इसके अलावा विगत कुछ दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से कई तरह की अफवाएं और गलत संदेश प्रसारित किया जा रहे हैं उनको लेकर संस्था अपना स्पष्टीकरण भी जनमानस तक पहुंचाना चाहती है, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो, ना कि एक गंदी मानसिकता के साथ अभिभावकों के बीच एक भ्रम की स्थिति पैदा की जाए। मैं आपके माध्यम से सभी को यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि डीएस साइंस अकादमी ने आज तक अपनी मेहनत, अपनी ईमानदार और जुझारू टीम के दम पर हमेशा, हर सत्र में अलग-अलग क्षेत्र में सफलता हासिल की है और कभी भी डीएस साइंस अकादमी ने इसके लिए ना किसी शॉर्टकट का इस्तेमाल किया है और ना ही लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है कि जब कोई संस्था या व्यक्ति उन्नति के शिखर पर होता है तो बहुत सारे लोग उसकी टांग खींचने में या उसके प्रति गलत प्रचार करने की दौड़ में शामिल हो जाते हैं किंतु ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि आप दूसरों के लिए जो गड्डा खोद रहे हो एक दिन आपको उसी में गिरना है जनता बहुत समझदार है अभिभावक और आज के विद्यार्थी बहुत समझदार हैं वह सही-गलत, अच्छे-बुरे सब का फैसला अपने स्वविवेक से करते हैं और अब तक करते आए हैं1
- Post by Bharat SING Meena1
- चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी (बसोड़ा) का पर्व इस बार सोमवार और बुधवार को बड़े उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। ग्रहण और तिथियों के विशेष संयोग के कारण महिलाओं ने दो दिनों तक शीतला माता की विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। *बासी भोजन का लगाया भोग* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को ठंडी चीजें अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए महिलाओं ने माता को दही-चावल, लापसी और विभिन्न मीठे व्यंजनों का भोग लगाया। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया गया और एक दिन पहले तैयार किया गया बासी भोजन ही सुबह और शाम प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। *निरोगी काया की प्रार्थना* पूजा के दौरान महिलाओं ने शीतला माता से अपने परिवार की सुख-शांति और विशेष रूप से निरोगी काया (अच्छे स्वास्थ्य) का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समितियों और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं भी की गईं। *बसोड़ा का धार्मिक महत्व* हिंदू पंचांग के अनुसार ऋतु परिवर्तन के समय मनाया जाने वाला यह पर्व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है। शीतला माता को स्वच्छता और शीतलता की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें बासी और ठंडे भोजन का भोग लगाने की यह प्राचीन परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।2
- Post by मनोज तिवाड़ी2
- Post by SNG NEWS LIVE 📺 RAJSTHAN.1
- Post by Krishan murari rajora1