डॉ. राजकुमार भारती पर बार-बार लगते आरोप, बार-बार वायरल वीडियो… फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग पर फिर उठे सवाल डॉ. राजकुमार भारती पर बार-बार लगते आरोप, बार-बार वायरल वीडियो… फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, मिर्जापुर के अस्थि रोग विभाग की एक चिकित्सीय उपलब्धि जहां चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो ने एक बार फिर पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनमानस में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक सफल ऑपरेशन या चिकित्सा उपलब्धि किसी भी डॉक्टर को भ्रष्टाचार के आरोपों से स्वतः मुक्त कर देती है? यदि किसी विभाग के नाम पर बार-बार धन उगाही, मरीजों से वसूली और कथित भ्रष्टाचार के वीडियो सामने आते हैं, तो आखिर हर बार मामला ठंडे बस्ते में क्यों चला जाता है? सोशल मीडिया पर वायरल दो कथित वीडियो में एक व्यक्ति मरीज के परिजनों से ऑपरेशन में लगने वाले इम्प्लांट एवं सर्जिकल सामान के नाम पर धनराशि मांगता सुनाई देता है। वीडियो में कथित रूप से कहा जाता है कि बाहर अधिक खर्च आएगा, जबकि यहां "50 प्रतिशत डिस्काउंट" पर सामान उपलब्ध कराया जाएगा। दूसरे वीडियो में कथित रूप से यह भी कहा जाता है कि "डॉक्टर साहब बोले हैं कि पैसा मिलते ही सामान मंगा देंगे" तथा बातचीत के दौरान "डॉ. राजकुमार सर" का नाम भी लिया जाता है। हालांकि, इन वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी ने इनकी सत्यता प्रमाणित की है। फिर भी लगातार सामने आ रहे ऐसे आरोपों ने आम जनता के मन में अनेक गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या बार-बार लगने वाले आरोप महज संयोग हैं? स्थानीय लोगों एवं कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद कुछ मामलों में इम्प्लांट अथवा सर्जिकल सामान के नाम पर अतिरिक्त धनराशि मांगी जाती है। यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में भी इस प्रकार की शिकायतें प्रशासन और शासन स्तर तक पहुंच चुकी हैं। यदि यह सब निराधार है, तो अब तक स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि आरोपों में कोई सच्चाई है, तो जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता पूछ रही है… आखिर डॉ. राजकुमार भारती के नाम से जुड़े विवाद बार-बार क्यों सामने आते हैं? क्या बार-बार वायरल होने वाले कथित वीडियो महज अफवाह हैं, या इनके पीछे किसी गंभीर अनियमितता की आशंका है? क्या किसी प्रभावशाली राजनीतिक, प्रशासनिक अथवा अन्य स्तर के संरक्षण के कारण कठोर कार्रवाई नहीं हो पा रही? क्या अस्पताल प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य तंत्र एक डॉक्टर के सामने बेबस और लाचार है? यदि वीडियो में डॉक्टर का नाम लिया जा रहा है, तो उसकी निष्पक्ष जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई? वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन है? क्या उसका मेडिकल कॉलेज से अधिकृत संबंध है? यदि वह निजी व्यक्ति है, तो अस्पताल परिसर में मरीजों से आर्थिक लेन-देन कैसे कर रहा था? क्या उपलब्धि भ्रष्टाचार का लाइसेंस बन सकती है? यह निर्विवाद है कि किसी गंभीर मरीज का सफल उपचार चिकित्सा जगत की उपलब्धि है और उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन यदि उसी विभाग पर बार-बार आर्थिक अनियमितताओं और मरीजों से कथित वसूली के आरोप लगते रहें, तो केवल उपलब्धियों का हवाला देकर उन आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चिकित्सा सेवा विश्वास पर आधारित व्यवस्था है। यदि मरीज और उनके परिजन सरकारी अस्पताल में भी आर्थिक शोषण की आशंका महसूस करने लगें, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है। निष्पक्ष जांच ही दूर करेगी संदेह मिर्जापुर का जनमानस मांग कर रहा है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि वायरल वीडियो भ्रामक या फर्जी हैं तो संबंधित डॉक्टर एवं संस्थान को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट देकर तथ्य सामने लाए जाएं। वहीं यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो किसी भी पद, प्रभाव या राजनीतिक संरक्षण की परवाह किए बिना दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डॉ. राजकुमार भारती पर बार-बार लगते आरोप, बार-बार वायरल वीडियो… फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग पर फिर उठे सवाल डॉ. राजकुमार भारती पर बार-बार लगते आरोप, बार-बार वायरल वीडियो… फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, मिर्जापुर के अस्थि रोग विभाग की एक चिकित्सीय उपलब्धि जहां चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो ने एक बार फिर पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनमानस में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक सफल ऑपरेशन या चिकित्सा उपलब्धि किसी भी डॉक्टर को भ्रष्टाचार के आरोपों से स्वतः मुक्त कर देती है? यदि किसी विभाग के नाम पर बार-बार धन उगाही, मरीजों से वसूली और कथित भ्रष्टाचार के वीडियो सामने आते हैं, तो आखिर हर बार मामला ठंडे बस्ते में क्यों चला जाता है? सोशल मीडिया पर वायरल दो कथित वीडियो में एक व्यक्ति मरीज के परिजनों से ऑपरेशन में लगने वाले इम्प्लांट एवं सर्जिकल सामान के नाम पर धनराशि मांगता सुनाई देता है। वीडियो में कथित रूप से कहा जाता है कि बाहर अधिक खर्च आएगा, जबकि यहां "50 प्रतिशत डिस्काउंट" पर सामान उपलब्ध कराया जाएगा। दूसरे वीडियो में कथित रूप से यह भी कहा जाता है कि "डॉक्टर साहब बोले हैं कि पैसा मिलते ही सामान मंगा देंगे" तथा बातचीत के दौरान "डॉ. राजकुमार सर" का नाम भी लिया जाता है। हालांकि, इन वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी ने इनकी सत्यता प्रमाणित की है। फिर भी लगातार सामने आ रहे ऐसे आरोपों ने आम जनता के मन में अनेक गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या बार-बार लगने वाले आरोप महज संयोग हैं? स्थानीय लोगों एवं कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद कुछ मामलों में इम्प्लांट अथवा सर्जिकल सामान के नाम पर अतिरिक्त धनराशि मांगी जाती है। यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में भी इस प्रकार की शिकायतें प्रशासन और शासन स्तर तक पहुंच चुकी हैं। यदि यह सब निराधार है, तो अब तक स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि आरोपों में कोई सच्चाई है, तो जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता पूछ रही है… आखिर डॉ. राजकुमार भारती के नाम से जुड़े विवाद बार-बार क्यों सामने आते हैं? क्या बार-बार वायरल होने वाले कथित वीडियो महज अफवाह हैं, या इनके पीछे किसी गंभीर अनियमितता की आशंका है? क्या किसी प्रभावशाली राजनीतिक, प्रशासनिक अथवा अन्य स्तर के संरक्षण के कारण कठोर कार्रवाई नहीं हो पा रही? क्या अस्पताल प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य तंत्र एक डॉक्टर के सामने बेबस और लाचार है? यदि वीडियो में डॉक्टर का नाम लिया जा रहा है, तो उसकी निष्पक्ष जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई? वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन है? क्या उसका मेडिकल कॉलेज से अधिकृत संबंध है? यदि वह निजी व्यक्ति है, तो अस्पताल परिसर में मरीजों से आर्थिक लेन-देन कैसे कर रहा था? क्या उपलब्धि भ्रष्टाचार का लाइसेंस बन सकती है? यह निर्विवाद है कि किसी गंभीर मरीज का सफल उपचार चिकित्सा जगत की उपलब्धि है और उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन यदि उसी विभाग पर बार-बार आर्थिक अनियमितताओं और मरीजों से कथित वसूली के आरोप लगते रहें, तो केवल उपलब्धियों का हवाला देकर उन आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चिकित्सा सेवा विश्वास पर आधारित व्यवस्था है। यदि मरीज और उनके परिजन सरकारी अस्पताल में भी आर्थिक शोषण की आशंका महसूस करने लगें, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है। निष्पक्ष जांच ही दूर करेगी संदेह मिर्जापुर का जनमानस मांग कर रहा है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि वायरल वीडियो भ्रामक या फर्जी हैं तो संबंधित डॉक्टर एवं संस्थान को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट देकर तथ्य सामने लाए जाएं। वहीं यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो किसी भी पद, प्रभाव या राजनीतिक संरक्षण की परवाह किए बिना दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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- *थाना को0कटरा पर पूर्व में पंजीकृत हत्या से सम्बन्धित अभियुक्त के विरूद्ध NSA/रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980) का आदेश पारित—* *थाना को0कटरा पर पूर्व में पंजीकृत हत्या से सम्बन्धित अभियुक्त के विरूद्ध NSA/रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980) का आदेश पारित—* पूर्व में थाना कोतवाली कटरा पर पंजीकृत मु0अ0सं0- 97/2026 धारा 103(2),352,351(3),3(5) बीएनएस व 07 सी.एल.ए. व 3/25 आयुध अधिनियम से सम्बन्धित अभियुक्त राजेन्द्र सोनकर पुत्र शोभा सोनकर निवासी देवरी थाना विन्ध्याचल जनपद मीरजापुर द्वारा जेल से बाहर आने हेतु मा0न्यायालय में अपनी जमानत याचिका दाखिल की गयी है, अभियुक्त के जमानत पर जेल से बाहर आने की स्थिति में सम्भावित प्रतिकुल प्रभाव को रोकने तथा सुदृढ़ लोक व्यवस्था बनाये रखने के दृष्टिगत त्वरित निरोधात्मक कार्यवाही करते हुए अपर्णा रजत कौशिक पुलिस अधीक्षक मीरजापुर द्वारा NSA/रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980) की धारा 3(2) की अनुज्ञा हेतु की गयी संस्तुति के उपरान्त जिला मजिस्ट्रेट मीरजापुर द्वारा दिनांक 04.08.2026 को अभियुक्त के विरूद्ध NSA/रासुका का आदेश पारित किया गया जिसमें अग्रिम कार्यवा�1
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- मंदिर परिसर में मारपीट पर विंध्य पंडा समाज की सख्ती, दो पुरोहितों के मंदिर प्रवेश पर 6 दिनों की रोक मिर्जापुर: विंध्याचल धाम के मंदिर परिसर में हुए मारपीट के मामले में विंध्य पंडा समाज ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो पुरोहितों पर 6 दिनों तक पुरोहिती कार्य करने पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई पुरोहित अमन गिरी और शक्ति दुबे के विरुद्ध की गई है। पंडा समाज के पदाधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैठक कर यह निर्णय लिया। समाज का कहना है कि मंदिर की गरिमा, परंपरा और अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से दोनों पुरोहितों के विरुद्ध अस्थायी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। निर्णय के अनुसार, निर्धारित 6 दिनों की अवधि तक अमन गिरी और शक्ति दुबे मंदिर परिसर में पुरोहिती का कार्य नहीं कर सकेंगे। पंडा समाज ने स्पष्ट किया कि सभी पुरोहितों से अपेक्षा की जाती है कि वे मंदिर की मर्यादा का पालन करें और किसी भी प्रकार के विवाद या अनुशासनहीनता से बचें। पंडा समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी यदि कोई व्यक्ति मंदिर परिसर की गरिमा के विपरीत आचरण करता है, तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।1
- मीरजापुर: हत्या के आरोपी पर NSA/रासुका की कार्रवाई, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश मीरजापुर। जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाते हुए थाना कोतवाली कटरा पर पूर्व में पंजीकृत हत्या के एक मामले से संबंधित अभियुक्त के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना कोतवाली कटरा पर दर्ज मु0अ0सं0-97/2026 धारा 103(2), 352, 351(3), 3(5) बीएनएस एवं 07 सी.एल.ए. एक्ट व 3/25 आयुध अधिनियम से संबंधित अभियुक्त राजेन्द्र सोनकर पुत्र शोभा सोनकर निवासी देवरी थाना विन्ध्याचल, जनपद मीरजापुर द्वारा न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। पुलिस प्रशासन को आशंका थी कि अभियुक्त के जेल से बाहर आने पर जनपद की लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक मीरजापुर अपर्णा रजत कौशिक द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के अंतर्गत निरोधात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई। उक्त संस्तुति के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट मीरजापुर द्वारा दिनांक 04 अगस्त 2026 को अभियुक्त के विरुद्ध NSA/रासुका का आदेश पारित कर दिया गया है। मामले में अग्रिम वैधानिक कार्यवाही जारी है। अभियुक्त का आपराधिक इतिहास भी रहा है गंभीर पुलिस अभिलेखों के अनुसार अभियुक्त राजेन्द्र सोनकर का आपराधिक इतिहास लंबा और गंभीर रहा है, जिसमें हत्या, हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम तथा अन्य आपराधिक धाराओं से संबंधित कुल 8 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2005 में धारा 302 भादवि का मामला भी शामिल है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।1
- मिर्ज़ापुर: वन विभाग के अकाउंटेंट पर करोड़ों के गबन का आरोप, डीएफओ कार्यालय पर दिया पत्रक।1
- उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का सपा के विरोध प्रदर्शन पर बयान DCM केशव प्रसाद मौर्य का सपा के सदन पर प्रदर्शन पर बयान - जिन्होंने अयोध्या और माँ सरयू को खून से लाल किया उन्हें बोलने का कोई अधिकार नहीं1
- कटरा थाना क्षेत्र के सत्भाव नगर में अधिवक्ता राजीव सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई। मिर्जापुर: शहर के कटरा थाना क्षेत्र स्थित सत्भाव नगर में अधिवक्ता राजीव सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने के बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर के विरुद्ध राष्ट्रीय सूचना अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की है, पुलिस ने बताया कि आरोपी की अपराधिक गतिविधियों और लोग व्यवस्था पर संभावित खतरे को देखते हुए यह बड़ी कार्रवाई की गई है1