logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

वकील मनोज टंडन मामले में नया मोड़, झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के सचिव संजय पासवान निलंबित, जानिए वजह

8 hrs ago
user_भरोसा सच का
भरोसा सच का
Court reporter गोमिया, बोकारो, झारखंड•
8 hrs ago

वकील मनोज टंडन मामले में नया मोड़, झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के सचिव संजय पासवान निलंबित, जानिए वजह

More news from झारखंड and nearby areas
  • सरिया नगर पंचायत में शोभा देवी के शोभायात्रा में कोडरमा लोकसभा के पूर्व सांसद डॉक्टर रविंद्र कुमार रॉय शामिल हुए
    1
    सरिया नगर पंचायत में शोभा देवी के शोभायात्रा में कोडरमा लोकसभा के पूर्व सांसद डॉक्टर रविंद्र कुमार रॉय शामिल हुए
    user_BITTU JOURNALIST
    BITTU JOURNALIST
    Local News Reporter बगोदर, गिरिडीह, झारखंड•
    21 hrs ago
  • रामगढ़ : होली को लेकर गोला थाना परिसर में रखा शांति सेमिती का बैठक dknewsjharkhand
    1
    रामगढ़ : होली को लेकर गोला थाना परिसर में रखा शांति सेमिती का बैठक dknewsjharkhand
    user_Dilip Karmali
    Dilip Karmali
    रिपोर्टर मो. 7857961735 Gola, Ramgarh•
    23 hrs ago
  • दारु प्रखंड के पत्रकारों ने होली मिलन समारोह का किया आयोजन प्रखंड वासियों को दिया होली कि बधाई
    1
    दारु प्रखंड के पत्रकारों ने होली मिलन समारोह का किया आयोजन प्रखंड वासियों को दिया होली कि बधाई
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    26 min ago
  • Post by जनता न्यूज़ 24
    1
    Post by जनता न्यूज़ 24
    user_जनता न्यूज़ 24
    जनता न्यूज़ 24
    बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    3 hrs ago
  • बाघमारा. (रिपोर्ट प्रेम कुमार). झारखंड के अग्रणी नेता झारखंड आंदोलनकारी शेरे शिवा महतो का आज पुण्यतिथि है. शिव महतो एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे और अविभाजित बिहार के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। महतो 'झारखंड आंदोलन' के प्रमुख प्रतिभागियों में से एक थे, जिसने 1970 के दशक में बिहार राज्य को विभाजित करके झारखंड नामक एक अलग राज्य बनाने की मांग की थी। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आदिवासियों के बीच शिक्षा के प्रसार के प्रयासों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 1980, 1985 और 1995 में डुमरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा राजनीतिक दल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. शिवा महतो का जन्म 1914 में महाशिवरात्रि के शुभ दिन बोकारो जिले के दुगदा के पास सिजुआ बस्ती में हुआ था। महतो ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत किया और मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के गरीब बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। वे गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने हेतु गाँव-गाँव घूमते थे। उन्होंने ही 'पढ़ो और लड़ो' का नारा भी दिया था। 1962 में वे बिनोद बिहारी महतो से जुड़ गए, जो अविभाजित बिहार के आदिवासियों के लिए झारखंड के अलग राज्य की मांग से जुड़े प्रमुख नेता थे। वे जल्द ही बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए. के. रॉय जैसे अन्य नेताओं के साथ झारखंड आंदोलन के स्तंभों में से एक बन गए। महतो ने साहूकारों द्वारा संचालित असंगठित ऋण बाजार के चंगुल से आदिवासियों को मुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण अंततः एक आदिवासी परिवार बंधुआ मजदूरी में विलीन हो जाता था। राजनीति में उनका पहला कदम 1970 के दशक में आया, जब उन्होंने जेल से ही मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा और आसानी से जीत हासिल की। ​​इसके बाद वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। महतो झारखंड की कोयला खदानों के माफियाओं के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए भी जाने जाते थे। वे अपने प्रभावशाली भाषणों और सिर पर हरी पगड़ी वाले पारंपरिक पहनावे के लिए प्रसिद्ध थे। महतो ने आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से झारखंड वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना का भी नेतृत्व किया। सिर पर हरी पगड़ी, गेहुएं रंग के चेहरे पर सफेद नुकीली मूंछें, गठीले शरीर पर सफेद धोती-कुर्ता, उसके ऊपर लदा एक पुराने स्टाइल का बंडी, पैरों में एक काला चमड़े का जूता, और हट्टे कट्टे मजबूत गठीले हाथों में एक टांगी – ये पहनावा, और ये विशेषण कहीं न कहीं किसी गांव में रहने वाले बुजुर्ग हरियाणवी के लिये शायद बिल्कुल सटीक लग रहे होंगे, लेकिन कुछ ऐसा ही पहनावा झारखंड के एक वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता का भी हुआ करता था, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं। वो नाम है दिवंगत शिवा महतो। वही शिवा महतो, जिनकी गिनती झारखंड आंदोलन के अग्रणियों के तौर पर होती है, जिन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन की ही तरह सूदखोरों, महाजनों और माफियाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद किया, जिनके खोरठा भाषा में दिये जाने वाले जोशीले भाषणों से पूरा इलाका गूंज उठता था, जिन्हें ‘झारखंड का शेर’ कहकर संबोधित किया जाता था। आज दिग्गज नेता शिवा महतो की पुण्यतिथि है। 1 मार्च 2022 को डुमरी प्रखंड के घुटवाली स्थित पैतृक आवास में उन्होंने 108 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। डुमरी विधानसभा, जो आज भी पूर्व शिक्षा मंत्री स्व.जगन्नाथ महतो का गढ़ माना जाता है। दरअसल, कहा जाता है कि जगन्नाथ महतो ने राजनीति का ककहरा शिवा महतो से ही सीखा था, वह उनके राजनीतिक गुरु थे। जगन्नाथ महतो से पहले डुमरी का पूरा इलाका शिवा महतो का ही माना जाता था। शिवा महतो जब पहली बार डुमरी विधानसभा सीट से झामुमो उम्मीदवार बन कर चुनाव लड़े, तब जगरनाथ महतो उनका दाहिना हाथ बने। साल 1980 से लेकर 1999 के विधानसभा चुनाव के पहले तक जगरनाथ महतो शिवा महतो के ही साथ रहे। हालांकि, बाद में दोनों के रास्ते जुदा हो गये। झामुमो के संस्थापक सदस्य और झारखंड आंदोलन के जनक विनोद बिहारी महतो, कामरेड एके राय, गुरुजी शिबू सोरेन जैसे दिग्गज आंदोलकारियों की कतार में शिवा महतो का नाम लिया जाता है। हालांकि, शिवा महतो ने ही आगे चलकर गुरुजी शिबू सोरेन का मोर्चा खोल दिया था, 1990 के दशक में स्व. बिनोद बाबू के बेटे राजकिशोर महतो और कृष्णा मार्डी के नेतृत्व में नौ विधायकों ने झामुमो से अलग होकर मार्डी गुट का गठन कर लिया था। इन विधायकों में डुमरी विधायक शिवा महतो और मांडू विधायक टेकलाल महतो भी शामिल थे। मार्डी गुट की वजह से झारखंड में झामुमो को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही थी। शिवा महतो ने राजनीति में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। बताया जाता है कि जब कोयलांचल में सूदखोरों, माफियाओं और महाजनों के खिलाफ किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती थी, तब एकमात्र शिवा महतो ही थे, जो लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे। बेरमो कोयलांचल में विस्थापितों के हक-अधिकार को लेकर विनोद बिहारी महतो के साथ लंबी लड़ाई भी लड़ी। शिवा महतो पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ। बताया जाता है कि एक बार शिवा महतो को मारकर घायल अवस्था में उन्हें फेंक दिया गया था। तब ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती करवा कर उनकी जान बचायी। खास खोरठा भाषा में भाषण देने की शैली के कारण लोग इन्हें दूर-दूर से सुनने के लिए सभाओं में पहुंचते थे। डुमरी के लोगों को आज अगर उच्च शिक्षा का लाभ मिल पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय दिवंगत शिवा महतो को ही जाता है। विधायक रहते शिवा महतो ने डुमरी में झारखंड कॉमर्स इंटर कॉलेज समेत 2 कॉलेज और कई विद्यालयों की स्थापना की। वह गांव-गांव घूम कर लोगों को जागरूक करते रहे और इलाके में शिक्षा का अलख जगाते रहे। गरीब के बच्चों को पढ़ो और लड़ो की सीख देते थे। उन्होंने शिक्षा, न्याय और हक की लड़ाई में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। आज भी डुमरी और पूरे झारखंड के लोग उनकी विरासत को याद करते हैं, और उनके दिखाये मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते हैं। शिवा महतो की बुलंद आवाज़ और उनके सिद्धांतों की गूंज आने वाली पीढ़ियों को हमेशा संघर्ष और सच्चाई का पाठ पढ़ाती रहेगी।
    1
    बाघमारा. (रिपोर्ट प्रेम कुमार). झारखंड के अग्रणी नेता झारखंड आंदोलनकारी शेरे शिवा महतो का आज पुण्यतिथि है. शिव महतो एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे और अविभाजित बिहार के डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। महतो 'झारखंड आंदोलन' के प्रमुख प्रतिभागियों में से एक थे, जिसने 1970 के दशक में बिहार राज्य को विभाजित करके झारखंड नामक एक अलग राज्य बनाने की मांग की थी। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में आदिवासियों के बीच शिक्षा के प्रसार के प्रयासों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 1980, 1985 और 1995 में डुमरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा राजनीतिक दल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. शिवा महतो का जन्म 1914 में महाशिवरात्रि के शुभ दिन बोकारो जिले के दुगदा के पास सिजुआ बस्ती में हुआ था। महतो ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत किया और मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के गरीब बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। वे गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने हेतु गाँव-गाँव घूमते थे। उन्होंने ही 'पढ़ो और लड़ो' का नारा भी दिया था। 1962 में वे बिनोद बिहारी महतो से जुड़ गए, जो अविभाजित बिहार के आदिवासियों के लिए झारखंड के अलग राज्य की मांग से जुड़े प्रमुख नेता थे। वे जल्द ही बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए. के. रॉय जैसे अन्य नेताओं के साथ झारखंड आंदोलन के स्तंभों में से एक बन गए। महतो ने साहूकारों द्वारा संचालित असंगठित ऋण बाजार के चंगुल से आदिवासियों को मुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण अंततः एक आदिवासी परिवार बंधुआ मजदूरी में विलीन हो जाता था।
राजनीति में उनका पहला कदम 1970 के दशक में आया, जब उन्होंने जेल से ही मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा और आसानी से जीत हासिल की। ​​इसके बाद वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। महतो झारखंड की कोयला खदानों के माफियाओं के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए भी जाने जाते थे। वे अपने प्रभावशाली भाषणों और सिर पर हरी पगड़ी वाले पारंपरिक पहनावे के लिए प्रसिद्ध थे। महतो ने आदिवासी बहुल राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से झारखंड वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना का भी नेतृत्व किया।
सिर पर हरी पगड़ी, गेहुएं रंग के चेहरे पर सफेद नुकीली मूंछें, गठीले शरीर पर सफेद धोती-कुर्ता, उसके ऊपर लदा एक पुराने स्टाइल का बंडी, पैरों में एक काला चमड़े का जूता, और हट्टे कट्टे मजबूत गठीले हाथों में एक टांगी – ये पहनावा, और ये विशेषण कहीं न कहीं किसी गांव में रहने वाले बुजुर्ग हरियाणवी के लिये शायद बिल्कुल सटीक लग रहे होंगे, लेकिन कुछ ऐसा ही पहनावा झारखंड के एक वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता का भी हुआ करता था, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं। वो नाम है दिवंगत शिवा महतो। वही शिवा महतो, जिनकी गिनती झारखंड आंदोलन के अग्रणियों के तौर पर होती है, जिन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन की ही तरह सूदखोरों, महाजनों और माफियाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद किया, जिनके खोरठा भाषा में दिये जाने वाले जोशीले भाषणों से पूरा इलाका गूंज उठता था, जिन्हें ‘झारखंड का शेर’ कहकर संबोधित किया जाता था।
आज दिग्गज नेता शिवा महतो की पुण्यतिथि है। 1 मार्च 2022 को डुमरी प्रखंड के घुटवाली स्थित पैतृक आवास में उन्होंने 108 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।
डुमरी विधानसभा, जो आज भी पूर्व शिक्षा मंत्री स्व.जगन्नाथ महतो का गढ़ माना जाता है। दरअसल, कहा जाता है कि जगन्नाथ महतो ने राजनीति का ककहरा शिवा महतो से ही सीखा था, वह उनके राजनीतिक गुरु थे। जगन्नाथ महतो से पहले डुमरी का पूरा इलाका शिवा महतो का ही माना जाता था। शिवा महतो जब पहली बार डुमरी विधानसभा सीट से झामुमो उम्मीदवार बन कर चुनाव लड़े, तब जगरनाथ महतो उनका दाहिना हाथ बने। साल 1980 से लेकर 1999 के विधानसभा चुनाव के पहले तक जगरनाथ महतो शिवा महतो के ही साथ रहे। हालांकि, बाद में दोनों के रास्ते जुदा हो गये।
झामुमो के संस्थापक सदस्य और झारखंड आंदोलन के जनक विनोद बिहारी महतो, कामरेड एके राय, गुरुजी शिबू सोरेन जैसे दिग्गज आंदोलकारियों की कतार में शिवा महतो का नाम लिया जाता है। हालांकि, शिवा महतो ने ही आगे चलकर गुरुजी शिबू सोरेन का मोर्चा खोल दिया था, 1990 के दशक में स्व. बिनोद बाबू के बेटे राजकिशोर महतो और कृष्णा मार्डी के नेतृत्व में नौ विधायकों ने झामुमो से अलग होकर मार्डी गुट का गठन कर लिया था। इन विधायकों में डुमरी विधायक शिवा महतो और मांडू विधायक टेकलाल महतो भी शामिल थे। मार्डी गुट की वजह से झारखंड में झामुमो को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही थी। शिवा महतो ने राजनीति में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
बताया जाता है कि जब कोयलांचल में सूदखोरों, माफियाओं और महाजनों के खिलाफ किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं होती थी, तब एकमात्र शिवा महतो ही थे, जो लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे। बेरमो कोयलांचल में विस्थापितों के हक-अधिकार को लेकर विनोद बिहारी महतो के साथ लंबी लड़ाई भी लड़ी। शिवा महतो पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ। बताया जाता है कि एक बार शिवा महतो को मारकर घायल अवस्था में उन्हें फेंक दिया गया था। तब ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती करवा कर उनकी जान बचायी। खास खोरठा भाषा में भाषण देने की शैली के कारण लोग इन्हें दूर-दूर से सुनने के लिए सभाओं में पहुंचते थे।
डुमरी के लोगों को आज अगर उच्च शिक्षा का लाभ मिल पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय दिवंगत शिवा महतो को ही जाता है। विधायक रहते शिवा महतो ने डुमरी में झारखंड कॉमर्स इंटर कॉलेज समेत 2 कॉलेज और कई विद्यालयों की स्थापना की। वह गांव-गांव घूम कर लोगों को जागरूक करते रहे और इलाके में शिक्षा का अलख जगाते रहे। गरीब के बच्चों को पढ़ो और लड़ो की सीख देते थे। उन्होंने शिक्षा, न्याय और हक की लड़ाई में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। आज भी डुमरी और पूरे झारखंड के लोग उनकी विरासत को याद करते हैं, और उनके दिखाये मार्ग पर चलने की प्रेरणा पाते हैं। शिवा महतो की बुलंद आवाज़ और उनके सिद्धांतों की गूंज आने वाली पीढ़ियों को हमेशा संघर्ष और सच्चाई का पाठ पढ़ाती रहेगी।
    user_प्रेम कुमार साव
    प्रेम कुमार साव
    Local News Reporter बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    4 hrs ago
  • झरिया: वार्ड 36 में जीत का जश्न, सुमन देवी की ऐतिहासिक जीत, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य विजय जुलूस
    1
    झरिया: वार्ड 36 में जीत का जश्न, सुमन देवी की ऐतिहासिक जीत, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य विजय जुलूस
    user_Journalist - Roshan Gupta
    Journalist - Roshan Gupta
    पत्रकार Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    21 min ago
  • Post by Jharkhand News Feed
    1
    Post by Jharkhand News Feed
    user_Jharkhand News Feed
    Jharkhand News Feed
    Local News Reporter चितरपुर, रामगढ़, झारखंड•
    21 hrs ago
  • बरकट्ठा: होली मिलन समारोह....
    1
    बरकट्ठा: होली मिलन समारोह....
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    38 min ago
  • दारू (हजारीबाग) – दारू प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा रविवार को मेडकुरी सिवाने नदी स्थित पेयजल विभाग के भवन परिसर में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रेस क्लब से जुड़े दर्जनों पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समारोह के दौरान पत्रकार फगुआ गीतों पर झूमते नजर आए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में सभी ने मिलकर स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया तथा प्रेस क्लब की मजबूती और आपसी एकता पर चर्चा की। प्रेस क्लब के अध्यक्ष बसंत नारायण राणा ने कहा कि होली का त्योहार आपसी गिले-शिकवे भूलकर प्रेम और भाईचारे के साथ मिलने का संदेश देता है। उन्होंने सभी प्रखंडवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए शांति और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की। इस अवसर पर जयनारायण प्रसाद, देव नारायण प्रसाद, बजरंग सहाय, राजन सिन्हा, सुमन सिन्हा, अखिलेश कुमार, रौशन सिन्हा, महेश साव, पप्पू ठाकुर, सुनील यादव, रंजीत साव, सुमित, बीरेंद्र यादव, राजीव रंजन शर्मा, अनिल यादव, अजय यादव, विषेक कुमार सहित कई पत्रकार उपस्थित रहे।
    3
    दारू (हजारीबाग) – दारू प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा रविवार को मेडकुरी सिवाने नदी स्थित पेयजल विभाग के भवन परिसर में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रेस क्लब से जुड़े दर्जनों पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समारोह के दौरान पत्रकार फगुआ गीतों पर झूमते नजर आए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में सभी ने मिलकर स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया तथा प्रेस क्लब की मजबूती और आपसी एकता पर चर्चा की। प्रेस क्लब के अध्यक्ष बसंत नारायण राणा ने कहा कि होली का त्योहार आपसी गिले-शिकवे भूलकर प्रेम और भाईचारे के साथ मिलने का संदेश देता है। उन्होंने सभी प्रखंडवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए शांति और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की। इस अवसर पर जयनारायण प्रसाद, देव नारायण प्रसाद, बजरंग सहाय, राजन सिन्हा, सुमन सिन्हा, अखिलेश कुमार, रौशन सिन्हा, महेश साव, पप्पू ठाकुर, सुनील यादव, रंजीत साव, सुमित, बीरेंद्र यादव, राजीव रंजन शर्मा, अनिल यादव, अजय यादव, विषेक कुमार सहित कई पत्रकार उपस्थित रहे।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    25 min ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.