सिंगरौली नगर पालिक निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ढोटी स्थित जी-2 गंगोत्री मॉल को नोटिस जारी किया है। निगम ने मॉल के अनाधिकृत हिस्से को दस दिनों के भीतर स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा निगम प्रशासन नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। यह सख्त कदम नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान द्वारा जारी नोटिस के बाद उठाया गया है। नोटिस के अनुसार, संबंधित व्यावसायिक भवन के लिए कुल 1232.92 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण की अनुमति प्रदान की गई थी। हालांकि, निरीक्षण के दौरान मौके पर लगभग 3840 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण पाया गया, जो स्वीकृत क्षेत्रफल से करीब तीन गुना अधिक है। निगम प्रशासन का कहना है कि भवन निर्माण में निर्धारित मानकों और स्वीकृत मानचित्र का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 308-क में 13 मार्च 2024 को हुए संशोधन के बाद 10 प्रतिशत से अधिक अवैध निर्माण का शमन (रेगुलराइजेशन) अब संभव नहीं है। आयुक्त द्वारा जारी अंतिम सूचना पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नोटिस प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर स्वीकृत सीमा से अधिक किए गए निर्माण को स्वयं हटा लिया जाए। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होती है, तो नगर निगम अपने स्तर पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगा। निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी, तो उस पर होने वाला पूरा व्यय संबंधित संचालक से भू-राजस्व की भांति वसूला जाएगा, और कार्रवाई के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति अथवा क्षति के लिए संबंधित पक्ष स्वयं जिम्मेदार होगा। नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माणकर्ताओं के बीच चर्चा का माहौल है, और इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सख्ती तथा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष अभी सामने आना शेष है।
सिंगरौली नगर पालिक निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ढोटी स्थित जी-2 गंगोत्री मॉल को नोटिस जारी किया है। निगम ने मॉल के अनाधिकृत हिस्से को दस दिनों के भीतर स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा निगम प्रशासन नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। यह सख्त कदम नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान द्वारा जारी नोटिस के बाद उठाया गया है। नोटिस के अनुसार, संबंधित व्यावसायिक भवन के लिए कुल 1232.92 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण की अनुमति प्रदान की गई थी। हालांकि, निरीक्षण के दौरान मौके पर लगभग 3840 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण पाया गया, जो स्वीकृत क्षेत्रफल से करीब तीन गुना अधिक है। निगम प्रशासन का कहना है कि भवन निर्माण में निर्धारित मानकों और स्वीकृत मानचित्र का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 308-क में 13 मार्च 2024 को हुए संशोधन के बाद 10 प्रतिशत से अधिक अवैध निर्माण
का शमन (रेगुलराइजेशन) अब संभव नहीं है। आयुक्त द्वारा जारी अंतिम सूचना पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नोटिस प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर स्वीकृत सीमा से अधिक किए गए निर्माण को स्वयं हटा लिया जाए। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होती है, तो नगर निगम अपने स्तर पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगा। निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी, तो उस पर होने वाला पूरा व्यय संबंधित संचालक से भू-राजस्व की भांति वसूला जाएगा, और कार्रवाई के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति अथवा क्षति के लिए संबंधित पक्ष स्वयं जिम्मेदार होगा। नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माणकर्ताओं के बीच चर्चा का माहौल है, और इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सख्ती तथा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष अभी सामने आना शेष है।
- बुधवार को सिंगरौली जिले के आदिवासी विकास विभाग में उस समय हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त की टीम ने विभाग में पदस्थ लिपिक एम.एल. वर्मा को कथित रिश्वतखोरी के मामले में कार्यालय से अपने साथ ले जाने की कार्रवाई की। इस घटना की खबर फैलते ही पूरे विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त टीम ने यह कार्रवाई पूर्व से मिली एक शिकायत के आधार पर की, जिसमें किसी काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था। टीम ने विभागीय कार्यालय पहुंचकर आवश्यक पूछताछ और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित कर्मचारी को अपने साथ ले गई। हाल के वर्षों में लोकायुक्त की लगातार हो रही कार्रवाइयां यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि भ्रष्टाचार पर जांच एजेंसियां अब अधिक सक्रिय हैं। सिंगरौली जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में सरकारी योजनाओं और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है। यह घटना मात्र एक कर्मचारी तक सीमित नहीं मानी जा सकती; यदि रिश्वतखोरी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सवाल भी उठेगा कि क्या विभागीय कार्यप्रणाली में ऐसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियाँ मौजूद हैं, क्योंकि अक्सर छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई तो होती है, पर भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँचने का प्रयास कम दिखाई देता है। जनता इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच चाहती है, ताकि यदि आरोप प्रमाणित हों तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। वहीं, अगर किसी स्तर पर गलतफहमी या तथ्यात्मक त्रुटि हो तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए, क्योंकि कानून के मूल सिद्धांत के अनुसार जांच पूरी होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। फिलहाल, विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, लेकिन पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर लोकायुक्त की आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। सिंगरौली की जनता इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है और आगे की कार्यवाही पर पैनी नजर रखे हुए है।1
- सोनभद्र जिले के बालू टोला के ग्रामीण पिछले 17 दिनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं। 13 मई को आई आंधी के कारण ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे गिरने के बाद से बालू टोला के दर्जनों परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जिससे भीषण गर्मी में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि नया ट्रांसफार्मर पहुंच जाने के बावजूद उसकी स्थापना नहीं की गई है और न ही क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को बदला गया है। इस गंभीर मुद्दे पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।1
- सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।4
- सोनभद्र के कोन क्षेत्र स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर में प्रसव के दौरान एक आशा बहू की मौत के बाद शनिवार को भारी जनाक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है और संचालक समेत संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सिंगा-बागेसोती निवासी लगभग 38 वर्षीय सीमा देवी, जो एक आशा बहू के रूप में कार्यरत थीं, को देर रात प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि उनके पहले चार प्रसव सामान्य तरीके से हुए थे, लेकिन इस बार अस्पताल पहुंचते ही ऑपरेशन की सलाह दी गई। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान सीमा देवी की तबीयत बिगड़ गई और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई, हालांकि नवजात शिशु सुरक्षित है। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल छोड़कर चले गए, जिससे नाराज ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। सूचना मिलने पर प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। इसी अस्पताल में भर्ती एक अन्य प्रसूता, लौकवाखाड़ी बागेसोती निवासी 35 वर्षीय कुसुमरी देवी की हालत भी गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की मौजूदगी में सरकारी अस्पताल रेफर किया गया। घटना की सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में किसी भी अपंजीकृत अस्पताल को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। उनकी मौजूदगी में ही अस्पताल को सील किया गया। एसीएमओ गुलाब शंकर यादव ने बताया कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। फिलहाल अस्पताल संचालक नसीम अंसारी और संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह, एसीएमओ डॉक्टर गुलाब शंकर यादव, डॉक्टर कृति आजाद बिंद, प्रधान संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मी जायसवाल, विजय शंकर यादव, भाजपा पूर्व ब्लॉक प्रमुख बंशीधर, भाजपा नेता अलख नारायण शुक्ला और जोखन यादव सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, और ग्रामीण अवैध अस्पतालों के संचालन तथा स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।4
- उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहाँ थाना रामपुर बर्कोनिया के धर्मदासपुर गांव में अराजकतत्वों ने एक मंदिर पर हमला किया है। इस हमले में उपद्रवियों ने हनुमानजी की मूर्ति को तोड़कर नाली में फेंक दिया। हमलावरों ने मंदिर को भी काफी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने मंदिर के शिखर को क्षत-विक्षत कर दिया और मंदिर में लगे घंटे तथा झंडे को निकालकर खेत में फेंक दिया। यह हनुमानजी की मूर्ति शीतला मंदिर के प्रांगण में रखी गई थी। यह भी बताया गया है कि पूर्व में भी सोनभद्र के कई अलग-अलग इलाकों में मंदिरों पर हमले हो चुके हैं।4
- राजधानी रायपुर में स्थित छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित वाणी वाचन बहु-प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र में विशेष थैरेपी प्राप्त कर रहे दिव्यांग बच्चों से हाल ही में आत्मीय मुलाकात की गई। इस दौरान बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण संवाद स्थापित करते हुए उनकी गतिविधियों और प्रगति के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। यह केंद्र लगभग 70 दिव्यांग बच्चों को विशेष शिक्षा, थैरेपी और पुनर्वास संबंधी सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिसके लिए 30 से अधिक प्रशिक्षित शिक्षक कार्यरत हैं। केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया गया। मुलाकात के समय बच्चों में उत्साह, आत्मविश्वास और सीखने की प्रबल लगन स्पष्ट रूप से देखी गई। केंद्र द्वारा दिव्यांग बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई, और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।1
- सिंगरौली जिले में खनिज संपदा के अवैध दोहन और बिना अनुमति खनिज परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में, कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशों और खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल के मार्गदर्शन में खनिज विभाग ने बिना वैध अभिवहन पास के गिट्टी का परिवहन कर रहे एक डंपर को जब्त कर बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई अवैध खनन के खिलाफ एक सख्त संदेश देती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 29 मई 2026 को खनिज विभाग की जांच के दौरान डंपर क्रमांक MP66ZD0758 गिट्टी का परिवहन करते हुए पाया गया। वाहन चालक वैध अभिवहन पास प्रस्तुत करने में विफल रहा, जिसके बाद विभागीय अधिकारी अशोक मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डंपर को जब्त कर पुलिस थाना चितरंगी में सुरक्षित खड़ा कराया। यह कार्रवाई केवल एक वाहन की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो शासन के नियमों को ताक पर रखकर खनिज संसाधनों के अवैध परिवहन में संलिप्त हैं। खनिजों का अवैध परिवहन न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाता है, बल्कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और वैधानिक व्यवस्था को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। हाल के दिनों में सिंगरौली जिले में खनिज विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है, जो यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन अवैध खनन एवं परिवहन के मामलों को लेकर बेहद गंभीर है और नियमों के उल्लंघन पर किसी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है। खनिज विभाग के अनुसार, जब्त वाहन के विरुद्ध खनिज नियमों के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद संबंधित प्रावधानों के अनुसार जुर्माना अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सिंगरौली जैसे खनिज समृद्ध जिले में प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयाँ न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करती हैं, बल्कि ईमानदारी से कार्य कर रहे वैध परिवहनकर्ताओं और खनन व्यवसायियों के हितों की भी रक्षा करती हैं। यह आवश्यक है कि ऐसी कार्रवाई अभियान के रूप में निरंतर जारी रहे, ताकि अवैध परिवहन के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और शासन को होने वाली राजस्व हानि को रोका जा सके। खनिज विभाग की यह कार्रवाई एक सकारात्मक संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रशासन पूरी सजगता के साथ मैदान में मौजूद है।1