मुहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के नाम से जाना जाता है, जो इतिहास की सबसे गमनाक तारीख मानी जाती है क्योंकि इसी दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी। विश्वभर में सभी भाषाओं और जाति-धर्म के लोग मुहर्रम का यह गम मनाते हैं, और भारत में यह परंपरा शुरुआत से चली आ रही है। जहाँ शिया समुदाय इस गम को मनाता है, वहीं कुछ जगहों पर इसे हिंदुओं द्वारा शुरू करने के प्रमाण भी मिलते हैं, जिसकी पुष्टि पुरानी तर्ज़ पर निकलने वाले मुहर्रम जुलूस करते हैं। कौशाम्बी के दारानगर कस्बे में अज़ादारी की यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है; ब्रिटिश शासन के दौरान जब मुहर्रम पर कुछ पाबंदियाँ लगाई गईं, तब दारानगर में ब्राह्मण समाज के लोगों ने शिया समुदाय के साथ मिलकर मुहर्रम का जुलूस निकाला, जिससे यह परंपरा आज तक अपना अस्तित्व बनाए हुए है। इमाम हुसैन और उनके साथियों के परिवारजनों को पुरसा मजलिस और मातम के ज़रिए दिलासा दिया जाता है, और निर्धारित तारीखों पर इसे जुलूस की शक्ल में सड़कों पर लाया जाता है। दारानगर में मुहर्रम पर दिखने वाली हिंदू-मुस्लिम एकता किसी को भी चकित कर देती है; एक ओर जहाँ शिया समुदाय दशहरा पर्व में रघुराई राम, लखन, सीता और रामलीला कमेटी का स्वागत करता है, वहीं मुहर्रम का दसवाँ आशूरा जुलूस प्राचीन हनुमान मंदिर के सामने से निकाला जाता है, जिसमें हिंदुओं का पूरा सहयोग मिलता है। दारानगर अंजुमन के सदर सय्यद असद सग़ीर जुलूस में मुहर्रम की दर्दनाक घटना और उसके महत्व के बारे में जानकारी देते हैं, जहाँ हिंदी नौहा भी पढ़ा जाता है। दारानगर का मुहर्रम न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि यहाँ अनोखे अंदाज़ में किए जाने वाला हाथ और छुरियों का मातम भी खास मायने रखता है, जिसका अंदाज़ सब जगहों से अलग दिखता है।
मुहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के नाम से जाना जाता है, जो इतिहास की सबसे गमनाक तारीख मानी जाती है क्योंकि इसी दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी। विश्वभर में सभी भाषाओं और जाति-धर्म के लोग मुहर्रम का यह गम मनाते हैं, और भारत में यह परंपरा शुरुआत से चली आ रही है। जहाँ शिया समुदाय इस गम को मनाता है, वहीं कुछ जगहों पर इसे हिंदुओं द्वारा शुरू करने के प्रमाण भी मिलते हैं, जिसकी पुष्टि पुरानी तर्ज़ पर निकलने वाले मुहर्रम जुलूस करते हैं। कौशाम्बी के दारानगर कस्बे में अज़ादारी की यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है; ब्रिटिश शासन के दौरान जब मुहर्रम पर कुछ पाबंदियाँ लगाई गईं, तब दारानगर में ब्राह्मण समाज के लोगों ने शिया समुदाय के साथ मिलकर मुहर्रम का जुलूस निकाला, जिससे यह परंपरा आज तक अपना अस्तित्व बनाए हुए है। इमाम हुसैन और उनके
साथियों के परिवारजनों को पुरसा मजलिस और मातम के ज़रिए दिलासा दिया जाता है, और निर्धारित तारीखों पर इसे जुलूस की शक्ल में सड़कों पर लाया जाता है। दारानगर में मुहर्रम पर दिखने वाली हिंदू-मुस्लिम एकता किसी को भी चकित कर देती है; एक ओर जहाँ शिया समुदाय दशहरा पर्व में रघुराई राम, लखन, सीता और रामलीला कमेटी का स्वागत करता है, वहीं मुहर्रम का दसवाँ आशूरा जुलूस प्राचीन हनुमान मंदिर के सामने से निकाला जाता है, जिसमें हिंदुओं का पूरा सहयोग मिलता है। दारानगर अंजुमन के सदर सय्यद असद सग़ीर जुलूस में मुहर्रम की दर्दनाक घटना और उसके महत्व के बारे में जानकारी देते हैं, जहाँ हिंदी नौहा भी पढ़ा जाता है। दारानगर का मुहर्रम न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि यहाँ अनोखे अंदाज़ में किए जाने वाला हाथ और छुरियों का मातम भी खास मायने रखता है, जिसका अंदाज़ सब जगहों से अलग दिखता है।
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में एक सर्राफा व्यापारी के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया गया है। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय है, जिस पर कौशाम्बी पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस से संज्ञान लेने की अपेक्षा की जा रही है।1
- उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने योगी सरकार से एक ऐसा सवाल पूछा है, जिसके बाद राजा भैया, धनंजय सिंह और बृजभूषण की चिंता बढ़ गई है।1
- जनपद कौशांबी में पल्स पोलियो अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है, जहाँ उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने एक जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अपने सभी छोटे बच्चों को पोलियो की खुराक अनिवार्य रूप से पिलाने की भावुक अपील की। क्षेत्र में लगातार जनहित के कार्यों और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहने वाली प्रतिभा कुशवाहा की कार्यशैली की व्यापक सराहना हो रही है। इस पहल के माध्यम से, सभी से मिलकर पोलियो मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को सफल बनाने का आह्वान किया गया है।1
- कौशाम्बी के भरवारी में कोखराज थाना भरवारी चौकी प्रभारी की मौजूदगी में 10वीं मुहर्रम का मातमी जुलूस बड़े शांतिपूर्वक और अमन-भाईचारे के माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने आलम और ताज़िया के साथ जुलूस में शिरकत की, जहाँ "या हुसैन" की सदाओं से पूरा माहौल गूंज उठा। अकीदतमंदों ने जंजीर और कमा का मातम भी किया, और जगह-जगह सबील तथा शर्बत का इंतजाम किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र, जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। पूरे जुलूस के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रहे। इन्हीं पुख्ता इंतजामों और अधिकारियों की सक्रियता के कारण यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।1
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में एक सर्राफा व्यापारी के साथ लूट की घटना सामने आई है। इस वारदात ने इलाके में हलचल मचा दी है, और इस मामले में पुलिस से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।1
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के कोखराज थाना क्षेत्र में कल्यानपुर स्थित जियो पेट्रोल पंप के सामने एक भीषण सड़क हादसा हो गया। कानपुर से प्रयागराज की ओर जा रहा एक तेज रफ्तार बाइक सवार अचानक एक चलते ट्रक से भिड़ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए, जिससे बाइक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत एक एम्बुलेंस की मदद से घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार चल रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घायल युवक पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जा रहा है। हादसे के बाद ट्रक चालक अपने वाहन के साथ मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और फरार ट्रक चालक की तलाश में जुट गई है।1