90 दिन चलेगा एनीमिया जांच अभियान, जमुई में 2.28 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य जमुई। जिले में एनीमिया यानी खून की कमी की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार से 90 दिवसीय विशेष जांच अभियान की शुरुआत की गई। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत चलने वाला यह अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा। अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल से की। इस दौरान उद्घाटन स्थल पर करीब 70 लोगों की हीमोग्लोबिन जांच कर आवश्यक उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। अभियान के तहत जिले में 5 से 50 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों, किशोर-किशोरियों, महिलाओं और पुरुषों की हीमोग्लोबिन जांच की जाएगी। जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति ने अभियान के दौरान कुल 2 लाख 28 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। डिजिटल मशीन से होगी हीमोग्लोबिन की जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए आधुनिक डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग किया जाएगा। जांच कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे एनीमिया से प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक उपचार और नियमित फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अभियान के लिए सदर अस्पताल के अलावा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार इन स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों की जांच की जाएगी। कमजोरी समझकर न करें नजरअंदाज जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि शरीर में खून की कमी को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करें। विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोग इस अभियान का लाभ उठाते हुए अपनी हीमोग्लोबिन जांच अवश्य कराएं। समय पर जांच होने से एनीमिया की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सकता है। अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक संगठनों से भी सक्रिय सहयोग की अपील की गई है। हर घर तक पहुंचेगा जांच का संदेश जिला प्रशासन ने अभियान का संदेश देते हुए कहा है कि एनीमिया की पहचान और समय पर जांच से स्वस्थ एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव है। अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करते हुए संदेश दिया जा रहा है—“खून की कमी को नहीं करेंगे नजरअंदाज, जांच कराएं- स्वस्थ जमुई बनाएं।” जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति ने जिलेवासियों से अभियान में भाग लेने और अपनी हीमोग्लोबिन जांच कराने की अपील की है, ताकि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए जमुई को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सके।
90 दिन चलेगा एनीमिया जांच अभियान, जमुई में 2.28 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य जमुई। जिले में एनीमिया यानी खून की कमी की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार से 90 दिवसीय विशेष जांच अभियान की शुरुआत की गई। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत चलने वाला यह अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा। अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल से की। इस दौरान उद्घाटन स्थल पर करीब 70 लोगों की हीमोग्लोबिन जांच कर आवश्यक उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। अभियान के तहत जिले में 5 से 50 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों, किशोर-किशोरियों, महिलाओं और पुरुषों की हीमोग्लोबिन जांच की जाएगी। जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति ने अभियान के दौरान कुल 2 लाख 28 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। डिजिटल मशीन से होगी हीमोग्लोबिन की
जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए आधुनिक डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर का उपयोग किया जाएगा। जांच कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे एनीमिया से प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक उपचार और नियमित फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अभियान के लिए सदर अस्पताल के अलावा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार इन स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों की जांच की जाएगी। कमजोरी समझकर न करें नजरअंदाज जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि शरीर में खून की कमी को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करें। विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोग इस अभियान का लाभ उठाते हुए अपनी हीमोग्लोबिन जांच अवश्य कराएं। समय
पर जांच होने से एनीमिया की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सकता है। अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक संगठनों से भी सक्रिय सहयोग की अपील की गई है। हर घर तक पहुंचेगा जांच का संदेश जिला प्रशासन ने अभियान का संदेश देते हुए कहा है कि एनीमिया की पहचान और समय पर जांच से स्वस्थ एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव है। अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करते हुए संदेश दिया जा रहा है—“खून की कमी को नहीं करेंगे नजरअंदाज, जांच कराएं- स्वस्थ जमुई बनाएं।” जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति ने जिलेवासियों से अभियान में भाग लेने और अपनी हीमोग्लोबिन जांच कराने की अपील की है, ताकि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए जमुई को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सके।
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- बड़ीबाग में प्रशासनिक बैरियर हटाकर बालू लदे ट्रकों का परिचालन, हादसे का खतरा; वीडियो वायरल जमुई। खैरा प्रखंड के बड़ीबाग चौक के समीप प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरियर को हटाकर बालू लदे भारी वाहनों के परिचालन का मामला सामने आया है। इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बैरियर हटाकर बालू लदे ट्रकों को रास्ता दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गिद्धेश्वर बालू घाट से आने वाले बालू लदे ट्रकों को संवेदक के मुंशी द्वारा कथित तौर पर बैरियर हटाकर इस मार्ग से पार कराया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो इससे प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के लिए निर्धारित व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बड़ीबाग चौक के समीप स्थित पुलिया की स्थिति पहले से ही जर्जर है। ऐसे में लगातार बालू लदे भारी वाहनों के गुजरने से पुलिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और पुलिया की खराब स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बड़े वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है और उसी रास्ते से आवागमन का निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद कथित तौर पर बालू लदे ट्रकों को इस मार्ग से गुजारे जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रशासन ने बैरियर लगाया है तो उसे हटाकर ट्रकों को पार कराना गंभीर मामला है। जर्जर पुलिया पर भारी वाहनों का परिचालन किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। खासकर व्यस्त चौक के समीप इस तरह के वाहनों के आवागमन से राहगीरों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से वायरल वीडियो की जांच कराने, बैरियर हटाकर भारी वाहनों को पार कराने के आरोपों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी आग्रह किया है कि प्रशासन द्वारा निर्धारित वैकल्पिक मार्ग से ही बालू लदे भारी वाहनों का परिचालन सुनिश्चित कराया जाए। लोगों का कहना है कि पुलिया की जर्जर स्थिति को देखते हुए यदि समय रहते भारी वाहनों के आवागमन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।1
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- राखी के बाजार में छाईं झाझा की सृष्टि-अंकिता, सृष्टि और अंकिता की हस्तनिर्मित फोटो राखियों की बढ़ी मांग, पढ़ाई के साथ आगे बढ़ा रहीं मां का अधूरा सपना..... जमुई के झाझा की चचेरी बहनें सृष्टि और अंकिता रक्षाबंधन के लिए अनोखी और खूबसूरत हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। दोनों बहनें कई वर्षों से आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ी हैं और अलग-अलग अवसरों के लिए अपने हाथों से सजावटी व उपयोगी वस्तुएं बनाती हैं। इस बार रक्षाबंधन के लिए उन्होंने कई तरह की राखियां तैयार की हैं, जिसमें फोटो वाली राखियों की खास मांग है। लोग अपने भाई-बहन की तस्वीर लगवाकर राखियों को व्यक्तिगत और यादगार बना रहे हैं। सृष्टि बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही क्राफ्ट बनाने का शौक था। स्कूल के दिनों से ही वह अलग-अलग तरह की चीजें बनाया करती थीं। अपनी मां को कढ़ाई-बुनाई करते देखकर उनका रुझान इस कला की ओर बढ़ा और धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया। रक्षाबंधन के लिए दोनों बहनों ने करीब 10 दिन पहले राखियां बनाना शुरू किया और सृष्टि के मुताबिक अब तक उन्हें 500 से अधिक राखियों के ऑर्डर मिल चुके हैं। ग्राहक WhatsApp और Instagram के जरिए उनसे संपर्क कर राखियां मंगवा रहे हैं। अंकिता कहती हैं कि क्राफ्ट बनाना उनके लिए सिर्फ काम नहीं, बल्कि एक सुकून भरा अनुभव है। दोनों बहनें साथ बैठकर क्राफ्ट तैयार करती हैं और पढ़ाई के साथ अपने हुनर को भी आगे बढ़ा रही हैं। सृष्टि ग्रेजुएशन के चौथे सेमेस्टर में हैं, जबकि अंकिता दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। दोनों बहनों ने मिलकर एक शानदार इग्लू मॉडल भी तैयार किया है, जो उनकी रचनात्मकता का बेहतरीन उदाहरण है। उनके माता-पिता भी उनके इस हुनर को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करते हैं। लेकिन इस कहानी के पीछे एक भावुक वजह भी है। सृष्टि बताती हैं कि उनकी मां भी कभी इसी तरह का काम करती थीं, लेकिन अपने हुनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकीं। अब सृष्टि और अंकिता अपनी मां के उसी अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। ❤️ झाझा की इन दो बेटियों की मेहनत, हुनर और मां के सपने को पूरा करने की कहानी जरूर देखें। 🔔 ऐसे ही जमुई, बिहार और देश-विदेश की बड़ी खबरों के लिए City Channel Jamui को Subscribe करें। वीडियो को Like, Share और Comment करना न भूलें।1
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