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नगर परिषद भिवाड़ी के कर्मचारी लगातार दूसरे दिन भी धरने पर बैठे हुए हैं। वे आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की अपनी मुख्य मांग पर दृढ़ता से अड़े हुए हैं।
सुनील कान्त गोल्डी
नगर परिषद भिवाड़ी के कर्मचारी लगातार दूसरे दिन भी धरने पर बैठे हुए हैं। वे आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की अपनी मुख्य मांग पर दृढ़ता से अड़े हुए हैं।
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- खैरथल-तिजारा के मुंडावर नगर पालिका क्षेत्र के ग्रामीण किसानों ने मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना के तहत मिलने वाली 2000 यूनिट बिजली छूट को पुनः सुचारु रूप से लागू करने की मांग की है। इस संबंध में, किसानों ने विद्युत विभाग मुंडावर के AEN को एक ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के उनके बिजली कनेक्शनों का टैरिफ कोड बदल दिया गया है, जिसके कारण उन्हें मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना का लाभ मिलना बंद हो गया है। किसानों का कहना है कि यह कार्रवाई अनुचित और नियमों के विपरीत है। उन्होंने यह भी बताया कि 4000 टैरिफ कोड को 4000 AX में बदलने के बाद उन्हें 24 घंटे के बजाय केवल 5 से 6 घंटे ही बिजली मिल रही है। किसानों ने शिकायत की कि प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं में ग्रामीण किसानों को 2000 यूनिट की छूट मिल रही है, जबकि मुंडावर के किसानों को इससे वंचित रखा जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि कृषि भूमि का दर्जा यथावत रखते हुए मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना का लाभ तुरंत बहाल किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने पूर्व में हुई कथित अवैध वसूली की राशि को 6 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने और भविष्य में किसानों से कोई अतिरिक्त वसूली नहीं करने की भी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना देने को मजबूर होंगे। इस संबंध में एक ज्ञापन भिवाड़ी के SE को भी सौंपा गया था, जिन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक किसानों के बिल बंद कर दिए जाएंगे और कृषि कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे। SE ने समस्या के समाधान के लिए सात दिन का समय मांगा, जिसके बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।1
- पकड़ीदयाल सिनेमा हॉल रोड पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, जमीन की पैमाइश में काफी समय लग जाने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी और उसे टाल दिया गया। समय समाप्त होने के चलते, कोर्ट और प्रशासन की टीम बिना कोई कार्रवाई किए ही वापस लौट गई। प्रशासन द्वारा अब आगे की कार्रवाई अगली निर्धारित तिथि पर किए जाने की संभावना है।1
- राजस्थान सरकार पर जनता को बेवजह परेशान करने और अपने वादों से मुकरने का आरोप लगाया गया है। लोगों का कहना है कि सरकार सिर्फ यह कहकर वादे करती है कि सड़कों का निर्माण करवाया जाएगा, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। राज्य में सड़कों की हालत बेहद खराब है; एक सीधी रोड जिसे बने हुए करीब चार या पांच साल हो चुके हैं, उसकी भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। इस स्थिति को लेकर जनता में गहरी नाराजगी है।1
- Post by Ram Mishra1
- खैरथल तिजारा जिले के मुंडावर में आज, सोमवार 29 जून 2026 को, खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 680 लीटर मिलावटी, खट्टा और बदबूदार दूध ज़ब्त कर उसे तत्काल मौके पर ही नष्ट करवा दिया। यह अभियान जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश के निर्देशों और सीएमएचओ डॉ. अरविंद गेट के नेतृत्व में चलाया गया था। विभाग को मुखबिर से इस मिलावटी दूध के परिवहन की सटीक सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने नाकाबंदी कर पिकअप गाड़ी (नंबर RJ-32-GE-5362) को रोका, जिसे मोहित पुत्र सोम सिंह चला रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि पिकअप में रखे 17 स्टील के कैनों में भारी मात्रा में दूध भरा हुआ था, जिसे हरियाणा की वीटा डेयरी में सप्लाई के लिए भेजा जा रहा था। मौके पर पहुँची मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से हुई जांच में यह दूध पूरी तरह से मिलावटी, फटा हुआ और बेहद बदबूदार पाया गया, जो इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। अधिकारियों ने बिना किसी देरी के सभी 17 कैनों के इस दूषित दूध को मौके पर ही नष्ट करवा दिया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह दूषित दूध विक्रम पुत्र प्रहलाद और लोकेश यादव (निवासी भुरियावास) के डेयरी कोड से सप्लाई किया जा रहा था, जिसके चलते विभाग अब इस संबंधित डेयरी कोड को हमेशा के लिए बंद कराने की सख्त कानूनी कार्रवाई कर रहा है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान टीम में महिपाल सिंह और सुभाष यादव भी मौजूद रहे।1
- एक वीडियो के माध्यम से राजस्थान की सड़कों की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जो राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे 'विकास' के बड़े दावों पर सीधा कटाक्ष है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राजस्थान के किसी भी गाँव में चले जाएँ, वहाँ ऐसी ही जर्जर और खराब सड़कें देखने को मिलेंगी, जो सरकारी विकास कार्यों की वास्तविकता पर सवाल उठाती हैं।1
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