बहराइच दलहनी फसलों के लिए उपयोगी है जनपद की भूमि व जलवायु कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच में आयोजित हुई गोष्ठी बहराइच 02 मई। कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी.पी.एन. गौतम की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के परिसर में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के वैज्ञानिकों की टीम जिसमें प्रमुख रूप से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. हेमन्त कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.के. परिहार, वैज्ञानिक डॉ. वैभव कुमार, वैज्ञानिक डॉ. आदर्श कुमार सहित अन्य कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम स्थल पर वैज्ञानिकों का दल पहुंचने पर कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के वैज्ञानिकों तथा प्रगतिशील कृषकों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. परिहार ने किसानों दलहनी फसलों की खेती करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनपद की जलवायु व भूमि दलहनी फसलों के लिए उपयोगी है। डॉ. वैभव ने बताया कि दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है तथा भोजन के माध्यम से दाले मानव शरीर के लिए प्रोटीन की पूर्ति भी करती हैं। डॉ. हेमन्त ने बताया कि मसूर की बायो-फोर्टिफाइड प्रजाति आईपीएल-220 को ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रफल में बोना चाहिए। क्योंकि इसके दाने में जिंक और आयरन काफी मात्रा मे पाया जाता है। डॉ आदर्श ने किसानों को सुझाव दिया कि मृदा नमूना की जांच के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने भूमि की उर्वरा शक्ति में बढ़ोत्तरी के लिए हरी खाद का प्रयोग करते रहें। गोष्ठी के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के कृषि वैज्ञानिकों डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. नंदन सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अरुण कुमार राजभर व अन्य ने भी कृषकों को उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सी.पी.एन. गौतम ने कहा कि उर्वरक का संतुलित प्रयोग करने से उत्पादन लागत घटने से कृषकों को ज्यादा लाभ प्राप्त होगा। डॉ. गौतम ने मौजूद सभी कृषि वैज्ञानिकांे एवं कृषकों का आभार ज्ञापित करते हुए यह कार्यक्रम जनपद के किसानों केे लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पुरूष एवं महिला कृषक मौजूद रहीं।
बहराइच दलहनी फसलों के लिए उपयोगी है जनपद की भूमि व जलवायु कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच में आयोजित हुई गोष्ठी बहराइच 02 मई। कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी.पी.एन. गौतम की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के परिसर में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के वैज्ञानिकों की टीम जिसमें प्रमुख रूप से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. हेमन्त कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.के. परिहार, वैज्ञानिक डॉ. वैभव कुमार, वैज्ञानिक डॉ. आदर्श कुमार सहित अन्य कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम स्थल पर वैज्ञानिकों का दल पहुंचने पर कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के वैज्ञानिकों तथा प्रगतिशील कृषकों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. परिहार ने किसानों दलहनी फसलों की खेती करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनपद की जलवायु व भूमि दलहनी फसलों के लिए उपयोगी है। डॉ. वैभव ने बताया कि दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है तथा भोजन के माध्यम से दाले मानव शरीर के लिए प्रोटीन की पूर्ति भी करती हैं। डॉ. हेमन्त ने बताया कि मसूर की बायो-फोर्टिफाइड प्रजाति आईपीएल-220 को ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रफल में बोना चाहिए। क्योंकि इसके दाने में जिंक और आयरन काफी मात्रा मे पाया जाता है। डॉ आदर्श ने किसानों को सुझाव दिया कि मृदा नमूना की जांच के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने भूमि की
उर्वरा शक्ति में बढ़ोत्तरी के लिए हरी खाद का प्रयोग करते रहें। गोष्ठी के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच के कृषि वैज्ञानिकों डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. नंदन सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अरुण कुमार राजभर व अन्य ने भी कृषकों को उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सी.पी.एन. गौतम ने कहा कि उर्वरक का संतुलित प्रयोग करने से उत्पादन लागत घटने से कृषकों को ज्यादा लाभ प्राप्त होगा। डॉ. गौतम ने मौजूद सभी कृषि वैज्ञानिकांे एवं कृषकों का आभार ज्ञापित करते हुए यह कार्यक्रम जनपद के किसानों केे लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पुरूष एवं महिला कृषक मौजूद रहीं।
- उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर कहने को तो यहां विकास की बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन इन इमारतों के पीछे छिपी जर्जर हकीकत ने आज एक मां की गोद उजाड़ दी। ये साठ फीट ऊंची पानी की टंकी, जो प्यास बुझाने के लिए बनी थी, आज मातम का प्रतीक बन गई है। तस्वीरें डराने वाली हैं। महज एक रील बनाने की चाहत में कुछ मासूम बच्चे इस टंकी के ऊपर जा चढ़े। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस सीढ़ी के सहारे वो ऊपर जा रहे हैं, वो मौत का फंदा बन चुकी है। अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ हुई जर्जर सीढ़ी टूटकर नीचे गिर गई और कुछ ही सेकंड में बच्चों की हंसी, चीखों में तब्दील हो गई। हादसा दिल दहला देने वाला था। एक मासूम की मौके पर ही जान चली गई। दो बच्चे इस वक्त अस्पताल के आईसीयू में अपनी आखिरी सांसों के लिए जंग लड़ रहे हैं। और वो दो बच्चे? जो ऊपर रह गए थे... कल्पना कीजिए उस खौफ की। साठ फीट की ऊंचाई, पैर रखने को जर्जर कंक्रीट और नीचे उतरने का हर रास्ता बंद। दो घंटे तक वो बच्चे मौत को अपने सामने देखते रहे। प्रशासन जागा, क्रेन मंगाई गई, शोर मचा लेकिन यहीं विकास के दावों की पोल खुल गई। टंकी तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं थी। चारों तरफ दलदल, जहां सिस्टम के पहिए धंस गए। जब ज़मीन पर रास्ते बंद हो गए, तो आसमान से उम्मीद की किरण जागी। मुख्यमंत्री कार्यालय और राहत आयुक्त के समन्वय के बाद भारतीय वायु सेना को मोर्चा संभालना पड़ा। रविवार की सुबह जब यम आई सत्तरह हेलीकॉप्टर के पंखों की गड़गड़ाहट सुनाई दी, तब जाकर उन मासूमों की सांस में सांस आई। वायु सेना के जवानों ने जांबाजी दिखाते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन क्या हम इसे जीत कह सकते हैं?1
- बिजनौर के थाना मंडावली की भागुवाला चौकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सिपाही संजय कुमार यादव एक युवक को ताबड़तोड़ थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। हालांकि वीडियो पुराना बताया जा रहा है, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई के इस तरीके पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या वर्दी पहनकर कानून हाथ में लेना सही है? अपनी राय कमेंट में दें। #Bijnor #UPPolice #ViralVideo #AdityaBharat #CrimeNews1
- बहराइच, उत्तर प्रदेश जब सिस्टम खामोश हो जाए, तो दर्द आवाज बनकर फूट पड़ता है…एक बेबस महिला कई दिनों से अपने जमीनी विवाद को लेकर दफ्तर-दफ्तर भटक रही थी, लेकिन हर बार उसे सिर्फ तारीख और इंतज़ार ही मिला समाधान दिवस में बड़े अधिकारी बैठक कर रहे थे… उसी बीच ये महिला पहुंची और फूट-फूट कर रोने लगी उसकी आवाज में दर्द था, गुस्सा था और सबसे ज्यादा न्याय की पुकार थी “हम गरीब हैं… पैसा कहां से लाएं… अब कहीं नहीं जाएंगे… बस न्याय चाहिए सवाल ये है कि क्या गरीब को इंसाफ के लिए भी कीमत चुकानी पड़ेगी क्या बिना पैसे के न्याय मिलना सिर्फ किताबों की बात है ये सिर्फ एक महिला की कहानी नही ये उन हजारों आवाज़ों की सच्चाई है, जो सिस्टम के दरवाजे पर दम तोड़ देती हैं अब वक्त है आवाज उठाने का… ताकि किसी और को यूं रोकर न्याय न मांगना पड़े!1
- 5 din Se light nahin a rahi hai chacha ka kya kahana Hai ki gaon mein light nahin aati hai1
- Post by Ravi Verma Bahraich1
- झारखंड के धनबाद जिले के मुनीडीह स्थित बीसीसीएल की कोल वाशरी में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। स्लरी लोडिंग के दौरान अचानक मलबा ढह गया, जिससे वहां काम कर रहे चार दिहाड़ी मजदूर उसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है, वहीं मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी तेज हो गई है।1
- Post by Pankaj Dev Tripathi1
- My 11 Years Of Instinct Just Stopped A National Security Crisis1