कौशांबी में विधवा हिरनिया पासी का आशियाना उजाड़ने का आरोप, बिना नोटिस कार्रवाई का दावा—न्याय और आवास की गुहार कौशांबी में विधवा हिरनिया पासी का आशियाना उजाड़ने का आरोप, बिना नोटिस कार्रवाई का दावा—न्याय और आवास की गुहार कौशांबी। जिले के ग्राम पंडरिया सुखवारा से एक गरीब विधवा महिला के आशियाने को कथित तौर पर बिना किसी पूर्व नोटिस के तोड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सामने आए दावे के मुताबिक, श्रीमती हिरनिया पासी, पत्नी स्वर्गीय विजय पासी के घर को जबरन तोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि पति के निधन के बाद यही मकान महिला और उसके परिवार के लिए सिर छुपाने का प्रमुख सहारा था। घर टूटने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी होने का दावा किया जा रहा है। मामले को लेकर पीड़ित महिला की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और कौशांबी प्रशासन से जांच की मांग की जा रही है। मांग है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मकान गिराने की कार्रवाई किस आदेश के तहत हुई और क्या महिला को नियमानुसार कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर दिया गया था। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने तथा प्रभावित महिला को तत्काल आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि यदि बिना नोटिस मकान गिराए जाने का आरोप सही है, तो कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया क्या थी? प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कौशांबी में विधवा हिरनिया पासी का आशियाना उजाड़ने का आरोप, बिना नोटिस कार्रवाई का दावा—न्याय और आवास की गुहार कौशांबी में विधवा हिरनिया पासी का आशियाना उजाड़ने का आरोप, बिना नोटिस कार्रवाई का दावा—न्याय और आवास की गुहार कौशांबी। जिले के ग्राम पंडरिया सुखवारा से एक गरीब विधवा महिला के आशियाने को कथित तौर पर बिना किसी पूर्व नोटिस के तोड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सामने आए दावे के मुताबिक, श्रीमती हिरनिया पासी, पत्नी स्वर्गीय विजय पासी के घर को जबरन तोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि पति के निधन के बाद यही मकान महिला और उसके परिवार के लिए सिर छुपाने का प्रमुख सहारा था। घर टूटने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी होने का दावा किया जा रहा है। मामले को लेकर पीड़ित महिला की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और कौशांबी प्रशासन से जांच की मांग की जा रही है। मांग है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मकान गिराने की कार्रवाई किस आदेश के तहत हुई और क्या महिला को नियमानुसार कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर दिया गया था। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने तथा प्रभावित महिला को तत्काल आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि यदि बिना नोटिस मकान गिराए जाने का आरोप सही है, तो कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया क्या थी? प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
- बहू की प्रताड़ना से परेशान सास ससुर पहुंचे उन्नाव एसपी की चौखट बहू की प्रताड़ना से परेशान सास-ससुर पहुंचे एसपी की चौखट, लगाई न्याय की गुहार “झूठे दहेज केस में फंसा दूंगी”... बहू की धमकियों से परेशान बुजुर्ग दंपती ने मांगी पुलिस से मदद बहू पर सास-ससुर और देवर को प्रताड़ित करने का आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार तीन साल की शादी, घर में बढ़ा विवाद... बहू की धमकियों से आजिज सास-ससुर पहुंचे एसपी दरबार “घर में नहीं रहती, फिर भी करती है परेशान”... बहू पर बुजुर्ग सास-ससुर ने लगाए गंभीर आरोप बहू के खिलाफ थाने में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, अब एसपी की चौखट पर पहुंचे सास-ससुर दहेज एक्ट में फंसाने की धमकी का आरोप, बहू से परेशान बुजुर्ग दंपती ने लगाई न्याय की गुहार गंगा घाट के पिपरी में घरेलू कलह का मामला, बहू पर सास-ससुर को धमकाने का आरोप बेटे की शादी के तीन साल बाद बिगड़े रिश्ते, बहू के खिलाफ बुजुर्ग दंपती ने एसपी से मांगा इंसाफ बहू की कथित प्रताड़ना और धमकियों से परेशान सास-ससुर, थाने के बाद अब एसपी दरबार में फरियाद2
- पटना/बिहार। बिहार में बाढ़ के बीच राहत और मदद के लिए आगे आए शिक्षकों और ऑनलाइन एजुकेटर्स की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। ऐसे वक्त में जून 2026 में यूट्यूब शिक्षकों को लेकर अंजना ओम कश्यप की “दो कौड़ी” वाली टिप्पणी भी एक बार फिर बहस का विषय बनती दिखाई दे रही है। इस टिप्पणी के बाद खान सर समेत कई शिक्षकों और ऑनलाइन एजुकेटर्स ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी। दो कौड़ी के बयान से बाढ़ के मैदान तक! BREAKING NEWS | बिहार बिहार में बाढ़ का कहर है… लोग पानी के बीच हैं… और इसी संकट के बीच कुछ शिक्षक और यूट्यूब एजुकेटर्स जमीन पर उतरकर राहत पहुंचाते नजर आ रहे हैं। पटना के खान सर बाढ़ प्रभावित राघोपुर पहुंचे, नाव के जरिए पीड़ित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की घोषणा की। लेकिन अब इसी तस्वीर ने पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। कुछ समय पहले शिक्षकों और यूट्यूब एजुकेटर्स को लेकर अंजना ओम कश्यप की “दो कौड़ी” वाली टिप्पणी विवाद का विषय बनी थी। उस बयान पर शिक्षकों और सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब सवाल सीधा है— जिस शिक्षक को स्टूडियो की बहस में कमतर बताने वाली भाषा पर विवाद हुआ था, वही शिक्षक आज बाढ़ के पानी में लोगों के बीच क्यों दिखाई दे रहा है? स्टूडियो की बहस बनाम जमीन की हकीकत! एक तरफ शब्दों पर विवाद… दूसरी तरफ बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंचती मदद। सोशल मीडिया पर इसी विरोधाभास को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह नहीं कि कौन बड़ा पत्रकार है और कौन बड़ा शिक्षक। सवाल यह है कि संकट की घड़ी में कौन लोगों के बीच खड़ा है? और सबसे बड़ा सवाल— क्या किसी शिक्षक के योगदान को सिर्फ इसलिए छोटा समझा जा सकता है क्योंकि वह टीवी स्टूडियो में नहीं, बल्कि यूट्यूब या जमीन पर काम करता है? बिहार की बाढ़ ने बहस को फिर सामने ला दिया है— बयान बड़ा या इंसानियत का काम? फिलहाल इतना साफ है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं और खान सर की राघोपुर यात्रा तथा राहत वितरण की खबर सामने आई है।2
- ‼️जगदलपुर में सामाजिक समरसता का संदेश! बजरंग दल की संगोष्ठी में हर जाति-समाज की भागीदारी।‼️ ➡️जगदलपुर बस्तर सिरासर भवन में विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में बजरंग दल ने सामाजिक समरसता संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में हर जाति और समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया। आयोजन का उद्देश्य सामाजिक एकता और आपसी समरसता का संदेश देना रहा।...1
- आसीवन थाना क्षेत्र रसूलाबाद चौकी अंतर्गत हरे भरे पेड़ों पर चला आरा Unnao ग्राम अजमत नगर में हरे नीम के पेड़ पर चला आरा दबंगई की हद जब हो गई पीड़ित के घर के पास खड़ा नीम का पेड़ दबंग महिला ने चलावा दिया आरा पीड़ित को जब मालूम हुआ तो पीड़ित की शिकायत पर मारपीट पर आमादा पीड़ित का आरोप पेड़ के काटने से पास में बना मंदिर की बाउंड्री हुईं क्षतिग्रस्त पूरा मामला रसूलाबाद चौकी अंतर्गत अजमत नगर का मामला1
- कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय का आलोचकों को जवाब दिया कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय का आलोचकों को जवाब कानपुर में महापौर प्रमिला पांडेय ने सड़कों की स्थिति को लेकर नगर निगम अफसरों के साथ बैठक की महापौर ने कहा कि कोई क्या कहता है, वह इसको लेकर सफाई नहीं देना चाहती है, हमने अपना जीवन सबकी सेवा करने में लगाया है,,, महापौर ने कहा कि वह सिर्फ काम करना चाहती हैं, यही हमारी संस्कृति बताती है और जनता न्याय करती है1
- हमीरपुर में फायरिंग के आरोपों पर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में! पीड़ित की शिकायत पर गंभीर आरोप, थाना अध्यक्ष से जवाब मांगने पर बढ़ा विवाद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। मामला मौदहा तहसील के रीवन गांव का बताया जा रहा है, जहां 17 सितंबर की शाम करीब 7 बजे एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विवाद होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव निवासी राहुल पुत्र बालकृष्ण कार्यक्रम में मौजूद थे। इसी दौरान गांव के ही निवासी बताए जा रहे योगी श्रीवास पुत्र सियाराम श्रीवास पर गाली-गलौज करने और दबदबा कायम करने के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। आरोप है कि विरोध करने के बाद राहुल की ओर 315 बोर के कथित अवैध हथियार से फायरिंग की गई। राहुल इस घटना में सुरक्षित बच गया। हालांकि, घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन वह मौके से भाग निकला। इसके बाद कथित हथियार गांव वालों ने अपने कब्जे में लेकर पुलिस को सौंप दिया। घटना की सूचना 112 पुलिस सेवा को दी गई। अब इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित मौदहा थाना पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय एफआईआर में आरोपी को पुलिस गश्त के दौरान पकड़े जाने की बात दर्ज की। वहीं, पीड़ित राहुल की ओर से दिए गए शिकायत पत्र को स्वीकार नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। जब करंट टाइम न्यूज़ के पत्रकार ने संबंधित थाना अध्यक्ष से फोन पर इस मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया, तो फायरिंग की घटना को लेकर थाना अध्यक्ष की ओर से इनकार किए जाने की बात सामने आई। पत्रकार के अनुसार, बातचीत के दौरान सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और कॉल समाप्त कर दी गई। इस बातचीत की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि जब ग्रामीण फायरिंग का आरोप लगा रहे हैं और कथित हथियार पुलिस को सौंपे जाने की बात सामने आ रही है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हो रही? क्या पीड़ित की शिकायत विधिवत स्वीकार की जाएगी? क्या उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी? क्या पीड़ित की सुरक्षा को लेकर पुलिस कोई ठोस कदम उठाएगी? पुलिस की जिम्मेदारी है कि किसी भी गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच करे और सभी पक्षों की बात सुने। करंट टाइम न्यूज़ इस पूरे मामले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। यह खबर ग्रामीणों के आरोपों, पीड़ित पक्ष से संबंधित दावों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रसारित की जा रही है। हम संबंधित पुलिस अधिकारियों और आरोपी पक्ष का जवाब सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। सच्चाई के साथ, जनता की आवाज़— CURRENT TIME NEWS1
- सीरिया के अलेप्पो में रक्षा मंत्रालय के हथियार डिपो में भीषण विस्फोट; पूरा इलाका दहला। सीरिया के दक्षिणी अलेप्पो में सैन्य गोदाम (Ammunition Depot) में जोरदार ब्लास्ट। रात के अंधेरे में उठीं आग की भयानक लपटें। घटना में 4 लोग घायल। सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे बंद, प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया। धमाके की वजह की जांच जारी। इजरायल (Israel) पर संदेह: सीरिया में अक्सर होने वाले ऐसे सैन्य धमाकों के पीछे इजरायली हवाई हमलों का इतिहास रहा है। इस वजह से कई लोग और स्थानीय रिपोर्ट्स यह आशंका जता रहे हैं कि यह इजरायल का कोई खुफिया या हवाई हमला हो सकता है। हालांकि, इजरायल की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया है।1
- 12,788 ब्राह्मण और 4,600 पासी समाज के लोगों की मौत का दावा, आंकड़ों को लेकर सरकार से जवाब की मांग 2,788 ब्राह्मण और 4,600 पासी समाज के लोगों की मौत का दावा, आंकड़ों को लेकर सरकार से जवाब की मांग** **नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश।** भाजपा सरकार के कार्यकाल को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में ब्राह्मण एवं पासी समाज से जुड़े लोगों की मौत के आंकड़ों को लेकर गंभीर दावे सामने आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान **12,788 ब्राह्मण समाज और 4,600 पासी समाज के लोगों की जान गई**। हालांकि, इन दोनों आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय सरकारी या आधिकारिक स्रोत फिलहाल सामने नहीं आया है। इसलिए इन संख्याओं को प्रमाणित तथ्य के बजाय **दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए**। मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि यदि अलग-अलग सामाजिक समुदायों से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या में मौत हुई है, तो इन घटनाओं का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है? किन मामलों में हत्या, आपराधिक हिंसा या अन्य कारणों से मौत हुई और उन मामलों में पुलिस एवं प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? ब्राह्मण और पासी समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार को ऐसे आंकड़ों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि किसी समुदाय के लोगों के खिलाफ अपराध हुए हैं तो उनके मामलों में निष्पक्ष जांच तथा प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि **हर मौत के पीछे की वास्तविक वजह, दर्ज मुकदमों और हुई कार्रवाई का है।** सरकार तथा संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक आंकड़े ही इस दावे की वास्तविकता को स्पष्ट कर सकते हैं।4